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दिनो मोरिया का नाम सुशांत सिंह राजपूत केस में क्यों आया? हैरान कर देने वाला सच

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मुंबई की चमकती हुई दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर [संगीत] लगता है कि उनकी ज़िंदगी में सब कुछ बिल्कुल परफेक्ट है। महंगे बंगले, बड़े लोगों से दोस्ती, आलीशान पार्टियां, और कैमरों के सामने एक शानदार जिंदगी। लेकिन असली सवाल तब शुरू होता है जब किसी ऐसे चेहरे का नाम बार-बार उन [संगीत] मामलों के आसपास सुनाई देने लगे, जिनसे पूरा देश कभी ना कभी हिल चुका हो। एक तरफ बॉलीवुड [संगीत] का वो चेहरा जिसने कभी लाखों दिलों पर राज किया था और दूसरी तरफ ऐसे विवाद, जांच और ताकतवर कनेक्शन जिनके कारण उसके नाम पर लगातार सवाल उठते रहे। [संगीत] क्या यह सिर्फ सहयोग थे या फिर इन सभी घटनाओं के पीछे कोई ऐसा कनेक्शन [संगीत] था जिसे समझने के लिए हमें ग्लैमर की दुनिया के पीछे जाना पड़ेगा? क्यों कुछ बड़े नाम उसके करीब दिखाई देते रहे? उसके [संगीत] लाइफस्टाइल को लेकर सवाल क्यों उठे? जांच एजेंसियों की कारवाही ने किस तरह कई पुराने सवालों को फिर से जिंदा कर दिया और आखिर वो कौन सी वजह [संगीत] थी जिसके कारण एक समय का चॉकलेटी हीरो बॉलीवुड की खबरों से ज्यादा विवादों और जांच की चर्चाओं में दिखाई देने लगा। आज हम इसी पूरी कहानी की उन परतों को खोलेंगे। जहां [संगीत] फिल्मी पर्दे की चमक धीरे-धीरे गायब होती है और उसकी जगह सामने आता है मुंबई की पावर, [संगीत] पैसा और प्रभाव का वो चेहरा जिसे समझना इतना आसान नहीं है। लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा सवाल यही है। जो कुछ सामने आया उसमें कितना सच था, कितना दावा, [संगीत] और कितनी ऐसी बातें थी, जिनका जवाब आज भी बाकी है। क्योंकि आगे जो कहानी सामने आती है उसमें सिर्फ बॉलीवुड नहीं है। [संगीत] इसमें राजनीति, जांच एजेंसीियां, करोड़ों रुपए और कई ऐसे नाम हैं [संगीत] जिन्होंने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया। दोस्तों सोचो तो सही एक ऐसा आदमी जिसके [संगीत] पास पिछले 20 सालों में एक भी अकेला हिट फिल्म नहीं है वो डीनो मौरिया कैसे मुंबई के सबसे महंगे इलाके बांद्रा के कार्टर रोड पर बने विला मोरिया में ऐसा शानदार और आलीशान जीवन बिता [संगीत] रहा है और इतना ही नहीं जब रिया चक्रवर्ती जेल से रिहा हुई तो वह अपने [संगीत] परिवार के पास जाने की बजाय सीधे डीनो मोरिया के बंगले चली गई क्या डीनो मोरिया सिर्फ 90 के दशक का [संगीत] एक भूला बिसरा चॉकलेटी हीरो है या फिर वो आदित्य ठाकरे के सबसे खास और गुप्त भरोसेमंद है जो महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार [संगीत] के वारिस हैं। जिनके हाथों में टिंसल टाउन और सत्ता के सबसे गहरे राज छुपे हैं। आज के खास वीडियो में हम जानेंगे [संगीत] कि जब सच डायनामोरिया के बारे में पुलिस के सामने आएगा तो उसे अपनी पूरी जिंदगी जेल में बितानी पड़ेगी। [संगीत] दोस्तों जब 90 के दशक के अंत में एक बहुत हैंडसम और मासूम अंदाज दिखने वाला मॉडल