नहीं है। मेरा गांव ब्राह्मणी है सागर पड़ता है। मेरे बेटे ने तीन महीना पहले प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। दीक्षा लेने के घर गया। फिर पांच दिन बाद वो अपनी कंठी माला लेकर के बोला कि मैं प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने जा रहा हूं। मैंने हमारी नौकार है। मैंने कहा चला आजा। मैंने एक दो दिन वापस आ जाना। वो वापस नहीं आया। हमें हड़कंप हुआ।
हम उसी दिन से तीन महीने से यहां पर घूम रहे हैं और किसी ने कुछ बता के नहीं दिया। ये केली कुंड वाले किसी ने हमसे बात नहीं की। ये गेट से ही फटकार देते थे। मुझे आज तीन महीना हो गए भूखे प्यासे गेट पे सोते सोते तीन महीने से सो रहा हूं मैं गेट पे। इन्होंने मेरी कोई सुनवाई नहीं की है। जब जाकर के मैंने आज ये धरना प्रदर्शन किया है कि मैंने अब मरना ही बेहतर है।
क्या इस दौरान महाराज जी से बात हुई? पुलिस से कोई बात नहीं महाराज जी इनके चेले बात नहीं कर रहे हैं तो महाराज जी से तो जब मिलने देंगे मुझे ये चेले से तो बात करते नहीं है इन्होंने दरोगा को तो फटकार दिया मैं दरोगा लाया था प्रसादाबाद थाने से और यहां वृंदावन थाने से दरोगा को भी फटकार दिया इन लोगों ने बोले कि कही दरोगा जी तो आप जाइए मैंने दरोगा जी से कहा मैंने भाई मैं गरीब आदमी हूं तुम तो प्रशासन में हो कही हम भैया क्या करें यहां तो डीएम और एसडीएम के सिर झुकाने आते हैं।
जब प्रशासन यहां झुकाने आता है तो मैं तो गरीब मर ही सकता हूं बस और कुछ ज्यादा मैं कुछ नहीं कर सकता अपने बेटे के वो पे चार बेटी है शादी हो गए एक बालक है अब तुम बताओ मैं शादी करके सोचूंगा जब बच्चा ढूंढूं क्या करूं मैं बहुत परेशान हूं