[संगीत] सोशल मीडिया स्टार मिस्टर फैजू यानी फैजल शेख ने हाल ही में मदीना शरीफ की मुकद्दस जमीन पर तान्या यानी निखत फातिमा के साथ निकाह किया। फैजू ने Instagram पर आयत लिखी और हमने तुम्हें जोड़ों में बनाया। फैंस खुश थे लेकिन अचानक सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह निकाह वाकई सादगी से इबादत के इरादे से हुआ था या फिर यह सिर्फ एक वॉग की शूटिंग और लाइमलाइट बटोरने का जरिया था। लोगों का कहना है कि मदीना जैसी पाक जगह पर फैजू ने कुछ ऐसे काम किए जो इस्लामिक तौररीकों के खिलाफ हैं। आज के इस वीडियो में हम इन्हीं चार पांच बड़े सवालों को जानेंगे जो कि लोगों ने सोशल मीडिया पर उठाए हैं।
जैसे ही निकाह मुकम्मल हुआ फैसू ने अपनी बीवी के साथ फोटो शूट कराया, ब्लॉग बनाया और पूरी दुनिया के सामने उनका चेहरा सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इस्लाम में बीवी के लिए हिजाब और पर्दा बहुत अहम माना गया है। उलेमा और दीन की समझ रखने वालों का कहना है कि मदीना जैसी जगह पर जहां सादगी की मिसाल दी जानी चाहिए थी, वहां निकाह के तुरंत बाद बीवी को कैमरे के सामने लाना और शो बिजनेस का हिस्सा बनाना पर्दे के हुक्म और निकाह की पाकीजगी के खिलाफ नजर आता है। लोगों का कहना है कि यह सादगी नहीं बल्कि पब्लिसिटी का तरीका था। एक यूजर ने लिखा, इतनी बड़ी जगह जाके यह लोग क्या-क्या कर रहे हैं? आप लोग यह सब करने कहीं और चले जाते। इस्लाम के मुताबिक जब तक निकाह का हिजाबो कुबूल यानी निकाह मुकम्मल नहीं हो जाता तब तक एक लड़का और एक लड़की एक दूसरे के लिए गैर महरम होते हैं। शरीयत के कायदे से एक गैर महरम लड़की किसी लड़के के साथ अकेले लंबा सफर नहीं कर सकती। ना ही बिना निकाह के साथ वक्त गुजार सकती है। अगर दोनों ने निकाह से पहले साथ में सफर किया या ब्लॉगिंग के बहाने करीब रहे तो लोगों का यह गुस्सा जायज है कि निकाह से पहले का यह रिश्ता इस्लामिक कायदों के दायरे में नहीं आता। क्योंकि फैसू ने भी अपनी होने वाली बीवी यानी निखत के साथ हवाई सफर किया।
जाहिर है कि दोनों के बीच कुछ ना कुछ बातचीत तो हुई होगी जब दोनों इंडिया से सऊदी अरब पहुंचे हैं और एयरपोर्ट पर तो वह दोनों साथ में भी नजर आए थे। तीसरा पॉइंट जिसने सबसे ज्यादा लोगों को हैरान किया वो था मदीना में केक काटना। फैजू के ब्लॉग और तस्वीरों में देखा गया कि निकाह की खुशी में वहां बकायदा केक काटा जा रहा है। अब बात करते हैं कि इस्लाम इस पर क्या कहता है। केक काटना, मोमबत्तियां बुझाना या इस तरह के जश्न मनाना इस्लामिक कल्चर या सुन्नत का हिस्सा नहीं है। बल्कि ये गैर इस्लामिक यानी वेस्टर्न तौररीकों की नकल है। खासकर मदीना मुनव्वरा जैसी मुकद्दस सरजमी पर जहां इंसान को दुनियावी दिखावे से दूर रहकर अल्लाह की इबादत और तौबा में वक्त बिताना चाहिए। वहां केक कटिंग जैसी चीजें करना लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसे दीन की समझ रखने वाले एक गलत रिवाज की शुरुआत मान रहे हैं। एक यूजर ने लिखा निकाह से पहले तो आप पर्दा करती थी। अब कैसे छोड़ दी? आपका ईमान इतना कमजोर है क्या? एक और ने लिखा ये लोग बहुत ही ज्यादा बेशरम है। यह निकाह करने नहीं गए थे। वहां पर फोटो शूट करवाने गए थे। भाई आपसे उम्मीद नहीं थी। इस्लाम में निकाह को जितना हो सके आसान और कम खर्च वाला बनाने की ताकीद की गई है। हदीस का मफूम है कि सबसे बरकत वाला निकाह वो है जिसमें सबसे कम खर्च हो।
लेकिन आलोचकों का कहना है कि मदीना में निकाह सिर्फ एक फॉर्मेलिटी की तरह था क्योंकि इसके पीछे वॉग्स की बड़ी प्लानिंग, महंगे आउटफिट्स, कैमरे और प्रोफेशनल फोटोशूट शामिल थे। जब आप मदीना में निकाह को एक इवेंट की तरह पेश करते हैं तो इसे इस्लाम में रिया यानी दिखावा कहा जा सकता है। एक यूजर ने लिखा फिजूल खर्ची करने वाला शैतान का भाई है। इसके अलावा अब मुंबई में 19 अक्टूबर को एक बहुत बड़ी और आलीशान स्टार स्टडेड रिसेप्शन पार्टी की तैयारी है जिसे लोग साफ तौर पर फिजूल खर्ची और पैसे का नुमाइश मान रहे हैं। तो लबो लुबाब यह है कि एक तरफ जहां मदीना में निकाह करना हर मुसलमान की ख्वाहिश होती है। वहीं दूसरी तरफ फैजू के इस कदम को सोशल मीडिया पर काफी लोग इस्लाम के नाम पर ब्लॉगिंग कंटेंट तैयार करना कह रहे हैं। पवित्र मदीना में सादगी की आड़ में कैमरे का तामझाम, केक कटिंग और गैर मेहरम की पाबंदियों को नजरअंदाज करना वाकई बहस का मुद्दा बन गया है। आपका क्या मानना है? कमेंट सेक्शन में हमें लिखकर जरूर बताएं। वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।