आप कान को सीधा पकड़े या हाथ घुमाकर तरीका अलग हो सकता है लेकिन नतीजा एक ही होगा। आजकल हर विपक्षी नेता और कई देशों का डीप स्टेट किसी भी कीमत पर पीएम मोदी को हटाना चाहता है। ऐसे में अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते तो क्या होगा? चीन ने जाने अनजाने में इस सवाल का जवाब दे दिया है, लेकिन तरीका अलग चुना है। सवाल है कि अगर नरेंद्र मोदी अगली बार प्रधानमंत्री नहीं बनते, तो क्या होगा?
इसी कड़ी में चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस सवाल का जवाब एक अलग अंदाज में दिया है। हैरानी की बात देखिए कि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि 2014 के बाद भारत में क्या-क्या बदल गया। यानी अगर नरेंद्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री नहीं बनते तो शायद बहुत कुछ नहीं होता। इसी कड़ी में ग्लोबल टाइम्स ने भारत और चीन में नई दवाओं और मेडिकल रिसर्च यानी क्लीनिकल ट्रायल्स में आई भारी तेजी के बारे में एक ग्राफ बनाया है।
यह ग्राफ देखकर आपके होश उड़ जाएंगे। सबसे पहले आप यह समझ लीजिए कि जब कोई नई दवाई वैक्सीन या इलाज बनाया जाता है तो इंसान पर उसकी सुरक्षा और असर को देखने के लिए परीक्षण किए जाते हैं। इन्हीं को क्लीनिकल ट्रायल्स कहा जाता है। ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि साल 1999 से लेकर 2025 के बीच भारत और चीन में नई रिसर्च और परीक्षणों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
साल 1999 में चीन ने सिर्फ 39 ट्रायल किए थे, जो 2025 में बढ़कर 24,524 हो गए हैं। तो वहीं 1999 में भारत ने सिर्फ नौ क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्टर करवाए थे, जो अब 2025 में बढ़कर 21,410 हो गए हैं। लेकिन असली खेल चीन ने इसके बाद किया। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने ग्राफ में यह दिखाया कि भारत को यह बड़ी सफलता 2014 के बाद मिली है। 2014 तक भारत सबसे पीछे था। लेकिन 2025 आते-आते भारत ने जर्मनी, जापान और अमेरिका जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए दूसरा नंबर हासिल कर लिया। यानी चीन ने इशारे में बताया है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत मेडिकल रिसर्च में बादशाह बनता जा रहा है।
आपको बता दें कि ऐसे कई सेक्टर हैं जहां 2014 के बाद भारत ने तहलका मचा दिया। सभी सेक्टर्स के बारे में बताना मुश्किल है लेकिन कुछ के बारे में हम आपको बताते हैं। भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट्स साल 2014 के मुकाबले साल 2025-26 तक 5500 से भी अधिक बड़े हैं। भारत अब एक बड़े हथियार इंपोर्टर से बदलकर तेजी से हथियार एक्सपोर्टर बनता जा रहा है। 2014 में भारत का कुल रक्षा निर्यात मात्र 686 करोड़ था। लेकिन 2025-26 में यह आंकड़ा 38,442 करोड़ के पार जा चुका है। भारत ने डिफेंस एक्सपोर्ट्स के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में साल 2014 से लेकर 2026 के बीच एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव आया है। 2014-15 में भारत से मोबाइल निर्यात ना के बराबर था जो केवल 10,566 करोड़ था। लेकिन 2025-26 में भारत का मोबाइल फोन निर्यात 165 गुना बढ़ गया जो अब 2.60 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। अब आप डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम देखिए। 2014 में भारतीय अर्थव्यवस्था कैश पर आधारित थी। लेकिन आज भारत ने रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन के मामले में दुनिया में नंबर वन पोजीशन हासिल कर ली है। दुनिया के 46 से ज्यादा डिजिटल लेनदेन अकेले भारत में होते हैं। अब आप इसरो की तरक्की देखिए।
भारत ने 1990 के दशक से लेकर 2014 तक कुल 35 विदेशी सेटेलाइट ल्च किए थे। भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में था और स्पेस सेक्टर में स्टार्टअप्स की संख्या सिर्फ एक थी। लेकिन 2014 के बाद भारत की रॉकेट क्षमता इतनी मजबूत हुई है कि अब तक इसरो ने 399 विदेशी सेटेलाइट लॉन्च कर दिए हैं। और अब तो भारत के स्पेस सेक्टर में 440 से भी ज्यादा प्राइवेट स्टार्टअप्स हैं। जाते-जाते आपको बता दें कि 2014 तक देश में लगभग 74 एयरपोर्ट थे, जो अब 150 के पार हैं। 2014 तक देश के ग्रामीण इलाकों में केवल 17% घरों तक पानी पहुंचता था जो अब 80% से ज्यादा हो गया है। 2014 में भारत की अर्थव्यवस्था शायद 10वें नंबर के आसपास थी लेकिन आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया