नमस्कार दोस्तों, मेरे पीछे करीब करीब 300 मीटर 350 मीटर पर जंतरमंतर की वही प्रोटेस्ट साइट है जहां कल सुबह अचानक सीजेपी के आशुतोष रांका सौरभ दास, अजिंक्य शिंद और उनके कुछ समर्थक कार्यकर्ता अचानक दाखिल हुए थे। पीछे एक जेडीयू का दफ्तर है। उस दफ्तर के पीछे कॉलोनी है। वहां से होते हुए जेडीयू के दफ्तर से होते हुए कूदपान करते हुए वहां पहुंचे थे। तिरंगा लेकर भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। पुलिस ने कुछ ही मिनट के भीतर उन्हें दबोचा। उन्हें हिरासत में भेजा गया। बाहरी दिल्ली के एक थाने में रखा गया। 23 घंटे बाद आज सुबह पता चला कि उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और पांच दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया गया। पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। आरोप क्या लगे? पुलिस ने धाराएं क्या लगाई? आरोप यह लगे कि बीएएनएस की धारा 163 यहां लागू है जिसके तहत आप इस प्रोटेस्ट साइट पर जिसे ऑलरेडी डीनोटिफाई भी परसों कर दिया गया है वहां आप दाखिल नहीं हो सकते तो उस धारा का उल्लंघन किया इसके अलावा आशुतोष रांका और सौरभ दास को जब 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने के लिए दीपके के साथ ये लोग मुंबई से आ रहे थे एयरपोर्ट पे फ्लाइट के भीतर दिल्ली पुलिस ने इन्हें डिटेन किया था और उसके बाद भी दिन भर हिरासत में रखा और जब छोड़ा गया तो मजिस्ट्रेट के सामने बॉन्ड भरवाया गया। बॉन्ड पर इनके दस्तखत हैं।
जिसमें शांति भंग होने वाली या कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली किसी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेंगे। इस तरह के बॉन्ड पर पीस बॉन्ड पर तीनों के दस्तखत है। तो जो कल यहां हुआ पुलिस के मुताबिक उस पीस बॉन्ड का उल्लंघन है। यह भी उन पर आरोप लगाए गए और उसके बाद आज उन्हें 23 घंटे की हिरासत के बाद तिहाड़ में भेज दिया गया। तो अब पुलिस ने ये तय कर लिया है कि अब जो प्रोटेस्टर्स इस तरह से एक बार छोड़े गए या उनकी लीडरशिप में जो लोग जो डिटेन हो के आएंगे उन्हें अब धीरे-धीरे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। पुलिस के रवैया से यह साफ हो गया। अजित शिंद भी वैसे पकड़े गए थे। हिरासत में थे। तस्वीरें तीनों की आई थी। उन्हें इसलिए छोड़ दिया गया कि वो पहली बार उन्होंने 163 का उल्लंघन किया। यह भी आरोप लगाया गया कि यह रिपीट ऑफेंडर है। मतलब पहले भी 163 का उल्लंघन किया, फिर उल्लंघन किया और बॉन्ड का उल्लंघन किया। तो सलाखों के पीछे तो गए 5 दिन के लिए। लेकिन अभिजीत दीपके जो सीजेपी के फाउंडर हैं पुणे में थे। उनका एक बयान आया है। वो बयान मैं सुनाऊंगा। दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं। अब वो दिल्ली आकर क्या करेंगे? क्या वह कहीं प्रोटेस्ट को लीड करने की कोशिश करेंगे? क्या प्रोटेस्टर्स को जमा करके कोई कॉल देंगे? क्योंकि चार दिन पहले जब तीन दिन पहले जब आशतोष रांका और सौरभ दास गए थे दिल्ली पुलिस के संसद मार्ग थाने में तो यह कहने और बताने गए थे कि अब आप बताओ कि हम कहां प्रोटेस्ट करें 8 दिन बाद 10 दिन बाद और जिस दिन उन्होंने बताया शायद परसों 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि अगर 24 घंटे में हमें आपने नहीं जानकारी दी या अनुमति नहीं दी तो हम अपना कॉल देंगे अपने हिसाब से फिर आंदोलन करेंगे जंतरमंतर प्रोटेस्ट साइट पर और उसके पहले ही जंतरमंतर की प्रोटेस्ट साइट को डिनोटिफाई कर दिया। उन
