एक फ्लाइट तकरीबन 200 पैसेंजर्स इस फ्लाइट को क्रैश कराने की कोशिश करता एक पायलट और इस क्रैश से इनोसेंट पैसेंजर्स की जान बचाने वाला एक इंडियन पायलट। FZ1073 एंड दैट इज़ द कोपायलट ऑफ इंडियन ओरिजिन वेरी ब्रेव वेरी ब्रेव सर्वाइव दैट अटैक एंड मैनेज टू लैंड द प्लेन। प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी इस आल्सो कॉल्ड स्मिथ मच अ हीरो प्रेजिंग हेंस करज एंड हैज़ सेड दैट इंडियास प्राउड ऑफ हिम। इस घटना का जो सच सामने आया है उससे पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ गया क्योंकि प्लेन [संगीत] में जिस पायलट पर चाकू से हमला हुआ क्योंकि वो इस प्लेन को क्रैश होने से बचा रहा था वो पायलट जिसने सबकी जान बचाई वो भारतीय दोस्तों कल एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। सोचिए आप 300 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे हैं। एक हवाई जहाज में बैठे हैं। उस प्लेन का पायलट प्लेन को उड़ा रहा है और वहीं अचानक उसका को पायलट उसी पायलट पर चाकुओं से अटैक कर देता है। जिस पायलट पर लगभग 200 पैसेंजर्स की सुरक्षा का जिम्मा था, उसने अपने ही पायलट पर 15 बार चाकुओं से हमला कर दिया। सुनने में ये किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म का सीन लगता है। लेकिन यकीन मानिए यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। कल एक ऐसा इंसिडेंट हुआ जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया और एिएशन इंडस्ट्री के इतिहास में एक नया और भयानक पन्ना जोड़ दिया। कल का दिन फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफेड 1073 के ट्रैवलर्स के लिए एक आम दिन जैसा ही शुरू हुआ था। दुबई से तेल लवीफ जाने वाली इस फ्लाइट में 150 से अधिक इजरायली पैसेंजर सवार थे। फ्लाइट बिल्कुल नॉर्मल तरीके से टेक ऑफ हुई और अपने रास्ते पर थी।
लेकिन बीच हवा में अचानक से सब कुछ बदल गया। जहाज ने एक बेहद खतरनाक डिप लिया। जहां फ्लाइट रडार के डाटा के हिसाब से प्लेन सिर्फ 1 मिनट के अंदर लगभग 14,000 फीट नीचे आ गया। यह हवा के किसी आम टर्बुलेंस से बहुत अलग और खौफनाक था। इसी दौरान जहाज के एक इमरजेंसी कोड और उसके बाद हाईजैक का कोड फ्लैश हुआ और फिर यह प्लेन फ्लाइट ट्रैकिंग एप से पूरी तरह गायब हो गया। इजराइल में तुरंत हड़कंप मच गया। सिचुएशन की गंभीरता को देखते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्या और रक्षा मंत्री को एक इमरजेंसी सिक्योरिटी मीटिंग बुलानी पड़ी। सस्पेक्टेड किडनैपिंग की न्यूज़ मिलते ही इजराइल ने तुरंत अपने फाइटर जेट्स हवा में भेज दिए। यह एक ऐसी घटना थी जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को बेचैन कर दिया और ग्लोबल एवीएशन सेक्टर की सांस अटका दी। अगर ये जहाज क्रैश हो जाता तो एक बहुत बड़ी ट्रेजडी होती जिसमें तकरीबन 200 लोगों की जान जा सकती थी जिसमें तकरीबन 25 से ज्यादा बच्चे थे। खुशकिस्मती से वहां उड़ रहे प्लेन को सऊदी अरब में सुरक्षित लैंड करवाने में सक्सेस मिली। लेकिन लैंडिंग के बाद जो सच्चाई सामने आई उसने सबको और भी ज्यादा चौंका दिया। जब जहाज सऊदी अरब में सेफली लैंड हुआ तो ये क्लियर हो गया कि ये कोई आम हाईजैक नहीं था। जहां कोई बाहर से आकर प्लेन को कंट्रोल करता। यह कॉकपिट के अंदर की ही एक खौफनाक घटना थी। इजराइली मीडिया और बाकी रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरी घटना दोनों पायलट्स के बीच हवा में हुई एक हाथापाई के कारण हुई। इज़रायल के चैनल N12 ने भी इसी बात की रिपोर्ट दी कि सेफ्टी असेसमेंट और पैसेंजर्स की गवाही के आधार पर को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से कई बार वार किया और फिर क्रू और पैसेंजर्स ने कॉकपिट का दरवाजा तोड़कर उसे रोका। रिपोर्ट्स की मानें तो को पायलट कैप्टन को चाकू मारने के बाद प्लेन को लगभग 200 पैसेंजर्स के साथ क्रैश करना चाहता था। लेकिन पैसेंजर्स, क्रू और कैप्टन की बहादुरी और सूझबूझ से यह बड़ा हादसा टल गया। वहीं एक और रिपोर्ट की मानें तो फ्लाइट में मौजूद दूसरे पायलट और इजराइली पैसेंजर्स ने बीच बचाव किया और इस हादसे को रोका। एक सीनियर अधिकारी के अनुसार ऐसा लग रहा है कि हमलावर का इरादा प्लेन को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेकर पैसेंजर समेत उसे क्रैश करने का था। अब सवाल यह है कि हमलावर कौन था? C1-14 न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार प्लेन को क्रैश करने की कोशिश करने वाला पायलट ओमान का नागरिक है। जबकि दूसरा पायलट एक भारतीय है जिनका नाम है समित मच्छर बताया जा रहा है।
उनकी हालत अभी नाजुक बताई जा रही है। लेकिन दुनिया के सामने एक बड़ा एग्जांपल सेट हुआ है कि एक पायलट कैसे इतने सारे लोगों की जान बचा सकता। फिलहाल उस ओमानी को पायलट सस्पेक्ट से पूछताछ की जा रही है और अधिकारी उसकी पहचान और बैकग्राउंड की जांच कर रहे हैं। अब इस इंसिडेंट के बाद इजराइल ने इसे एक टेरर इंसिडेंट डिक्लेअर कर दिया है। सवाल यह है भाई कि आखिर 30,000 से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर दो पायलट्स के बीच हुए एक वायलेंट झगड़े को इजराइल ने सीधे टेरर अटैक का नाम क्यों दिया? इसके पीछे कुछ बहुत ठोस आधार और शुरुआती जांच के नतीजे हैं जिन्होंने इजराइयली एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इजराइल के न्यूज़ चैनल एन-12 की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली अथॉरिटीज़ ने इसे आतंकी हमला घोषित करने का फैसला सिक्योरिटी असेसमेंट और पैसेंजर टेस्टिमनी के आधार पर लिया है। जब क्रू मेंबर्स और इजराइयली पैसेंजर्स ने कॉकपिट द का दरवाजा तोड़कर को- को पायलट को काबू किया तो उन्होंने जो कुछ भी अंदर देखा और बाद में जांच एजेंसीयों को बताया। उससे साफ हो गया कि ये गुस्से में उठाया गया कदम या कोई दिमागी दौरा नहीं था। ये एक सोची समझी साजिश थी। किसी भी इंसिडेंट को आतंकी हमला मानने के पीछे सबसे बड़ी वजह इरादा यानी इंटेंट होता है। ILTV, इजरायल न्यूज़ की रिपोर्ट में एक सीनियर ऑफिसियल के हवाले से बताया गया है कि ऐसे पुख्ता सिग्नल्स मिल रहे हैं कि हमलावर का असली मकसद प्लेन को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में लेना और उसमें सवार सभी पैसेंजर्स के साथ उसे जानबूझकर क्रैश करना था। जब कोई आदमी सैकड़ों मासूमों