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9/11 वाला दरवाज़ा बना जाल! भारतीय पायलट स्मित मच्छर ने कैसे बचाईं 174 जानें?

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अमेरिका के नाइन 111 के बाद सारी दुनिया ने तय किया था कि कॉकपिट के दरवाजे को इतना मजबूत रखेंगे कि कभी कोई आतंकवादी दोबारा अंदर ना घुस सके। लेकिन 34,000 फीट पर इजराइल जा रहे फ्लाई दुबई के विमान में जब वही दरवाजा अंदर से मजबूत था तब अंदर कॉकपिट में चाकू चल रहा था। हमला करने वाला कोई बाहरी आतंकवादी नहीं था। वो उसी कॉकपिट में बैठा कोपायलट था जिसके भरोसे 174 जाने आसमान में थी और उस बंद दरवाजे के पीछे खून से लथपत एक हिंदुस्तानी था। कैप्टन स्मिथ मच्छर। 29 साल के दो बच्चों के पिता विमान नाक के बल नीचे गिरता जा रहा था और बाहर बैठे लोग भगवान को याद कर रहे थे। उस वक्त सिर्फ एक इंसान था जो इस कहानी के एंड को बदल सकता था और उसने बदल दिया और यही वजह है कि आज इजराइल से लेकर अमेरिका अमेरिका से लेकर हिंदुस्तान तक सारी दुनिया हिंदुस्तान के बेटे स्मिथ को रियल लाइफ अवेंजर कह रही है। आई थिंक व्हाटपस एक्टिवदर हीरो हर देशवासी के लिए स्मिथ का ये पराक्रम हमें गौरव से भर देता है। यू डोंट हैव टू थिंक अबाउट ऑन टाइम एज अ पायलट आई डोंट हैव टू थिंक इट्स देयर आर दे हायर्ड अदर पीपल टू टेक केयर वो कह रही है कि हर हीरो कैप पहन कर नहीं आता और जो कुछ स्मिथ ने किया है उसने हिंदुस्तान का नाम मान सम्मान सब कुछ बढ़ा दिया हालांकि स्मिथ की कहानी में उनके साथ चार इजराइली यात्री भी थे जिन्होंने इन लोगों की जिंदगियां बचाई एक प्लंबर एक बैंक अफसर एक दांत का डॉक्टर और एक पिता और इसीलिए हम चाहते हैं

कि आज इन चेहरों को आप ध्यान से देखिए सोशल मीडिया पर आज दुनिया दुनिया इन्हें अवेंजर्स कह रही है और कहना भी चाहिए क्योंकि कोई जादुई ताकत नहीं थी। यह सुपरमैन या फिर आयरन मैन नहीं थे। बस इंसानियत का जज्बा था और इसलिए आज ये दुनिया के हीरोज़ हैं। लेकिन इस कहानी की एक बात जो सीधे दिल पर लगती है। बाकी चार जो थे वो अपने मुल्क के लिए, अपने लोगों के लिए लड़ रहे थे। हिंदुस्तान के स्मिथ उनके लिए खून बहा रहे थे जो उनके देश के नहीं थे। हिंदुस्तान ने पहले भी किया है। 40 साल पहले हिंदुस्तान की बेटी नीरजा ने हाईजैक हुए विमान में यही किया था। दूसरों के बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी थी। तब भी पासपोर्ट अलग था। इंसानियत एक थी और इस बार भी पासपोर्ट अलग था। इंसानियत एक थी और दोनों बार दुनिया में हिंदुस्तान का सिर ऊंचा हुआ। शायद यही वजह है कि आज हर कोई इनको सैल्यूट कर रहा है। लेकिन जब हम और आप कैप्टन स्मिथ की वीरता की कहानी को दुनिया को सुना रहे हैं तब दिल में यह डर आता है। यह ख्याल आता है यह सोच कर कि अगर इस कहानी का एंड दूसरा हुआ होता तो इसका असर क्या होता? क्योंकि कॉकपिट में सिर्फ दो लोग थे। एक हिंदुस्तानी कैप्टन और एक ओमान का जिहादी को पायलट जिसने सभी को मारने की नियत से अपने पायलट पर हमला किया था। कैप्टन पर हमला किया था और अगर वो प्लेन नीचे गिरता आग लगती तो शायद दुनिया हीरो नहीं गुनहगार को खुशती और यहीं से डर लगता है कि क्या यह उंगली तब हिंदुस्तान पर भी आती क्योंकि ओमान के पायलट का नाम अब तक दुनिया को नहीं बताया गया ना दुबई ने बताया ना कहीं और से निकल कर आया हिंदुस्तान की पायलट की बहादुरी कहानियां भी सुनाने में हिंदुस्तान में खेमा है जो संकोच कर रहा है डर रहा है सिर्फ पायलट पायलट कह रहा है यूं कहते हैं कि नाम में कुछ नहीं रखा होता। लेकिन कई बार नाम के पीछे भी पूरी एक एजेंडी कहानी होती और यही सोच कर डर लगता है कि अगर यह कहानी उल्टी होती तो इस कहानी में हिंदुस्तान का कितना नुकसान होता? आज इसे समझेंगे।

आज समझेंगे कि उस कॉकपिट में हुआ क्या था? बचाने वाला दरवाजा फंदा कैसे बना? और यह शेर से हिम्मत दिखाने वाला व्यक्ति कौन है? वो कोपायलट कौन था? विमान गिर जाता तो हिंदुस्तान पर क्या आंच आती। आज सब कुछ समझेंगे कि हिंदुस्तान के विंजर ने हिंदुस्तान के हीरो पायलट ने कैसे 174 जान बचाई। नमस्कार, मैं हूं शुभांकर मिश्रा और इस कहानी की शुरुआत करें उससे पहले हम सबको आज बहुत गर्व की अनुभूति हो रही है कि हम भारतीय हैं। और उसकी वजह कैप्टन स्मिथ हैं। इसलिए सबसे पहले कैप्टन स्मिथ को सैल्यूट। उनकी वीरता को सैल्यूट और यह समझिए कि हिंदुस्तान से जब आप बाहर जाते हैं तो आप हिंदुस्तान को रिप्रेजेंट करते हैं और यही काम कैप्टन स्मिथ ने किया है जिसकी वजह से आज सारी दुनिया हमारी तारीफ कर रही है। हम सबको उनको सलाम करना चाहिए। उनकी सेहत के लिए दुआ करनी चाहिए और उनका साथ दुआओं में देना चाहिए। वैसे साथ आपको हमारा भी देना चाहिए ताकि ऐसी खबरें हम बेबाकी से ला सकें। हमारे WhatsApp चैनल का लिंक जो है हमने डिस्क्रिप्शन में दिया है। हम गुजारिश करेंगे कि आप बड़ी संख्या में हमसे जुड़े। हमारा साथ दें और डिस्क्रिप्शन कमेंट में से WhatsApp पर आइए। ऐसी और कहानियां हम आपके लिए बनाते रहेंगे। बहुत सारी जानकारियां लाते रहेंगे। इसलिए प्लीज आप हमारा साथ दीजिएगा। Instagram पर देख रहे हैं तो लिंक इन बायो है। अब शुरुआत करते हैं हुआ क्या था? तो 30 सितंबर की सुबह करीब 7:00 बजे फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफ जेड1073 दुबई से इजराइल के शहर तेल अवीब के लिए उड़ती है। विमान में 174 यात्री और छह क्रू होते हैं। ज्यादातर यात्री इजराइल के थे। सवा दो घंटे तक सब कुछ नॉर्मल था। फिर इजराइल के बड़े बैंक लेओमी की एक कंपनी के सीईओ ट्विस्ट मानिस की पत्नी कॉकपेट यानी पायलट का जो कमरा होता है उसके पास अपनी बेटी का वेट करती है। बेटी जो वाशरूम के अंदर थी। इसी वक्त कॉकपेट के अंदर से चीखें आती है। उन्होंने पास बैठे फ्लाई दुबई के एक दूसरे पायलट से चिल्ला कर कहा कि जल्दी अंदर आओ। अंदर ओमान का कोपायलट वहां पर इंडियन पायलट पर जो उसका कैप्टन था चाकू से लगातार वार करा था और जैसे ही चाकू से वार हुआ जो विमान था वो गिरने लगा क्योंकि कंट्रोल खो गया था। उड़ानों पर नजर रखने वाली वेबसाइट फ्लाइट रडार 24 के डाटा के मुताबिक इजराइल के वक्त से 8:21 पर विमान 34,000 फीट से अचानक से नीचे गिरा। फिर झटके से उठा और दोबारा गिरने लगा। करीब 12 मिनट में वो 15,000 फीट के आसपास था। अब आप सोच कर देखिए क्या हालत होगी। उस जमान में 27 बच्चे थे। 