मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के उस घर में जहां पर सौरभ का कत्ल हुआ था। यही वो मकान है। यही वो कमरा है और मकान है जहां सौरभ की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर सौरभ का कत्ल किया। और आप देख सकते हैं कि आज भी इस घर पर ताला लगा हुआ है। यह वाशिंग मशीन है। यह बताया जा रहा था जब सौरभ यहां आया था मेरठ तो उसने अपने परिजनों को ये यानी कि मुस्कान को ये वाशिंग मशीन लाकर के दी थी। ये वाशिंग मशीन आज भी यही ऐसी ही रखी है। इस मशीन के अंदर कपड़े हैं।
यह कपड़े वो हैं जो मुस्कान ने उस समय धोए थे। इसी वाशिंग मशीन से बताया जा रहा है कि वो कपड़े धोए थे और यह आज भी ऐसे ही यहां रखे हुए हैं। पीछे मैं दिखाना चाहूंगा डस्टबिन भी रखा है और एक बच्चों की साइकिल भी रखी है।
बच्चे की साइकिल भी रखी है। तो ये सब सामान जो है वो उसी परिवार का है यानी के सौरभ के परिवार का। बात यह है कि जो मकान मालिक हैं उनका कहना है कि यह मकान आज भी यह बंद है और वो इस मकान को अब ना बेच सकते हैं ना किराए पर दे सकते हैं। उन्हें इस बात की परेशानी है कि केस जो है वो खत्म हो गया। सजा बन गई लेकिन अभी तक मकान इनका बंद है। हमारे साथ मकान वाले खुद मौजूद है। उनसे हम पूछेंगे कि क्या उनका दर्द है? सर क्या नाम है आपका? ओमपाल सिंह।
ओमपाल जी ये मकान कब से बंद है और यहां कौन रहता था? क्या हुआ था? थोड़ा सा बताते हैं। यहां पे मुस्कान सौरभ के साथ रहते थे। एक बच्ची थी छ साल की और काफी तीन दो तीन साल से रहे वो सौरभ कुछ अपने काम से नौकरी पे चला गया था दो साल में आया था वो उसके लेकिन सौरभ बहुत अच्छा लड़का था हम सब एक ही था लेकिन पता नहीं क्या हुआ मैं तो अपने गांव चला गया था पीछे से इन्होंने जो है उसकी सौरभ हम क्या दर्द है आपका? आप मकान बेचना चाहते हैं, किराए देना चाहते हैं? क्या क्या है और क्या नहीं हो पा रहा? अब ये तो ताले खुल जाए तभी मेरा निर्णय होगा। बेचना तो है ही मुझे क्यों मेरा कोई बच्चा नहीं है। मेरे बच्चा एक्सपायर हो हम 25 साल का था। अच्छा अब हम दो मियां बीए बस हम और बेचना तो है ही नहीं। गांव चला जाऊंगा। बेच के यहां क्या रखा है बिक नहीं रहा ये मकान बिकेगा तभी जब ये खाली हो जाएगा हम क्या कहते हैं लोग नहीं देना मुझे क्यों अभी तभी आएंगे ना जब ये खाली हो जाएगी हम आपने इसे बेचने की कोशिश की लोगों से बात की हां मैंने कईों से कह रखा है बोले ठीक है ये खाली हो जाने दो हम अभी कोई नहीं ले रहा कोई बात करने भी नहीं आता यहां। कोई अच्छा ये आपने कब दिया था? मकान कितने रुपए किराए पे लिया था? और कब से वो यहां रह गए थे? ये हत्या से कम तीन साल हो गए उसको।
