Cli

इंडस्ट्री में पसरा मातम, पेट दर्द से हुआ मशहूर सिंगर का निधन नाम चौंका देगा ।

Uncategorized

जिस इंसान की उंगलियों से निकलने वाली धुनें हजारों लोगों के दिलों की धड़कन बनती थी। जिसके गिटार की आवाज सुनकर लोगों के कदम थिरकने लगते थे और जिसने अपनी जिंदगी का हर एक पल म्यूजिक के नाम कर दिया। आज उसी इंसान की जिंदगी का म्यूजिक हमेशा हमेशा के लिए खामोश हो गया है। एक ऐसा स्टार जिसने शोहरत के पीछे भागने के बजाय अपने हुनर से पहचान बनाई जिसने इंडियन रॉक म्यूजिक को एक नई दिशा दी और जिसने ना जाने कितने यंगस्टर्स को गिटार उठाने और अपने सपनों को जीने की हिम्मतदी।

लेकिन अफसोस अब उनके हाथों में गिटार नहीं होगा। स्टेज पर उनकी मौजूदगी नहीं होगी और ना ही उंगलियों से निकलने वाली वह जादुई धुनें दोबारा सुनाई देंगी क्योंकि म्यूजिक वर्ल्ड से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने रॉक म्यूजिक से प्यार करने वाले हर शख्स को भावुक कर दिया है। हम बात कर रहे हैं दिग्गज गिटारिस्ट महेश तिनायकर की जिनका 63 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके जाने से इंडियन रॉक म्यूजिक की दुनिया ने अपना एक ऐसा सितारा खो दिया है जिसकी चमक आने वाली पीढ़ियों तक महसूस की जाती रहेगी।

लेकिन सबसे ज्यादा भावुक करने वाली बात यह है कि जिस कलाकार ने अपनी जिंदगी म्यूजिक को डेडिकेट कर दी उसकी विदाई की खबर ने उनके साथ काम करने वाले कलाकारों और चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक महेश तनायकर का निधन 15 अक्टूबर को मुंबई में हुआ। बताया जा रहा है कि उन्हें कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थी। करीब दो हफ्ते पहले ही उन्हें पेट में दर्द की शिकायत हुई थी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वो मुंबई के बोरीवली स्थित एक अस्पताल में एंडोस्कोपी के प्रोसेस से भी गुजर रहे थे। लेकिन तभी उन्हें हार्ट अटैक आया और इसी के बाद उनकी जिंदगी का सफर हमेशा हमेशा के लिए थम गया। म्यूजिक की तरफ बढ़ने लगा था। डीप पर्पल, दहू और क्रीडेंस क्लियर वाटर रिवाइवल जैसे इंटरनेशनल बें्स के म्यूजिक ने उनके भीतर एक अलग जुनून पैदा किया। साल 1984 में उन्होंने अपने साथियों के साथ रॉक मशीन नाम का एल्बम रिलीज किया और उनका सफर सिर्फ पुराने गानों की यादों तक सीमित नहीं रहा।

मार्च 2026 में इंडस क्रीज ने मुंबई में ब्रिटिश रॉक बैंड दे फ्लेपर्ड के शो में भी प्रस्तुति दी थी। लेकिन अब वही आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। फरहान अख्तर की श्रद्धांजलि हो या फिर विशाल ददलानी का भावुक मैसेज हर जगह एक ही बात महसूस हो रही है कि कुछ कलाकार सिर्फ गाने नहीं बनाते वो अपने पीछे पूरी विरासत को छोड़ जाते [संगीत] हैं। महेश तराईकर भी उन्हीं कलाकारों में से एक थे। उन्होंने भारतीय रॉक म्यूजिक के उस दौर में काम किया जब इस तरह के लिए रास्ते आसान नहीं थे। उन्होंने अपने दम पर उस रास्ते को थोड़ा और चौड़ा बनाया ताकि आने वाली पीढ़ियां उस पर आगे बढ़ सके। आज भले ही वह हमारे बीच ना रहे हो लेकिन जब भी गिटार की कोई धुन किसी यंगस्टर्स को संगीत की दुनिया में कदम रखने के लिएप्रेरित करेगी जब भी इंडस्ट्री का कोई गाना किसी पुराने दौर की याद दिलाएगा तबतब उनका नाम और उनका योगदान जरूर याद किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *