30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की फ्लाइट में हंगामा मच गया। फ्लाइट के दौरान को-पायलट ने कॉकपिट में मौजूद भारतीय कैप्टन, कैप्टन स्मिथ मिशार पर हमला कर दिया। घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मिथ ने हमलावर को खुद पर हावी नहीं होने दिया और बेहोश होने से पहले कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसी वजह से कुछ यात्री अंदर आ सके, लेकिन तब तक प्लेन नोज-डाइव करने लगा था। प्लेन लगभग 14,000 फीट नीचे गिर चुका था। 174 लोगों की जान अधर में लटकी थी।
लेकिन आखिरी पल में यानिव नाम के एक प्लंबर ने हाईजैकर को खींचकर हटाया और खुद प्लेन का कंट्रोल संभाल लिया। इससे प्लेन, भले ही एक पल के लिए ही सही, स्थिर हो गया और यात्रियों की जान बच गई।जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यानिव से पूछा कि प्लंबर का काम करते हुए उसने प्लेन संभालना कैसे सीखा? तो उसने कनाडाई टीवी डॉक्यू-सीरीज “मेडे” को इसका श्रेय दिया। इस वीडियो में हम आपको इसी सीरीज के बारे में बताएंगे।”मेडे” एक तरह की डिस्ट्रेस कॉल है जो फ्रेंच शब्द “m’aider” से बनी है। शाब्दिक रूप से इसका मतलब होता है “मुझे बचाओ” या “मेरी मदद करो”। इसीलिए जब भी कोई प्लेन या जहाज गंभीर खतरे में होता है, तो उसका कैप्टन तीन बार “मेडे, मेडे, मेडे” चिल्लाता है। उनकी आवाज रेडियो सिग्नल के जरिए नजदीकी ऑपरेटरों और दूसरे जहाजों तक पहुंचती है।
इससे जल्द से जल्द मदद पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।कनाडा में बनी डॉक्यूमेंट्री टीवी सीरीज “मेडे” भी इसी कॉन्सेप्ट के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें एयर क्रैश, फ्लाइट के दौरान इमरजेंसी, हाईजैकिंग और कई दूसरी घटनाओं को कवर किया जाता है। इसमें यह भी दिखाया जाता है कि हादसा आखिर हुआ कैसे। हादसे के वक्त प्लेन के अंदर क्या हो रहा था और पायलटों ने हालात को काबू में करने के लिए क्या किया।
अब तक इसमें सैकड़ों हादसों की कहानियां दिखाई जा चुकी हैं। खास बात यह है कि सीरीज में दिखाई गई जांच, गवाह और एक्सपर्ट्स सभी असली होते हैं।मेडे का प्रीमियर 3 सितंबर 2003 को हुआ था। इसे टोरंटो स्थित सिनेफ्लिक्स प्रोडक्शन कंपनी ने प्रोड्यूस किया था। अब तक इसके 24 से ज्यादा सीजन रिलीज हो चुके हैं। जो दुनिया भर में नेशनल जियोग्राफिक चैनल पर प्रसारित होते हैं। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग देशों में शो के अलग-अलग नाम हैं। यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में इसे “एयर क्रैश इन्वेस्टिगेशन” कहा जाता है। वहीं, अमेरिका में यह “एयर डिजास्टर्स” और “एयर इमरजेंसी” के नाम से टेलीकास्ट होता है। भारत में आप इसे जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम कर सकते हैं।मेडे 20 साल से ज्यादा समय से टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। शो की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पायलट कम्युनिकेशन, कॉकपिट कंट्रोल्स और हवाई जहाजों में तकनीकी खराबियों को बहुत ही सरल तरीके से समझाता है।
यानी, जब व्यास ने शो देखा होगा, तो शायद बहुत ही कैजुअली देखा होगा। देखते वक्त उन्होंने शायद यह भी नहीं सोचा होगा कि ये एपिसोड कभी उनकी जिंदगी बदल सकते हैं। लेकिन देर-सवेर, मेडे से सीखे गए सबक काम आ ही गए, जिसकी वजह से वो फ्लाई दुबई के 174 यात्रियों की जान बचा पाए।फिलहाल इस वीडियो में इतना ही। ।