टिंसल टाटाउन की चमचमाती दुनिया में कदम रखा तो उसके लुक्स ने सबको हैरान कर दिया था और पर्सनालिटी 1998 में जब डीनो मोरिया और विपाशा बसू ने एक [संगीत] विदेशी ब्रांड के लिए बहुत ही विवादस्पद पोस्टर शूट किया था तो ऐसा लगा जैसे पूरा देश तूफान [संगीत] की चपेट में आ गया हो। सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन हुए और उस वक्त की सरकार ने सख्त कानूनी कारवाई की [संगीत] धमकी दी। पूरे शहर से पोस्टर रातोंरात हटाने पड़े और यही पहली बार था जब डीनो मोरिया का नाम उसकी शक्ल सूरत के लिए नहीं बल्कि एक बड़े विवाद के कारण सामने आया। लेकिन उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं था कि ये तो बस शुरुआत थी। क्योंकि असली खेल तो अभी बड़ी स्क्रीन पर शुरू होना बाकी था। उसने बॉलीवुड [संगीत] में कदम रखा 1999 में। फिल्म प्यार में कभी-कभी से लेकिन असली धमाका 2002 [संगीत] में हुआ जब विक्रम भट्ट की हॉरर रोमांटिक फिल्म रॉस थिएटर में आई। उस फिल्म की ऐतिहासिक सफलता ने एक रात में ही डीनो को देश के हर कोने में मशहूर कर दिया। थिएटर में ताले की गड़गड़ाहट गूंजती थी और लड़कियां इस नए चॉकलेटी हीरो पर पागल हो चुकी थी। लेकिन टिंसल टाउन की एक बहुत कड़वी हकीकत यह है कि जैसे जैसे सितारे तेजी से आसमान की बुलंदियों को छूते हैं वैसे ही वह बेरहमी से जमीन पर भी गिरते हैं। राज की जबरदस्त कामयाबी के बाद ऐसा लगने लगा था कि किसी ने डीनो मोरिया [संगीत] की एक्टिंग करियर पर नजर लगाई हो। इसके बाद उनकी सारी फिल्में बारी-बारी से बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप होती चली गई। क्रिटिक्स ने उनकी एक्टिंग पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए और बड़े फिल्म मेकर धीरे-धीरे उनसे दूर होने लगे। [संगीत] अब सबसे बड़ा सवाल यह होता है

कि जब सिल्वर स्क्रीन की चमक फीकी पड़ जाती है तो क्या होता है? शोखों की चक भीगी पड़ने लगती है और फिल्मों से कमाई पूरी तरह से रुक जाती है। [संगीत] फिर एक ए लिस्ट एक्टर जो आलीशान जीवन बिताता है वो अपनी करोड़ों की जिंदगी कैसे संभालता है। यहीं से गिनो मोरिया की वो अनदेखी और रहस्यमई कहानी शुरू हुई जिसने उन्हें पर्दे के पीछे बड़ा खिलाड़ी बना दिया। और यह मीडियम था [संगीत] मुंबई के सबसे प्रभावशाली परिवारों से उनकी अटूट और गहरी दोस्ती जो सत्ता और राजनीति में थे। डीनो मोररिया की दोस्ती आदित्य ठाकरे से थी जो मुंबई के सबसे युवा और ताकतवर [संगीत] राजनीतिक चेहरा है। सिर्फ एक आम मुलाकात नहीं थी बल्कि पावर और ग्लैमर [संगीत] के बीच एक अटूट गठजोड़ की शुरुआत थी जिसने डीनो को मुंबई का सबसे [संगीत] ताकतवर इंसाइडर बना दिया। इस गहरे गठजोड़ की सबसे पहली और सबसे खुली झलक जुलाई 2015 में देखने को मिली। जब दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव [संगीत] पर समुद्र किनारे एक बहुत महंगा और लग्जरी खुला जिम ल्च किया गया। यह जिम [संगीत] डीनो मोररिया का खुद का था और इसे प्रमोट करने के लिए बड़ी बॉलीवुड एक्ट्रेस के साथ-साथ महाराष्ट्र के सबसे युवा वारिसकी थे। ताकतवर राजनीतिक परिवार आदित्य [संगीत] ठाकरे उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। लेकिन यह नजारा तब शुरू हुआ जब उद्घाटन [संगीत] के सिर्फ 24 घंटे बाद नगर पालिका के अधिकारी कानून का हवाला देते हुए बुलडोजर लेकर आए। पूरे जिम को तोड़ [संगीत] दिया और सारी महंगी चीजें जब्त कर ली। वजह साफ थी कि मरीन ड्राइव एक [संगीत] विरासत स्थल है जहां फुटपाथ पर किसी भी तरह की प्राइवेट इमारत बनाना गैरकानूनी [संगीत] माना जाता है। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने पूरे शहर को दिखा दिया कि डीनो मोरिया की पहुंच कितनी [संगीत] गहरी है ताकत के गलियारों में। एकदम से उस बड़े अधिकारियों की तरफ से इतनी छुपी हुई दबाव आई कि वही प्रशासन जिसने सुबह कानून की बातें की और जिम [संगीत] को तोड़ डाला था। वही प्रशासन के कर्मचारी शाम तक अपने हाथों से उस जिम को उसी जगह फिर से बना बैठे। यह [संगीत] मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सख्त लहजे में फैसला सुनाया कि यह निर्माण पूरी तरह गैरकानूनी [संगीत] है और इसे हटा देने का आदेश दिया। समुंदर के किनारे तुरंत थी। यह हाई प्रोफाइल मरीन ड्राइव विवाद पहली बार यह साबित कर दिया कि डेनो मोरिया अब सिर्फ एक पुराने फ्लॉप एक्टर नहीं रहे [संगीत] बल्कि आदित्य ठाकरे और उन बंद दरवाजों के अंदर के खास आदमी बन गए थे। जहां कानून के हाथ एक इशारे पर पीछे हटा दिए जाते थे। लेकिन [संगीत] यह तो उस बड़े खेल की बस एक छोटी सी झलक थी। जिसकी सबसे डरावनी और रहस्यमई बरतें [संगीत] जून 2020 में खुलने वाली थी। 8 जून 2020 का दिन था जब बांद्रा में कुछ हुआ था। एक ऐसा अपार्टमेंट जिसने [संगीत] देश में आई सबसे बड़ी तूफान की नींव रखी। रिया चक्रवर्ती जो महीनों से सुशांत सिंह राजपूत के [संगीत] साथ रह रही थी अचानक अपने सामान बांधकर घर छोड़ गई और तुरंत ही उनके साथ सारे रिश्ते खत्म कर लिए। सोचो जरा जिस किसी के साथ इतने लंबे वक्त तक रहो उसे ऐसे बिल्कुल अकेला छोड़ देना बिना किसी बड़े सार्वजनिक झगड़े के। [संगीत] क्या यह बस एक साधारण ब्रेकअप था? या फिर यह किसी बड़े और दुखद घटनाक्रम से [संगीत] पहले खुद को बचाने की सोची समझी तैयारी थी। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात तो इसका सबसे बड़ा मोड़ था। कहानी उसी रात शुरू हुई जब रिया बंद्रा वाले घर से [संगीत] चली गई। उसी रात देर रात 8 जून को सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की जिंदगी एक दुखद और संदिग्ध हालत में खत्म हो गई। जब वो मलाड की एक 12वीं मंजिल की बिल्डिंग से गिर गई। [संगीत] शुरू में स्थानीय पुलिस ने जल्दीबाजी में इस मामले को बंद करने की कोशिश की और इसे केवल एक दुर्घटना बताया। लेकिन यह बात तब पत्ते की झोपड़ी की तरह गिर गई जब दिशा के परिवार और उनके वकीलों ने इसकी सुनवाई के लिए दरवाजे खटखटाए। बॉम्बे हाईकोर्ट और सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसियां। [संगीत] अदालत में दायर याचिकाओं में वकीलों ने खुलेआम बताया कि उस फ्लैट में सिर्फ बचपन के दोस्त ही [संगीत] नहीं थे बल्कि एक बड़े मुंबई बिल्डर, कई प्रभावशाली बॉलीवुड सितारे और महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनैतिक परिवार के सदस्य भी उस सभा में शामिल थे। केंद्रीय एजेंसी के फाइलों में जिन नामों [संगीत] की गहन जांच की मांग की गई थी, उनमें अभिनेता दीनो मौर्या, सूरज पंचोली और रिया चक्रवर्ती के नाम भी थे।

