जब भी होली या दिवाली आती है, तभी लोगों को कहा जाता है कि इसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाएं। कभी पर्यावरण के अनुकूल रमजान या पर्यावरण के अनुकूल बकरीद को बढ़ावा देकर तो देखिए। तभी हमें लगेगा कि वे सबको बराबर की सलाह देते हैं।दिया मिर्ज़ा ने दिवाली को लेकर ऐसा क्या कहा कि इतना हंगामा हो गया और उन्हें अपना वीडियो डिलीट करना पड़ा? इसके बाद भी विवाद थमा नहीं। दिवाली से पहले दिया मिर्ज़ा का एक वीडियो आया था। इस वीडियो में दिया मिर्ज़ा समझाती हैं कि दिवाली कैसे मनाएं ताकि धुआं न हो, पर्यावरण प्रदूषण न हो, ध्वनि प्रदूषण न हो, पालतू जानवर डरें नहीं, और हमारा वातावरण और ज़्यादा प्रदूषित न हो।दिया मिर्ज़ा का ये वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया, और इसके थोड़ी देर बाद ही महाराष्ट्र के एक नेता अमित साटम ने इस पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने इस वीडियो को लेकर कहा कि दिवाली हमारा त्योहार है, और हमें दिया मिर्ज़ा से ये सलाह नहीं चाहिए कि इसे कैसे मनाएं। हमारी संस्कृति गहरी जड़ों वाली है, और हमें अपने त्योहार कैसे मनाएं, इस पर किसी के मार्गदर्शन की ज़रूरत नहीं है।दिया मिर्ज़ा के वीडियो पर हंगामा तब और बढ़ गया जब और नेताओं ने इस पर बोलना शुरू कर दिया। नितेश राणे ने कहा कि दिया मिर्ज़ा दिवाली से पहले ऐसे वीडियो बनाती हैं, लेकिन बकरीद से पहले वो ऐसे वीडियो क्यों नहीं बनातीं? दूसरे नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी।दिया मिर्ज़ा ने दिवाली को लेकर जिस तरह की सलाह दी, वो उनसे ईद, मुहर्रम या बकरीद के दौरान कभी आते हुए नहीं दिखती।
जब भी होली या दिवाली आती है, तभी उन्हें पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने के लिए कहा जाता है। कभी पर्यावरण के अनुकूल रमजान को बढ़ावा देकर देखिए। कभी पर्यावरण के अनुकूल बकरीद को बढ़ावा देकर देखिए। तब हमें लगेगा कि वे सबको बराबर की सलाह दे रहे हैं।इसलिए, अगर उनके जैसे लोग, जो सनातन हिंदू धर्म के खिलाफ हैं, उन्हें मुंबई महानगरपालिका के ज़रिए बढ़ावा दिया जा रहा है, तो ये गलत है। हम मुख्यमंत्री से इस बारे में बात करेंगे और ये सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी चीज़ें दोबारा न हों।अगर हम दिया मिर्ज़ा की पूरी प्रोफाइल देखें, तो उन्होंने नर्मदा प्रोजेक्ट का विरोध किया है। उन्होंने यूसीसी का विरोध किया है। उन्होंने पर्यावरण संकट को लेकर हम जो प्रयास कर रहे थे, उसके खिलाफ भी बोला है। उन्होंने भारत के सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों का भी विरोध किया है।
तो, हमने हमेशा उनका विरोध हिंदुत्व के खिलाफ ही देखा है। जो लोग हिंदुत्व के लिए काम करते हैं, वो इसके खिलाफ हैं, और दूसरी बात, दिया मिर्ज़ा, हमें आपको ये सिखाने की ज़रूरत नहीं है कि हिंदू लोगों को दिवाली कैसे मनानी चाहिए। हम जानते हैं कि अपनी दिवाली कैसे मनानी है। आपको अपने ही एजेंडे पर काम करना चाहिए, अपने चुनिंदा एजेंडे पर।पूरी तस्वीर इस बारे में साफ हो रही है कि आप हिंदुत्व के खिलाफ हैं। इसलिए हमने उनके वीडियो का पूरी तरह विरोध किया है, और उन्हें हमें ये सिखाने की ज़रूरत नहीं है कि हम हिंदू लोग दिवाली कैसे मनाएं। दिवाली साफ तौर पर रोशनी का त्योहार है, और दिया मिर्ज़ा, जिनके नाम का मतलब ही दिया (दीपक) है, उन्हें भी ये समझना चाहिए कि दिवाली से एक तरह की सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है। कोई भी प्रदूषण या पटाखे फोड़ने का प्रचार नहीं कर रहा है। लेकिन हमें खुद आत्ममंथन करने की ज़रूरत है। हमें दूसरों से ये सबक लेने की ज़रूरत नहीं है कि मुंबईकरों के तौर पर हमें क्या करना चाहिए।इस वीडियो पर विवाद बढ़ने के बाद इसे हटा दिया गया। दिया मिर्ज़ा ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि ये वीडियो बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी के लिए बनाया गया था। और अगर हम यहां पर्यावरण की बात कर रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है? दिया मिर्ज़ा ने कुछ इसी तरह प्रतिक्रिया दी, लेकिन अब ये वीडियो डिलीट कर दिया गया है।इसके अलावा, दिवाली या पर्यावरण को लेकर बीएमसी के अभियान से दिया मिर्ज़ा का नाम हटा दिया गया है, और इसके लिए वजह ये बताई गई है कि दिया मिर्ज़ा कुछ समय से बीजेपी विरोधी चीज़ों और बीजेपी विरोधी गतिविधियों का समर्थन कर रही हैं और अक्सर सनातन धर्म के खिलाफ पोस्ट करती हैं।
इसलिए दिया मिर्ज़ा का ये वीडियो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और इसे हटा दिया गया है।कई लोग इससे सहमत हुए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुछ दिन पहले ही करवा चौथ आया था और उस दिन भारत में कई महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
दिया मिर्ज़ा ने उस दिन एक सेल्फी पोस्ट की और उसके साथ लिखा कि एक कामकाजी पत्नी अपने पति की उम्र बढ़ाती है। ये उन महिलाओं पर तंज था जो गृहिणी हैं और अपने पति की उम्र बढ़ाने के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं।कई लोगों ने इस पोस्ट पर भी नकारात्मकता जताई और अपनी प्रतिक्रियाएं दीं, और लोगों ने यहां तक पूछा कि एक कामकाजी पत्नी के बारे में, क्या एक पत्नी जो काम नहीं करती, जो घर पर बैठती है, वो अपने पति की लंबी उम्र की कामना नहीं कर सकती? इस तरह लोगों ने सोशल मीडिया पर दिया मिर्ज़ा को काफी ट्रोल किया। वो विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि ये नया विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, कई लोगों ने कहा कि आपका अपना नाम ही दिया है, और आप ही दिवाली के खिलाफ बोल रही हैं।