आखिर श्री हित राधा केलीकुंज आश्रम को लेकर इतने बड़े सवाल क्यों उठ रहे हैं? श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज को एक चिट्ठी लिखी। लिखकर गोवर्धन में रहने की अपील की। क्यों? उन्होंने आश्रम में ₹5 करोड़ में विराट कोहली को बुलाने और एक कंपनी के लोगों के संत बनकर आश्रम में प्रवेश करने का दावा क्यों किया? लेकिन इन तमाम आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल है आखिर प्रेमानंद महाराज के पास खुद की कितनी संपत्ति है? क्या उनके नाम पर घर, जमीन, बैंक अकाउंट या कोई महंगी गाड़ी है?
खास बात यह है कि प्रेमानंद महाराज खुद अपनी संपत्ति को लेकर क्या कहते हैं? यह भी सामने आया है। तो आखिर सच क्या है? संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जिनकी मौत का वीडियो भी सामने आया। बाद में श्री हित राधा केलीिकुंज आश्रम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलीकुंज को लेकर श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने बड़ा खुलासा किया।
फलाहारी महाराज ने पत्र लिखकर प्रेमानंद बाबा को गोवर्धन गिरिराज जी में रहने की अपील की। फलाहारी महाराज ने पत्र में दावा किया कि विराट कोहली को ₹5 करोड़ में बुलाकर प्रेमानंद बाबा को प्रसिद्ध करने की बात कहने वाले दूसरे गुट पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा राजस्थान की कंपनी है जो विराट कोहली को 5 करोड़ में लेकर आई थी और अब उस कंपनी के लोग संत बनकर आश्रम में घुस चुके हैं और अब वह प्रॉपर्टी का काम कर रहे हैं। आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद जी महाराज के बारे में कई तरीके की बातें सुनने को मिलती हैं। कहा जाता है वह बहुत भयानक किडनी की बीमारी से भी पीड़ित हैं।
हालांकि इस बीच उनकी संपत्ति को लेकर भी काफी चर्चा है। लेकिन क्या वाकई उनके पास कोई प्रॉपर्टी है? प्रेमानंद जी महाराज ने खुद इस सवाल पर खुले तौर पर एक बार जवाब दिया था। प्रेमानंद महाराज के पास अपना कोई घर नहीं। जानकारी के मुताबिक वह एक भक्त के फ्लैट में रहते हैं। जहां उनके रहने और खाने की देखभाल होती है। उस घर का बिजली बिल भी उनके भक्त ही चुकाते हैं। क्या प्रेमानंद जी महाराज के पास कोई अपनी प्रॉपर्टी है? एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि उनके पास कोई निजी प्रॉपर्टी नहीं है।
उनके नाम पर ना कोई बैंक खाता है ना किसी प्रकार की कोई अचल संपत्ति जैसे कि जमीन, घर, फ्लैट यह सब। वो पूर्णत तपस्वी जीवन बिताते हैं और उनके पास कोई भौतिक संपत्ति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि अगर कोई उनसे ₹10 भी मांगे तो वह नहीं दे पाएंगे क्योंकि उनके पास ₹10 भी नहीं होते। यह कथन दिखाता है कि उनका जीवन सांसारिक धन दौलत पर केंद्रित नहीं है बल्कि त्याग और आध्यात्मिक साधना पर केंद्रित है। तो प्रेमानंद जी महाराज रहते कहां है? दरअसल प्रेमानंद महाराज को इससे पहले भी कई बार Audi और डिफेंडर में देखा गया। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनकी अपनी गाड़ी नहीं है। यानी उनका पर्सनल व्हीकल नहीं है। यह कार उनके कार सेवकों की तरफ से उनको मिलता है। जिसका उपयोग वो यात्रा के लिए करते हैं।
प्रेमानंद जी महाराज एक साधुमय जीवन जीते हैं। उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। उनके नाम पर तो कोई बैंक खाता भी नहीं है ना ही कोई प्रॉपर्टी है ना कोई निजी व्हीकल यानी कोई वाहन। अब इन सबके बीच टेस्ट क्रिकेट से सन्यास की घोषणा के एक दिन बाद विराट कोहली और उनकी पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा वृंदावन के ही श्री राधा के कुंज आश्रम में प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए पहुंचे थे और जिसकी तस्वीरें भी बहुत ज्यादा वायरल हुई थी। इस दौरान उन्होंने महाराज के धर्म और आध्यात्मिकता पर प्रवचन सुने।
भजन मार्ग ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया था जिसमें यह जोड़ा प्रेमानंद महाराज से बातचीत करता हुआ भी नजर आ रहा है। इन सबके बीच जब बात होती है प्रेमानंद महाराज की संपत्ति और जीवन शैली की तो कई मीडिया रिपोर्ट्स और उनके खुद के वचनों के मुताबिक प्रेमानंद महाराज जी के पास ना कोई बैंक खाता है ना घर ना जमीन ना किसी प्रकार की कोई अचल संपत्ति उनके पास खुद का मकान नहीं है। वह वृंदावन में भक्तों द्वारा उपलब्ध कराए गए एक स्थान या फ्लैट में रहते हैं। कभी कबभार उन्हें महंगी गाड़ियों में देखा जाता है।
लेकिन यह उनकी अपनी गाड़ी भी नहीं है। बल्कि उनके सेवकों की या भक्तों की गाड़ी होती है। वह पूरी तरह से एक संत और तपस्वी का जीवन जीते हैं। उनके पास मोबाइल फोन तक नहीं है। उन्हें मोबाइल फोन चलाना भी नहीं आता है। तो प्रेमानंद महाराज का असली नाम है अनिरुद्ध कुमार पांडे। उनका जन्म 1969 में कानपुर के सरसौल बोल के अखरी गांव में हुआ था।
प्रेमानंद महाराज अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से कर चुके हैं। लेकिन पांचवी कक्षा से उनका रुझान आध्यात्म की ओर बढ़ने लगा। उसके बाद नौवीं कक्षा में आते-आते उन्होंने सांसारिक मोह माया त्याग करके आध्यात्मिक मार्ग पर चल पड़े और आज देश विदेश के लोग उनके दर्शन करने के लिए आते हैं।