की जान लेने के इरादे से प्लेन को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश करे तो इंटरनेशनल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड के हिसाब से वो आतंकवाद की कैटेगरी में ही आता है। पर ऐसे अटैक्स को ऐसे आतंकवादी घटनाओं को हमारे सिक्योरिटी एजेंसीज ने अलग-अलग तरीके से रोका है और देश को हमेशा सुरक्षित रखा है। हमारे इन्हीं जांबाज सीक्रेट सर्विस एजेंट्स और हमारे इन्हीं खुफिया जासूसों के बारे में। एक पॉडकास्ट में हमने बात की रिसेंटली अनुरुद्ध मित्र जी से जो कि एक बेस्ट सेलिंग ऑथर और एक फॉर्मर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट है। इस पॉडकास्ट में बहुत सारी चीजें हमने नई सीखी हैं और इंटरेस्टिंग लगेगा आपको भी ये पॉडकास्ट लिंक डिस्क्रिप्शन में दिया है जाकर जरूर देखना और इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करना। फिलहाल वीडियो में आगे बढ़ते हैं और फ्लाई दुबई की इस फ्लाइट के बारे में बात करते हैं। कई अपडेट्स के आधार पर इजराइल अब पूरी तरह से इस टेरर एंगल पर काम कर रहा है। इजराइयली एजेंसियां इस बात को हल्के में नहीं ले रही है। फिलहाल उस सस्पेक्ट को-पायलट जिसे ओमान का नागरिक बताया जा रहा है उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है और अधिकारी उसकी पहचान के साथ-साथ उसके बैकग्राउंड की बारीकी से जांच कर रहे हैं। ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वो किसी रेडिकल आईडियोलॉजी से अफेक्टेड था? क्या उसका किसी टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन से कोई लिंक है या ये लोन वुल्फ यानी अकेले किया गया कोई अटैक था। अब एक कॉमन सवाल ये है कि इजराइल क्यों इसके बारे में जांच कर रहा है? अभी ये प्लेन दुबई से सीधे इजराइल के शहर तेलवी के बेंगरेन एयरपोर्ट के लिए उड़ा था। किसी भी देश की नेशनल सिक्योरिटी का बुनियादी नियम होता है कि उसके एयरफेस की तरफ आ रहा कोई भी प्लेन अगर अजीब हरकत करता है तो वो सीधे उस देश की सोवनिटी और सिक्योरिटी के लिए खतरा बन जाता है।
अगर प्लेन को हाईजैक या क्रैश करने की प्लानिंग थी तो उसका अंतिम निशाना इजरायली जमीन या इजराइयली शहर भी हो सकता था। वहीं इस उड़ान में लगभग 200 यात्रियों में से 150 से ज्यादा केवल इजराइयली नागरिक सवार इंटरनेशनल कानून में पैसिव पर्सनालिटी प्रिंसिपल का सिद्धांत लागू होता है। जिसके तहत अगर विदेश में किसी देश के नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है तो उस देश के मामले की पूरी जांच करने और अपने नागरिकों की रक्षा के लिए कदम उठाने का उस देश को पूरा कानूनी अधिकार होता है। वहीं इजरायली अधिकारियों ने के अनुसार हमलावर को पायलट ने किसी दूसरे रूट की जगह तेल ओवी जाने वाली फ्लाइट को ही क्यों चुना? जिसमें बड़े नंबर्स में इजराइयली नागरिक सवार थे। क्यों? इजराइयली खुफिया एजेंसियां जैसे मुसाद और शेनबेट का प्राइमरी काम दुनिया भर में अपने नागरिकों के खिलाफ होने वाली आतंकी साजिशों को बेनकाब करना है। इजराइल ये पता लगा रहा है कि क्या ये हमला खासतौर पर इजराइयली नागरिकों को ग्रुप में मारने के ऑब्जेक्टिव से किया गया। एक सोची समझी क्या आईडियोलॉजिकल आतंकी साजिश थी? इसके बारे में पता लगाया जा रहा है। अब सबको ये पता चल गया है कि इजराइल का रिस्पांस बहुत ही तेज और सख्त था। हाईजैक कोड मिलते ही उन्होंने बिना समय गवाए फाइटर जेट्स हवा में भेज दिए। लेकिन इसमें कई जानकारी यह भी बोल रहे हैं कि कहीं यह वर्ल्ड वॉर 3 की तरह बढ़ती हुई कोई बड़ी घटना तो नहीं। जिओपॉलिटिक्स में एक सिद्धांत होता है डोमिनो इफेक्ट जहां एक छोटी सी घटना देशों के बीच ऐसा चैन रिएक्शन पैदा करती है जिसे रोक पाना संभव होता है। अगर हम आज की दुनिया के हालात देखें जहां रूस यूक्रेन युद्ध चरम पर है और मिडिल ईस्ट में इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच पहले ही टेंशन की स्थिति बनी हुई है। तो भगवान ना करे ये घटना अगर सक्सेसफुल हो जाती तो ये सचमुच दुनिया को एक भयंकर वॉर की तरफ धकेल सकती थी। सबसे पहले तो ये सीधे यहूदियों पर किया गया अटैक लगता। अगर ये प्लेन 150 इजराइलियों के साथ क्रैश हो जाता तो सबसे पहला असर इजराइल और गल्फ कंट्रीज के रिश्तों पर पड़ता। इजराइल में जबरदस्त जनता का गुस्सा होता और इजराइली सरकार अरब देशों के सिक्योरिटी सिस्टम पर सवाल उठाती। इससे अब्राहम अकॉर्ड्स रातोंरात टूट सकता था जिससे मिडिल ईस्ट वापस दशकों पुराने दुश्मनी के दौर में चला जाता। वहीं इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद इसे कभी भी एक दिमागी दौरे का नाम देकर इसकी फाइल बंद नहीं करेगी। ऐसा एक्सपर्ट्स का कहना है। इजराइल तुरंत इस ओमानी पायलट के तार किसी बड़े आतंकी नेटवर्क या सीधे तौर पर ईरान से जोड़ने की कोशिश करता है। कई लोगों का कहना है कि शायद मुसाद और इजराइल एजेंसियां इसकी जांच कर भी रही हो। अगर ये जांच में साबित हो जाता है या इजराइल ये दावा करता है कि इस पायलट को ईरान के इस्लामिक रेवोलशरी गार्ड कॉर्प्स या उनके सपोर्टेड गुटों ने रेडिकलाइज किया था तो इजराइल इसे अपने ऊपर सीधा वॉर मानता हमला मानता। इसके जवाब में इजराइल सीधे ईरान के न्यूक्लियर या मिलिट्री ठिकानों पर बमबारी कर सकता। उधर अगर इजराइल ईरान पर हमला करता है तो ईरान जवाब में स्टेट ऑफ़ हॉर्मोस को ब्लॉक कर देता। जहां से दुनिया का 20% से ज्यादा कच्चा तेल गुजरता है। तेल की कीमतें फिर से आसमान छूने लगती है जो अभी भी ज्यादा है। जिससे पूरी दुनिया की इकॉनमी में हाहाकार मच सकता। इजराइल की डिफेंस और तेल की सप्लाई लाइन को खोलने के लिए अमेरिका को मजबूरन इस वॉर में सीधे अपनी सेना उतारनी पड़ती और यहीं से यह वर्ल्ड वॉर का रूप ले लेता। अमेरिका और उसके वेस्टर्न एलाइज पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के युद्ध में फंस जाते। इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा रशिया को मिलता। अमेरिका का ध्यान और हथियार मिडिल ईस्ट में शिफ्ट होते ही रूस यूक्रेन पर एक डिसाइसिव और बड़ा हमला कर देता जिसके बारे में अब बताया जा रहा है कि रूस इस वॉर को रोकना चाहता। लेकिन अगर इस स्थिति में वॉर होती तो वो ऐसी लड़ाई होती जिसे रोकना यूरोप के लिए इंपॉसिबल होता। दूसरी तरफ चीन इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर ताइवान पर कब्जा करने की अपनी प्लानिंग को अंजाम दे सकता था क्योंकि अमेरिका एक साथ तीन मोर्चों पर लड़ने की स्थिति में नहीं है।