दो साल तो नौकरी से आया था एक साल पहले और रह चुके थे। हम तो सौरभ ने लिया था ये। जी हां। सौरभ और ये और चीफ आए थे उनके साथ में उनके संबंधी थे जो मामा और जाने वाले एक किराएदार भी आए थे जो हमारे पहले रह गए थे वो भी आए थे पांच छ साल रह गए वो लाए थे तब मैंने इनको किराए थे कितने रुपए का मकान दिया ये शुरू में मैंने 3000 में दिया था लेकिन फिर 6000 तक अभी ये कितने दिन से बंद है इंसान।
ये तभी से ही बंद है जब इसकी हत्या सौरभ की सौरभ की हत्या हुई। आपने पुलिस से या कोर्ट से गुहार लगाई इसको? जी हां मैंने पुलिस में भी पानी में भी गया था। उन्हें बोला भाई अब तो ये कोर्ट का मामला हो गया। फिर मैंने वकील भी किया। तो तजी से जो है वकील क्या किया है क्या नहीं किया मुझे पता नहीं। अभी एक भी तारीख उस मुझे नहीं। कोई रिलीफ नहीं मिल रहा। कोई रिलीफ नहीं। मैं बहुत परेशान हूं और प्रशासन से अपील करता हूं मुझ पर तरस खाए और ये मकान का ताला जल्दी से जल्दी खुलवा दूं ताकि मैं और मेरी पत्नी आराम से रह सके।
कितनी परेशानी हो रही है यहां से। परेशानी मेरे शरीर से ही देख लीजिए। मैं तब से इतना परेशान हूं। टेंशन इतनी रहती है मेरा बीपी हाई रहता है और आंखें मेरी बिल्कुल बेकार हो चुकी है। ऐसा मत इलाज भी बहुत करवाया आंखों का लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मेरे पर्दे खराब हो गए और मुझे चलने में भी परेशानी होती है। हमेशा सिर में दर्द रहता है। मैं देख रहा हूं कि आप कहीं ना कहीं वहां से भी हो रहे हैं। इतना बड़ा मकान है खाली हो जाएगा दो पैसे।
हां वो है लेकिन अब मैं आपकी किराए पर तो नहीं खा चुकी देश नहीं है अभी परिवार में कौन है आपके मैं और मेरी आदमी है अच्छा जब ये घटना हुई थी जब उस समय भी एक बात आई थी कि मुस्कान जो है वो दवाई लेने गई थी स्टोर तो उसमें आपका नाम आया था कि आपके साथ में वो बैठ के गई थी। हां वो स्कूटी बोली अंकल मुझे दवाई लेनी है। मेरे सिर में बहुत दर्द रहता है। मुझे दवाई करवा दो ना तुम्हें मिलनी है। खैर नगर में मिले। मैं मुझे क्या चला गया था साथ में। मुझे क्या पता था ये इसके अंदर क्या है क्या नहीं है। मैं तो अपने सीधे पं ले गया था। एक आपकी गवाही भी है इसमें नहीं मेरी कोई आपकी कोई गवाही नहीं आपको कभी ऐसा लगा मुस्कान को देख के या सौरभ को देख के वो ऐसा भी हो सकता है इस घर पे ऐसा भी मुस्कान अपने साथ नहीं ऐसा अगर मुझे ऐसा लगता तो मैं तो बिल्कुल खाली करवा लेता मुझे कभी कोई ऐसा ऐसा वो बहुत अच्छा लड़का था और पता नहीं क्या अच्छा सौरभ यहां आपके किराए पे सौरभ ने लिया था.