के आवेदन पर विचार करने से पहले ही। लेकिन अब अभिजीत दीपके जब आ रहे हैं तो क्या करने वाले हैं? उनका एक बयान सुनाने से पहले यह भी बता दूं कि आशुतोष रांका और सौरभ दास को जेल भेजे जाने को लेकर राहुल गांधी से लेकर एमके स्टालिन से लेकर महुआ मोहित्रा से लेकर तमाम लीडर्स ने इंडिया गठबंधन के नेताओं ने आलोचना की है आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कि क्या यह इमरजेंसी है? अघोषित इमरजेंसी है कि अगर चार लोग, पांच लोग, छह लोग चले गए उस प्रोटेस्ट साइट पर तो आपने उन्हें सलाखों के पीछे 5 दिन के लिए भेज दिया और जब छूट कर आएंगे फिर किसी गतिविधि में होंगे तो पता चला आप महीने दो महीने के लिए भेजेंगे। आखिर इरादा क्या है? ऐसे बहुत सारे ट्वीट हो रहे हैं। लेकिन उसके पहले जरा दीपके अभिजीत दीपके जो उनके लीडर हैं उनका बयान सुनाऊं और उससे पहले अजिंक्य शिंद जो हिरासत में 23 घंटे रहने के बाद छूटे। कहना है कि वकीलों से इन्हें मिलने नहीं दिया गया था। फोन इनके छीन लिए गए और उसके बाद जो कुछ हुआ जरा सुनिए पहले अजिंक्य शिंद को साथियों आपने देखा होगा कल आशुतोष सौरभ मैं और हमारे सीजेपी के साथी जंतरमंतर पर गए थे हमने वहां पर जाकर हमारा तिरंगा लहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए और इसी वजह से आज मोदी शाह की तानाशाही सरकार ने आशुतोष और सौरभ को पांच दिन के लिए जेल में भेज दिए। आपने सुना होगा कि हमारी स्वतंत्रता की लड़ाई में हमारे क्रांतिकारी साथी देश के आजादी के लिए भारत माता की जय के नारे और जब तिरंगा लहरा थे तब अंग्रेज उन्हें जेल में डाल देते और वही राह पर चलते हुए मोदी शाह की तानाशी सरकार ने आज आशुतोष और सौरभ को जेल में डाल दिया। ये तानाशाशी जोड़ी समझती होगी कि हम इससे डर जाएंगे। ये आशुतोष आप माफ करें अजिंक्य शिंद हैं। हालांकि इन्हें जेल नहीं भेजा गया है।
अभिजीत दीपके जो पुणे से चले हैं। दादी के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने गए थे। उन्होंने क्या कहा जरा सुनिए। सौरव और आशु को पांच दिन के जुडिशियल कस्टडी में भेजा गया है। जब वो जंतरमंतर के लिए निकले थे उन्हें पता था कि उन्हें जेल भेजा जा सकता है। लेकिन वो फिर भी वहां गए। तिरंगा लेकर गए और तिरंगा लहराया। नरेंद्र मोदी के अंडर आज इस देश में तिरंगा लहराना भी वलेशन ऑफ लॉ हो चुका है। मैं नरेंद्र मोदी से बस इतना कहना चाहता हूं। अगर दम है तो इमरजेंसी को ऑफिशियली डिक्लेअ करो। यह कायरों की तरह कावर्ड्स की तरह पुलिस के पीछे छुपना बंद करो। लगा दीजिए ऑफिशियल इमरजेंसी और कह दीजिए इस देश में डिसेंट नहीं चलेगा। कह दीजिए इस देश में प्रोटेस्ट नहीं चलेगा। कह दीजिए कि इस देश में सिर्फ अब हर हर मोदी घर-घर मोदी चलेगा। क्योंकि ना आप तिरंगे की इज्जत करते हैं, ना आप इस देश के लोगों की इज्जत करते हैं। ना आप संविधान की इज्जत करते हैं। तो डिक्लेअ कर दीजिए इमरजेंसी अगर आप में हिम्मत है तो। यह अभिजीत दीपके का बयान है। इसी तरह से बहुत सारे नेताओं के बयान है। जरा मैं आपको सुनाऊं कि राहुल गांधी ने क्या कहा है और बाकी नेताओं ने क्या कहा क्योंकि विपक्ष के नेताओं की तरफ से लगातार अभिजीत दीपके और इनकी गिरफ्तार माफ़ करिए सौरभ दास और आशतोष की गिरफ्तारी और उसके बाद उन्हें माफ़ करिए थोड़ी गर्मी ज्यादा है। जेल भेजे जाने के खिलाफ बयान आ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जंतरमंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। छात्र युवा, पत्रकार और इंडिया गठबंधन के बैनर अलग-अलग हैं। लेकिन मकसद एक है। सभी प्रदर्शन एक ही लड़ाई का हिस्सा हैं। नागरिकों के अपने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। जंतरमंतर भारत की जनता का है। हम इसे वापस लेकर रहेंगे। तो इंडिया गठबंधन के लीडर्स, प्रोटेस्टर्स, अलग-अलग संगठनों के लोग, सिविल सोसाइटी के लोग जो जंतरमंतर पर प्रोटेस्ट करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जंतरमंतर को हम रिक्लेम करेंगे। क्योंकि जंतरमंतर 93 से 33 साल से प्रोटेस्ट साइट है और अब क्या किया अचानक पुलिस ने परसों एमएचए ने अचानक इसे डिनोटिफाई किया और जो मैदान तय किए गए रामलीला मैदान जो यहां से लगभग 4 किमी है बुरारी मैदान जो लगभग 20 किमी है। एक सीबीडी मैदान जो ऐसे ही 157 किमी है। खास बात क्या है? यह सारे मैदान प्रदर्शन के लिए अगले 2 महीने के लिए मोटे तौर पर खाली होने की स्थिति में नहीं है। रामलीला मैदान में कई तरह के कार्यक्रम, आयोजन, रामलीलाएं और बहुत तरह की चीजें चल रही है। अक्टूबर नवंबर में खाली नहीं है और मोटी फीस भी लगती है रामलीला मैदान की। बुरारी मैदान भी बहुत दूर है और सीबीडी मैदान भी उसी तरह की स्थिति में है और इसको लेकर बहुत बार मैं वीडियो में बात कर चुका हूं इसलिए रिपीट नहीं करूंगा। मल्लिकार्जुन खरगे ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है गृह मंत्री द्वारा एसआईआर में बाहर एक 13 करोड़ भारतीयों को घुसपैठियां घोषित करना भारत का अपमान है। ज्ञानेश कुमार को बचाना बंद कीजिए। सत्ता से सवाल पूछने वाले को जेल युवाओं को लाठी डंडे जबरन हिरासत यह बंद कीजिए। मोदी शाह की दमनकारी नीतियों के आगे कोई नहीं झुकेगा। अभिषेक बनर्जी जो उसी के लीडर हैं। उन्होंने कहा है कि खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताने वाले भारतीयों को अपने ही देश में तिरंगा फहराने और लहराने के लिए गिरफ्तार कर रहे हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक ऐसा करना शांति भंग करना है और उसके बाद मैं लगातार देख रहा हूं अरविंद केजरीवाल क्या अपने ही देश में अपना तिरंगा लहराना अपराध है यह सरासर बेतुका है एम के स्टालिन ने भी कहा ये सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले सकती है बीजेपी कितने युवा आवाजों को खामोश कर सकती है ये जितने युवाओं को जेल में डालेंगे उतने ही ज्यादा आम नागरिक जिनका किसी राजनीतिक दल से कोई जुड़ाव नहीं है सड़कों पर उतरेंगे इस तरह से लगातार बयान आ रहे हैं डेरेकोब्राइन का बयान है और बहुत सारे नेताओं का बयान है अब सवाल उठता है