[संगीत] बड़े-बड़े राजनीतिक शख्सियतों के बिल्कुल साथ-साथ वकीलों ने कहा कि उस रात दिशा के साथ एक बहुत गंभीर और अभद्र घटना हुई थी और इसमें शामिल गवाहों के बयान और पूरी बात के सबूत एक सुरक्षित चिप में मौजूद हैं। अब बस इस घटनाक्रम के तार जोड़ के देखो। यह दुखद घटना दिशा सूयन के साथ 8 [संगीत] जून की रात होती है और सिर्फ छ दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत को उनके बांद्रा वाले फ्लैट में बेहोश पाया जाता है। क्या इसे कोई बड़ी संयोग मान सकता है कि एक मैनेजर और एक तारा दोनों एक ही दायरे से जुड़े हुए। दोनों ने इस दुनिया को सिर्फ 6 [संगीत] दिनों के अंदर अलविदा कह दिया। जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी ने इस मामले की परतें खोलनी शुरू की तो रिया चक्रवर्ती को प्रतिबंधित पदार्थों के अवैध लेनदेन के आरोप में हिरासत में ले लिया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला और मानसिक तौर पर हैरान कर देने वाला राज तब सामने आया [संगीत] जब रिया को कोर्ट से जमानत मिली और वो जेल की सलाखों के पीछे से बाहर निकली। बस उस सीन की कल्पना करो। इतने लंबे [संगीत] समय तक बिताने के बाद जेल से निकलते ही किसी की पहली इच्छा होती [संगीत] है अपने परिवार के पास अपने घर के दरवाजे तक पहुंचने की। लेकिन रिया चक्रवर्ती जेल के मुख्य गेट से बाहर निकलने के बाद घर जाने की बजाय अपनी बहुत करीबी दोस्त के साथ एक लग्जरी कार में बैठकर सीधे बांद्रा के एक बेहद आलीशान पते पर पहुंच जाती है। बंगला नंबर 10 विला मोरेरा। हां, यह शानदार [संगीत] विला किसी और का नहीं बल्कि अभिनेता डीनो मोरेरा का था। अब खुद से यह सवाल पूछो। डीनो मोरेरा जिसका नाम [संगीत] पहले से ही दिशा मामले में जांच एजेंसियों की नजर में था वो ऐसा क्यों करेगा? [संगीत] साइलियन केस और आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी दोस्तों में से एक माना जाता था। रिया होने के बाद रिया सबसे पहले कहां पहुंची थी। ये दिनो मोरेरा का विला कोई आम घर नहीं था। बल्कि ये उन लोगों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना था, जिनके पास ताकत थी। बॉलीवुड [संगीत] के और इस पूरे मामले में फंसे पुतलों के लिए। डीनो मोरेरा बॉलीवुड के एक पूर्व अभिनेता की शक्ल [संगीत] बनाए हुए था। लेकिन असल में वो इस राजनीति और कॉर्पोरेट गठजोड़ का सबसे बड़ा संकट प्रबंधक [संगीत] बन गया था। उसका काम था मुश्किल में फंसे लोगों को शरण देना, कानूनी [संगीत] बयान संभालना और यह सुनिश्चित करना कि कोई कमजोर कड़ी टूट कर पूरे सिस्तान के राज सरकार की एजेंसियों [संगीत] के सामने ना खोल दे। इस पूरे मामले का एक और बहुत ही रहस्यमई पहलू था [संगीत] रिया चक्रवर्ती की कानूनी बचाव। एक ऐसी अभिनेत्री जिसकी करियर अभी शुरू ही हुआ था और जिसके पास कोई बड़ी चल अचल संपत्ति नहीं थी। कोर्ट में उसका सामना कर रहा था सतीश मनीष शिंदे देश के सबसे महंगे और लेजेंड्री क्रिमिनल डिफेंस वकील सतीश मनीष शिंदे वही सीनियर है। एक वकील जो मुंबई [संगीत] में कई बड़े केसों में मशहूर हस्तियों की पैरवी कर चुका था। जिसकी एक दिन की फीस करोड़ों में होती है। उस [संगीत] वक्त सोशल मीडिया और कुछ मीडिया वालों ने यह कहानी घड़ी कि यह वकील यह केस मानवता के नाम पर मुफ्त में लड़ रहा है। लेकिन खुद उस सीनियर वकील ने [संगीत] मीडिया के सामने आकर इसे गलत बताया और साफ कहा कि वह पूरी प्रोफेशनल फीस ले रहा है। तो फिर सवाल उठता है आखिर यह भारी फीस कौन दे रहा था? [संगीत] करोड़ों और लाखों रुपए। रिया के खाली बैंक खातों के पीछे वो क्या खजाना था जो पानी की तरह बह रहा था? ताकि रिया [संगीत] की जुबान बंद रहे और जांच की आग सत्ता में बैठे मालिकों तक ना पहुंच सके। सुशांत के दुखद हादसे के बाद महाराष्ट्र के कई बड़े नेता [संगीत] कैमरे के सामने आए और एक ऐसा दावा किया जिसने पूरे देश में तहलका मचा दिया। दावा यह था कि 14 जून की रात यानी 13 जून की देर रात एक [संगीत] डीनो मोरे के बांद्रा बंगले में एक हाई प्रोफाइल सीक्रेट पार्टी रखी गई थी जो सुशांत के घर से बस कुछ ही दूर था। इसमें सत्ता में बैठे बहुत ताकतवर लोग शामिल [संगीत] थे। जिसमें आदित्य ठाकरे का नाम बार-बार आया और कुछ चुनिंदा बॉलीवुड एक्टर्स भी मौजूद थे। सबसे चलती हुई बात यह [संगीत] थी कि पार्टी खत्म होने के बाद कुछ संदिग्ध गाड़ियां सीधे सुशांत सिंह राजपूत के अपार्टमेंट की तरफ पढ़ी। इन दावों [संगीत] ने सिर्फ टीवी चैनलों पर ही नहीं बल्कि पूरे समाज में एक नया तूफान मचा दिया। देश भर में हर कोई यही पूछ रहा था कि [संगीत] उन बंद दरवाजों के पीछे असल में क्या चल रहा था। विवाद बढ़ता देख दीनो मुरैया तुरंत मीडिया के सामने आए और टीवी चैनलों के क्लिप दिखाते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। [संगीत] उन्होंने जोरदार बयान जारी किया कि 13 जून की रात उनके घर कोई पार्टी नहीं हुई थी। कोई मेहमान [संगीत] उनके यहां नहीं आया था और उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूत उनके नाम को इस संवेदनशील मामले [संगीत] में क्यों घसीटा जा रहा है। उस वक्त स्थानीय पुलिस ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में वहां से किसी भी पार्टी या वाहनों के जाने का कोई सबूत नहीं मिला। लेकिन आज भी आम जनता के दिमाग में यह सवाल घूम रहा है कि हर रहस्यमई मोड़ पर डीनो मोरिया [संगीत] और उसके ताकतवर दोस्तों के नाम क्यों सामने आते रहते हैं? इन रहस्यमय बॉलीवुड मामलों के अलावा डीनो मोरिया का नाम देश के बड़े वित्तीय घोटालों में भी लगातार सुनाई देता रहा है। डीनो मोरिया का नाम 14500 करोड़ के स्टर्लिंग बायोटेक [संगीत] बैंक धोखाधड़ी मामले में भी प्रमुखता से उभरा था। इस बड़े बैंक घोटाले में ससरा भाइयों ने सरकारी [संगीत] बैंकों से हजारों करोड़ के कर्ज लिए थे और उन्हें नकली शेल कंपनियों के जाल के [संगीत] जरिए लगाकर विदेश भाग गए। लेकिन जब