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प्यार बना मौत की वजह? पैरा एथलीट की रहस्यमयी मौत!

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एक खिलाड़ी का जीवन क्या होता है? पसीना, मैदान [संगीत] की मिट्टी, तिरंगे को सबसे ऊंचा लहराने का सपना और सालों साल का संघर्ष। लेकिन जब वही खिलाड़ी जिसने देश को कई बार जश्न मनाने का मौका दिया अचानक [संगीत] जिंदगी का मैदान छोड़ दे तो पीछे कई सवाल छूट जाता है। आज हम खेल जगत से आई एक ऐसी खबर पर बात कर रहे हैं जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। एशियाई पारा खेलों [संगीत] में भारत का परचम लहराने वाले 42 साल के स्टार एथलीट नीरज यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। दिल्ली के जाफराबाद इलाके में मंगलवार रात उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्ट्स और पुलिस जांच के मुताबिक नीरज ने जहर खाकर अपना जीवन [संगीत] खत्म कर लिया।

नीरज यादव की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं थी। यह इंसान के अटूट हौसले की मिसाल थी। जब नीरज महज [संगीत] 7 साल के थे तब पोलियो की वजह से उनके पैरों की ताकत छीन गई थी। लेकिन कहते हैं ना कि हौसले कभी दिव्यांग नहीं होते। नीरज ने हार नहीं मानी। उन्होंने सबसे पहले व्हीलचेयर टेनिस [संगीत] खेला और फिर कदम रखा पैरा एथलेटिक्स में। F-55 कैटेगरी में जहां खिलाड़ी बैठकर शॉर्ट फुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन [संगीत] फेंकते हैं। साल 2018 में जाकर में हुए एशियन पैरा गेम्स में जब [संगीत] नीरज ने भाला फेंका तो सोना भारत की झोली में गिरा। इसके बाद 2023 के [संगीत] हांगझो एशियन पैरा गेम्स में नीरज ने इतिहास रच दिया। उन्होंने जैवलिन और डिस्कस थ्रू दोनों स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीतकर कुल [संगीत] तीन एशियाई स्वर्ण पदक अपने नाम किए। पूरा देश उनके जज्बे को सलाम कर रहा था। लेकिन किस्मत का खेल [संगीत] देखिए। जिस हांगझों में नीरज को अपने करियर की सबसे बड़ी खुशी मिली थी, वहीं [संगीत] से उनके जीवन का सबसे काला अध्याय शुरू हुआ। हांगझों खेलों के ठीक बाद [संगीत] नाडा और वाडा की डोपिंग जांच में नीरज यादव पॉजिटिव पाए गए। उन पर 4 साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया और उनसे 2023 में जीते गए दोनों गोल्ड मेडल्स छीन लिए गए।

इस एक फैसले ने नीरज की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी। पहला झटका। हंगझू में मिलने वाली ₹3 करोड़ से अधिक की इनामी राशि रुक गई। दूसरा झटका उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाले क्लास वन अधिकारी की नौकरी का अवसर हाथ से निकल गया। तीसरा झटका [संगीत] खेल के मैदान से दूरी और समाज में लगा डोपिंग का दाग। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस सत्यनारायण के मुताबिक नीरज इस झटके से कभी उभर ही नहीं पाए। उनके साथी खिलाड़ियों को नौकरियां मिल चुकी [संगीत] थी। लेकिन नीरज आर्थिक और मानसिक तंगी से जूझ रहे थे। हाल ही में उन्होंने आईजी नागोया एशियन पैरा गेम्स के ट्रायल्स [संगीत] में हिस्सा लेने की इच्छा जताई थी। लेकिन बैन के कारण उन्हें मना करना पड़ा जिससे उनका तनाव और बढ़ गया। 27-28 अक्टूबर की दरमियानी रात क्या हुआ? [संगीत] पुलिस जांच में इस मामले से जुड़ा एक नया और उलझा हुआ मोड़ सामने आया है। दिल्ली पुलिस जाफराबाद थाने में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता [संगीत] की धारा 194 के तहत इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस के शुरुआती पूछताछ [संगीत] के मुताबिक नीरज पिछले 6 महीनों से सोनीपत के एक अपार्टमेंट में अपनी पत्नी और मां से अलग अकेले रह रहे थे। एक महिला जो दिसंबर 2025 से नीरज की दोस्त बताई जा रही है।

