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लता मंगेशकर और आशा ने हुई थी बड़ी लड़ाई?करीबी ने बताया चौंकाने वाला सच, जानकार रो पड़ेंगे।

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आशा जी के निधन से इस देश ने एक बहुत बड़ी हस्ती को खो दिया। एक संगीत का खजाना चला गया। एक तपस्विनी चली गई। वैसे तो मैंने Twitter के जरिए सुख संदेशभी व्यक्त किया था। उनके परिवार में उनके बेटे आनंद से भी बात की। लेकिन मुझे लगा कि आज मुझे कुछ बोलना चाहिए क्योंकि इधर लगातार देख रहा हूं सोशल मीडिया पे इस बात का खूब प्रसार हो रहा है कि बड़ी बहन लता मंगेशकर और आशा भोसले में बड़े मतभेद थे। दोनों में बहुत जो है मनमुटाव था।

दोनों के रिश्ते बहुत खराब थे। तो मुझे लगा कि कुछ बोलना चाहिए क्योंकि मैं भी मंगेशकर परिवार को थोड़ा बहुत जानता हूं बल्कि अच्छी तरह जानता हूं। लता जी से भी मैं मिलता रहता था। आशा जी को भी कई बार मिला। भूषा जी को भी मिला। मीना मंगेशकर जी से भी मिला और उनके बच्चों से भी मिला। चाहे योगेश हो, चाहे आदि हो सबसे मिला। सबसे मिलता रहता था।

हर गणेश उत्सव पे जो होता है पिछले दो-ती साल से मैं जा रहा था चार साल से चार पांच साल से और लता जी से भी लगातार फोन पर बात होती रहती थी। मुझे लगता है कि कुछ इस पर बोलना चाहिए क्योंकि यह बात एकदम झूठ है। एक सफेद झूठ है जो बार-बार फैलाया जा रहा है। लोगों को पता नहीं है और खुद लता जी का बताया हुआ है कि जब सांगली में लता जी छोटी थी तो एक स्कूल में उन्होंने दाखिला लिया। मुरलीधर पाठशाला करके स्कूल था और उसमें पढ़ने जाती थी। सिर्फ तीन ही दिन गए थे कि अपने साथ वो अपनी छोटी बहन आशा को ले गई जो उनकी गोद में थी। तो जो वहां टीचर थे उन्हें बड़ा गुस्सा आया।

उन्होंने कहा ये बच्चा किसके साथ आया? तो बताया कि लता जी खड़ी होंगी कि उनके साथ तो उनको बहुत डांटा कि आप यहां बच्चे नहीं ला सकते। बिल्कुल आप बच्चों को ना ले आइए। यह बात लता जी को बहुत बुरी लगी और उन्होंने जाकर अपनी मां को बोल दिया कि मैं अब स्कूल पढ़ने नहीं जाऊंगी।

तो उनकी स्कूली शिक्षा सिर्फ तीन दिन की हुई। तीन दिन से ज्यादा वो किसी स्कूल में पढ़ी ही नहीं। और वो भी स्कूल उन्होंने पढ़ाई इसलिए छोड़ दी क्योंकि टीचर ने उनकी बहन आशा को लाने से मना कर दिया था। ऐसा प्यार था दोनों के बीच और उन्हीं लता जी को आपको पता है जिन्होंने कोई स्कूली शिक्षा नहीं ली। बाद मेंदुनिया की ऐसी कौन सी यूनिवर्सिटी है जिसने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि नहीं दी। चाहे अमेरिका की हो, चाहे कनाडा की हो, चाहे ब्रिटेन की हो, चाहे ऑस्ट्रेलिया की हो, भारत की तो छोड़ ही दीजिए। कितनों ने डॉक्टरेट को पा दी लेकिन उनकी स्कूली शिक्षा बिल्कुल शून्य थी।

सिर्फ तीन दिन की थी और वो भी उन्होंने आशा जी की वजह से छोड़ दी थी। बाद में सब लोग मुंबई आ गए। मुंबई में रहने लगे। मिलजुल के काम करते थे। लेकिन परिस्थिति बहुत खराब हो गई। तो पूरे परिवार को उनकी मां ले अपने गांव चली गई और मुंबई में सिर्फ रह गई लता जी और उनके साथ उनकी छोटी बहन मीना जी जो ये दोनों बहने रह के वहां पे जो है काम की खोज में लगी हुई थी ताकि उनको कुछ काम मिले। धीरे-धीरे काम मिला और वो बालकेश्वर में एक घर में आके रहने लगी।

इसी दरमियान आशा जी भी बड़ी हो गई थी और आशा जी का किसी से प्यार हो गया जो परिवार नहीं चाहता था कि शादी हो आशा जी बिल्कुल निश्चय कर चुकी थी कि उन्हें शादी करनी है उससे पूरा परिवार बा से नाराज था खासतौर से मां बहुत नाराज थी उन्होंने कहा कि बिल्कुल ये होना ही नहीं चाहिए और आशा जी नहीं मानी और उसके साथ चली गई और 12 साल तक वो घर नहीं आई कभी-कभी स्टूडियो में दोनों बहनें एक साथ गाती थी।

