हाल ही में टाइगर श्रॉफ पर बिश्नोई गैंग ने हमला किया। हर कोई जानता है की बिश्नोई समाज सलमान के पीछे तब से पड़ा है जब से एक्टर ने काला हिरण का शिकार किया था। इस मामले में कई साल तक केस भी चला है।इस पर फिल्म भी बनने वाली थी। ये तो सब जानते है लेकिन असल में उस किस्से के दौरान उस रात क्या हुआ इसकी सच्चाई अब सामने आई है।
1998 काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान को 2 दिन बाद शनिवार को जमानत मिल गई। कांकाणी गांव में उस रात क्या हुआ था, ये बात वहां मौजूद चश्मदीद ने बताई। पूनमचन्द विश्नोई और छोगाराम विश्नोई थे मुख्य चश्मदीद पहले छुपाया मुंह, फिर पीछे की सीट पर लेट गई ये एक्ट्रेस..जा रही थी सलमान से मिलने… – चश्मदीद छोगाराम विश्नोई के मुताबिक, 1 और 2 अक्टूबर, 1998 की रात में एक सफेद रंग की गाड़ी जंगल में लगातार घूम रही थी। उसकी आवाज सुनकर चश्मदीद पूनमचंद की नींद खुली और उसने आकर उन्हें उठाया था।
अपने घर से कुछ ही कदम की दूरी पर उनके खेत में उन्हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जिससे उनका शक यकीन में बदल गया कि शिकारियों ने हिरण को मार दिया है।- गांव वालों के साथ जब सभी खेत में पहुंचे तो देखा कि वहां पर कुछ शहरी लोग थे, जिनके साथ कुछ लड़कियां भी थीं। उनमें से एक लड़की सलमान से बोल रही थी- ‘गोली मारो’।
उनको देखकर वो लोग दोनों हिरण को वहीं छोड़कर तेज स्पीड में निकल गए। गांव वालों ने उस गाड़ी का पीछा किया और तुरंत पहचान लिया कि वे सलमान हैं।- जिसके बाद गांव के लोगों ने FIR दर्ज कराई थी और फिर तब से आज तक ये केस चल रहा है। कोर्ट ने सैफ, तब्बू और सोनाली को बरी कर दिया और सलमान को दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई गई।
बता दे की यह केस सबसे पुख्ता था, क्योंकि 1 अक्टूबर 1998 की रात जब सलमान और उनके साथियों ने जोधपुर के पास कांकाणी गांव में संरक्षित वन्य प्राणी दो काले हिरणों का शिकार किया था। गांव वालों ने गोली की आवाज सुनकर उनका पीछा भी किया था। इनमें से कई लोगों ने उन्हें मौके पर देखा था और हिरणों के शव भी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को सौंप दिए थे। इस मामले में सलमान गोली चलाने के आरोपी बनाए गए।
शिकार से जुड़े बाकी के दोनों केस में इकलौता चश्मदीद हरीश दुलानी था, उसने भी बयान बदल लिए थे। उसने सलमान के अलावा दूसरे कलाकारों को पहचानने से इनकार कर दिया था। दूसरा कमजोर पक्ष यह भी था कि उसमें हिरणों के शव नहीं मिले थे।