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पिता नाना पाटेकर से आखरी बातचीत को लेकर बेटे ने कही चौंकाने वाली बात, जानकर रो पड़ेंगे।

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हां बोलो सर सबसे पहले ये बताइए अंतिम संस्कार को काफी वक्त लग गया है और भी बहुत सारे लोग आना चाहते थे नाना के जो भी फैंस हैं या फिर जो भी उनके शुभचिंतक हैं तो इतना वक्त क्यों लग गया वो जानना चाहते हैं नहीं मैं समझा नहीं कॉन्ट्राडिक्ट सवाल हो रहा है मतलब ये काफी वक्त लग गया मतलब यूजुअली इतना 12 1:00 बजे इतना हां नहीं गोवा में थे ना वहां से रहे हमको एक्सपेक्टेड था कि हम जल्दी आ जाएंगे लेकिन समय लग गया किसी वजह से वैसी बात हो गई.

लेकिन अ क्योंकि सुबह ही ये मतलब जल्दी डॉन सुबह बहुत जल्दी ये मतलब प्रॉब्लम ये हो गया था तो ज्यादा रखना ठीक नहीं था तो इसलिए फिर हमने सोचा कि आज ही करेंगे अभी आगे किस तरह से आप देखते हैं क्योंकि वो जो फाउंडेशंस वो चलाते थे उसको लेके भी काफी बातें किसानों को लेके भी वो काफी हमेशा रखते थे और सबसे दुष्काल आज ये जो परेशानी है वो काफी आप इसको किस तरह से लीगसी किस तरह से कैरी फॉरवर्ड करते हां मैं वही कहना चाहता हूं। सबसे जरूरी बात ऐसी है कि नाना साहब मैंने पहले दो तीन ये बात कही कि नाना साहब जैसी व्यक्ति ये कहीं नहीं जाती। ये अपने काम के जरिए हम जिसको मराठी में अजरामर कहते हैं। तो मतलब ये इमोर्टल लोग होते हैं। एक बात ये है। दूसरी बात उनकी हमेशा से एक ही सोच रहती थी। एक लाइन वो बार-बार दोहराते थे कि लेट्स गेट टुगेदर इन द नेम ऑफ ह्यूमैनिटी एंड वर्क फॉर द बेटरमेंट ऑफ द वर्ल्ड। तो वो दुनिया के पैमाने पर सोचते थे। तो अभी महाराष्ट्र का हो गया था।

पैन इंडिया हम अपने संस्था के जरिए अभी पानी के क्षेत्र में तो काम चल ही रहा था। अभी कश्मीर में भी बड़े पैमाने पे एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर में काम शुरू हो गया था। तो वो एक चीज थी और तीसरी बात ऐसी है कि जो आपको यकीन नहीं होगा लेकिन वो सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारी देकर गए हैं क्योंकि उनके दिमाग में बात ऐसी थी कि मतलब उन्होंने चुनाव किया लोगों का कि तुमने ये करना है तुमने वो करना है और वो ये सारी चीजों में से बाहर निकल गए और उनके दिमाग में था कहीं जाके वापस स्क्रैच से जिंदगी शुरू की जाए शून्य से तो वो उनके दिमा दिमाग में था और जहां पे जरूरत है वहां पे आगे की जिंदगी अर्पण की जाए। तो ये उनके दिमाग में था।

तो जो चीज़ उनके तरफ से जो अभी रह गई किसी वजह से तो वो तो पूरी करनी है और अपनी तरफ से भी उसमें और जो कर सकते हैं सो करना है। तो आगे की जिंदगी जो होगी वो इसी काम में होगी। काम रहेगा। काम तो चलते रहेगा। रही बात जो ये मराठवाड़ा की हो तो उस सिलसिले में नाम फाउंडेशन में जो काम चल रहा है वहां पे हमारे सीओ साहब हैं गणेश स्वराज साहब हैं वहां हमारे ट्रस्टी साहब हैं तो ऑलरेडी काम चल रहा है ऑलरेडी काम चल रहा है नाना साहब नाना साहब को बहुत पहले उनका उनके दिमाग में था कि मैं 4 साल ऑर्गेनाइजेशन एस्टैब्लिश करके इसमें से निकल जाऊंगा लेकिन उनको थोड़ा समय लग गया लेकिन आप यकीन करें कि अभी वो सबको अपने-अपने काम बांट के इसमें से बाहर बाहर निकल गए थे।

