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बॉलीवुड सस्पेंस फिल्मों के असली किंग तो देवानंद थे! दिमाग की बत्ती बुझा देंगे ये 6 फिल्मे

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आज की पीढ़ी जब भी सस्पेंस, मिस्ट्री और धोखे वाली फिल्मों के बारे में सोचती है तो सबसे पहले अजय देवगन की दृश्यम सीरीज का नाम दिमाग में आता है। लेकिन अगर हम बॉलीवुड के इतिहास को देखें तो सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर जॉनर के असली किंग एवर ग्रीन एक्टर देवानंद थे। 1950 और 1960 के दशक में जब पूरी फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ कन्वेंशनल रोमांस और फैमिली ड्रामा के आसपास घूमती थी। देवानंद ने अपने यूनिक स्टाइल और विज़न से दर्शकों को नॉयर सिनेमा के थ्रिल से इंट्रोड्यूस करवाया। यह छह फिल्में जिनमें से हर एक में माइंड ब्लोइंग क्लाइमेक्स है। इसका पक्का सबूत है। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। आजकल जब कोई सस्पेंस या थ्रिलर फिल्म बड़े पर्दे पर आती है तो

अक्सर टेक्नोलॉजी, वीएफएक्स और मॉडर्न बैकग्राउंड स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। मेकर्स दर्शकों को चौंकाने के लिए बड़े स्क्रीनप्ले बनाते हैं। लेकिन जरा सोचिए लगभग 70 साल पहले बिना किसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी के सिर्फ जादुई एक्टिंग, शार्प डायलॉग डिलीवरी और शानदार डायरेक्शन से दर्शकों को हंसाहंसा कर लोट कर देना कितना बड़ा हुनर रहा होगा। देवानंद के पास यही हुनर था। लोग आमतौर पर देवानंद को उनके रोमांटिक स्टाइल, टेढ़ी टोपी वाले स्टाइल और तेजतर्रार बात करने के तरीके के लिए याद करते हैं। लेकिन फिल्म क्रिटिक्स के मुताबिक देव साहब हिंदी सिनेमा के पहले क्राइम और मिस्ट्री स्टार थे। अपने बैनर नवकेतन फिल्म्स के तहत उन्होंने ऐसी डार्क कहानियों में कदम रखा जिन्हें उस जमाने के दूसरे डायरेक्टर्स छूने से भी हिचकिचाते थे। 1951 में मशहूर डायरेक्टर गुरुदत्त की डायरेक्ट की हुई बाजी फिल्म को इंडियन सिनेमा की पहली नॉयर यानी डार्क अर्बन क्राइम फिल्म माना जाता है। इस फिल्म में देव आनंद ने मदन नाम के एक जुरी का रोल किया था जो अपनी बीमार बहन के इलाज के लिए पैसे की तलाश में अंडरवर की अंधेरी गलियों में खो जाता है।

फिल्म की कहानी ने मर्डर का एक ऐसा रहस्यमई जाल बुना जिसने दर्शकों को आखिर तक अपनी सीट से बांधे रखा। कोर्ट रूम ड्रामा और लगातार बदलते गवाहों ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक फिल्म बना दिया। बाज फिल्म की जबरदस्त सफलता के बाद देवानंद और गुरुदत्त की जोड़ी ने अपने सिनेमाई एक्सपेरिमेंट को एक कदम और आगे बढ़ाया। गोवा के खूबसूरत और रहस्यमई समुद्रों के बैकग्राउंड में बनी जाल ने उस समय काफी अटेंशन बटोरा था। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि देवानंद ने इसमें कोई आम हीरो नहीं बल्कि टोनी नाम के एक चालाक, धोखेबाज और स्मगलर का रोल किया था। वो अपनी मीठी-मीठी बातों से लड़कियों को फंसाता था। देव साहब का यह ग्रे शेडेड अवतार दर्शकों के लिए बिल्कुल नया और चौंकाने वाला था। 1955 में रिलीज हाउस नंबर 44 यह फिल्म जासूसी और क्राइम की दुनिया का एक अनोखा उदाहरण है

जिसके बारे में आज की पीढ़ी बहुत कम जानती है। एमके धीरेंद्र के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म की कहानी एक ऐसे घर यानी हाउस नंबर 44 के इर्द-गिर्द घूमती है जो कई अनसुलझे मर्डर से जुड़ा है। देवांद ने एक ऐसे मासूम नौजवान का रोल किया था जो अनजाने में एक बहुत खतरनाक क्रिमिनल गैंग का मोहरा बन जाता है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमेटोग्राफी इतनी डार्क थी कि इसने थिएटर में बैठे दर्शकों को डरा दिया था। डायरेक्टर राज खोसला की फिल्म सीआईडी आज भी इंडियन सिनेमा की सबसे बेहतरीन कॉप थ्रिलर फिल्मों में से एक मानी जाती है। कहानी एक न्यूज़पेपर एडिटर के मर्डर से शुरू होती है। जिसकी इन्वेस्टिगेशन का काम बहादुर इंस्पेक्टर शेखर यानी देवानंद को सौंपा जाता है। कहानी का असली थ्रिलर तब सामने आता है जब एक-एक करके जरूरी गवाहों का मर्डर हो जाता है और इंस्पेक्टर शेखर को ही कातिल बताकर जेल में डाल दिया जाता है। असली विलेन का पता आखिरी कुछ मिनटों में एक जबरदस्त ट्विस्ट के साथ चलता है।

अपने भाई विजय आनंद के डायरेक्शन में बनी देव साहब ने काला बाजार जैसी फिल्म दी जिसने उस समय की ब्लैक मार्केटिंग के काले धंधे का पर्दाफाश किया। फिल्म में देवानंद ने रघु नाम के एक नौजवान का रोल किया जो सिनेमा हॉल के बाहर TikTok की ब्लैक मार्केटिंग करके अपना सफर शुरू करता है और धीरे-धीरे एक बड़े क्रिमिनल एंपायर का बेताज बादशाह बन जाता है। इस क्राइम ड्रामा में भरे थ्रिल और रोमांच ने इसे बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सक्सेस दी। अगर हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे शानदार, सस्पेंस से भरी और दिमाग घुमा देने वाली फिल्म का नाम लेना हो तो ज्वेल थीफ पहले नंबर पर आएगी। विजय आनंद के शानदार डायरेक्शन ने इस फिल्म को एक अमर मास्टर पीस बना दिया। कहानी एक चालाक चोर के इर्द-गिर्द घूमती है जिसका चेहरा देवानंद से काफी मिलताजुलता है। हर कोई विनय को यानी देवानंद को असली चोर समझ लेता है और विनय अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए निकल पड़ता है। दोस्तों आज का वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।

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