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राजेश खन्ना को लेकर आशा पारेख ने कह दी चौंकाने वाली बात, मच गया बवाल!

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का दरअसल एक इंटरव्यू हम आपको हुबहू सुनाएंगे जिसमें उन्होंने राजेश खन्ना देवानंद दादा साहब फालके पुरस्कार अपना वो पुराना दौर और आज की इस पीढ़ी के साथ में मिलते जुलते उस सामंजस सारी बातें आशा पारेख ने कही हैं उस इंटरव्यू में और अब वह इंटरव्यू आपको पेशे खिदमत है पहला सवाल होता है आशा जी क्या दादा साहब फालके पुरस्कार मिलने की आपको उम्मीद थी आशा पारे कहती हैं कि की वजह से 2 साल तक यह पुरस्कार वितरित नहीं हुए और जब यह पुरस्कार मुझे प्राप्त हुआ तो सचमुच वह पल मेरे लिए सम्मानित महसूस करने वाले थे मैंने इस बारे में कभी नहीं सोचा था और जब मुझे यह सूचना मिली तब मैं बोस्टन में थी और मेरे पास पुरस्कार समारोह का आमंत्रण पहुंचा तब भी मुझे यकीन नहीं था ।

खुशी तो है साथ ही जिम्मेदारी का एहसास भी है पुरस्कार किसी भी एक्टर का उत्तरदायित्व बढ़ा देते हैं आशा जी फिल्म इंडस्ट्री में आपको कैसा रिस्पांस मिला जबरदस्त 300 से ज्यादा तो ड आए हैं वहीदा रहमान और हेलेन ने मुझे सम्मानित करने का मन बनाया और कहा कि मैं मेहमानों की लिस्ट तैयार करूं ताकि एक समारोह हो सके ।

हालांकि मैं सिर्फ सहेलियों के साथ ही इस मोमेंट को सेलिब्रेट करना चाहती थी बॉलीवुड ही नहीं दक्षिण फिल्म इंडस्ट्री से महेश बाबू का भी एक बड़ा सा पत्र आया बहुत से बुके भेजे साथियों प्रशंसकों ने और यह सब पाकर गदगद हुई अभिभूत हुई बहुत खुश हूं आशा पारिक से अगला सवाल होता है कि इतना लंबा समय आपने इस इंडस्ट्री में बिताया आप फिल्मों में आई कैसे और यह भी आप बताइए तो इस पर आशा पारे कहती हैं कि मेरे पिता बच्चू भाई और मां सुधा बेन पारे की मैं इकलौती संतान हूं तो जाहिर सी बात है कि उनकी आंखों का तारा रही हालांकि उन्होंने कभी लाड़ प्यार को हावी नहीं होने दिया मुझ पर अनुशासन का पालन करने की हिदायत थी वक्त पर सोने जागने का नियम था ।

घर में कभी भी स्कूल का होमवर्क ना मिस करूं इसका ध्यान रखा था पेरेंट्स ने बचपन में मुझे डांस करना भाता था तो मां ने मुझे डांस स्कूल में भेजना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगी फिर सोलो परफॉर्म करने लगी एक बार स्टेज पर डांस करते देख नामचीन फिल्म मेकर विमल रॉय ने मेरे पिताजी से रिक्वेस्ट की कि वह मुझे अपनी फिल्म बाप बेटी में लेना चाहते हैं हालांकि यह फिल्म चली नहीं और इसके बाद एकाद फिल्में और की मगर वह भी नहीं चली।

