आपने अपने जीवन में पहली बार ऐसा सुना होगा कि एक बेटी ने अपनी मां को मार डाला। वहां कम से कम 10-12 करोड़ की संपत्ति तो उनकी है। इसके बाद में अगर हम जयपुर में वैल्यूएशन करने जाए तो कम से कम दो मकान तो ढाई तीन करोड़ के हैं।
सर मैं सबसे बड़ी बात करता हूं हमारा जो समाज है जिस तरीके से समाज का डीवैल्यूएशन जो नजर आ रहा है जिस तरीके से घटनाएं घट रही हैं। तो इसमें सबसे बड़ी बात ये आती है कि मैंने पहली बार मेरे जीवन में और शायद मैं समझता हूं। आपसे उम्मीद करता हूं कि आपने अपने जीवन में पहली बार ऐसा सुना होगा कि एक बेटी ने अपनी मां को मार डाला।
मैंने बहुत सुना है बेटे ने मार दिया या क्योंकि मैंने कभी बेटी के द्वारा मां को मारते हुए आज तक मैंने मैंने कभी ऐसी अप्रिय घटना नहीं सुनी तो यही सुनते ही मेरी रों कांप जाती है। समाज के हर व्यक्ति की रूह कांप रही है। भारत का कोई भी व्यक्ति ऐसा सोचने पे विवश हो रहा है कि आखिर एक बेटी अपनी मां को कैसे मार सकती है? ये सोचने पे भी आदमी मजबूर हो जाता है। तो ये सभी लोगों को डाउट तो इस चीज का सब क्यों है? जिसने भी ये खबर सुनी है और जिस तरह से ये खबर बूम हुई है बाकी तो रोज होते हैं रोज हत्याएं हो रही है लेकिन जिस तरीके से ये सोशल मीडिया पे जिस तरह से हाईलाइट हुआ है मैटर तो महत्वपूर्ण ये नहीं हुआ हुई है महत्वपूर्ण हुआ कि एक बेटी ने अपनी मां की की है ये सोचने पर सभी को मजबूर कर दिया मेरे बहनोई जो थे वो उनका हुआ था और में फर्स्ट बार हुआ था वो सही हो गए थे सेकंड बार में हॉस्पिटल में वो रहे थे नब हॉस्पिटल में वो 90% सही हो गए थे बाद में उनको ये आयुष और बलराम अपनी इमर्जी से प्राइवेट जगह ले गए।
3 सवा तीन महीने को गोपनीय जगह पर रखा। बाद में 9 अप्रैल 2025 को इन्ह हॉस्पिटल में भर्ती कराया। संदित परिस्थिति में भर्ती कराया। जिस दिन भर्ती कराया उस दिन बॉडी के 90% पार्ट डैमेज थे। तो जाहिर सी बात है कि जब मैंने सिंपल एप्लीकेशन लिख के इतने भारी मात्रा में अपराधी पकड़ में आए और और उन्होंने ये कबूल भी किया है कि हमने प्रॉपर्टी के लालच में सारा काम किया है। तो कैसे इंकार किया जाए कि प्लान ए प्लान बी के रूप में रहा होगा।
तो प्लान ए भी कहीं ना कहीं रहा होगा। सर जिस तरीके से सारे अपराधियों ने कबूल किया है कि हमने संपत्ति के लालच में यह घटना को अंजाम दिया है तो संपत्ति के लालच जभी सक्सेस होगा प्लान ए सक्सेस किया होगा उन्होंने अगर जिंदा होते तो प्रॉपर्टी प्लान सक्सेस कैसे होता सर प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन की बात करें तो कम से कम भरतपुर में सेवर चौराया है वहां कम से कम 101 करोड़ की संपत्ति तो उनकी है इसके बाद में अगर हम जयपुर में वैल्यूएशन करने जाए तो कम से कम दो मकान तो ढाई तीन करोड़ के हैं।
जीजा जी की मृत्यु के बाद में जो अन्य बेनिफिट बाकी थे वह बेनिफिट ₹87 लाख के हैं। चौथी बात आती है कि जिस तरह से घटना कारित की गई है और दुर्घटना से घटना कारित की गई है तो उसका जो मुआवजा मिलता क्योंकि सिस्टर ऑन ड्यूटी थी तो वो भी मुआवजा मैं समझता हूं जहां तक मैं ज्ञान लीगल रखता हूं करोड़ सवा करोड़ का वो इनको मुआवजा मिलता तो जिस तरीके से इन्होंने सारा इन्होंने जिस तरीके से एस्टीमेट करके चले हैं और पूर्णत सुनि प्लान इन्होंने बनाया है तो लमसम संपत्ति 22 23 करोड़ की बनती है।