कि जिस तरह तरह से पुलिस ने सक्रियता दिखाई और जंतरमंतर की प्रोटेस्ट साइट पर आने वाले उन आशतोष राका और उनको गिरफ्तार किया हिरासत में रखा और उसके बाद 5 दिन के लिए भेज दिया गया। इसी दिल्ली में इसी दिल्ली में सीपी में कन प्लेस में जहां प्रोटेस्टर्स जा रहे हैं वहां 100 से ज्यादा 150 राइट विंग के गुंडे भगवाधारी गुंडे मोदी और शाह के समर्थक गुंडे वो लगातार वहां जंतरमंतर से कुछ दूर सीपी में मौजूद हैं। वहां भी 163 की धारा लागू है और उसके बाद वह गुंडागर्दी करते हैं। वह जो प्रोटेस्टर्स हैं उनके साथ मारपीट करते हैं। कपड़े फाड़ते हैं। जो जर्नलिस्ट हैं जो प्रोटेस्ट को कवर करते हैं उनके साथ मारपिटाई करते हैं, दौड़ाते हैं। वहां तीन दिन पहले एक कार देखी गई जिसमें लाठी डंडे थे। न्यूज़ ल्ड्री के एक रिपोर्टर अवधदेश कुमार हैं। वो पुलिस को बताते रहे कि इस गाड़ी में लाठी डंडे इस गाड़ी को जब्त कीजिए। लेकिन उस गाड़ी को पुलिस ने सेफ पैसेज देकर निकाल दिया और वहां जो गुंडे जिन गुंडों ने 10 अक्टूबर को लड़कियों के साथ प्रोटेस्टर्स के साथ बदसलूकी की ऐसा ऐसी हरकत की, कपड़े तक फारे, मारपीट की, दौड़ा दौड़ा कर मारा। बहुत जब ट्वीट किए गए सोशल मीडिया पर जब बहुत नाराजगी लोगों ने जताई राहुल गांधी तक ने ट्वीट किया तो हुआ क्या उन दोनों गुंडों को चार को गिरफ्तार किया गया और जो वीडियो में दिख रहे हैं कपड़े फाड़ते हुए पिटाई करते हुए 24 घंटे के भीतर उन्हें छोड़ दिया गया उन्हें जमानत मिल गई बाहर आ गए और फिर उसके बाद कल वो वीडियो जारी कर रहे हैं फूल माला पहने हुए और मिठाई खाते हुए उसी तरह से जैसे बिलकिस बानू के हत्यारे और बलात्कारी छूटे थे जब जेल से तो उन्हें मिठाई खिलाई गई थी और माला पहनाया गया था। तो वो फिर वहां पहुंच गए। फिर कह रहे हैं कि हम लोगों को पीटेंगे और हम कॉकरोचों को और तिलचट्टों को सबक सिखाएंगे। जो उनको कवरेज करते हैं उनको भी पीटेंगे। उनके लिए कोई कानून नहीं है। इसी दिल्ली में वो जेल से 24 घंटे के भीतर हिरासत से जहां से भी छूट के आ जाते हैं। और उसके बाद खुलेआम गुंडागर्दी करते हैं। लेकिन आप दिल्ली में इसी दिल्ली में 10 को 11 को 12 को कुल मिलाकर 40 पत्रकार डिटेन किए गए। 40 कई वुमेन रिपोर्टर्स, यंग रिपोर्टर्स जिन्होंने शानदार काम किया है। जो पुलिस ने जिस ढंग से घसीटा घसीटी किया सड़कों पर जिस तरह से दौड़ा दौड़ा कर लोगों को पीटा घसीटा पीटा मतलब उस तरह का नहीं जैसे 20 जुलाई को हुआ धक्कामुक्की घसीटा घसीटी जो भी किया उसका जिन जर्नलिस्ट ने सवाल उठाया कि ऐसा क्यों कर रहे हैं या जो कवरेज कर रहे थे उन जर्नलिस्ट को उसी बस में बिठाकर छछ आठ आठ जर्नलिस्ट को एक साथ डिटेन करके भेज दिया गया 12 घंटे 10 घंटे कई जर्नलिस्ट ने शिकायत की है कि उनके साथ मारपीट की गई और इसमें द हिंदू के रिपोर्टर हैं। इसमें द क्विंट के रिपोर्टर हैं। इसमें न्यूज़ ल्ड्री के रिपोर्टर हैं। इसमें इंडियन एक्सप्रेस हिंदी जो YouTube चैनल है उसके रिपोर्टर हैं। कैरवान के रिपोर्टर हैं। तमाम ऐसे जर्नलिस्ट यंगस्टर 40 लोग तीन दिन में डिटेन किए जाते हैं। इसी दिल्ली में रिपोर्टर्स के लिए काम करना बहुत जोखिम भरा और मुश्किल है। टारगेटेड ढंग से पुलिस ने रिपोर्टर्स को टारगेट किया ऐसे लोगों को जो प्रोटेस्टर्स के साथ जो पुलिस का रवैया था उसको जो दिखा रहे थे लेकिन वो गुंडे आजाद घूम रहे हैं और वो गुंडे अभी भी गुंडागर्दी करने पर आमादा है। तो यह सब इसी दिल्ली में हो रहा है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि प्रोटेस्ट करने की ये जगह तो आपने छीन ली। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट पर नजर है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला भी जाने वाला है। कल शायद हाई कोर्ट में याचिका थी। क्या हुआ अभी तक?