तो मैं मायूस हो गई और फिर से अपनी पढ़ाई पर अपना ध्यान लगा दिया अगला सवाल होता है कि बतौर मुख्य अभिनेत्री आप फिल्मों में कब आई और किस तरह की चुनौतियां आपके सामने आई इसके जवाब में आशा पारे कहती है कि चुनौतियां तो बहुत रही फिल्म गूंज उठी शहनाई का प्रस्ताव मेरे पास आया सिलेक्शन हुआ लेकिन फिल्म शुरू होते ही निर्देशक विजय भट्ट ने मुझे इस फिल्म से आउट कर दिया और यह जरूरी नहीं कि हर मेकर मेरी परफॉर्मेंस से संतुष्ट हो विजय भट्ट ने हर मेकर से यह कहना शुरू किया कि मेरे पास स्क्रीन प्रेजेंस नहीं है पता नहीं इतना नेगेटिव प्रचार क्यों किया गया मेरा करियर शुरू होने से पहले ही खत्म होने के कगार पर था।

लेकिन फिल्मालय स्टूडियो के सर्वे सर्वा और मशहूर फिल्म मेकर एस मुखर्जी जो काजल के दादाजी हैं उन्होंने मुझे अपनी फिल्म दिल देके देखो में कास्ट करना चाहा और तब मैं 16 साल की थी स्कूल खत्म हो चुका था और कॉलेज की तैयारी चल रही थी कि मेरे पास एक फिल्म आ गई फिल्म के लेखक नासिर हुसैन थे निर्देशक जसवंत लाल जी ने मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया मेरा एक क्लोजअप उन्होंने मुखर्जी साहब और नासिर हुसैन को भेजा जो दोनों को पसंद आया और अगले हफ्ते शमी कपूर का एक दिन फ्री था तो तय हुआ कि इसी सप्ताह में एक शॉट साधना और एक शॉट मेरे साथ होगा जो भी स्क्रीन पर शमी कपूर के साथ जचे उसे फाइनल कर लिया।

जाएगा जब शमी जी आए मैं वहां मौजूद थी लेकिन साधना आंखों की किसी तकलीफ की वजह से आ नहीं सकी शमी के साथ पूरे दिन मेरी शूटिंग चली मेरा काम लुक स्क्रीन प्रेजेंस नासिर हुसैन और एस मुखर्जी दोनों को पसंद आ गए और इस तरह मुझे अपने करियर की पहली फिल्म दिल देके देखो मिली जो सभी जानते हैं सुपर हिट साबित हुई अगला सवाल होता है कि आपकी फिल्में खूब चलती थी और कहा जाता था कि आप अपने दौर की सबसे महंगी एक्ट्रेस थी इसके पीछे का क्या राज है इसके जवाब में आशा पारक कहती हैं कि हां यह बात सच है कि मेरी ज्यादातर फिल्मों ने सिल्वर गोल्डन जुबली मनाई और मेरी लगभग सभी फिल्में हिट रही।

लेकिन फिल्म की सफलता में पूरी टीम का हाथ होता है बस बात यह है कि निर्देशक निर्माता और कलाकारों को शे ज्यादा मिलता है फिल्में चली लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं तब सबसे ज्यादा पैसा लेती थी या नहीं हालाकि तमाम पत्र पत्रिकाओं में मेरे कॉलम्स छपते थे मेरे हेयर स्टाइल डांस एक्टिंग पर खूब लिखा जाता था मैं स्टार तो बन चुकी थी यह मुझे पता था अगला सवाल होता है कि जिंदगी के 80 साल पूरे करने के बाद आप अपने बारे में क्या सोचती हैं कभी क्या पाया क्या खोया जैसी फीलिंग आपको आती है इसके जवाब में आशा पारे कहती हैं कि मुझे लगता है कि मैंने खोया कुछ नहीं और सिर्फ पाया है सब आगे की जिंदगी भी मुझे शांति और सुकून के साथ अब बितानी है और अभी पूरी दुनिया घूमना है अपने देश के कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं।

