नाश्ता ठंडा हो गया ये नैपकिन तेरा गंदा हो गया झंडा हो गया आज क्या खिलाओगे बाजरे की रोटी और मशहूर की दाल शराब के नसे में दुबे पी कर झूमती हुए किसी भी शक्स की बात होती है तो हिंदी सिनेमा के इस ग्रेट आर्टिस्ट का चेहरा बरबस हमारी आंखों के सामने टायर जाता है और हमें प्यार मोहन इलाहाबाद ही कहते हैं जरा गाड़ी की चाबी दीजिए गाड़ी नहीं चलेगा क्यों भाई इसकी डिफरेंशियल में ला वह कॉमेडियन जिनके हाथ में बोतल होती थी बाल बिखरे और आंखें होती थी उनके जुबान लड़खड़ा रही होती वह हिचकी लेते हकलाते हुए कुछ बोलते और हिलते-डुलते-बम मुश्किल चल रहे होते थे| नहीं तो चोर उनसे के बदमाश होगा नहीं तो कोई मतलब थोड़ी हूं अब मैं तुम्हें अलहदा बॉडी लैंग्वेज और यूनिक स्टाइल कमल का था [संगीत] [प्रशंसा] एक और ड्राइवर साहब को भी चुम्मा दे सबसे ज्यादा शराबी के किरदार निभाए और हमेशा के लिए शराबियों की पहचान बन गए इस कलाकार ने कभी भी शराब पीकर एक्टिंग नहीं की बल्कि बिना उसके एक्सपीरियंस के ही अपने किरदारों में डब जाते थे [संगीत] शादी क्या आपको पता है की
फिल्मों में लालची शराबी अनपढ़ और लापरवाह दिखने वाले यह शख्स अपनी अल जिंदगी में बेहद गंभीर और संजीदा व्यक्ति थे और इन्होंने इंग्लिश लिटरेचर में एचडी हासिल की थी [संगीत] और क्या आप यकीन करेंगे की बेहद गरीबी में जिंदगी जीने वाले इस कलाकार ने मुंबई में भूखे पेट स्ट्रगल किया फुटपाथ पर सोए और किसी शौक की वजह से नहीं बल्कि परिवार को दो वक्त की रोटी खिलौने की मजबूरी में फिल्मों में कम करते रहे हरामजादे तू हमारे साहब ज्यादा होकर अनारकली जैसी लड़की गए मालूम नहीं उसकी मां हमारे घर में आए थे तो कौन थे यह कलाकार जो बेहद बीमारी की हालात में भी पूरे-पूरे दिन शूटिंग करते थे और क्यों ये अपने बच्चों को किसी भी फिल्मी हस्ती से नहीं मिलने देते थे बताएंगे और भी बहुत कुछ आप बने रहिए हमारे साथ [संगीत] है [संगीत] और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें दोस्तों आज हम हिंद सिनेमा के जी महान कलाकार की जिंदगी की दास्तान आपको सुनने जा रहे हैं वह है 60 और 70 के दशक में फिल्मों में हाथ से कलाकार के तोर पर अपनी खास पहचान बनाने वाले शख्स तू मुखर्जी उन्होंने अगले जन्म के लिए किया था इस जन्म के लिए नहीं बाज रही है [संगीत] [प्रशंसा] कल क्या था जो आज है [संगीत] भारतीय सिनेमा का इतिहास अधूरा माना जाएगा दिखाए करते [प्रशंसा] है रीना राय के चेहरे हैं
पढ़ाई पुरी करने के बाद इन्होंने बाकायदा बंगाली थिएटर जॉइन किया और प्ले करने लगे फिल्म मकर रित्विक घटक ने इनका प्ले देखा इनकी एक्टिंग से काफी प्रभावित हुए और 1952 में अपनी बंगाली फिल्म नागरिक में इन्हें कास्ट कर लिया यह फिल्म तो फैंस गई और 1977 में रिलीज हुई पर इस दौरान उन्होंने कुछ और बंगाली फिल्मों में कम जारी रखा इसके बाद जान मैन फिल्म मकर ऋषिकेश मुखर्जी ने इन्हें हिंदी फिल्मों में मौका दिया और 1957 में रिलीज हुई फिल्म मुसाफिर में एक कॉमेडियन का रोल दिया और बनावट कहीं जमाना है आदमी से भी किसी को हमदर्दी होती है बाबूजी जब भगवान लंगड़ा ही ना पैदा करें इन्हें 1958 के बाद कुछ अच्छा कम नहीं मिल रहा था पैसों की किल्लत थी और कम की सख्त जरूर थी ऐसे में यह कई फिल्म निर्माता के दफ्तर के चक्कर काटने लगे इसी दौरान ये जाने-माने फिल्म निर्माता विमल राय के ऑफिस पहुंचे पर उन्होंने डालते हुए कहा की अभी कोई कम नहीं है बाद में आना लेकिन कृष्णा मुखर्जी को कम की इतनी ज्यादा जरूर थी की ये वही खड़े रहे विमल राय गुस्सा हो गए और कहा मुझे अभी तो बस एक कुत्ते की जरूर है क्या तुम भोक सकते हो कृष्णा मुखर्जी ने इस बात को सीरियस ले लिया और हूबहू कुत्ते की आवाज निकालनी शुरू कर दी और कम के प्रति जुनून को देखकर वह बेहद शर्मिंदा हुए और अपनी फिल्म में झट से एक रोल दे दिया कमल का किरदार था अरे बुद्धू दिखता नहीं दिखता है खर भी दवा खाना और गरीबों से एक कौड़ी नहीं मिल जाएगी डॉक्टर साहब मुक्त करेंगे इसके बाद 1962 में विमल डेन एक फिल्म बनाई प्रेम पत्र इस हिट फिल्म में भी कैस्टो मुखर्जी ने कम किया इसके साथ-साथ अब किस्तों मुखर्जी और भी कई फिल्मों में कम करने लगे थे कई फिल्मों में इन्हें दर्शकों ने काफी पसंद किया 1960 में एक फिल्म रिलीज हुई मासूम जिसमें ये एक सीआईडी ऑफिसर के तोर पर दिखे तो 1962 में चीन टाउन में भी इन्होंने अच्छा किरदार निभाया 1965 में फरार नाम की एक फिल्म रिलीज हुई जिसमें उन्होंने स्कूल चौकीदार की भूमिका निभाई इतना कम बाकी है अरे आप रे आप तीन सवाल फिर तो एक घंटा ग जाएगा कैस्टो मुखर्जी ने ऐसे कई किरदार निभाए जिन्होंने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी अब मैं मैं इसको 1970 के बीच में इनकी कई महत्वपूर्ण फिल्में रिलीज हुई और केशन की एक अलग पहचान बने लगी इसके बाद एक फिल्म आई पड़ोसन जिसमें किशोर कुमार की संगीत मंडली में केस्टो की एक खास भूमिका थी इनका किरदार एक बंगाली शख्स का था जिसमें यह बिल्कुल कलकत्ता अंदाज में नजर आए नाटक मंडली के पंचरत्न कृष्णा मुखर्जी के साथ खास बात ये रहती थी की इनको दर्शकों को हंसते के लिए किसी डायलॉग की जरूर नहीं पड़ती थी बस चेहरे का एक्सप्रेशन ही काफी था आंखों की पुतलियां को घूमर हिचकी लेकर जब यह गार्डन हिलाते तो सिनेमा हाल में ठहाकों की गंज टायर जय करती थी प्रीत का तो तांडव नृत्य हो गया है तू जी कोना से मोहब्बत करता है वो तो किसी नचाइए के साथ रख लिया कर रही है साथ ही इनका भोला अंदाज और बिखरे बाल भी दर्शकों में गुदगुदी पैदा करते हालांकि आप इसे टाइप्ड अंदाज भी का सकते हैं लेकिन इसी खास अंदाज की वजह से केस्टो मुखर्जी को अधिकतर फिल्मों में कास्ट किया जान लगा और शायद लोगों को भी इनका यही रूप देखने में मजा आता था वह कैसे साहब उसे आदमी ने रिश्वत खाकी एक मुजरिम को जय से भाग दिया था पर आपको ये जानकर हैरानी होगी की इन्हें कम तो खूब मिलता लेकिन पैसे तेरा 22 क्योंकि उसे दौरान इस तरह की छोटी-मोटी रोल करने वाले एक्टर्स को इतने ज्यादा पैसे
नहीं मिलते की इनकी आर्थिक स्थिति ठीक र सके इसलिए क्रिस्टा को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में कम करना पड़ता ताकि घर चलने लायक पैसे काम सकें खाना मिला देना मिलकर अच्छे महीना होगा कुकर को बोले ममता इस फिल्म में एक शराबी के रोल के लिए एक कॉमेडियन का किरदार था उसे समय जॉनी वॉकर मोहम्मद और जगदीप सभी काफी बीजी थे ऐसे में जब केस्टो मुखर्जी कम मांगने उनके पास पहुंचे तो असित सेन ने इन्हें कास्ट कर लिया और यही से शुरू हुआ शराबी कॉमेडियन कैस्टो का सिलसिला [संगीत] एक शराबी खुला शक्ति है फिल्म मां और ममता रिलीज हुई जिसमें पहले बार केशव मुखर्जी ने एक शराबी का रोल निभाया और यही वो फिल्म साबित हुई जिसने कैस्टो में फर्जी को बड़े पर्दे पर एक नई पहचान दिलाई इसके बाद 1970 में ही इनकी अगली फिल्म डायरेक्टर की पहले पसंद बने लगे खासकर जिन्हें एक शराबी की किरदार की जरूर होती थी दोस्त दोस्त ना रहा प्यार प्यार ना रहा इसके बाद कई फिल्म डायरेक्टर तो मुखर्जी के लिए एक शराबी का रोल क्रिएट करने लगे और ऐसा किरदार फिल्म में अलग से एड किया जान लगा भले ही वह छोटा सा रोल ही क्यों एन हो तेरा की तेरा बाबू बहुत बड़े शराबी है और बिना शराब पिए एक पाल भी नहीं र सकते लोगों को लगता था की शराब के नसे में ही यह फिल्मों में इस कादर अच्छी एक्टिंग कर पाते हैं क्योंकि इतनी रियल एक्टिंग तो कोई शराबी कर सकता है अरे वह दूध ले ए गया है या लॉन्ड्री कोली मेरी भी नजर बहुत तेज खूब पहचान लिया लेकिन 1970 71 में गुलजार ने एक फिल्म बनाई किताब जिसमें कैसन ने एक सीरियस टीचर का चरित्र निभाया और इसमें भी जबरदस्त जान दाल दी इसके अलावा भी और कई फिल्में रही जिसमें शराबी के अलावा भी किस्तों मुखर्जी ने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाएं और उनमें भी अपने एक्टिंग की खूबसूरत छाप छोड़ी ये किस बदतमी जवाब दो किस बदतमीज नहीं लिखा है नहीं बोलोगे मैं अच्छी तरह बुलवाना जानता हूं ठीक है जब गुलजार ने परिचय फिल्म बनाई तो उसमें भी केशव मुखर्जी को एक ट्यूशन टीचर की खास भूमिका दी जिसमें ये शरारती बच्चों को पढ़ना जाते हैं और बच्चे एक कछु की पीठ पर मोमबत्ती रखकर अंधेरे में छोड़ देते हैं और फिर कृष्णा मुखर्जी डर से भाग खड़े होते हैं इस अभिनव को आज भी याद किया जाता है जिसमें उन्होंने बिना बोले ही नींद में दर्शकों को गुदगुदाने का कम किया तेरे प्यार में सनम जग छोड़ साल 1973 में फिल्म जंजीर में भी केस्टो मुखर्जी ने एक खास रोल से अपनी कल का लोहा मनवाया कम करने से घबराते हुए भगवान जानता है चोरी चक्रीकरण में कितनी मेहनत करनी पड़ती एक बार बदनाम हो गए नौकरी कौन देगा सर ये वो दूर था जब फिल्मों में जॉनी वॉकर मोहम्मद राजेंद्र नाथ टुनटुन असरानी और जगदीप जैसे दिग्गज कलाकारों का बोलबाला था लेकिन उन सबके बीच कैस्टो मुखर्जी ने अपना अलग अंदाज डेवलप किया और हमेशा डिमांड में बने रहे [संगीत] आपको कैसे पता चला तुम्हारे आने से एक सेकंड पहले अब तक शराबी का करैक्टर फिल्मों की जान बन चुका था और कैस्टो इसकी पहचान बन चुके थे 1973 में फिल्म बड़ा कबूतर और लोफर में केस्टो मुखर्जी ने शराबी की ही भूमिका निभाई और किरदारों में अपनी अदायगी से अनजान फोंट दी एम का क्या नाम है जो कल था कल का था जो आज है [संगीत] चुपके चुपके ऋषिकेश मुखर्जी की इस फिल्म में एक ऐसे शराबी की यादगार भूमिका निभाई जो हमेशा कंफ्यूज राहत है ढूंढ रहे हैं आप एक साला ड्राइवर को ओ साला मलिक की थाली को भाग लाया बहुत बदमाश हो अगर मिल जाए तो साले का रस निकलेगा 1975 में एक और ब्लॉकबस्टर यादगार फिल्म रिलीज हुई शोले इस फिल्म के एक-एक करैक्टर को आज भी इनकी अदायगी के लिए याद किया जाता है गैस्ट्रो ने इसमें हरिराम नई का जो किरदार निभाया उसे याद कर लोग आज भी हंस पढ़ते हैं 1977 में एक फिल्म आई इनकार इसके एक सुपर हिट गीत को आज भी पसंद किया जाता है और रीमिक्स के रूप में भी बंता राहत है हेलेन और कैस्टो पर फिल्माया गया गाना तो मुंगड़ा मैं गुड की काली को भला कौन भूल सकता है [संगीत] धर्मेंद्र के दोस्त का रोल निभाया और धर्मेंद्र अपने दोस्त को कास्ट नाम से ही बुलाया करते थे मुखर्जी की शादी दिखाई जाति है और धर्मेंद्र इनकी शादी में गाना गेट हैं इस गाने के बोल थे शादी बना 1977 में जब ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म गोलमाल बनाई तो उसमें केस्टो मुखर्जी के लिए अलग से किरदार जोड़ा जो बेहद कमल का रहा हूं आई इसके बाद साल 1978 में आई फिल्म राहु केतु में भी यह शराबी ड्राइवर के रोल में लोगों को हंसते दिखे ऐसे बहुत सारे यादगार रोल केशव मुखर्जी ने निभाए और तालिया की गड़गड़ाहट के रूप में इन्हें अवार्ड भी मिलते रहे लेकिन एक ऐसी फिल्म भी रही जिसने इन्हें फिल्म फेयर अवार्ड दिलाई यह थी साल 1980 की फिल्म खूबसूरत एक ही दिन में हरि भाजी क्यों नहीं करती [संगीत] घर में मुझे कम नहीं होगा हालांकि इससे पहले भी यह कई फिल्मों के लिए फिल्मफेयर में नॉमिनेट किया गए थे ये फिल्में थी साल 1975 की फिल्म कल सोना 1977 की फिल्म चाचा भतीजा 1978 में आई फिल्म आजाद और 1980 में आई फिल्म बहन मेरे यही है ना छह नंबर यहां रहते हैं साल 