फर्स्ट वर्ल्ड वॉर की शुरुआत भी आर ड्यूक फर्डन की हत्या जैसी घटना से हुई थी। जिओपॉलिटिक्स में वॉर हमेशा सरहदों पर सेनाओं से टकराने से शुरू नहीं होती। कभी-कभी 3,000 फीट की ऊंचाई पर एक कॉकपेट में लिया गया वायलेंट फैसला भी पूरी दुनिया का नक्शा बदलने की ताकत रखता है। वहीं इस घटना का ग्लोबल एवीएशन सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा झटका और गंभीर वेकअप कॉल भी है। 91 के आतंकी हमलों के बाद पूरी दुनिया में हवाई ट्रेवल को सेफ बनाने के लिए कॉकपेट के दरवाजों को बुलेट प्रूफ और अंदर से लॉक होने लायक बनाया गया था। मकसद ये था कि कोई भी बाहरी कॉकपेट में घुसकर प्लेन पर कब्जा ना कर सके। लेकिन इस फ्लाई दुबई इंसिडेंट ने एिएशन सिक्योरिटी के सामने एक बिल्कुल नया और खतरनाक लूप उजागर किया है जिसे इनसाइडर थ्रेट कहा जाता है। अगर वो आदमी जिसके पास पहले से ही कॉकपिट का एक्सेस है जिसके पास प्लेन उड़ाने की पूरी ट्रेनिंग है और जिस पर यात्रियों की जान की जिम्मेदारी है वही अगर आतंकी बन जाए या सुसाइड मिशन पर निकल जाए तो आप उसे कैसे रोकेंगे? यह एक नया और बेहद खतरनाक टेररिज्म मॉड्यूल है। इसमें आतंकियों को हथियारों को सिक्योरिटी से छुपाकर अंदर ले जाने की कोई जरूरत नहीं है। प्लेन अपने आप में एक बहुत बड़ा हथियार बन जाता है। इस घटना के बाद दुनिया भर की एयरलाइंस और एवीएशन अथॉरिटीज को पायलट्स स्क्रीनिंग प्रोसेस पर दोबारा प्रोसेस करना पड़ेगा। काम करना पड़ेगा। पायलट्स की बैकग्राउंड चेकिंग, उनका रेगुलर साइकोलॉजिकल एनालिसिस और कॉकपिट के अंदर पायलट्स की हरकतों की मॉनिटरिंग पर अब पहले से कई गुना ज्यादा ध्यान देना होगा। सिक्योरिटी सिस्टम को ये सिक्योर करने के लिए नए तरीके खोजने होंगे कि कोई एक पायलट कभी भी प्लेन को पूरी तरह से खतरे में ना डाल सके। इस घटना ने साबित कर दिया कि सिक्योरिटी को लेकर कभी भी आंखें बंद करके नहीं बैठा जा सकता। खैर जब ये इंसिडेंट के बारे में आपको पता चला तो आपका क्या रिएक्शन था? क्या देखा, सुना और पढ़ा आपने और आपके हिसाब से यह कैसी घटना है? क्या सोचते हैं आप इसके बारे में? कमेंट करके जरूर बताइएगा। उस भारतीय पायलट को हम सलूट करना चाहते हैं जिसने अपनी जान जोखिम में डाली और सैकड़ों लोगों की जान बचाई। आज उन सारे परिवारों की प्रार्थना स्मित मच्छर के साथ है। उन पायलट के साथ है। बाकी दोस्तों, यह वीडियो सही लगी हो तो इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करना और डिस्क्रिप्शन में लिंक दिया है हमारे रिलेटेड पॉडकास्ट का। उसे भी जरूर देखना। हमारे देश की खुफिया एजेंसियां कैसे काम करती हैं और कैसे-कैसे मिशनंस को उन्होंने अंजाम तक पहुंचाया है। इसके बारे में हमसे बात करी बेस्ट सेलिंग ऑथर एंड फॉर्मर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट अनिरुद्ध मित्र जी ने। इनफैक्ट इस पॉडकास्ट के ट्रेलर के साथ आपको छोड़े जाता हूं। ट्रेलर एंजॉय करिएगा और पूरा एपिसोड भी जरूर देखिएगा। लिंक डिस्क्रिप्शन में दिया है इस एपिसोड का। पाकिस्तान में घुस के इंडियन एजेंसीज के लिए दाऊद को मारना बहुत मुश्किल है। ये भी माना जाता है कि बहुत सारे अननोन गन मैन का जो ऑपरेशन पाकिस्तान में हुआ वो दाऊद के थ्रू हुआ है। घर में घुस के मारेंगे ये जो फ्रेज है ये शायद डोबाल साहब से मिस्टर मोदी के सामने रखा गया था। 