प्रेमानंद महाराज का शिष्य रसिक दुलारी जिसकी संदिग्ध मौत के बाद मानो हड़कंप मच गया। हंगामे के बीच कुछ और परिवार भी सामने आए और आरोप लगाए। तो सवाल था कि आखिर कब बोलेंगे प्रेमानंद महाराज? कब टूटेगी आश्रम की चुप्पी? घंटे बीतते गए, दिन बीतते गए। आरोप और सवाल बढ़ते गए। तो अब आ ही गया है बड़ा बयान। जी। रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रेमानंद महाराज के आश्रम की तरफ से अब आधिकारिक बयान जारी किया गया है।
जिस घटना के बाद लगातार सवाल उठ रहे थे जिसके बाद आश्रम के बाहर कुछ परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में हंगामा और नारेबाजी करते नजर आए। उस पूरे विवाद के बीच अब राधा केली कुंज ट्रस्ट ने अपना पक्ष रखा है। ट्रस्ट की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम में हुई दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत से प्रेमानंद महाराज और पूरा परिवार आहत है। साधक के परिवार के प्रति ट्रस्ट ने संवेदना जाहिर की है।
आश्रम की ओर से अपने Facebook पेज पर इस अपील में आश्रम प्रबंधन ने कहा है कि पिछले दिनों हुई घटना से पूज्य महाराज जी और समस्त अनुयाय अत्यंत आहत हैं। ट्रस्ट साधक के परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करता है। वहीं केलीकुंज ट्रस्ट द्वारा भी पुलिस प्रशासन को घटना के निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में सहयोग देने की बात कही गई है। जांच पूरी होने तक ट्रस्ट सभी श्रद्धालुओं, साधकों और आम लोगों से विनर्व अपील भी करता है कि किसी प्रकार की अधूरी जानकारी, अफवाह और पूर्वानुमान के आधार पर पूज्य महाराज और आश्रम की छवि को धूमिल ना किया जाए। आश्रम प्रबंधन की ओर से कहा गया कि पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच के माध्यम से घटना के वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाएगा।
इस पोस्ट की पुष्टि आश्रम द्वारा की गई है। लेकिन सवाल यह है कि जवाब आने में इतना वक्त क्यों लगा? रसिक दुलारी शरण की मौत 25 सितंबर को हुई थी और आश्रम की तरफ से यह आधिकारिक संदेश करीब 8 से 9 दिन बाद सामने आया। इसी देरी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने दिन तक आश्रम की तरफ से सार्वजनिक बयान क्यों नहीं आया? क्या पुलिस जांच का इंतजार किया जा रहा था? क्या घटना की जानकारी तत्काल आश्रम के शीर्ष प्रबंधन तक नहीं पहुंची थी या फिर मामला बढ़ने के बाद आश्रम को सार्वजनिक तौर पर अपना पक्ष रखना ही पड़ा। फिलहाल इन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं। दूसरी तरफ रसीद दुलारी की मौत की परिस्थितियां भी अब तक पूरी तरह से साफ नहीं है। पुलिस के मुताबिक दीपक लोधी की मौत आश्रम की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद हुई।
उनके शरीर पर गंभीर चोटें थी और प्राइवेट पार्ट पर भी गंभीर चोट की बात सामने आई है। अब पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या स्थितियां बनी कि रसिक दुलारी ने कथित तौर पर पहले खुद को इतनी गंभीर चोट पहुंचाई और फिर चार मंजिला इमारत से गिरकर उनकी मौत हो गई। यह खुद से उठाया गया कदम था या इसके पीछे कोई और वजह थी। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा। लेकिन विवाद सिर्फ रसिक दुलारी की मौत तक सीमित नहीं रहा। आश्रम से जुड़े कुछ लोगों के परिजनों के सामने आने और अपने अपनों की तलाश का दावा करने के बाद मामला और गमा गया। हाथरस के 12 मई खेड़ा गांव का एक परिवार शुक्रवार से केलीकुंज आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गया। परिजनों का आरोप था कि उनका 16 साल का बेटा अनुज चौधरी पिछले 3 महीने से लापता है। परिजनों का आरोप था कि वह आखिरी बार दीक्षा लेने आश्रम ही गया था।
व नोएडा के एक युवती के परिजन भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाते हैं। हालांकि इन पर आश्रम का कोई जवाब नहीं आता। लेकिन रसिक दुलारी मामले में आश्रम ने बोला है जांच पर भरोसा रखने की अपील की है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि रसिक दुलारी की मौत आखिर कैसे हुई? उस दिन क्या हुआ और बाकी लोगों के लापता होने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं उसकी हकीकत क्या?