आप सरकार से सरकार से मेरी ये मेरे माननीय मुख्यमंत्री महोदय से मेरा निवेदन है कि जिस तरीके से ये इन्वेस्टिगेशन की जा रही है उस इन्वेस्टिगेशन से मैं 60% ही संतुष्ट हूं।
क्योंकि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह घटना तीन तारीख की है। मुख मलजूम जो बलराम है वो अभी तक पकड़ में नहीं आया तो क्या ऐसा संभव है कि जब उसके पिता को पकड़ लिया गया 5 तारीख को तो उस बलराम की इतनी औकात है कि पुलिस अपना थर्ट इस्तेमाल करे वो आज तक पकड़ में नहीं आता।
ऐसा संभव नहीं है। मेरा आपके के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री महोदय से निवेदन है कि या तो इसकी जांच हो या भी जांच हुई। एक सवाल और है क्या आप कंफर्म ऐसा लगता है कि पुराना मामला था मामला था वो अलग है और आपके का मामला उसके अंदर भी उस समय आप सर जिस तरीके से सामान एफआई कटाने पर भारी मात्रा में अपराधियों को पकड़ा गया है तो और जिन्होंने हर अपराधियों ने यह कबूल किया है कि हां हमने अमुक 14 करोड़ संपत्ति के लालच में सरकारी नौकरी लालच हमने यह काम को अंजाम दिया है और कब से यह अप्रिय घटनाएं कभी तांत्रिक क्रिया के माध्यम से कभी रिहर्सल के माध्यम से कभी पत्थर फेंकना कैमरा जिस तरीके से आपने सोशल मीडिया पे देखा है तो कैसे इंकार किया जा सकता है ।
कि प्लान ए प्लान बी से पूर्व प्लान ए को रचित नहीं किया गया हो आपको डर नहीं आप सामने आ रहे हैं सर डर डर तो ऐसा है कि जब मैंने मेरी बहन की न्याय के लिए मैं आगे कदम आगे बढ़ा तो डर तो ठाकुर जी से स्नेह रखता हूं तो ठाकुर जी की कृपा मेरे ऊपर पूरी है और मनना सभी को है डर का माहौल है परिवार में भी होगा।
सर मेरे मेरे पूरे परिवार में डर का माहौल है। इसमें निसंदेह कोई वो नहीं है। लेकिन सर जब मेरी बहन गई है तो सर जाना तो मुझे भी है। हर प्राणी को जाना है। तो मैं तो सिर पर कफ़न बांध के निकला हूं। राजस्थान से कलयुग की एक खौफनाक और रोंगटे खड़े करने वाली वारदात सामने आई है। जिसने मां बेटी के पवित्र रिश्ते को भी कलंकित किया है।
दरअसल 23 साल की एक बेटी ने अपनी ही मां की सुपारी देकर उसको की खाट उतार दिया। इस पर बातचीत करने के लिए उसके मामा हमारे साथ बातचीत के लिए मौजूद हैं। क्या नाम हुआ आपका? एडवोकेट चंद्र प्रकाश शर्मा। काफी गंभीर आरोप आपकी भांजी पर लगे हैं कि उसने आपकी बहन को जिस तरीके से ₹7 लाख की सुपारी दी और फिर उनकी मौत करवा दी। क्या कहेंगे? देखिए पूर्ण रूप से मैं यह कहना चाहूंगा कि आयुषी जो है उसको मोहरा बनाया गया है क्योंकि 23 साल की आयुष जो कि स्वयं एक स्टूडेंट है और अभी कॉलेज में पढ़ रही है लॉ की पढ़ाई कर रही है तो उसके लिए ₹ लाख जुटा पाना एकदम से संभव नहीं था। उसके अलावा इतना बड़ा षड्यंत्र जो है उसको अंजाम देना और पूरे सुनियोजित तरीके से जैसा यह हुई है यह सब करना उसके अकेले की वस की बात नहीं थी तो निश्चित रूप से उसका कोई ना कोई सहयोगी रहा है।
कोई ना कोई मास्टरमाइंड है जिसने इस पूरे काम को अंजाम दिया है। हमारा शक जो है यहां पर बन हमारा जो शक है वो मोहन के ऊपर है और बलराम शर्मा जो कि उसका रिश्ते में तो भाई लगता है उसके ऊपर जो है उसका शक है क्योंकि देखिए बलराम शर्मा अभी तक फरार है पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है और उसी ने जो है यहां पर ₹7 लाख की व्यवस्था की है। सुपारी देके जो है स्कर्पियो कार का अरेंज किया और स्कर्पियो कार ने इस तरीके से नीरज शर्मा को कुचल कर जो है मार दिया। यहां पर ऐसा भी पुलिस को मालूम चला है कि एक महीने पहले भी Thar कार का इन्होंने व्यवस्था की थी और Thar कार ने रेकी करके नीरज शर्मा को मारने का प्रयास किया।
