वी लव द इंडियन पीपल एंड अप्रिशिएट देम रेस्पेक्ट दे आवर फ्रेंडशिप विल स्टे आज तुम नहीं मरोगे यह वो शब्द थे जो 35,000 फीट की ऊंचाई पर हवा में तैर रहे एक विमान में खून से लथपट पड़े एक भारतीय कैप्टन के कानों में गूंजे। उस वक्त फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफ जी एक 073 एक बहुत बड़े खौफनाक हादसे के मुहाने पर खड़ी थी। कॉकपिट के भीतर को पायलट ने अपने ही सीनियर भारतीय पायलट कैप्टन स्मिथ मछार पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया था। अगर उस वक्त सूझबूझ और बहादुरी नहीं दिखाई गई होती तो प्लेन में सवार सभी 174 जिंदगियां चंद पलों में खत्म हो सकती थी। अब उस खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से देखने वाले इजराइली यात्री यानी भायून ने इस दिल दहला देने वाले रेस्क्यू अभियान की पूरी इनसाइड स्टोरी बयां की है। इगायास ओके आयास तो िसवाक्राइफ दरअसल
फ्लाई दुबई की फ्लाइट एफj एक 073 हवा में सामान्य गति से उड़ रही थी। सब कुछ शांत था लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि बंद कॉकपिट के भीतर मौत का खेल शुरू हो चुका है। ओमानी मूल के को-पायलट ने अचानक भारतीय कैप्टन स्मिथ मच्छार पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मिथ फर्श पर गिर पड़े। शरीर से तेजी से खून बह रहा था। लेकिन कैप्टन जानते थे कि अगर दरवाजा बंद रहा तो कॉकपिट में बैठा हमलावर पूरे विमान को तबाह कर देगा। अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हुए गंभीर दर्द के बीच कैप्टन स्मिथ ने कॉकपिट का इमरजेंसी लॉक खोला। विमान में सवार यानिव हयून जो पेशे से प्लंबर हैं और अपनी बेटी नोआ के साथ सफर कर रहे थे। अचानक हरकत में आए। जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा थोड़ा खुला केबिन क्रू और यानिव ने अपनी पूरी ताकत लगाकर दरवाजा धक्का देकर खोला। कॉकपिट में कदम रखते ही जो मंजर दिखा उसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए।
फर्श पर कैप्टन स्मिथ खून से लथपट तड़प रहे थे और को पायलट फ्लाइट कंट्रोल्स के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहा था। ऐसा लगा मानो प्लेन किसी भी पल क्रैश हो सकता है। यानी उन्हें ने बिना एक पल गवाए घायल कैप्टन स्मिथ की आंखों में देखा और हौसला बंधाते हुए कहा आज तुम नहीं मरोगे। इसके तुरंत बाद यानीव ने पीछे से हमलावर को पायलट को दबोच लिया। कोपायलट ने विरोध किया और कंट्रोल्स नहीं छोड़ने की ज़िद की। लेकिन यानी और अन्य यात्रियों ने मिलकर उसे जबरन खींचकर कॉकपिट से बाहर निकाल दिया और काबू में कर लिया। को पायलट को बाहर निकालने के बाद कॉकपिट में अफरातफरी मच गई थी। कुछ लोग कैप्टन स्मिथ के घावों को दबाकर खून रोकने की कोशिश कर रहे थे।
वहीं यानीव ने कुछ पलों के लिए विमान के कंट्रोल्स को संभाला ताकि विमान का संतुलन ना बिगड़े। तभी इस कहानी में एक और बड़ा मोड़ आया। इकोनॉमी क्लास में दो ऐसे यात्री सफर कर रहे थे जो ऑफ ड्यूटी पायलट थे। जैसे ही उन्हें हालात की गंभीरता का पता चला, वे तुरंत कॉकपिट में पहुंचे और विमान की कमान अपने हाथों में ले ली। यानी भाई कॉकपिट के दरवाजे पर डटकर खड़े हो गए ताकि कोई अन्य व्यक्ति अंदर ना घुस सके और विमान को सुरक्षित लैंड कराया जा सके। इस खौफनाक मंजर को याद करते हुए यानी हयून ने कहा कि असली हीरो कैप्टन स्मिथ मच्छार हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कैप्टन स्मिथ ने इतने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हिम्मत दिखाकर कॉकपिट का दरवाजा नहीं खोला होता तो हम में से कोई भी आज जिंदा नहीं बचता। हम सब मारे जाते। मिस्टर यानिव ने कहा कि वह हैरान है कि इतनी गहरी चोटों के बाद भी एक इंसान ने 174 यात्रियों की सुरक्षा को अपनी जान से ऊपर रखा। यानिव ने कैप्टन स्मिथ के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की और कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलकर गले लगाना और धन्यवाद कहना चाहते हैं। 35,000 फीट की ऊंचाई पर कैप्टन स्मिथ मच्छार का अदम्य साहस और यानी भाई की तत्परता ने 174 परिवारों को बिखरने से बचा लिया। यह सिर्फ एक रेस्क्यू अभियान नहीं था बल्कि इंसानियत, बहादुरी और दो अजनबियों के बीच भरोसे की वह दास्तान है जो हमेशा याद रखी जाएगी। कैप्टन स्मिथ के इस अदम्य साहस और यानी की सूझबूझ पर आपकी क्या राय है? कमेंट सेक्शन में अपनी बात जरूर लिखें।