27 बच्चे उनमें से 16 साल के पेलेग ने बाद में बताया कि उस वक्त सिर्फ हर कोई ईश्वर को याद कर रहा था। लोग अपनी गलतियों की माफी मांग रहे थे। वो प्रार्थना कर रहे थे, दुआ कर रहे थे कि प्लीज हमें जिंदा रहना, बचा लो। और जब यह सब कुछ हो रहा था तो सारी दुआओं को मुकम्मल करना सिर्फ एक इंसान के हाथ में था। यह चीखों के बीच में दरवाजा खुलता है। फ्लाई दुबई के दूसरे पायलट एक साथ अंदर घुसते हैं। और इसी में यानिव हायून नाम याद रखिएगा जो पेशे से प्लंबर है वो घुस जाते हैं। बाद में इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन याू के साथ उनका वीडियो भी आया। खून से वो लथपत थे। उसी लथपथ खून वाली शर्ट में वो अपने मुल्क के सबसे बड़े व्यक्ति से मुलाकात करने गए और बताया कि अंदर दोनों सीट खाली थी। एक पायलट नीचे पड़ा था। हमलावर कंट्रोल पर झुक कर विमान गिराने में लगा था। यानि जाते हैं उसकी गर्दन पकड़ते हैं और घसीट कर बाहर निकालते हैं। खुद कंट्रोल पकड़ कर पीछे खींचते हैं। नेतन याू ने हैरानी से पूछा कि आपको कैसे पता था कि उसे खींचना है? उनका यह जवाब था कि मैं मेडे देखता हूं। मीडिया हम आपको बता दें कि हवाई हादसों पर बना एक टीवी शो है और यह जवाब बहुत वायरल हो गया क्योंकि एक प्लंबर ने ना सिर्फ उस को पायलट को पकड़ कर बाहर निकाला बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि प्लेन जो है जो नीचे गिर रहा है उसको कैसे ऊपर उठाएं और यह सब कुछ इसलिए क्योंकि वो एक टीवी शोज़ देखा करते थे। अब यह भी अपने आप में कमाल है कि यार कई बार जो चीजें आप यूं ही करते हैं वो आप पर कितने काम आ जाती है। इन जनाब ने उनसे बाहर निकाला। बाहर दांत के डॉक्टर वहां पर मौजूद थे और उनके साथ श्रोता मौजूद थे। आसफ मौजूद थे

और इन सब ने वो जो को पायलट था, यह उस पर टूट पड़े। सीट के हेडफोन के तारों से उसके हाथ-पांव बांधे। वो बार-बार कोशिश करता रहा अपने आप को निकालने की। उसे पूरी तरह काबू करने में 20 से 25 मिनट लग जाते हैं। फिर वहीं पर फ्लाई दुबई के ही एक एक्स्ट्रा पायलट ने कंट्रोल को संभाला और इजराइल ने अपने फाइटर जेट आसमान में भेज दिए। करीब डेढ़ घंटे बाद सऊदी अरबिया के शहर तबूक में यह प्लेन जो है उतरता है और जैसे ही यह प्लेन लैंड करता है यह सब एक साथ गाना गाने लगते हैं। इजराइली लोग जो है वो अपना गाना गा रहे थे कि हम इसराइल खाई जिसका मतलब है कि इजराइल के लोग जिंदा है। यह तस्वीर रोंगटे खड़े करने वाली है। यह कहानी जो है यह अपने आप में हस्तप्र करने वाली है। लेकिन ये कहानी यह भी बताती है कि 25 साल पहले जो एतहाद बरता गया था जो दरवाजा बचाने के लिए बनाया गया था इस बार वही दरवाजा मारने के लिए वजह बन सकता था। हां जी। यह कहानी 25 साल पहले शुरू होती है 11 सितंबर 2001 को