एक्टर राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस के कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने दो हफ्ते में बकाया भुगतान का ठोस प्रस्ताव देने और ₹ करोड़ सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश दिया है। फिलहाल उन्हें सरेंडर से मिली राहत
5 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। फिल्मी पर्दे पर लोगों को हंसाने वाले राजपाल यादव अब असल जिंदगी में कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। चेक बाउंस के कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आखिरी मौका दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि दो हफ्ते के भीतर भुगतान का ठोस प्रस्ताव पेश करना होगा और ₹ करोड़ जमा करने होंगे।
मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा हुआ है। शिकायत के मुताबिक साल 2010 में एक फिल्म के लिए राजपाल यादव को करीब ₹5 करोड़की आर्थिक मदद दी गई थी। भुगतान के लिए 2013 में 1.05 करोड़ के सात चेक दिए गए । लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा।
शिकायत के मुताबिक 2012 के समझौते में राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब ₹11 करोड़ चुकाने की बात मानी थी। लेकिन भुगतान को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं होने पर मामला लगातार आगेबढ़ता रहा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव के पिछले रवैया पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों का पालन नहीं हुआ और उनके व्यवहार से भरोसा पैदा नहीं होता। हालांकि अदालत ने उन्हें आखिरी मौका दिया है।
राजपाल यादव की ओर से वरिष्ठ वकील पीएस पटवालिया ने दो हफ्ते का समय मांगा। उन्होंने कहा कि राजपाल यादव ₹2 करोड़ जमा करेंगे ताकि भुगतान को लेकर उनकी गंभीरता साबित हो सके। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में उन्हें 3 महीने की सजा सुनाई थी। अब राजपाल यादव के सामने दो बड़ी शर्तें हैं। ₹ करोड़ जमा करना और बकाया चुकाने का ठोस प्लान देना।