जहां जाने की इच्छा है ढेर सारी किताबों की सूची है जो पढ़नी है सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रह सकूं यह कोशिश है पिछले कई सालों से मैं फिल्म इंडस्ट्री वेलफेयर फंड के अध्यक्ष हूं और फिल्म इंडस्ट्री के कई मेहनतकश वर्कर्स को इस वेलफेयर संस्था से लाभ हो यह मेरी कोशिश रहेगी हां इस सफर में अपने माता-पिता को खोया जिसका दर्द तो ताम रहेगा मेरी मां फ्रेंड फिलोसोफर और गाइड थी मैं उन्हें ज्यादा वक्त नहीं दे सकी और अपने आशा पारक लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए कई स्टेज शो करती थी का सेटअप तैयार करने में काफी वक्त मैनेजमेंट के साथ जाता था साथ ही साथ फिल्मों की शूटिंग स्क्रिप्ट रीडिंग कॉस्ट्यूम ट्रायल्स भी होते थे।

सुबह 8 बजे से निकलती घर से और रात के 10 बजे घर में पहुंचती थी मां कई बार कहती थी कि आशा घर क्यों आती हो में ही रहा करो तब मां मुझे मिस करती थी और अब मैं अपनी मां को मिस करती हूं आशा पारक से इस इंटरव्यू में अगला सवाल होता है कि जीवन में कभी निराशा से घिरी तो कैसे उभरी आप आशा पार कहती है कि कुछ घटनाओं से से मैं आहत हुई मैं बोर्ड के लिए काम करती थी और जब कुछ फिल्मों को मैंने यू सर्टिफिकेट नहीं दिया तो उनके मेकर्स खफा हो गए फिल्म इंडस्ट्री वेलफेयर ट्रस्ट के लिए काम करना भी कांटो भरी कुर्सी पर बैठने जैसा था लेकिन अब उन घटनाओं को दोहराने का कोई लाभ नहीं मैंने कई संस्थाओं के लिए दिन रात काम किया संस्था को फायदा हुआ।

लेकिन मुझे क्रेडिट देना तो दूर मेरा नाम तक नहीं लिया गया खैर ऐसे कड़वे अनुभवों के बाद भी मैं फिल्म इंडस्ट्री के लिए काम करते रहना चाहूंगी मलाल को दिल में नहीं दिल के बाहर रखकर जीने में मजा है पिछले कुछ सालों में कई उभरते कलाकारों मॉडल्स एक्टर्स की खुदकुशी की खबरों ने मुझे परेशान किया निराशा से उभरने की कला सीखनी होगी और हर दिन एक जैसा नहीं हो सकता ।