जब 19 आतंकवादी अमेरिका के चार यात्री विमानों में चढ़े। उनके पास बंदूक तक नहीं थी। छोटे-छोटे चाकू थे, बॉक्स कटर थे यानी गत्ता काटने वाला ब्लेड और कॉकपेट के दरवाजे तब कमजोर होते थे जिसे जोर लगाकर खोला जा सकता था। तब आतंकवादियों ने पायलट को हटाया था और तीन विभाग न्यूयॉर्क वाशिंगटन की इमारतों से टकरा गए थे। एक खेत में गिर गया था और करीब 3000 लोग मारे गए थे। उस घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। पूरी-पूरी दुनिया को। इसके बाद दुनिया ने सबक लिया था कि कॉकपेट के दरवाजे को इतना मजबूत करो कि बाहर वाला अंदर आ ही ना पाए। अमेरिका ने अप्रैल 2003 तक हर यात्री विमान में ऐसा दरवाजा जरूरी कर दिया था जिस पर धक्के, गोली या फिर छोटे धमाके का भी असर ना हो। और बाकी दुनिया ने भी फिर यही किया। बाहर से क्रू कोड डालकर अंदर आने की इजाजत मांग सकता है। लेकिन अगर अंदर पायलट एक बटन घुमा दे तो क्रू के लिए भी दरवाजा नहीं खुलेगा। आप यूं समझिए जैसे घर की कुंडी अंदर से लगी हो, बाहर वाला कितना भी पीटे अंदर का दरवाजा इतना मजबूत कि वो नहीं खुलेगा। और इसी वजह से हर आदमी यह मान कर बैठा था कि यह बहुत सेफ है, सिक्योर है। क्योंकि लोग यह मानते थे कि प्लेन में खतरा जो आएगा वो हमेशा बाहर से आएगा। अंदर जो पायलट है उस पर किसी ने डाउट ही नहीं किया और यही सोच सबसे कमजोर कड़ी निकली। हालांकि ये पहली बार नहीं है। मार्च 2015 में भी जर्मन विंग्स नाम की एयरलाइन है। कैप्टन थोड़ी देर के लिए बाहर गया और को-पायलट ने अंदर कुंडी लगा ली। कैप्टन बाहर से दरवाजा पीटता रहा। अंदर से जवाब नहीं आया। इसके बाद को पायलट ने विमान को जानबूझकर पहाड़ों से टकरा दिया था। विमान में सवार सभी 150 लोग मारे गए थे और उसके बाद कई एयरलाइन ने नियम बनाया कि कॉकपिट में कभी कोई अकेला नहीं रहेगा। इस बार भी फ्लाई दुबई की फ्लाइट में यही कमी दिखाई पड़ी। यहां कॉकपिट में दो लोग थे और खतरा उन्हीं दो में से एक से था। यानी यह नियम अकेलेपन को रोकता है। लेकिन इरादे को नहीं। मेरी नजर में उस दिन दरवाजा फेल नहीं हुआ था। वो ठीक वैसे ही काम करता जैसा बनाया गया था। फेल वो भरोसा हुआ था जिस पर यह सिस्टम टिका था। फेल वो भरोसा हुआ था जिसके भरोसे 174 लोग उस फ्लाइट में बैठे थे। कुल मिलाकर इस घटना में बचने का सिर्फ एक रास्ता था कि अंदर की कुंडी खुलेगी जो आदमी चाकू खा रहा था तो बाहर वाले अंदर आएंगे बचा सकते हैं। अगर वो कुंडी नहीं खुलती तो चाहे जो कर लेते इजराइल, अमेरिका, दुबई वाले कुछ भी कर लेते यह प्लेन उड़ जाता और सब के सब मारे जाते। इसीलिए आज नेतन याू कह रहे हैं कि गिरने से पहले क्या दरवाजा खुला और जवाब मिला हां और फिर नेतन याू ने खूब तारीफ की। डॉनल्ड ट्रंप ने खूब तारीफ की। प्रधानमंत्री मोदी ने खूब तारीफ की और ये तारीफ बनती भी है क्योंकि खून से लथपथ आदमी इतने विवेक में था कि उसे यह एहसास था कि मुझे वो दरवाजा खोल देना। अगर मैं वो दरवाजा खोल ले गया तो हम सब बच जाएंगे। और यही हुआ। स्मिथ गिरे वो घायल हैं। खून से लथपत हैं। लेकिन दरवाजा खोल कर गिरे और यहीं से उन्होंने दुनिया को बचा लिया।