अब भी निकल गए थे उसमें से और उनके दिमाग में था कि कहीं नॉर्थ में जाके कुछ नए सिरे से शुरू करेंगे वो काम। वैसे वो उनके दिमाग में था। बदकिस्मती है कि नहीं हो पाया। लेकिन एक बात वो लेकिन कहने का मतलब मेरा इतना ही है कि ये काम मराठवाड़ा का जो है तो वो सीएम साहब से बात हुई थी। अभी थोड़ी देर पहले ही बात हुई। तो उन्होंने [नाक से की जाने वाली आवाज़] वही कहा कि जो नाम फाउंडेशन के जरिए जो काम चल रहा है हमारे गणेश तोरा साहब सीओ साहब हैं तो उनके गाइडेंस के नीचे वो सारा काम चल रहा है। हमारे चंद्रशेखर साहब हैं बाकी ट्रस्टी साहब है मकरंद अनास पुरे साहब हैं। तो इनके अंडर वो सारा काम चल रहा है। तो वो सीएम साहब का कहना था कि अगर हम मिलकर पहले भी मिलकर काम किए हैं।

लेकिन इस बार उनका कहना था कि नाना साहब के दिमाग मतलब नाना साहब ने यह सोच रखा था कि इस बार और जोर लगाना है। तो सीएम साहब ने ऑनरेबल सीएम साहब ने यह बात कही कि वी हैव टू मेक श्योर कि जो उनके दिमाग में था तो वह होना ही है। तो वो अभी उन्होंने वो एक अभी बात जो चल रही थी तो तभी उन्होंने जी जी तो तभी उन्होंने सर बात ऐसी होती है ना कि ये लेगसी ऐसी नाना साहब मेरे अकेले के नहीं है। नाना साहब ये क्या कहते हैं? एक परिवार के लिए मरदित नहीं है। नाना साहब दुनिया के हैं। तो नाना साहब की लीगसी चलाने वाले दुनिया भर लोग हैं। मैं तो अपनी तरफ से तो मैं करूंगा ही लेकिन ऐसे उनकी लीगसी चलाने वाले मेरे इतने भाई बहन हैं दुनिया भर तो वो हम सब मिलकर करेंगे और मैं मेरी आपको मेरी दिली दरख्वास्त रहेगी आपसे कि आप सभी जुड़ जाएं। आप ये कॉज समझ ले आए और आप सभी जुड़ जाए। उनकी आखिरी बातचीत क्या हुई थी? क्या वो मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। तो वो थोड़ा कंसर्न थे तो वो वो उतना ही कहते थे कि तू मेरे लिए बस इतना ही कर कि तू खुद के खुद के तबीयत का ख्याल रख बस इतना ही इतना ही कर थैंक यू हां बोलो सर सबसे पहले ये बताइए अंतिम संस्कार को काफी वक्त लग गया है तो और भी बहुत सारे लोग आना चाहते थे.

नाना के जो भी फैंस हैं या फिर जो भी उनके शुभ चिंतक हैं तो इतना वक्त क्यों लग गया है वो जानना चाहते हैं नहीं मैं समझा नहीं कंट्राडिक्ट सवाल हो रहा है मतलब ये काफी वक्त लग गया मतलब यूजुअली इतना 12 1:00 बजे इतना हां नहीं गोवा में थे ना वहां से लाए हमको एक्सपेक्टेड था कि हम जल्दी आ जाएंगे लेकिन समय लग गया किसी वजह से वैसी बात हो गई लेकिन क्योंकि सुबह ही ये मतलब जल्दी डॉन सुबह बहुत जल्दी ये मतलब प्रॉब्लम ये हो गया था तो ज्यादा रखना ठीक नहीं था तो इसलिए फिर हमने सोचा कि आज ही करेंगे अभी आगे किस तरह से आप देखते हैं क्योंकि वह जो फाउंडेशन वो चलाते थे उसको ले भी काफी बातें हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] किसानों को लेके भी वो काफी अमेरिका थे और सबसे दुष्काल आज ये जो आप इसको किस तरह से लीग किस तरह से कैरी फॉरवर्ड हां मैं वही कहना चाहता हूं।

सबसे जरूरी बात ऐसी है कि नाना साहब मैंने पहले दो तीन ये बात कही कि नाना साहब जैसी व्यक्ति ये कहीं नहीं जाती। ये अपने काम के जरिए हम जिसको मराठी में अजरामर कहते हैं। तो मतलब ये इमोर्टल लोग होते हैं। एक बात ये है। दूसरी बात उनकी हमेशा से एक ही सोच रहती थी। एक लाइन वो बार-बार दोहराते थे कि लेट्स गेट टुगेदर इन द नेम ऑफ़ ह्यूमैनिटी एंड वर्क फॉर द बेटरमेंट ऑफ द वर्ल्ड। तो वो दुनिया के पैमाने पे सोचते थे। तो अभी महाराष्ट्र का हो गया था। पैन इंडिया हम अपने संस्था के जरिए अभी पानी के क्षेत्र में तो काम चल ही रहा था। अभी कश्मीर में भी बड़े पैमाने पे एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर में काम शुरू हो गया था।