जो कलाकार इंडस्ट्री में करियर बनाने के लिए आते हैं उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि सफलता चार दिन की चांदनी है हमेशा टिकती सफलता विफलता को निरपेक्ष भाव में देखना सीखना होगा और सीखना चाहिए अगला सवाल होता है कि आपने इंडस्ट्री के नामी हीरो देवानंद शमी कपूर राजेश खन्ना धर्मेंद्र मनोज कुमार जितेंद्र सभी के साथ काम किया किनके साथ आपकी दोस्ती स्क्रीन के बाहर भी थी आशा पारे कहती है कि मेरे बहुत से रिश्ते आगे पारिवारिक बन गए शमी कपूर के साथ फिल्मों में रोमांटिक जोड़ी बनती थी जबकि असलियत में मैं उन्हें चाचू कहा करती थी उनकी पत्नी नीला देवी को चाची कहती हूं और कहती थी और अब चाचू तो है नहीं और लेकिन वह मेरा जन्मदिन कभी भूलती नहीं है नीला जी और हमेशा वह मुझे फोन पर हमेशा जब भी मेरी बात होती रही उनसे हमेशा उन्होंने मुझे अच्छा रिस्पांस किया अगला सवाल होता है कि देवानंद और राजेश खन्ना से जुड़ी कुछ यादें आप साझा करना चाहेंगी आशा पार कि देव साहब तो मस्त मौला शख्स थे उनकी अपनी दुनिया थी उन्हें अपनी पर्सनालिटी और इमेज पर बड़ा था उनसे प्रोफेशनल रिश्ते थे और राजेश खन्ना तो मुझसे थोड़ा डरते थे वैसे भी वह इंट्रोवर्ट थे दरअसल उनकी डेब्यू फिल्म बहारों के सपने के लिए एक बड़ी एक्ट्रेस को उनके अपोजिट साइन किया गया था लेकिन उसने फिल्म करने से मना कर दिया नासिर हुसैन जी ने मुझे कहा कि यह फिल्म तुम कर लो मेरे पास डेट्स नहीं थी फिर नासिर साहब ने कहा तुम्हारी डेट्स मैं एडजस्ट कर दूंगा प्लीज फिल्म कर लो उनके कहने पर मैंने यह फिल्म की और मैं तब एक स्थापित एक्ट्रेस थी और काका डेब्यू कर रहे थे क्यूंकि मैं सीनियर थी तो थोड़ा लिहाज व मेरा रखते थे अगला सवाल होता है कि सुना है मनोज कुमार ने फिल्म दो बदन का क्लाइमैक्स चेंज किया था क्या यह सच है आशा पारे कहती है जी राज कोसला निर्देशित फिल्म दो बदन 1966 में रिलीज हुई थी मनोज कुमार मेरे अपोजिट थे और हुआ यूं कि कहानी के एंड में हीरोइन फिल्म में मेरा नाम आशा था आशा की मौत होती है और स्क्रिप्ट के हिसाब से मुझ पर डेथ का सीन राज खोसला जी ने शूट करवाया मनोज सेट पर आए तो उन्हें यह बात पता चली तो वो नाराज हुए और बोले कि यह तो नाइंसाफी है हीरोइन को ही फिल्म में मार दिया तो फिल्म कैसे चलेगी हीरो को भी मारना होगा और तभी कहानी एक तरीके से कन्विंसिंग लगेगी और तब दोबारा क्लाइमैक्स शूट किया गया और कहने की जरूरत नहीं है कि फिल्म सुपरहिट रही अगला सवाल होता है कि फिल्म इंडस्ट्री में पिछले 60 सालों में आप बदलाव को किस तरीके से देखती हैं जो आपके सामने से गुजरा है आशा पारे कहती है कि फिल्म इंडस्ट्री ने टेक्निकली बहुत प्रगति की है चाहे मेकअप हो एडिटिंग हो म्यूजिक हो वीएफ एकस कुछ भी हो भारतीय फिल्मों ने दुनिया को दिखाया है कि हमारी फिल्में किसी भी तरह हॉलीवुड से कम नहीं है आप देखिए बाहुबली आर आर आर ब्रह्मा कितने नाम लिए जा सकते हैं एयर कंडीशन स्टूडियोज आ चुके हैं पहले गर्मी में इनडोर स्टूडियोज में काम करना आसान नहीं था ड्रेस बदलना बहुत मुश्किल टास्क होता था आउटडोर शूट में बाथरूम नहीं जा सकते थे पेड़ों के पीछे कपड़े बदलने पड़ते थे अब तो पिछले 2530 सालों में वैनिटी वन आ गई है सारे एक्टर्स शॉट देकर वैन में बैठ जाते हैं और इस वजह से कलाकारों की आपसी बॉन्डिंग कम हो गई है कमर्शियल माहौल बन चुका है एक्ट्रेस एक जैसी दिखती है नेचुरल मेकअप होता है और लगभग एक जैसी हेयर स्टाइल होती है कुछ अलग स्टाइल आप उसको नहीं देख सकते फिर भी कुछ बदलाव अच्छे हैं जैसे टेक्निकली फिल्में बहुत बेहतर हुई हैं हमारे दौर में ऐसा नहीं था एक आखिरी सवाल आशा पारेख से होता है कि आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं आजकल तो आशा कहती हैं कि मेरी मैनेजर ने मेरा टा अकाउंट खोला है पर मुझे यह पसंद नहीं मेरे समय में तो देखिए सोशल मीडिया था नहीं फिर भी फिल्में चलती थी और खूब चलती थी मेरी मैनेजर अब पीछे पड़ी है [संगीत] [संगीत] m

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