हालांकि एक सवाल दुनिया के मन में है कि भविष्य में कैसे भरोसा करेंगे कि पायलट हमें सुरक्षित रखेगा या मार गिराएगा। अहमदाबाद प्लेन क्रैश में भी मानसिक तनाव की बात सामने आई थी। हमने एक उदाहरण पहले आपको दिया और यह कहानी पहले भी हुई है। साल 1999 में इजिप्ट एयर की फ्लाइट समंदर में गिरती है। 217 लोग मारे आते हैं। अमेरिका की जांच एजेंसी ने तब कहा कि को पायलट ने उसे जानबूझकर गिराया। इजिप्ट आज तक ये बात नहीं मानता। लेकिन सवाल तो है कि इसका इलाज क्या है? इलाज कई बार कॉकपेट में बैठा दूसरा इंसान होता है कि एक इंसान अगर अपने विवेक से जाता है तो दूसरा इंसान उसे बचा सकता है। इस बार यह भारतीय पायलट थे भारतीय पायलट स्मिथ। भारतीय पायलट स्मिथ की कहानी नीरजा जैसी है। वो नीरजा जिन्होंने अपनी जान गवा कर हिंदुस्तान का नाम रोशन किया था और वो स्मिथ जिन्होंने जान पर खेलकर यात्रियों की जान बचाई और हिंदुस्तान का नाम रोशन किया। और तभी तो आज इजराइली इस पायलट को सैल्यूट कर रहे हैं। इजराइल के डॉक्टर जो इस फ्लाइट में मौजूद थे श्रोता वो कहते हैं कि जब मैं स्मिथ के पास गया तो मैं उसको पायलट से लड़ने गया था। लेकिन मैंने देखा कि स्मिथ के सिर से खून बह रहा था। वो कह रहे हैं कि मैं हैरान हूं कि उन्होंने कैसे अपने आप को उस वक्त काबू में रखा, दरवाजा खोला और इसी घटना के बीच में लोगों को स्मिथ का वो पॉडकास्ट भी याद आया। स्मिथ साहब जो है वो 39 साल के हैं। दो बच्चों के पिता हैं। पिछले साल एक पडकास्ट में स्मिथ साहब ने कहा था कि कैबिन क्रू भले सर्जरी करना ना जानता हो लेकिन आपकी जान बचा सकता हो और एक साल बाद यही बात सामने आई। एक दांत के डॉक्टर ने उनकी जान बचाने में हेल्प की। हैरानी की बात ये है कि स्मिथ पायलट बनने वाले थे ही नहीं। वो मुंबई के गुजराती परिवार से आते हैं जिसका टेक्सटाइल का बिजनेस है। इसलिए पहले उन्होंने टेक्सटाइल और फिर मैनेजमेंट ने पढ़ाई की। 19 साल की उम्र में हवाई जहाजों से जुड़े एक सेमिनार ने उनका रास्ता बदला। फिर वो वहां से न्यूजीलैंड गए। ट्रेनिंग के बाद 11 साल से ज्यादा स्पाइस जेट में काम किया। नए पायलट को उड़ाना सिखाया और फिर जून 2022 में कैप्टन बनकर वो फ्लाई दुबई पहुंच गए। तकरीबन 10,000 घंटे की उड़ान का उनके पास एक्सपीरियंस है। यानी 400 दिन से ज्यादा लगातार आसमान में। फिलहाल स्मिथ साहब की सर्जरी हो चुकी है। सऊदी अरेबिया में इंडियन एंबेसी यानी भारतीय दूतावास के मुताबिक उनकी हालत ठीक है। उनके माता-पिता दुबई से सऊदी अरब पहुंच गए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे बातचीत की है। उनके माता-पिता को साहस दिया है। हिंदुस्तान में भी लोग उनके परिवार के बारे में लगातार बात कर रहे हैं और भारत के प्रधानमंत्री ने भी कहा कि यह परिवार हीरो का परिवार है। लेकिन स्मृति कहानी नीरजा की कहानी याद दिलाती है। अब नीरजा की कहानी आपको समझना है तो आपको थोड़ा पहले चलना पड़ेगा क्योंकि आज जो कुछ हुआ है यह 5 सितंबर 1986 को भी हुआ था। तब भी एक विमान था तब भी आतंकवाद था। तब भी एक भारतीय की हिम्मत थी। और इसीलिए हम कह रहे हैं कि यह कहानी हिंदुस्तान ने पहले भी देखी है। 