मंगलवार को उनसे मिलने सोनीपत गई थी। महिला का दावा है कि उसने नीरज से कहा कि वह अब उनसे संबंध या संपर्क नहीं रख सकती। इसके बाद नीरज ने उसे अपनी स्कर्पियो गाड़ी से दिल्ली के मौजपुर छोड़ा। रात [संगीत] करीब 9:00 बजे महिला को शक हुआ और वह मौजपुर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास पहुंची। वहां नीरज अपनी कार के बाहर जमीन पर अचेत पड़े थे। महिला उन्हें तुरंत अस्पताल ले गई। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जांच अधिकारियों के अनुसार नीरज की मौत [संगीत] की वजह अत्यधिक मानसिक तनाव, डोपिंग का अवसाद और इसी निजी रिश्ते में आई कड़वाहट का मिलाजुला असर हो सकती है। हालांकि दिल्ली के जीटीपी अस्पताल में पोस्टमार्टम [संगीत] किया गया है और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट के बाद ही जहर के प्रकार की आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी। नीरज के निधन की खबर मिलते ही पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल और एथलीट [संगीत] विपिन कसाना समेत कई दिग्गज खिलाड़ी अस्पताल पहुंचे। पूरा पैरास्पोट्स जगत सदमे में है। लेकिन यह त्रासदी भारतीय खेल प्रशासन और हमारे समाज पर कुछ गंभीर सवाल खड़े करती है।

[संगीत] मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा। क्या हमारे खेल संघ के पास ऐसे खिलाड़ियों के लिए कोई काउंसलिंग या मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम है जो डोपिंग बैन या असफलता के बाद डिप्रेशन से जूझ रहे होते हैं? आर्थिक सुरक्षा। कोच सत्यनारायण का कहना है कि नीरज सोनीपत में अंश नीर नाम से एक ऑनलाइन स्पोर्ट्स [संगीत] एकेडमी चला रहे थे। लेकिन आय का जरिया सीमित था। क्या एक बैन खिलाड़ी को जीवन जीने के अन्य अवसर समझाने वाला कोई मार्गदर्शक मौजूद था? एक ऐसा एथलीट जिसने 7 साल की उम्र में पोलियो को हरा दिया जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का मान बढ़ाता रहा। वो [संगीत] जिंदगी के इस मोड़ पर इतना अकेला कैसे पड़ गया? नीरज यादव का चले जाना सिर्फ एक खिलाड़ी का जाना नहीं है। इस बात की चेतावनी है कि जब तालियां बजना बंद हो जाती है और मैदान की लाइटें बुझ जाती [संगीत] है तब खिलाड़ी के अंदर चल रहे अंधेरे को देखना उतना ही जरूरी है। जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार [संगीत] है। लेकिन नीरज की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है क्या हम सिर्फ मेडल जीतने पर ही अपने खिलाड़ियों के साथ खड़े [संगीत] हैं या जब वो जिंदगी की सबसे मुश्किल जंग हार रहे होते हैं तब भी हम उनका हाथ थामने [संगीत] को तैयार हैं। आपकी इस खबर पर क्या राय है? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। फिलहाल बस इतना ही। देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहिए [संगीत] वन इंडिया। हिंदी। सब्सक्राइब टू वन इंडिया एंड नेवर मिस एन अपडेट। [संगीत] डाउनलोड द वन इंडिया एप्प नाउ।

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