1981 में मैं और मेरा हाथी फिल्म में भी कृष्णा मुखर्जी ने एक शराबी की यादगार भूमिका निभाई कृष्णा को लेकर हमेशा से कहा गया की इन्होंने कभी शराब नहीं पी फिर भी शराबी की भूमिका ऐसी निभाई की कोई भी इनके लेवल को आज तक ऊ नहीं पाया लेकिन हां इसके साथ एक सच और भी है जिससे कैस्टो साहब ने खुद अपने एक इंटरव्यू में बताया था कृष्णा साहब ने कभी भी शराब पीकर शराबी की एक्टिंग तो नहीं की लेकिन हां जब कम पर नहीं होते थे तब शराब पीने से इन्हें कोई परहेज नहीं था खासकर शुरू शुरू में जब यह मुंबई में आए थे तो ऐसी जगह पर रहते थे की सांप बिच्छू और भूतों का डर इन्हें सत्या करता था नहीं रही क्योंकि तब छोटे रोल करने वाले कलाकारों को ज्यादा फीस नहीं मिला करती थी और इसके लिए घर गृहस्ती चलाना भी इन्हें मुश्किल पड़ता था जानकारी बताते हैं की 1980 के दौरान जब इनके फिल्म बेरहम की शूटिंग चल रही थी तब कृष्णा मुखर्जी की तबीयत काफी खराब रहा करती थी
पर इनके पास पैसों की इतनी किल्लत थी की अपना इलाज करने के भी पैसे नहीं थे फिर भी ये बिल्कुल ते समय पर शूटिंग पर पहुंचने और घंटा कम करते रहते थे जी वजह से तबीयत ज्यादा बिगड़ी चली गई लेकिन कम के प्रति समर्पण के अलावा परिवार के जिम्मेदारियां भी इन्हें आराम नहीं करने देती थी इनके परिवार की बात करें तो 1964 में इन्होंने छाया नाम की लड़की से शादी की थी जींस इनके दो बेटे हुए रंजीत और इंद्रजीत कैस्टो यह कभी नहीं चाहते थे की इनके बच्चे फिल्मों में आएं यह चाहते थे की इनके बच्चे पढ़ाई करें और पायलट और डॉक्टर बने कृष्णा मुखर्जी के बड़े बेटे पूर्व मुखर्जी ने एक इंटरव्यू में बताया था की इनके पिता अल जिंदगी में कॉमेडियन नहीं बल्कि एक सीरियस इंसान थे वो अपने बच्चों से फिल्मों को लेकर कोई बात नहीं करते थे यहां तक की कोई फिल्मी शख्स जब इसे मिलने घर पर आता था तो ये बच्चों को अंदर कमरे में भेज दिया करते थे बताते हैं की इसके पीछे कासन का एक डर था की इनके बच्चे फिल्मी दुनिया की चकाचौंध में को ना जाए कृष्णा मुखर्जी ने 30 साल से ज्यादा सिनेमा में कम किया और करीब 100 फिल्मों का हिस्सा रहे 1981 में इनकी आखिरी फिल्म आई थी पांच कैदी लेकिन पुरी जिंदगी यह अक्सर फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स का ही सामना करते रहे कैस्टो साहब मीडिया से भी कम ही मुखातेब होते थे और इंटरव्यू देने से भी बच्चा करते थे लेकिन एक बार एक शख्स इंटरव्यू के लिए इनके पीछे पद गया और आखिरकार इन्हें इंटरव्यू देना पड़ा इस समय उसे जर्नलिस्ट ने इनकी पत्नी के साथ इनकी एक तस्वीर खींची थी जो की आज मीडिया डोमेन में मौजूद इकलौती तस्वीर है कृष्णा मुखर्जी ने उसे इंटरव्यू में बताया था की जब वो कोलकाता से मुंबई आए थे तो उनकी हालात बहुत खराब थी वो कम की तलाश में