लेकिन जब साहिल आने लगा तो आपको पता नहीं चला कि साहिल आता है या हां आता था वो शाम को आता था कुछ सामान ले जाता था और पूछा भी था मुस्कान से कौन है मेरा भाई ये नानी के साथ रहता है खाना ले जाता अच्छा उसने अपना भाई बताया था तो अभी क्या डर लगता ही कराने गए घर में इस तरीके से बंद है अंदर ये पूजा आज्ञा वही बॉडी रखी रही नहीं डर तो अब क्या लगेगा जो अपने ही घर में अब जो हुआ वो गलत हुआ क्या-क्या परेशानियां आ रही है आपको किस तरीके की परेशानी आ रही है और जो मैं बात करूं कि आप बीमार भी है और परेशानी क्या है बस तीनों ही समझ लो मानसिक आर्थिक भी तरह क्या समाधान होना चाहिए सर? ताला खुल जाए मुझे और कुछ नहीं सामान किसी को भी नहीं। मुझे कोई मतलब नहीं बस मेरा ताले खुल जाए। मैं अपना आराम से रह सकते हैं। अभी क्या करते हैं? घर का खर्चा कैसे चलता है? घर का खर्चा अभी तो बस मैंने पूरी जिंदगी कमाया है। उससे जो चल रहा है अपना मैं बिजनेस करता था क्या? कपड़े का था मेरे काम। अच्छा अब वो भी खत्म हो गया।
वो भी खत्म। जब से लड़का चला गया जब से बंद कर दिया। लड़का कैसे चले गया? लड़का बीमार हो गया था। साइंस हो गया था। 25 साल के 10 साल की हो गई थी। अच्छा उसके परिवार वाले कहां है? वो बच्चे वो दूसरी साल बच्चे नहीं थे। बच्चे एक हुआ तो वो भी हो जाती। एकमात्र सहारा यही था किराए का मकान किराए का गांव में थोड़ी बहुत जमीन है उससे थोड़ा आगे अब जो मकान बंद है कोई किराया नहीं इसका इसका कौन किराया देगा फिर ऊपर दो किराएदार है मतलब किराए से ही चल रहा था आपका पूरा जो सरकार चल रहा है तो अभी आपने पुलिस वालों से किसी के कोर्ट में गुहार लगाई फील नहीं कर रखा वो कह रहा 30 तारीख पता नहीं क्या आज सुना है कि आप पुलिस के पास जाएंगे अधिकारी से मिलने के लिए आप कहा था उसका सॉरी नहीं मतलब अधिकारी से मिलेंगे ठीक है तो ये देख सकते हैं ये मकान मालिक है इस मकान के और ये वही मकान है जिसमें मुस्कान और सौरभ रहते थे। उनकी बच्ची भी रहती थी और इनका कहना है के जब से ये हत्याकांड हुआ है तब से मकान बंद है। और आपको मैं दिखाना चाहता हूं ये बराबर में जो एरिया है यहां ये रहते हैं और ये वाला जो एरिया है इन्होंने किराए पे गया हुआ था।
इसके ऊपर जो है वह भी उन्होंने किराए पर दिया हुआ है। लेकिन अब इनकी परेशानी यह है कि जब से यह हत्याकांड हुआ है जब से यह मकान बंद है काफी प्रयास इन्होंने कर लिए हैं। लेकिन यह मकान खुल नहीं पा रहा है और जब तक यह खुल नहीं पा रहा है। कोई इसको ना किराए पे दे सकते हैं ना किसी को ये बेच सकते हैं। इनका कहना है कि अब ये तीन तरीके से परेशान हो चुके हैं क्योंकि पति पत्नी अकेले रहते हैं। कारोबार खत्म हो गया है और जो किराया आता था वो भी खत्म हो गया है। इसलिए अब ये चाहते हैं कि मकान के ताले खुल जाए और ये इस मकान को बेच के यहां से अब जाना चाहते हैं। इनका कहना है कि यहां ये मकान जब बेच सकते हैं जब इसका ताला खुल जाएगा। ताला खुलने के बाद ये सब चीजें यहां से खत्म हो जाएंगी। उसके बाद ही मकान बिक सकता है। लेकिन अभी तक इस मकान का कोई किराएदार इनके कोई किराएदार और कोई खरीदार अभी तक इनके पास नहीं आता है। जो भी आता है वह कहता है कि पहले केस खत्म हो जाने दीजिए उसके बाद ही इस मकान को हम खरीद लेंगे।