पश्चिम बंगाल में कोलकाता के चोर बागान में दुर्गा पंडाल में मची भगदड़ से 19 लोगों की मौत हो गई थी। 25 लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद सीएम शुभेंदु अधिकारी घायलों से मिलने उनके घर भी पहुंचे थे। इस घटना पर बीजेपी की एमएलए रत्ना देवनाथ का बयान आया है। उन्होंने भगदड़ के लिए लोगों को ही जिम्मेदार ठहराया है। रत्ना देवीनाथ से मीडिया ने बातचीत की। इस भगदड़ के बारे में उनका बयान जाना। रत्ना देवीनाथ ने कहा कि अगर लोग बाहर निकल जाते तो इतनी गैदरिंग होती ही नहीं पंडाल में।
इंसानों की मानसिकता चेंज होना बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री ने तो एसआईटी गठन कर दिया है। जांच तो हो ही रही है। मैं इससे ज्यादा और क्या मांग करूं? यह रत्ना देवीनाथ की तरफ से बयान आया है। जब मीडिया ने उनसे सवाल किया इस भदड़ को लेकर। सवाल यह भी किया गया कि आपको किसकी लापरवाही लग रही है? तो जवाब आया कि लापरवाही तो है ही। लापरवाही लोगों की है। लोग अपने स्वार्थ के अलावा कुछ नहीं समझते।
बारिश में भीगते तो क्या होता? कुछ नहीं होता। रत्ना देवीनाथ का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई बारिश हो रही थी। अगर लोग बारिश में भीग जाते तो ज्यादा से ज्यादा क्या हो जाता? अंदर घुसकर गैदरिंग नहीं करनी चाहिए थी। सवाल यह भी किया गया कि एग्जिट गेट पर पुलिस थी ही नहीं।
इस पर आप क्या बोलेंगी? तो जवाब आया कि पुलिस एग्जिट गेट पर थी या नहीं थी मुझे नहीं पता क्योंकि मैं वहां नहीं थी। रत्ना देवनाथ पानीहाटी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं और आरजीकर रेप केस में पीड़िता की मां भी हैं। इस पूरे केस में जो चोर बागान पंडाल में दुर्गा पंडाल में जो यह भगदड़ मची है। इस केस में आगे की जांच के लिए सीएम शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर छह सदस्यय एक एसआईटी टीम बनाई गई है।
टीम हादसे के पीछे की वजह जानने के लिए जांच करेगी और भविष्य में ऐसे हादसे ना हो इसे रोकने के लिए सुझाव भी देगी। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि सप्तमी की शाम को अचानक हुई तेज बारिश के बाद भीड़ को मैनेज करने में नाकामी दिखी। भ्रामक अनाउंसमेंट की वजह से लोगों में डर फैल गया। जिसकी वजह वजह से भगदड़ मची। जांच में यह भी सामने आया कि मौके पर तैनात पुलिस और प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स की संख्या भी कम थी जिसने स्थिति को और भी ज्यादा बिगाड़ दिया। पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि हमारे पास पूजा आयोजकों की भारी लापरवाही को साबित करने वाले पर्याप्त सबूत हैं।
भीड़ को संभालने की कोई क्लियर प्लानिंग नहीं थी और सब कुछ मौखिक तौर पर ही चल रहा था। हमने सीसीटीवी फुटेजेस जुटाए हैं। स्थानीय लोग चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए हैं और फैक्ट्स का मिलान किया जा रहा है। सुरक्षाकर्मियों की संख्या बहुत कम थी। उन्होंने आगे कहा मिसमैनेजमेंट के चलते भगदड़ के दौरान लोग एंट्री गेट से बाहर भागने लगे। पंडाल के गेट और वहां तक पहुंचने वाली जो जगह थी दोनों काफी सक्रिय थे। जिससे हादसा और बड़ा हो गया। साथ ही आने जाने और भीड़ की लापरवाही को लेकर लाउडस्पीकर से कोई क्लियर दिशा निर्देश नहीं दिए गए। जिससे भगदड़ के समय लोग असमंजस में पड़ गए।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि पंडाल में पुलिस की तैनाती बहुत कम थी और अधिकतर जवान सिर्फ वीआईपी गेट के पास तैनात किए गए थे। फिलहाल इस केस में जांच चल रही है। सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एसआईटी टीम गठित की जा चुकी है।