साल 2007 के अपने एक पुराने इंटरव्यू में शर्मिला टैगोर कहती हैं कि “जब मैंने अपना करियर शुरू किया, उस समय महिलाओं की भूमिका को लेकर एक बड़ी समस्या थी, और सिनेमा को स्वयं एक कलंकित व्यवसाय समझा जाता था… लगभग 50 साल पहले, 1957 में, जब मैं ‘अपूर संसार’ में काम कर रही थी, मुझे स्कूल से निकाल दिया गया था। प्रधानाचार्या का मानना था कि मैं अन्य छात्राओं के लिए एक अनुचित प्रभाव हो सकती हूँ।
“मुझे एक और घटना याद है-1963 में ‘कश्मीर की कली’ की शूटिंग के दौरान, एक प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार की बेटी वहां आई थी। उस समय ली गई उनकी तस्वीरें ‘Filmfare’ के कवर पर चली गईं। परिवार इस बात से आहत था कि उनकी बेटी किसी फिल्मी अभिनेत्री के साथ मैगज़ीन में दिख रही हो, इसलिए उन्होंने उस अंक को पूरी तरह खरीद लिया।”