इस वक्त सौरभ राजपूत की मां मेरे साथ में है। मैम आज जो फैसला कोर्ट का आया है इस फैसले को लेकर क्या कहना चाहेंगे? संतुष्ट है हम चाहते हैं जो आगे जो है जो मृत्यु दंड की सजा वही मिलनी चाहिए। अच्छा इस फैसले का करीब एक साल तक आपने इंतजार किया। ये वक्त कितना मुश्किल था आपके लिए? एक साल तक हमने वेट किया। कितना मुश्किल वक्त था? हमारे लिए तो चल ही रहा है और आगे भी मालूम मुश्किल वक्त चलेगा ही।
हमारा तो बेटा नहीं है तो हमारा तो हर वक्त ही उसके हर चीज पे छोटी-छोटी चीज पे हर छोटे थे हमारे पे हर समय याद आएगा वो वैसे भी हर समय याद आता है घर में हर छोटी-छोटी चीज पे ये देखता था करता था वो अच्छा मुस्कान की दो बेटियां हैं क्या दोनों बेटियों को आप स्वीकार करेंगे नहीं हमारे तो बड़ी बेटी है बस खाली उनको उनको हम लेंगे उसके नाना के विवाद के बिना लेंगे हम अच्छा छोटी वाली को नहीं लेंगे क्योंकि वो हमारे लड़के की नहीं है वो साहिल के साहिल के परिवार को दी जाए या उसके नाना नानी को दी जाए अच्छा ये लोग अगर ये लोग हाई कोर्ट जाते हैं, सुप्रीम कोर्ट जाते हैं और जो बात कर रहे हैं जाने की तो फिर आप लोग क्या करेंगे? हम भी जाएंगे। हम भी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
हमें पूरा इंसाफ चाहिए। अगर वो जाते हैं तो हमें भी जाना चाहिए। आज कोर्ट रूम में आप थी जब ये फैसला आया तो आपने आपको उम्मीद थी कि फांसी होगी या उम्र कैद होगी? नहीं हमें तो शुरू से ही वो है कि हमारे को तो उनको फांसी ही होनी चाहिए। अच्छा जो आपने मांग की थी वही हुआ। हां। तो देखिए बिल्कुल ये सौरभ की मां है जो इस फैसले से खुश है। उनका कहना है कि उनको इंसाफ मिला है और अगर आरोपी जो दोषी हैं अगर वो हाई कोर्ट जाएंगे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तो ये भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। मेरठ से कैमरा पर्सन मोहम्मद मुस्लिम के साथ मैं मुकेश सिंह सगर एनडी सौरभ के वकील मेरे साथ है। उनसे बात करते हैं। सर आपका नाम क्या है? विजय बहादुर सिंह। जी आज कोर्ट में क्या हुआ?
जब जज साहब आए तो उन्होंने सबसे पहले महाभारत का जिक्र किया। क्या उन्होंने कहा? एक्चुअली उन्होंने महाभारत का प्रसंग देते हुए यह कहा कि न्यायालय अपना काम करता है और इस तरह का जो गंभीर अपराध है उसमें तमाम एविडेंस सब चीज को ध्यान में रखते हुए मैं इनको मृत्युदंड की सजा देता हूं। यद्यपि इसमें मुलजिमान की तरफ से बचाने का काफी प्रयास किया गया था। कहा गया था कि जेल के अंदर इनका कंडक्ट बहुत अच्छा है। मुस्कान के पास दो बच्चे हैं छोटे। उनका ध्यान रखा जाए। इस तरह से जो है इनका कोई पुराना अपराधिक इतिहास नहीं है। यह दलील दी थी उन्होंने लेकिन इन दलीलों को न्यायालय ने नहीं माना है क्योंकि साक्ष्याप्त थी इनके। यही बताइए कि आज सुबह जो मुस्कान की मां और उनके पिता हैं उन्होंने लिख कर दिया था कि हमें हमारा मुस्कान से कोई मतलब नहीं है और जो भी सजा होगी हम उसको मानेंगे।
हां ये हमारी जानकारी में आया है कि न्यायालय को उन्होंने भिजवाया था लिख के कि मुस्कान ने उस गलत काम किया है समाज में। यहां पर कर दिया गया है और यहां और भी जो अधिवक्ता है वो आप देखिए चारों तरफ से एक माहौल दिखाना चाहूंगा सब लोगों के चेहरे के वो यहां पर आ रहे हैं।
था जिससे अपराध साबित हुआ है और न्यायालय में जो बनी थी जो साबित हुआ है उसको कंसीडर करते हुए उन्होंने क्या कुछ कहा सजा के दौरान या कुछ नहीं कहा वो किस तरीके से लगातार थे मुस्कान ने कहा था मेरे बच्चों का ध्यान रखना किस तरीके से जजमेंट के दौरान जो कन्विक्शन के दौरान जो मुस्कान थी वो उसके रोने की आवाज आ रही थी शायद बीसी से जो मैं सुन पा रहा था कोर्ट के अंदर