लेकिन वह सफल हो नहीं पाए और उसके बाद में जो है तांत्रिक विधि के द्वारा तंत्र मंत्र करके भी नीरज शर्मा की हत्या करने का आयुष शर्मा और बलराम शर्मा ने प्रयास किया। 1 मार्च 2026 को बलराम शर्मा अपने कुछ सहयोगियों के साथ में नीरज शर्मा के रविंद्र नगर आवास पर आता है और जबरन वहां पर घुसकर कब्जा करने का प्रयास करता है। मारपीट करता है। उनके 15 साल के बच्चे को जो मंदबुद्धि बच्चा है उसके साथ मारपीट करता है। तकरीबन ₹ लाख कुछ जेवरात और कुछ सामान चुराकर वहां से ले जाता है।
इस संबंध में नीरज शर्मा ने प्रतापनगर थाने में लिखित रूप से शिकायत भी दर्ज करवाई थी। लेकिन पुलिस पुलिस ने कोई भी एक्शन नहीं लिया। ना ही पुलिस ने मामले में कोई तहकीकात की। आरोपियों को पकड़ा। उसके बावजूद भी नीरज शर्मा ने मौखिक रूप से कई बार जो है प्रतापनगर थाने में जाकर शिकायत करी। लेकिन पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। अगर पुलिस जो है प्रतापनगर थाना पुलिस नीरज शर्मा की शिकायत पर आरोपियों की धरपकड़ करती उनसे कड़ी पूछताछ करती या उन्हें पाबंद करती तो आज ये नौबत नहीं आती नीरज शर्मा को बचाया जा सकता है।
ये बताइएगा काफी गंभीर आरोप लगा रहे हैं और यह भी कह रहे हैं आयुषी को बरगलाया जा रहा है। ये जो बलराम है ये पेशे से क्या है? क्या करता है? और यह भी बताइएगा क्योंकि रिश्ते में तो चचेरा भाई है। लेकिन क्या इनके और कोई संबंध भी हैं? प्रेम संबंध भी हैं? देखिए जैसा आसपास के पड़ोसी बताते हैं इनके घर में हमेशा लॉक रहता था और बलराम शर्मा और आयुष शर्मा दोनों एक ही घर में एक ही कमरे में पतिप के रूप में लिविंग रिलेशनशिप में रहते थे और ऐसा माना जा रहा है कि इनकी योजना थी कि शादी करने की तो बड़े आश्चर्य की बात है कि एक बहन भाई इस प्रकार के रिलेशन में थे।
बलराम ने आयुषी को पूरी तरीके से अपने कंट्रोल में अपने कब्जे में कर रखा था। जैसा बलराम कहता था वैसा ही आयुषी जो है वो करती थी और यहां पर देखिए बलराम का जो पिता है मोहन उसकी मां बलदेई वो उसका भाई कृष्णा जिसे पुलिस ने गिरफ्तार करके कुछ ही समय बाद छोड़ दिया पुलिस ने ना तो कृष्णा से कोई पूछताछ करी ना ही और अन्य कोई कार्य किया तो यहां पर सुनियोजित तरीके से आयुष जो है आयुषी के माध्यम से आयुषी को मोहरा बना के इन्होंने जो है वो हत्याएं जो है वो की है। सर अनुकंपा नियुक्ति पाना ही मकसद था या फिर जो उनकी संपत्ति है उसको भी हड़पना चाहते थे यह दोनों मिलकर? देखिए अनुकंपा की अनुकंपा नियुक्ति जो है वो पिता की के बाद में राजस्थान हाई कोर्ट में इस नौकरी को पाने के लिए जो है आयुष शर्मा ने आवेदन किया था। क्योंकि आयुषी ग्रेजुएट नहीं थी तो नियुक्ति जो है आयुषी की जगह उसकी मां को मिल गई थी। मां ने आयुष को यह भी कहा था कि भाई जब आपकी ग्रेजुएशन हो जाएगी तो मैं आपको यह जॉब ट्रांसफर कर दूंगी।
तो यहां पर एक लालच तो इस नियुक्ति को पाना था। उसके अलावा बलराम और उसके पिता विजय वशिष्ठ की संपूर्ण संपत्ति जो कि हाईवे पर इनके पांच बीघा खेत है। कुछ इनकी प्रॉपर्टी है। कुछ एफडीआई है उनको पाना चाहते थे। तकरीबन 15 20 करोड़ की इनकी संपत्ति है। उसको प्राप्त करना चाहते थे।
