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अपनों से दूर वियतनाम में खत्म हो गया इन भारतीयों का सफर!

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सुबह घर पर वीडियो कॉल हुई थी। नन्ही पोती मुस्कुरा रही थी। दादा ने उसे प्यार से देखा। पत्नी से बात की। बेटे को कारोबार से जुड़ी कुछ बातें समझाई और फिर जाते-जाते बस इतना कहा, “मैं एक ऐसे द्वीप पर जा रहा हूं जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा।” लौट कर बात करता हूं, लेकिन वो फोन कभी दोबारा नहीं आया। कुछ घंटों बाद खबर आई कि जिस स्पीड बोट में वह सवार थे, वह समुद्र में पलट गए। वियतनाम की खूबसूरत यात्रा देखते ही देखते मातम में बदल गई। इस हादसे में 15 भारतीयों की जान चली गई और अब हर परिवार के पास सिर्फ आखिरी बातचीत की याद बची [संगीत] है।

यह हादसा वियतनाम के मशहूर फूक दीप के पास हुआ। एक मोबाइल कंपनी की ओर से अपने चैनल पार्टनर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और कर्मचारियों के लिए रिवॉर्ड ट्रिप आयोजित की गई थी। इसी ट्रिप पर भारत से कई लोग वियतनाम पहुंचे थे। 9 जुलाई को शुरू हुई यात्रा 13 जुलाई को खत्म होनी थी। किसी ने नहीं सोचा था कि लौटने से पहले इतनी बड़ी त्रासदी उनका इंतजार कर रही होगी। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। इस हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई। इनमें तमिलनाडु के 10, आंध्र प्रदेश के तीन और केरल के दो लोग शामिल हैं। हौोई स्थित भारतीय दूतावास ने सभी मृतकों की पहचान भी जारी कर दी। वहीं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल सरकारों ने कहा है कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर सभी पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश कर रही है। मंडीवालों में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के

रहने वाले शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद भी थे। उनकी कहानी सुनकर किसी का भी दिल भर आए। उनके रिश्तेदार बताते हैं कि हादसे वाली सुबह उन्होंने वीडियो कॉल पर अपनी नवजात पोती को देखा था। पत्नी और बेटे से भी बात हुई थी। उन्होंने परिवार से कहा था कि जिस द्वीप पर जा रहे हैं वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा इसलिए लौट कर बात करेंगे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। परिवार वालों ने बताया कि अब्दुल्ला अक्सर ऐसी यात्राओं पर नहीं जाते थे। इस बार भी पहले उन्होंने अपने बेटे को भेजने की बात सोची थी, लेकिन बाद में खुद जाने का फैसला किया। शायद अगर फैसला अलग होता तो आज कहानी भी अलग होती, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब्दुल्ला के चचेरे भाई मोहम्मद इस्माइल बताते हैं कि परिवार को हादसे की

जानकारी सीधे अधिकारियों से नहीं मिली। सबसे पहले यह खबर उन लोगों ने दी जो तमिलनाडु से उसी ट्रिप पर वियतनाम गए थे। उसके बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इस बीच यात्रा आयोजित करने वाली लावा मोबाइल कंपनी ने भी बयान जारी किया। कंपनी ने गहरा दुख जताते हुए पुष्टि की कि इस हादसे में उसके 14 चैनल पार्टनर्स और लावा टीम के एक सदस्य की मौत हुई है। कंपनी ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद करेगी। हादसे से बचकर लौटे लोगों की आपबीती भी रोंगटे खड़े कर देती है। तमिलनाडु के पालनी निवासी निर्मल कुमार बताते हैं कि स्पीड बोट कुछ ही सेकंड में पलट गई। उनके मुताबिक ऊंची लहरें और पॉसिबबली नाव में ज्यादा लोगों का होना इसकी वजह हो सकता है। हालांकि हादसे की असली वजह की जांच अभी जारी है।

वहीं आंध्र प्रदेश के गुंटूर के रहने वाले आशीष कुमार ने उस पल को याद करते हुए कहा हम तस्वीरें खींच रहे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही पल सब कुछ बदल जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी लोग लावा मोबाइल से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स, सेलर्स और कर्मचारी थे। तीन अलग-अलग नावों में पर्यटकों को द्वीपों तक ले जाया जा रहा था। बाकी दो नावों के लोग पहले द्वीप पर घूम रहे थे। जबकि उनकी नाव दूसरे द्वीप की ओर निकली थी। लेकिन कुछ ही मिनटों में हादसा हो गया। आशीष बताते हैं कि नाव किनारे से सिर्फ 300 से 400 मीटर ही दूरी पहुंची थी कि अचानक पलट गई। चारों तरफ अफरातफरी मच गई। लोग मदद के लिए छींक रहे थे। राह दल कुछ ही देर में पहुंच गया और घायलों और मृतकों को बाहर निकाला गया। लेकिन उनका कहना है कि मौके पर तुरंत मेडिकल टीम मौजूद नहीं थी। आशीष का दावा है कि अगर उसी वक्त डॉक्टरों की टीम पहुंच जाती और तुरंत सीपीआर जैसी प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती तो शायद कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना है कि हादसे के वक्त मौसम भी बिल्कुल सामान्य था। हल्की हवा चल रही थी जो समुद्र के किनारे आम बात है। इसलिए उन्हें नहीं लगता कि सिर्फ मौसम इस हादसे की वजह बना। फिलहाल जांच चल रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर स्पीड बोट कैसे पलटी? लेकिन इस जांच से भी बड़ा सच उन परिवारों के सामने है जिनके अपने अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। जो लोग इस सफर पर यादें बनाने निकले थे उनकी तस्वीरें तो बच गई लेकिन उन तस्वीरों में मुस्कुराते चेहरे अब सिर्फ याद बनकर रह गए। कुछ परिवारों के लिए यह ट्रिप एक इनाम थी लेकिन लौटते वक्त उनके हिस्से में सिर्फ इंतजार, आंसू और अपनों की आखिरी यादें बची।

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