प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने उस जटिल पैसों के नेटवर्क को ट्रैक करना शुरू किया तो पता चला कि इस काले धन का [संगीत] एक बड़ा हिस्सा आखिरकार डीनो मोररिया के खातों में भी पहुंचा था। इसके बाद जुलाई [संगीत] 2021 में केंद्रीय जांच एजेंसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आधिकारिक तौर पर उनकी संपत्तियां ज्त कर ली। लगभग 1.4 [संगीत] करोड़ की कीमत वाली संपत्ति जो डीनो की थी। लेकिन यह आर्थिक छल कपट यहीं खत्म नहीं हुई। कॉर्पोरेट बैंक धोखाधड़ी [संगीत] के बाद डीनो का नाम मुंबई के एक बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में भी सामने आया। 2005 में मुंबई में आई भारी बाढ़ और तबाही [संगीत] के बाद नगर पालिका ने मिट्टी नदी की सफाई और कीचड़ हटाने का काम शुरू किया। लेकिन यह जरूरी जनहित का काम 65 करोड़ के बड़े घोटाले में तब्दील हो गया।

पैसे की सफाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान इस मामले में कड़ी कारवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय की टीमें अचानक डिनो मोरिया और उनके भाई के बांद्रा वाले घर पर छापे मारने पहुंची। छापेमारी [संगीत] के दौरान जांच अधिकारियों को कई संदिग्ध लेनदेन और बेनामी संपत्तियों से जुड़ी दस्तावेज मिले। इसके बाद उनके 20 से ज्यादा बैंक खातों और फिक्स डिपॉजिट्स पर तुरंत रोक लगा दी गई और [संगीत] दिनों को प्रवर्तन निदेशालय के मुख्यालय में घंटों तक कड़ी पूछताछ का सामना करना पड़ा। लेकिन जैसे [संगीत] ही यह खबर मीडिया में तेजी से फैल गई टिंसल टाउन में अफरातफरी मचाई। जब इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ईओडब्ल्यू [संगीत] की टीम उस आलीशान बांद्रा के घर में दाखिल हुई तो डिनू मोरिया से मीठी नदी [संगीत] घोटाले को लेकर 8 घंटे तक लगातार पूछताछ हुई। फाइलों के पन्नों, बैंक [संगीत] खातों के ट्रांजैक्शंस और सरकारी कागजों के बारे में कोई साफ सुथरा जवाब नहीं मिल पाया तो जांच अधिकारी कानूनी शिकंजा कसने लगे। डिनो के पास वित्ती लेनदेन [संगीत] की कोई ठोस वजह नहीं बची थी और जांच एजेंसियों के पास ऐसे दस्तावेजी सबूत आ चुके थे जो इसे साबित करने के लिए काफी थे। पूरा खेल देखो। [संगीत] डिनो मोरिया सिर्फ एक तमाश भी नहीं थे बल्कि वह पार्टी के फाइनेंशियल कनेक्शन बनाने वाले अहम शख्स भी थे। कई बार तो उन्हें कानूनी हिरासत भी झेलनी पड़ी और सख्त पूछताछ भी। जांच एजेंसियों की इस तेजी से की गई कारवाई ने एक बार फिर टिंसिल टाउन की काली सच्चाई सबके सामने ला दी। असली खिलाड़ी जो पावर और इन्फ्लुएंस के पीछे छिपे होते हैं, अक्सर [संगीत] ऐसे ग्लैमरस चेहरों को अपनी ढाल बनाकर अपनी गंदी हरकतें छुपाते हैं। अब 1 मिनट रुक कर इस पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखो। दूसरी तरफ वो मासूम दिखने वाली मॉडल जो 90ज के दशक में राज जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकी है और असली दुनिया में उसका [संगीत] नाम देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में सामने आता है। फिर सुसेंट और दिशा जैसे बेहद संवेदनशील [संगीत] मामलों में लगातार दिखता है और वो आदित्य ठाकरे जैसे राजनीतिक मालिकों का सबसे करीबी सहयोगी [संगीत] भी है। यह है टंसल टाटाउन की चमक-दमक की कड़वी हकीकत, जो हमें सिखाती है कि जो चेहरा बाहर से सबसे ज्यादा आकर्षक लगता है। [संगीत] कैमरे के पीछे भी एक सच्चाई हो सकती है जो उतनी ही गहरी और रहस्यमई हो। क्या डेनो मोरया [संगीत] वाकई इस पूरे सिंडिकेट का बस एक प्यादा है या फिर वो उस भूल भुलैया की सबसे अहम चाबी है [संगीत] जिसने सालों से पूरी जांच एजेंसी को उलझाए रखा है। जब भी मुंबई के किसी प्रतिष्ठित और प्रभावशाली घराने में जांच [संगीत] का दांव बढ़ता है तो डेनो मोरया ही क्यों सबसे पहले सामने आता है? [संगीत] कोर्ट में बयान तो बदले जा सकते हैं, लेकिन इतिहास के पन्नों में दर्ज धागे कभी मिटाए नहीं जा सकते। अब यह [संगीत] आगे आने वाले वक्त में देखा जाएगा जब देश के सबसे बड़े अदालत और जांच एजेंसियां अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगी [संगीत] कि डिनो मोरे और उसके ताकतवर दोस्त इन सारे गंभीर आरोपों में खुद को पूरी तरह बेकसूर साबित कर पाएंगे या फिर इस पावर और ग्लैमर की इस गठजोड़ का कोई और बड़ा राज हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगा। कहानी के इस उलझे मोड़ [संगीत] पर जब हम अतीत के पन्नों में और गहराई से झांकते हैं तो हमें पता चलता है कि बांद्रा के यह इलाका है।

बॉलीवुड स्टार्स का बस घर ही नहीं। [संगीत] यहां की आलीशान बंगले कई राज़ी मीटिंग्स के गवाह भी रहे हैं। 90 के दशक [संगीत] में जब डीनो मोरिया ने मॉडलिंग से अपनी शुरुआत की थी। उस वक्त ना तो उसका कोई बड़ा फिल्मी परिवार था, [संगीत] और ना ही मुंबई में कोई गॉड फादर। पर बहुत कम वक्त में उसने पेज 3 की पार्टियों और हाई प्रोफाइल सर्कलों में ऐसा दबदबा बना लिया कि बड़े-बड़े उद्योगपति और नेता उसके फैन बन गए। [संगीत] इसी वजह से जब उसकी फिल्में फ्लॉप होने लगी तब भी उसका लाइफस्टाइल और उसकी शख्सियत कम नहीं हुई बल्कि दिन-बदिन बढ़ता गया। [संगीत] जब मरीन ड्राइव जिम विवाद हुआ और बीएएमसी के बुलडोजर ने डीनो मोरिया का गैर कानानूनी जिम तोड़ा तो राजनीति के गलियारों में यह आम बात [संगीत] थी कि पूरे प्रशासकीय स्टाफ को सिर्फ एक फोन कॉल पर पीछे हटना पड़ा। सत्ता की ऊंची कुर्सी पर बैठे लोगों के दबाव [संगीत] में अधिकारी अपनी ही कार्यवाही को वापस लेने को मजबूर हुए। यह साफ सबूत था कि डीनो मोररिया सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि उसके पास इतनी ताकत थी कि वो किसी भी कानूनी प्रक्रिया को रातोंरात रोक सकता था। इस प्रभाव का फायदा उठाते हुए [संगीत] उसने बॉलीवुड और राजनीति के बीच एक पुल बनाया। जहां से कई बेनामी लेनदेन और गुप्त मामले निपटाए [संगीत] गए। 