तो यहां पर देखिए संपत्ति को पाना तो बलराम और उसके पिता चाहते थे। अनुकंपा पर नियुक्ति आयुष चाहती थी। आयुष के माध्यम से जो है इनकी मां यानी कि आयुषी की मदद जो है नीरज शर्मा उसकी करवा दी गई। हमें पूर्ण आशंका है कि निश्चित रूप से नीरज शर्मा के पति विजय वशिष्ठ जो है उनकी भी संदिग्ध परिस्थिति में हुई है। तो हो ना हो यह जो है विजय वशिष्ठ की वो भी एक हो सकती है। तो आप काफी गंभीर आरोप लगा रहे हैं क्योंकि विजय शर्मा की जो है जो आपके जीजा जी थे वो तो काफी पहले हुई थी और पहले ही कहा जा रहा था कि वो नेचुरल थी। तो आपको लगता है कि वो भी प्लांट था। जी हां देखिए हमने प्रतापनगर थाना पुलिस में सामान्य एफआईआर दर्ज करवाई थी जिसमें हमने केवल शंका के आधार पर करना जो है वो किया था।
लेकिन जब पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो एक नहीं सात-सात आरोपी जो है पुलिस की पकड़ में आ गए। उसके अलावा बलराम शर्मा अभी तक फ्री है। उसको पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है। अगर बलराम शर्मा को पुलिस गिरफ्तार करके और थर्ड डिग्री इस्तेमाल करते हुए कड़ाई से पूछताछ करें तो हो सकता है बलराम शर्मा के अलावा अन्य कई और और आरोपी अन्य और कई सहयोगी उसके पकड़ में आ सकते हैं। और कई नए खुलासे जो है वो हो सकते हैं। और यहां पर जो है इन दोनों के बीच में प्रेम संबंध थे। आयुष और बलराम शर्मा के बीच प्रेम संबंध थे।
संपत्ति हड़पना चाहते थे। पिता की मृत्यु में भी इनका हाथ था और यहां पर उन्होंने जो है भरतपुर से या अन्य जगह से जो है गाड़ी की व्यवस्था की और पूरी तरीके से सुनियोजित तरीके से उसको मार दिया। आयुषी के और कोई भाई बहन है? देखिए आयुष का एक 15 वर्ष का भाई है जो कि मंदबुद्धि है जो कि सोच समझ नहीं सकता और निश्चित रूप से जो है मां की मृत्यु के बाद में हो सकता है अगला टारगेट इनका भाई भी हो। लेकिन आप जिस तरीके से खुलकर बात कर रहे हैं आप आरोप आयुषी पर लगा रहे हैं। हालांकि वो पुलिस गिरफ्त में तो आप लोगों को कोई डर की शंका नहीं नजर आ रही।
देखिए इस समय हमें जो है हमारी बहन जो है उसके प्रति हमारा जो स्नेह है वो सर्वोपरि है। बाकी देखिए हमारा इष्ट है। हमें उसके ऊपर आस्था है पूर्ण रूप से। अब जो होना था वो हो गया लेकिन हम न्याय चाहते हैं। इसके अतिरिक्त मैं राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री श्री भजन लाल जी से यह प्रार्थना करना चाहूंगा। यह निवेदन करना चाहूंगा कि मामले की जो है निष्पक्ष जांच हो और सीआईडीसीबी से इसकी जांच करवाई जाए और यहां पर स्वयं जो है संज्ञान लेकर वो इस मामले में देखें कि यह मामला आखिर है क्या? यह मामला आपके सांगने थाना क्षेत्र का मामला है और यह भरतपुर का ही मामला है साहब। तो अगर आप इसमें मामले में श्री भजन लाल जी अगर आप इस मामले की सही तरीके से देखरेख करें और आप देखें कि आखिर यह किसकी हुई है तो यह मेरी बहन नहीं यह आपकी बहन है। आपके परिवार का ही मामला है साहब।
बातचीत के लिए शुक्रिया। तो आयुष के मामा टाइम्स नाउ भारत से खास बातचीत में कह रहे हैं कि जिस प्रकार से आयुष ने अपनी माता की सुपारी देकर करवाई है, उसी तरह बीते दिनों जिस प्रकार से उनके पिता की हुई थी, वह भी एक सामान्य या नेचुरल मौत नहीं वह भी प्रीप्ला था और तंत्र विद्या का इस्तेमाल भी साफ तौर पर वह करती आ रही थी और उनके चचेरे भाई जो बलराम है उसके साथ उसके प्रेम संबंध थे और संपत्ति को हड़पने के लिए आयुष ने इस प्रकार की तमाम घटनाओं को अंजाम दिया है। कैमरा पर्सन गिरीश के साथ लखवीर सिंह शेखावत टाइम्स नाओ जयपुर।