5 सितंबर साल 1986 को पाकिस्तान ने कराची एयरपोर्ट पर खड़ी पैन एम की फ्लाइट 73 में चार आतंकवादी बंदूक लेकर घुस गए थे। विमान में 360 यात्री थे। जिनमें 91 भारतीय थे। क्रू में थी 22 साल की नीरजा जो चंडीगढ़ में पैदा हुई। मुंबई में बलि बढ़ी। नीरजा ने सबसे पहले कॉकपिट को खबर दी। पायलट ऊपर ही खिड़की से निकल गए ताकि आतंकी विमान उड़ा ही ना सके। आतंकी अमेरिकन यात्रियों को ढूंढने के लिए पासपोर्ट मांगने लगे तो नीजा ने बाकी क्रू से उनके पासपोर्ट छिपा दिए। करीब 17 घंटे बाद अंधेरे में आतंकवादी गोलियां बरसाने लगे। नीजा ने इमरजेंसी का दरवाजा खोला। लोगों को बाहर निकाला। वो चाहती तो सबसे पहले उस दिन कूद कर अपने आप को सेव कर सकती थी। लेकिन उन्होंने तीन बच्चों को गोलियों से बचाया और गोलियों का निशाना बन गई। अपने 23वें बर्थडे से सिर्फ दो दिन पहले नीरजा दुनिया को छोड़कर चली गई थी और बाद में भारत ने उन्हें अशोक चक्र सम्मान दिया था। यह सम्मान पाने वाली वह पहली भारतीय महिला थी। यही कहानी इस बार स्मिथ की थी। साल 1986 में निरजा की खबर पर कॉकपिट खाली हुआ ताकि आतंकवादी विमान ना उड़ा पाएं। 2026 में स्मिथ ने कॉकपेट खोला ताकि लोग अंदर आकर हमलावर को रोक सकें। 40 साल की दूरी दो अलग विमान। दोनों बार फैसला कॉकपिट पर हुआ और दोनों बार उस फैसले के पीछे एक हिंदुस्तानी खड़ा था। नीरजा के विमान में ज्यादातर यात्री दूसरे देश के थे और स्मथ के विमान में भी ज्यादातर यात्री इजराइल के थे। दोनों बार एक भारतीय ने दूसरे देशों के लिए अपने खून को बहाया। फर्क बस इतना है कि नीरजा वापस लौट कर नहीं आई और स्मिथ आज अस्पताल में ठीक होने की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन जब स्मिथ की हम बात कर रहे हैं तो एक सवाल मेरे मन में आता है कि फ्लाई दुबई में जिस को पायलट ने 174 यात्रियों की जान लेने की कोशिश की। उसमें हीरो कौन है? यह हम सब जानते हैं। लेकिन वो विलेन कौन है? ओमान का वो पायलट कौन है जिसने जिहादी मानसिकता के लिए 174 लोगों की जिंदगी दांव पर लगाई, मारने की कोशिश की। क्यों कोई भी सरकार दुबई की सरकार या बाकी सरकारें उसका नाम नहीं बता रही? क्यों ऐसा हो रहा है कि उसके बारे में बातें छिपाई जा रही है? क्यों सिर्फ इतना निकल कर आ रहा है कि ओमान का है? क्योंकि कहानी जो अब तक आई है उसके मुताबिक 8 से 9 महीने पहले यह आदमी फ्लाई दुबई में आया था। इस वक्त सऊदी अरेबिया में उससे पूछताछ की जा रही है। क्या दुनिया भर में ओमान की बदनामी के लिए यह छिपाया जा रहा है? और क्यों दुनिया को इसका नाम नहीं पता होना चाहिए? क्यों? यह सवाल मेरे मन में आ रहा है कि क्या वह अकेला था या इसके पीछे कुछ और लोग थे? उसे ट्रैप किया गया था। इजराइल ने जो खबर दी है वो यह है कि एक कट्टर जिहादी मानसिकता का यह व्यक्ति था। लेकिन इजराइल को भी उसका नाम अब तक या तो पता नहीं है या उसे बताने से मना कर दिया गया है। लेकिन दुनिया इस नाम को तलाशने की कोशिश कर रही है कि कौन था। इजराइल की ट्रांसपोर्ट मंत्री मेरी रेगव ने सवाल उठाया। उनका कहना है कि फ्लाई दुबई के साथ उनका एक समझौता था कि इजराइल आने वाले पायलट सिर्फ उन देशों से हो जिनके इजराइल से रिश्ते बेहतर हो। ओमान के इजराइल से कोई सरकारी रिश्ते नहीं है। और यही सवाल कि फिर इस फ्लाइट के कॉकपिट तक वो पहुंचा कैसे? हथियार पर भी सवाल है।

यात्री कहते हैं कि चाकू था लेकिन अब तक एजेंसी ने नहीं किया। ये सारे सवाल हैं कि क्या इरादा था? किस सोच से था? क्या वो इजराइल की लड़ाई को लेकर था? क्या यह लड़ाई वो जो इजराइल और बाकी खाड़ी देशों में चलती है यानी यहूदियों और मुस्लिम देशों में उसकी वजह से था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोन्ड ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि या तो वो आतंकवादी था या सनकी था। फ्लाई दुबई आज भी कहती है कि वजह किसी को पता नहीं। जांच पूरी होने तक इजराइल की सारी फ्लाइट्स रोकी गई है। अब क्या पक्का है क्या नहीं यह साफ समझ लीजिए। देखिए इस घटना में एक चीज जो पक्की है वो ये कि हिंदुस्तान के कैप्टन स्मिथ ने आज दुनिया में हिंदुस्तान का मान बढ़ाया। 174 लोगों की जान बचाई। घायल होकर दरवाजा खोला। विमान जो है वो बाद में तबुक में उतरा। सभी यात्री जीवित हैं। सुरक्षित हैं। जांच में हमलावर का नाम क्या है? अब तक सामने नहीं आया है। हथियार कॉकपिट कैसे पहुंचे यह नहीं पता चला है। और ओमान की इजराइल वाली फ्लाइट में वो कैसे क्यों बैठा यह भी नहीं पता। क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? यह जांच का विषय है? क्या यह व्यक्ति आतंकवादी मानसिकता का है? या इसका दिमाग खराब था या जो इजराइल कह रहा है कि जिहादी मानसिकता के चलते इसने किया है? ये सारे जवाबों का इंतजार हम करेंगे। लेकिन एक सवाल जो हिंदुस्तानी होने के मेरे मन में आता है। फ्लाई दुबई का अगर वो जहाज गिर जाता जिसमें ओमान के कोपायलट ने हिंदुस्तानी पायलट पर हमला किया था तो फिर इसका क्या असर होता? एक बार यह सोचना जरूरी है। देखिए ठीक-ठीक क्या होता यह कोई बता नहीं सकता। लेकिन कुछ बातें हैं जो समझने लायक है। विमान यूएई की एयरलाइन कंपनी का था। यात्री इजराइल के थे। हमलावर ओमान का था। दुबई से इजराइल की ये फ्लाइट 2020 के अब्राहम अकॉर्ड्स के बाद शुरू हुई थी। जब यूएई और इजराइल ने बरसों की दूरी खत्म की थी और यह विमान सऊदी अरेबिया के उसी इलाके की तरफ जा रहा था जहां भारत का एक बड़ा सपना गुजर रहा है। आईmक यह भारत से यूएई, सऊदी अरेबिया, जॉर्डन और इजराइल होते हुए यूरोप तक रेल, सड़क और बंदरगाहों का एक बड़ा गलियारा है। इसकी नीव 2023 में दिल्ली के G20 में रखी गई थी। अगर यह हादसा हो जाता तो यह इन देशों के रिश्तों में दरार डाल सकता था और उसकी चोट इस सपने तक पहुंच सकती थी। भारत के लिए फ्लाई दुबई के जहाज में अगर घटना हो जाती तो एक और डर था इल्जाम का। देखिए अभी सब जिंदा है। लेकिन फ्लाइट दुबई का को पायलट जो ओमान का जिहादी आदमी था। अगर वह अपने मकसद में कामयाब हो जाता तो शायद इसे दो पायलट का आपसी झगड़ा बता दिया था। सोशल मीडिया पर नामों को लेकर चर्चा होती। भारत ने यह दर्द पहले भी झेला है। जून 2025 में अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान AI171 गिरा।

