राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा के दो बेहद चर्चित सितारे रहे। राजेश खन्ना ने 1960 और 1970 के दशक की शुरुआत में लगातार सफल फिल्मों के साथ ऐसी लोकप्रियता हासिल की, जिसे उनके दौर में अभूतपूर्व माना गया। वहीं अमिताभ बच्चन ने बाद में ‘जंजीर’ और दूसरी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। दोनों की अभिनय शैली और स्टारडम की तुलना आज भी होती है,
लेकिन किसी एक को दूसरे से “बेहतर” कहना व्यक्तिगत पसंद का विषय है।राजेश खन्ना की निजी जिंदगी से जुड़ी चर्चाओं में उनकी की आदत का भी अक्सर जिक्र मिलता है। कुछ संस्मरणों और मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि करियर के उतार-चढ़ाव और निजी परेशानियों के दौरान उनका से रिश्ता बढ़ गया था।
हालांकि, इसे उनके पूरे करियर के पतन का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।उनके करियर में बदलाव के पीछे कई वजहें थीं-फिल्मों का बदलता दौर, दर्शकों की पसंद में परिवर्तन और नई तरह के नायकों का उभरना।
अमिताभ बच्चन का ‘एंग्री यंग मैन’ दौर इसी परिवर्तन का हिस्सा था।इसके बावजूद राजेश खन्ना का शुरुआती स्टारडम हिंदी फिल्म इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। उनकी लोकप्रियता, अभिनय और रोमांटिक नायक की छवि ने एक पूरे दौर को प्रभावित किया।