8 जून की उस काली रात को जब दिशा साल्यान के साथ मामला हुआ और फिर 14 जून को सुशांत सिंह राजपूत की दुखद घटना हुई [संगीत] पूरी देश की नाराजगी फूट पड़ी। लोगों ने सीधे सवाल उठाने शुरू कर दिए कि जांच एजेंसियां सिर्फ दिखावे के लिए जांच क्यों कर [संगीत] रही हैं? जब रिया चक्रवर्ती के कॉल डिटेल्स मिले तो कई बातें सामने आई। चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जब इनके कनेक्शन जोड़े गए तो डीनो मौरियो और ताकतवर लोगों के नाम बार-बार उजागर होने लगे। लेकिन [संगीत] हर बार किसी ना कोई कानूनी वजह ढूंढकर जांच को दबाने की कोशिश हुई। जब रिया चक्रवर्ती जेल से बाहर आई और विला मारिया पहुंची तो मीडिया के कैमरे ने उस पल को कैद कर लिया। यह कोई आम मुलाकात नहीं थी। यह एक अहम बैठक [संगीत] थी जो मुश्किल घड़ी में रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई थी। विला मारिया के बंद कमरे में कानूनी एजेंसियों के सवालों का सामना [संगीत] कैसे करना है और किन नामों को इस जांच की गर्मी से बचाना है इस पर कई घंटे तक चर्चा होती रही। इस पूरे प्लान का हिस्सा था इस केस में सतीश मने [संगीत] शिंदे जैसे बड़े वकील शामिल करना और उनके लिए भारी रकम जुटाना। जब ईडी और ईओडब्ल्यू ने बैंक फ्रॉड और मीठी नदी घोटाला [संगीत] मामले में डीनो मौर्या के ठिकानों पर छापा मारा तो अधिकारियों को कई दस्तावेज [संगीत] मिले जिनमें साफ दिख रहा था कि करोड़ों रुपए शेल कंपनियों के माध्यम से भेजे गए थे। स्टर्लिंग बायोटेक [संगीत] केस में भी ऐसा ही था। संदेशारा भाइयों ने भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपए की ठगी की और देश छोड़कर भाग [संगीत] गए। लेकिन उनका एक बड़ा हिस्सा डीनो मौर्या की कंपनियों में लगाया गया था। यह कोई संयोग नहीं था बल्कि एक बड़े प्लान के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा था जिसके तहत काले धन को सफेद में बदलने का काम चल [संगीत] रहा था। मीठी नदी घोटाला आम मुंबई करों की जान से खेलने जैसा था।

नदी की सफाई के नाम पर 65 करोड़ जनता के टैक्स के पैसे उड़ाए गए। उस काम में भी मिलावट हुई और इसके [संगीत] लिंक जुड़े थे। वो घोटाला सीधे डिनोरिया के घर तक पहुंच गया। 8 घंटे की सख्त पूछताछ [संगीत] के दौरान जब अफसरों ने डिनो से अचानक उनके बैंक खातों में आए करोड़ों के बारे में पूछताछ की तो वह कोई संतोषजनक [संगीत] जवाब नहीं दे सके। इसी वजह से उनके 20 से ज्यादा बैंक खाते तुरंत फ्रीज़ कर [संगीत] दिए गए और उनकी संपत्तियां जप्त कर ली गई। भले ही आज डिनोरिया और उनके प्रभावशाली दोस्त कैमरों [संगीत] के सामने आकर बेगुनाही जताएं और सभी आरोपों को खारिज करें। पर यह सवाल हवा में इतने मजबूती से गूंज रहे हैं। मुंबई में [संगीत] अभी भी लोग जवाब मांग रहे हैं। असल में 8 जून की रात क्या हुआ था कि गवाहों को दबा दिया गया। 13 जून की रात कौन-कौन सी [संगीत] गाड़ियां विलामारिया में आती जाती दिखी और उस रात का सीसीटीवी फुटेज आज भी क्यों [संगीत] एक रहस्य बना हुआ है। जब भी इस सपनों के शहर का यह काला सच सामने आता है तो सिर्फ चमकदमक नहीं बल्कि अपराध और सत्ता का डरावना चेहरा दिखता है। यह कहानी सिर्फ एक फेल होने वाले अभिनेता की नहीं है जिसने अपने करियर की असफलताएं छुपाने के लिए अपराध और सत्ता का सहारा लिया [संगीत] बल्कि पूरी एक ऐसा सिस्टम जो कानून को अपने पैसे और दबदबे में दबाए रखता

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