260 लोग मारे गए और भारतीय पायलट की तरफ इशारे शुरू हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि देश में कोई नहीं मानता कि गलती पायलट की है। फ्लाई दुबई का जहाज अगर हादसे का शिकार होता तो हिंदुस्तान को एक डर इल्जाम का भी होता। इल्जाम कि हिंदुस्तानी पायलट ओमानी पायलट आपस में भिड़ गए और इस हादसे को अंजाम दिया। जबकि कहानी असल में बिल्कुल उलट थी। ये सच नहीं थी। और हिंदुस्तान इस तरह के किसी भी आरोप प्रत्यारोप से बच गया और यह डर हवा में नहीं है। इसकी झलक इसी हादसे में दिखाई पड़ी है। हमले के कुछ ही घंटों में ईरान की न्यूज़ एजेंसी फार्स ने बिना किसी सबूत के कहानी चलाई कि इजराइल किसी विमान पर हमला कर ईरान पर इल्जाम डालने की सोच रहा है। सोशल मीडिया पर यह दावा करने वाली एक पोस्ट 15 लाख से ज्यादा बार देखी गई कि इजराइल यह इंटेंशनली कर रहा था। एआई से बना बीबीसी का एक नकली वीडियो घूमने लगा जिसमें इस हमले में भारतीय अफसरों और इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद का हाल बताया गया। जब सब जिंदा थे सच सामने था तब यह हाल है। आप सोचिए विमान गिरने पर ऐसी कहानियों को रोकना कितना मुश्किल होता और ऐसा पहले भी हुआ है।

91 अमेरिका में 25 साल बाद भी कई लोग मानते हैं कि वो हमला अमेरिका ने खुद करवाया था। 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमास के हमले के बाद भी ऐसी कहानियां चली थी कि इजराइल ने खुद करवाया। जानबूझकर होने दिया। 2611 के बाद तो 2010 में किताब छपी थी जिसमें कहा गया था क्या यह हमला आरएसएस की साजिश है? जबकि भारत की अदालत ने पाकिस्तान से आए लश्कर तयबा के आतंकवादियों को दोषी माना। कसाब को फांसी हुई। मुझे लगता है कि हर बार ऐसी कहानियों का एक तरीका होता है कि जो हमला कर रहा है उससे ध्यान हटा दो। जिस पर हमला हुआ है उसको कटघरे में खड़ा कर दो। और ये कहानियां चलती इसलिए है क्योंकि हर मुल्क में कुछ लोग होते हैं जो ऐसी कहानियों को बढ़ावा देते हैं। जैसे हिंदुस्तान में आज बहुत सारे लोग हैं जो कैप्टन स्मिथ की तारीफ करने से संकोच कर रहे हैं। बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो ओमानी पायलट पर बात करने संकोच करेंगे। वो सही को सही गलत को गलत नहीं बोल पाते। वो आतंकवाद को आतंकवाद नहीं बोल पाते। वो आतंकवाद में गलत कामों में भी जात धर्म या इलाका देखकर बात करते हैं और इसीलिए डर लगता है कि अगर फ्लाई दुबई का यह विमान गिर जाता तो शायद पूरा सच भी उसके साथ दफ्त हो जाता। जैसे इजिप्ट एयर का सच आज तक बाहर नहीं आया। इसी तरह इस बार भी शायद यही कहानी होती। जैसे 91 को लेकर शक आज तक बरकरार है। वै

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