उस पर कुछ हुआ नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं हैं। एसआईआर को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जो परसों इंडिया गठबंधन का बहुत बड़ा प्रोटेस्ट हुआ था। हजारों लोगों ने हिस्सा लिया था। हजारों लोग सुप्रीम कोर्ट से 200 मीटर 150 मीटर पहले तक पहुंच गए थे। उस देर शाम को भी 11 नेताओं के दस्तखत से एक याचिका दायर की गई। राहुल गांधी, मलिकार्जुन खरगे, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी और लीडर्स इंडिया गठबंधन के घटक दलों के। उस याचिका पर भी सुनवाई होनी है। अब सुन रहे हैं कि 15 अक्टूबर को सारी तारीखें पड़ी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में अदालत की अवमानना का भी मामला है कि अदालत के निर्देश और आदेश के बाद भी जिस ढंग से पत्रकारों को वकीलों को उनके साथ जो पुलिस का रवैया रहा जिस तरह से सारी चीजें बंद करके घेराबंदी की गई वो मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है। तो कई ऐसे मामले अभी सुप्रीम कोर्ट में हैं जिसकी सुनवाई होनी है जंतरमंतर को लेकर जिस जंतरमंतर को पहले भी 2017 में 2000 1993 से जंतरमंतर पर प्रोटेस्ट चल रहा है। 2017 में कुछ लोगों की शिकायत पर एनजीटी ने जंतरमंतर पर प्रोटेस्ट को रोका था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के आदेश को बदल दिया 2018 में और कहा कि आप नागरिकों के विरोध के अधिकार को आप रोक नहीं सकते और उन्हें जगह मिलनी चाहिए प्रोटेस्ट करने की। लेकिन चालाकी हुई तुरंत कोई समिति बनी। कौन सी समिति? कैसी समिति उस समिति को किसने अधिकृत किया? क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर के बगैर कोई ऐसी समिति बन सकती है? जब सुप्रीम कोर्ट ने इसको कहा कि जंतरमंतर की प्रोटेस्ट साइट को डीनोटिफाई जब करने की बात हुई थी तब सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ अपना स्टैंड लिया था। अपना आदेश दिया था। तो ये सर बहुत सारे सवाल हैं। इन सवालों का जवाब अब सुप्रीम कोर्ट से मिलना है। सरकार से नहीं। ज्ञानेश कुमार अपनी कुर्सी पर वैसे ही कायम है।
उनके इस्तीफे की मांग करने के लिए अगर इकेदुक्के दो चार लोग भी कहीं पहुंच जाते हैं किसी प्ले कार्ड के साथ तुरंत उसको धकियाते हुए पुलिस बस में ठेल देती है। और अब तो सलाखों के पीछे भेजे जाने का इंतजाम भी पुलिस ने शुरू कर दिया है। यह कहा जा सकता है कि ये जो डिटेन किए गए 100 लोग 50 लोग इन्होंने 163 का उल्लंघन दूसरी बार किया। यह हैबचुअल ऑफेंडर हैं। रिपीट ऑफेंडर हैं और इसलिए उन्हें भी किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके जेल भेजा जा सकता है। यह सब तरीका रवैया इसलिए कि कोई प्रोटेस्ट यहां ना कर पाए। कोई प्रोटेस्ट के हौसले से ना आए क्योंकि ये प्रोटेस्ट से डरी हुई सरकार है। 25 जुलाई को जिस प्रोटेस्ट ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया वो डरी हुई सरकार जंतरमंतर पर किसी तरह के प्रोटेस्ट को किसी सूरत में नहीं होने देना चाहती है। और जहां प्रोटेस्ट साइट तय किया गया। कल किसी से बात हुई कि बुरारी या जो सीबीडीएस जो मैदान है वहां इतनी गंदगी है कचरा है वहां कोई प्रोटेस्ट हो नहीं सकता है। बहुत तरह के कार्यक्रम होते रहते हैं। ट्रैफिक में शाहदरा में कहीं तो ये जानबूझकर किया गया है कि आप आंदोलन खत्म करो। कल विपक्ष के नेताओं की बैठक हुई थी। राहुल गांधी के यहां चाय पर चर्चा हुई। सब ने तय किया कि हम एकजुट होकर लड़ेंगे। तब तक जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं होता। जब तक एसआईआर रद्द नहीं होता। जब तक मतदाता सूची 2025 की बहाल नहीं होती। ऐसी बहुत सारी बातें कही गई। लेकिन ये लड़ाई बहुत मुश्किल है। बहुत चुनौती भरी है। जब सरकार सिस्टम मशीनरी इस तरह से नाकेबंदी करके आपके आंदोलन को कुचलने के लिए कटिबद्ध हो। प्रतिबद्ध।