वी आर डिमांडिंग दैट धर्मेंद्र प्रधान हैज़ टू गो आइदर ही रिजाइन और ही सैक्ड फ्रॉम द कैबिनेट। जितना मेरी मां उस दिन नहीं रोई, जितना मैं ही कुछ रहा था, उतना वो तब रो रही थी जब मैं अपने घर वापस आ रहा था।
जब देश में कोई इंसानअचानक रातोंरात करोड़ों की आवाज बन जाता है तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आखिर यह आदमी है कौन? इसके पीछे कौन सी ताकत है और यह किसके दम पर इतनी बड़ी सरकार के सामने खड़ा है।
हम बात कर रहे हैं कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की। आपको बता दें कि यह कोई चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ एक व्यंगात्मक आंदोलन है। लेकिन इस आंदोलन का जलवा देखिए। इसने देश की सबसे बड़ी पार्टियों यानी बीजेपी और कांग्रेस दोनों को Instagram फॉलोअर्स के मामले में कोसों पीछे छोड़ दिया है और इस पूरी सनसनीखेज कहानी के पीछे है महज 30 साल का एक लड़का जो महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर का रहने वाला है और आज अमेरिका के बॉस्टन में पढ़ाई कर रहा है। आइए जानते हैं अभिजीत दीपकी की पूरी इंसाइड स्टोरी।
सबसे पहले इस लड़के की कुंडली खोलते हैं। नाम है अभिजीत दीपकी। उम्र 30 साल। अभिजीत महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर के एक बेहद साधारण मिडिल क्लास परिवार से आते हैं। इनके पिता भगवान दीप के और मां अनीता दीप के हैं। अभिजीत ने शुरुआत में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। लेकिन पढ़ाई बहुत कठिन लगी तो उन्होंने उसे बीच में ही छोड़ दिया।
इसके बाद वह पुणे और मास मीडिया यानी पत्रकारिता की तरफ कदम बढ़ाया।कि क्योंकि उनकी बहन पहले से विदेश में थी तो उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए अभिजीत आगे की पढ़ाई के लिए सीधा अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटीपहुंच गए। आज वो वहां पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं। दोस्तों, ध्यान देने वाली बात यह है कि उनका पूरा एकेडमिक बैकग्राउंड इस बात परटिका है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स कैसे लोगों की राजनीतिक सोच को बदल सकते हैं। यानी यह लड़का सिस्टम से ऐसे ही नहीं टकरा रहा।
वह बकायदा इसकी पढ़ाई करके पूरी प्लानिंग के साथ उतरा है। अब आते हैं सबसे बड़े विवाद पर। जैसे ही सीजेपी का ग्राफ बढ़ा, सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। क्या इसके पीछे आम आदमी पार्टी का हाथ है? दरअसल सच यह है कि साल 2020 से 2023 तक अभिजीत दीपके ने आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम के साथ एक वॉलंटियर के रूप में काम किया था। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने युवाओं को टारगेट करने वाले कई मशहूर मीम्स बनाए थे। इतना ही नहीं उन्होंने दिल्ली सरकार को शिक्षा विभाग के लिए कम्युनिकेशन एडवाइजर का काम भी किया था।
साल 2023 में वह आम आदमी पार्टी छोड़कर पढ़ाई के लिए विदेश चले गए। अब आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी दरअसल आम आदमी पार्टी का ही एक छिपा हुआ प्रोजेक्ट है। हालांकि दीपके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा है मेरा आपसे पुराना जुड़ाव रहा है जिसे मैं कभी नहीं छुपाया। लेकिन सीजेपी का उससे कोई लेना देना नहीं है। यह पूरी तरह से स्वतंत्र आंदोलन है।
लेकिन अब सवाल है कि आखिर सीजेपी बनी कैसे? इसकी कहानी शुरू होती है 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई से। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर एक टिप्पणी करते हुए कह दिया कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह हैं जिन्हें कहीं नौकरी नहीं मिलती तो वह मीडिया बन जाते हैं और आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सबको टारगेट करते हैं। बस यही वह चिंगारी थी जिसने बारूद का काम किया।
अगले ही दिन यानी 16 मई को अभिजीत ने मजाक में एक्स पर पोस्ट डाली। व्हाट इफ ऑल कॉकरोचेस कम टुगेदर? यानी क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक हो जाएं? लोगों ने इस पर ऐसा जबरदस्त रिस्पांस दिया कि उसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हो गया। इस पार्टी की मेंबरशिप का क्राइटेरिया भी बड़ा मजेदार और तीखा था। आप बेरोजगार हो, आलसी हो, हमेशा ऑनलाइन रहते हो और सिस्टम पर शानदार तरीके से भड़ास निकाल सकते हो।
यह व्यंग था, लेकिन इसमें देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं का असली दर्द छिपा था। देखते ही देखते 10 दिन के अंदर इस पार्टी के Instagram पर 1 करोड़ फॉलोवर्स हो गए और 22 मई आते-आते यह आंकड़ा 2 करोड़ 20 लाख यानी 22 मिलियन पार कर गया। आपको बता दें कि बीजेपी के ऑफिशियल Instagram पर करीब 90 लाख और कांग्रेस के 1 करोड़ 34 लाख फॉलोवरर्स हैं। यानी सीजेपी के बिना किसी चुनावी फंड और बिना किसी बड़े नेता के दोनों बड़ी पार्टियों को मात दे दी। जाहिर सी बात है अब सोशल मीडिया पर इतना बड़ा सैलाब आएगा तो सरकार भी शांत नहीं बैठेगी। 21 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर सीजेपी का एक्स अकाउंट इंडिया में ब्लॉक कर दिया गया।
वेबसाइट्स डाउन कर दी गई और खुद अभिजीत दीपके को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी। हालात यह हो गए कि महाराष्ट्र पुलिस को छत्रपति संभाजी नगर में अभिजीत के घर के बाहर 24 घंटे का पहरा लगाना पड़ा। घर के अंदर का माहौल भी बेहद तनावपूर्ण है। उनकी मां नीता दीपके का कहना है कि मैंने उसे हमेशा राजनीति से दूर रहने को कहा था। वहीं उनके पिता भगवान दीपकी ने भावुक होकर बताया मैं डर के मारे दो रातों से सोया नहीं हूं। मुझे डर है कि कहीं मेरा बेटा गिरफ्तार ना हो जाए। तो दोस्तों यह है अभिजीत देवके की पूरी हकीकत। ना कोई करोड़पति बाप, ना कोई बड़ा सियासी घराना और ना ही कोई विदेशी फंडिंग।
यहां आंदोलन खड़ा हुआ है सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के एक शब्द के अपमान। एक नौजवान के दिमाग और देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं के उस दर्द के दम पर जो आज सोशल मीडिया के जरिए सड़कों पर आए हैं।