14 के बाद 14 के बाद जब इस लाइन को मिस्टर मोदी ने एक पॉलिटिकल रैली में यह हमारा सिद्धांत है हम घर में घुस के मारेंगे और मिस्टर राजनाथ सिंह ने इसी लाइन को इस्तेमाल किया था हमने आतंकवादियों को उनके घर में घुसकर मारा कंहर में इट इज मिस्टर अजीत डोबाल हु हैड टोल्ड दुल साहब कि पैसेंजर की सेफ्टी की बात तो दूर है हम लोग खुद सेफ नहीं है इस वक्त निजर का जो किलिंग हुआ उसके ऊपर आपने लिखा जी तो वो वो उसका कैसे वो कैसे एग्जीक्यूट हुआ? हाउ इट हैपेंड? देखिए मैंने तो फिक्शनल वर्शन लिखा है।
सो मैं कोई डेफिनेटली यहां पे आप रियल बता दीजिए। [हंसी] न्यू दिल्ली ने क्या किया? न्यू दिल्ली अटेंशन वहां से घुमा दिया। सो सडनली अ लॉट मोर अननोन गन मैन बिकम एक्टिव इन पाकिस्तान। इन पीओके। और यहां बहुत सारे लोगों को मारा गया। एंड इन अबाउट सिक्स टू सेवन मंथ्स टाइम दोज़ लीडर्स खिस्तानी लीडर्स इन कनाडा और यूएस थॉट कि खतरा टल गया। सो दे काइंड ऑफ़ कम केम आउट ऑफ द हाइडिंग और दे वंस अगेन बिकम पब्लिकली अ लॉट मोर एक्टिव। एंड देन वन डे व्हेन नेचर केम आउट ऑफ़ द गुरुद्वारा एंड ही वाज़ शॉट इनसाइड द कार ही वाज़ ट्रेवलिंग बाय। हमेशा तो टेररिस्ट पकड़कर उसको मारा थोड़ी जाता है। तो उनको फिर कल्टीवेट किया जाता है। एंड इट्स कॉल दे प्लेड बैक। कि अब तुम हमारे लिए काम करोगे। व्हेन यू जॉइन अ प्रोफेशन लाइक एस आप ये अच्छी तरह समझ-बूझकर जानकर जॉइ करते हैं [संगीत] कि जैसा ही मेरा यूटिलिटी खत्म हो जाएगा मेरा यूज़फुलनेस खत्म हो जाएगा तो मैं किसी के लिए कोई नहीं हूं। मोरारजी देसाई वाज़ ऑन द पेरोल ऑफ़ सीआईए एट 20000 यूएस डॉलर पर मंथ।
अगर पाकिस्तान के ऊपर हमें प्रेशर डालना है तो फोकस को शिफ्ट करना पड़ेगा। हाउ अबाउट वी अटैक देम? बॉर्डर पे आप लोग अटैक करो। फिर वो इधर यहां से उनका ध्यान हटाना पड़ेगा। इसका जब नाम मूसे वाला मर्डर केस में आ गया था तो ये भाग गया था यहां से और ये पाकिस्तान में जाके शट को मिल गया था आईएसआई से। एक्यूज़ ने बंदूक छीन के पुलिस को मारने की कोशिश की। ये तो बचपन से हम सुनते आ रहे हैं कहानी। और किसी पुलिस ऑफिस को मैंने पूछा भी था। आप हमेशा यही बोल दो कि उन्होंने ऐसे गोली पहले गोली चलाया। हमने तो सिर्फ रिटेलिएट किया। तो उन्होंने मेरे को बोला और क्या बोल सकते हैं हम? क्या ये बोले कि पहले गोली हमने चलाया? यूपी क्राइम सिंडिकेट का कनेक्शन आईएसआई से था और मनी लॉन्ड्रिंग खास करके अतिक अहमद का अतिक अहमद का ओके पर्टिकुलर अतिक अहमद परिकुलरिक बिल्कुल वो अफगानिस्तान वगैरह से आर्म्स आता था स्मगलिंग का और वो इंडिया में कुछ ऐसे स्लीपर सेल है टेररिस्ट वगैरह है जो अंदर बैठे हुए हैं। उनके पास ये सप्लाई देना ये अतिक के गैंग ने किया है। अभी आप किसी एक्टिव स्पाई से टच में है। क्या जवाब दूं इसका? मेरे ख्याल से मेरा अगला किताब बता देगा आपको। रहना तो पड़ता ही