थे और बहुत ही स्ट्रगल किया था तब इन्हें फुटपाथ पर भी सोना पड़ा और दोनों वक्त का खाना मिलेगा इस बार की भी कोई गारंटी नहीं होती थी खैर 1982 आते-आते कैस्टो साहब और ज्यादा बीमा होते चले गए फिर 4 मार्च 1982 को अचानक पता चला की कासन मुखर्जी अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की यह इनकी बीमारी की वजह से नहीं हुआ था बल्कि मुंबई में ही इनका भयानक रोड एक्सीडेंट हो गया था और एक्सेसिव ब्लीडिंग की वजह से इनकी जान चली गई सभी को हंसते वाला शख्स जिसका बेहद दर्द भारत अंत हो गया तब इनके उम्र सिर्फ 56 साल की थी बताते हैं की उसके बाद ना तो इन्हें फिल्मी दुनिया से अंतिम विदाई मिली और ना ही मीडिया में इसको लेकर कहानी कोई बड़ी खबर छुपी गई जिसके वह सही मेन में हकदार थे इसके बाद इनके बड़े बेटे बबलू मुखर्जी ने फिल्मों में कम करना शुरू किया और बताओ और कॉमेडियन कई फिल्मों में नजर आए क्योंकि तब परिवार के जिम्मेदारी उन्हें के कंधों पर ए गई थी
हालांकि इनके पिता इन्हें जो बनाना चाहते थे वह तो यह नहीं बन पे लेकिन बबलू मुखर्जी ने बहुत साड़ी फिल्मों और टीवी सीरियल में भी कम किया [संगीत] और उसे महालक्ष्मी के मंदिर [संगीत] के छोटे बेटे रंजीत का निधन हो गया बबलू मुखर्जी अब अपने पिता के नाम की एक एक्टिंग अकादमी चलते हैं और फिल्मों का भी हिस्सा है ये अपनी पत्नी पूनम और तीन बच्चों के साथ मुंबई में ही रहते हैं कृष्णा मुखर्जी को इस दुनिया को अलविदा कहे कई दशक बीट चुके हैं अपने खास अंदाज और बेहतरीन अदायगी की वजह से ये आज भी हम सबके जहां में जिंदा है और हमेशा रहेंगे आज भी लोग इनकी मिमिक्री करते हैं और इनके स्टाइल की चर्चा करते हैं कृष्णा मुखर्जी सिनेमा के वो सितारा है जिन्हें कभी भी बुझाए नहीं जा सकता शुरू से लेक आखिर तक हुजूर [प्रशंसा] से अभिनेता के जीवन के पीछे देर सारे दर्द और कई तरह की परेशानियां छुपी रहे लेकिन फिर भी इन्होंने अपने चेहरे पर कभी उसके चिकन तक नहीं आने दी और पर्दे पर बस अपने अंदर की कलाकार को जिंदा रखा का सकते हैं की इनके जिंदगी हम सबके लिए एक मिसल है मुझे बाबूजी है ना की मैंने शादी हुई है कैस्टो साहब को हमारी श्रद्धांजलि तो आज के वीडियो में फिलहाल के लिए बस इतना ही आपके पास भी कृष्णा मुखर्जी साहब से जुड़ी कोई और जानकारी हो तो हमसे सजा करना मत भूलिएगा आपको आज का हमारा ये एपिसोड कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइएगा इसी तरह के कुछ और फिल्मी किस कहानियां के लिए आप हमारे दूसरे इनेलो बेबाक बॉलीवुड और वो पुराने दिन को भी देख सकते हैं और अगर इसी तरह की और एंटरटेनिंग स्टोरी देखना चाहते हैं तो आप युटुब के थैंक्स बटन के जारी हमारे कम को सपोर्ट भी कर सकते हैं अब दीजिए अपने दोस्त और होस्ट श्वेता जी नमस्कार [संगीत]