तो वो एक चीज थी और तीसरी बात ऐसी है कि जो आपको यकीन नहीं होगा लेकिन वो सबको अपनी-अपनी जिम्मेदारी देकर गए हैं क्योंकि उनके दिमाग में बात ऐसी थी कि मतलब उन्होंने चुनाव किया लोगों का कि तुमने ये करना है, तुमने वो करना है और वो ये सारी चीजों में से बाहर निकल गए और उनके दिमाग में था कहीं जाके वापस स्क्रैच से जिंदगी शुरू की जाए शून्य से तो वो उनके उनके दिमाग में था और जहां पे जरूरत है वहां पे आगे की जिंदगी अर्पण की जाए। तो ये उनके दिमाग में था। तो जो चीजें उनकी तरफ से जो अभी रह गई किसी वजह से तो वो तो पूरी करनी है और अपनी तरफ से भी उसमें और जो कर सकते हैं सो करना है। तो आगे की जिंदगी जो होगी वो इसी काम में होगी। काम तो चलते रहेगा। रही बात जो ये मराठवाड़ा की हो तो उस सिलसिले में नाम फाउंडेशन में जो काम चल रहा है वहां पे हमारे सीओ साहब हैं गणेश थोरा साहब हैं वहां हमारे ट्रस्टी साहब हैं तो ऑलरेडी काम चल रहा है ऑलरेडी काम चल रहा है नाना साहब नाना साहब को बहुत पहले उनका उनके दिमाग में था कि मैं 4 साल ऑर्गेनाइजेशन एस्टैब्लिश करके इसमें से निकल जाऊंगा लेकिन उनको थोड़ा समय लग गया लेकिन आप यकीन करें कि अभी वो सबको अपने-अपने काम बांट के इसमें से बाहर बाहर निकल गए थे। अब भी निकल गए थे उसमें से और उनके दिमाग में था कि कहीं नॉर्थ में जाके कुछ नए सिरे से शुरू करेंगे वो काम। वैसे वो उनके दिमाग में था। बदकिस्मती है कि नहीं हो पाया। लेकिन एक बात वो लेकिन कहने का मतलब मेरा इतना ही है कि ये काम मराठवाड़ा का जो है तो वो सीएम साहब से बात हुई थी। अभी थोड़ी देर पहले ही बात हुई। तो उन्होंने वही कहा कि जो नाम फाउंडेशन के जरिए जो काम चल रहा है हमारे गणेश तोरा साहब सीओ साहब हैं तो उनके गाइडेंस के नीचे वो सारा काम चल रहा है हमारे चंद्रशेखर साहब है बाकी ट्रस्टी साहब है मकरंद दानास पुरे साहब हैं तो इनके अंडर वो सारा काम चल रहा है तो वो सीएम साहब का कहना था कि अगर हम मिलकर पहले भी मिलकर काम किए हैं लेकिन इस बार उनका कहना था कि नाना साहब के दिमाग मतलब नाना साहब ने यह सोच रखा था कि इस बार और जोर लगाना है तो सीएम साहब ने ऑनरेबल सीएम साहब ने यह बात कही कि वी हैव टू मेक श्योर कि जो उनके दिमाग में था.

तो वो होना ही है। तो वो अभी उन्होंने वो एक अभी बात जो चल रही थी तो तभी उन्होंने जी जी तो तभी उन्होंने सर बात ऐसी होती है ना कि ये लेगसी ऐसी नाना साहब मेरे अकेले के नहीं है। नाना साहब ये क्या कहते हैं? एक परिवार के लिए मरदित नहीं है। नाना साहब दुनिया के हैं। तो नाना साहब की लीगसी चलाने वाले दुनिया भर लोग हैं। मैं तो अपनी तरफ से तो मैं करूंगा ही लेकिन ऐसे उनकी लीगसी चलाने वाले मेरे इतने भाई बहन हैं दुनिया भर। तो वो हम सब मिलकर करेंगे और मैं मेरी आपको मेरी दिली दरख्वास्त रहेगी आपसे कि आप सभी जुड़ जाएं। आप ये कॉज समझ ले कि आएं और आप सभी जुड़ जाए। आखरी बातचीत क्या हुई थी? क्या वो मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। तो वो थोड़ा कंसर्न थे। तो वो वो उतना ही कहते थे कि तू मेरे लिए बस इतना ही कर कि तू खुद के खुद के तबीयत का ख्याल रख। बस इतना ही इतना ही कर। थैंक यू।

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