लेकिन जो एक रिश्ता मन का रिश्ता उस समय था वो ऐसा था कि भाई परिवार से चली गई थी तो कहीं ना कहीं टीस और पीड़ा थोड़ी सी लता जी में भी थी और आशा जी में भी होगी कि परिवार से विमुख होगी। लेकिन 12 साल बाद क्या हुआ? एक दिन बालकेश्वर में लता जी के घर पर घंटी बजी। दरवाजा खोला उनकी मां ने तो देखा आशा वहां पे एक आशाजी खड़ी थी। साथ में दो बच्चे थे और संदूक थी और वो घर वापस लौट आई थी दुखी होकर अपनी ससुराल से।

तो मां ने कहा कि आशा अब ये घर लता का है। लता ने इस घर को अब वो इस घर की मालकिन लता है। मैं नहीं मुझे उससे पूछना पड़ेगा। तभी तुम अंदर आ सकती हो। और लता जी कोल्हापुर गई थी। उन्होंने टेलीफोन किया लता जी को। लता जी को जैसे ही उनकी मां ने बताया कि आशा आई हुईहै इस तरह से अपने बच्चों के साथ एक सेकंड नहीं लगा लता जी का लता जी ने कहा कि उसे मेरा वाला कमरा दे दो मेरा कमरा तुरंत खाली करो और वो कमरा आशा कोlदे दो वो वहां रह गई और इसके बाद इस परिवार का फिर से मिलन हो गया ऐसे लोग जो इस तरह की कहानियां बनाते थे जो झगड़ा करा रहे थे दोनों के बीच में सबके मुंह सफेद पड़ गए सबके मुंह काले हो गए कि ये तो फिर से दोनों बहने एक हो गई।

पूरा परिवार एक हो गया और उसको मीरा जी बहुत ढंग से उन्होंने रखा कि आखिर हम अलग-अलग कैसे हो सकते थे? हम खून के रिश्ते थे हमारे बीच में। हम मास्टर दीनाना की पुत्रियां थी। हम अलग-अलग कैसे हो सकते थे? अगर लता जी तेज थी तो आशा जी ऊंच थी। अगर लता जी मां सरस्वती की वीणा थी तो आशा जी कृष्ण की बंसी थी। उन्हें अलग कौन कर सकता था? दोनों संगीत की साधक थी, उपासक थी। उन्हें कोई अलग करने का मतलब ही नहीं था। और पूरा परिवार फिर से एक हो गया। फिर उनके छोटे बेटे आनंद का जन्म भी उसी घर में हुआ बालकेश्वर में। और इसके बाद ये लोग प्रभु कुंज आए। प्रभु कुंज के घर में जो है पूरा पूरा फ्लोर नीचे छोटे-छोटे कमरे हैं। मैंने सब देखे हैं। उस पूरे परिवार में वहां पे सब लोग एक साथ परिवार रहता था। लता जी, आशा जी, उषा जी, हृदयनाथ जी और मीना जी बाद में आशा जी अपनी बेटी की मृत्यु के बाद परेल रहने चली गई।

और जो है मीना जी भी उनकी भी शादी हो गई थी बादमें। तो मीना जी भी अब जाके जो है वो भी उसी तरफ रहने लगी प्रभु कुंज के घर से लेकिन सब रोज आते जाते थे। सब में भारी प्यार और स्नेह था। दरअसल जब मैंने लता जी का इंटरव्यू किया तो मैंने सवाल उनसे किया। मैंने पूछा कि ये ऐसेसे मतभेद की बात बहुत कही जाती है। आप दोनों में झगड़े की बात बहुत कही जाती है दोनों बहनों में। और सही परांजपे जी ने तो फिल्म बना दी साज जिसमें यही दिखाया गया पूरी फिल्म इसी बात पे है कि दोनों बहनों में भयानक झगड़ा था। तो लताई से मैंने पूछा उन्होंने कहा कि मैं तो यह कल्पना भी नहीं कर सकती हूं राजीवजी आशा जी से भी आपके बड़े मतभेद थे और आशा जी को आपने बढ़ने नहीं दिया अपनी बहन को आशा को बढ़ने नहीं दिया होता तो आशा का इतना नाम होता और एक बात मुझसे उन्होंने और कही कि स्थिति ये है असलियत ये है कि अगर आशा के कमरे में जाना है तो मेरे बेडरूम से होके तुम्हें जाना पड़ेगा इतनी हमारी निकटता है इतना हमारा सानिध्य और ये कैसी बातें फैलाई जाती है ।

मेरी समझ समझ में नहीं आता। इस बात से बहुत हताश थी। वो कहती थी एकदम झूठ है। ये सब ये फैलाया गया। हम बहनों में पूर्ण एकता है। पूर्ण प्यार है। दिल से प्यार है। हम एक हैं। और एक बात और कही जाती है इस प्रकरण में कि साहब ओपी नगर साहब ने उस जमाने में जो है इसमें डालने का काम किया। उन्होंने लता मंगेशकर को कोई गाना नहीं दिया। और सारे गाने उन्होंने आशा भोसले से गवाए। लता जी से गाने नहीं गवाए।

जबकि असलियत यह है ओपी नियर जी ललिता जी के बहुत करीबी थे। दोनों में खूब बात होती रहती थी और बहुत अच्छे रिश्ते थे। लेकिन वो जो धुन बनाते थे वो थोड़ी सी दूसरे किस्म की थी। वो हल्ले गुल्ले तेज तर्रार उसकी थी। लता जी को गाना पसंद नहीं था। और आशा जी उस तरह के गानों की एक्सपर्ट थी।

तो वो इसलिए ओपी नयर की फिल्मों में आशा जी ने ही गाने गाए। लता जी को ओपी नयर का जो संगीत का तरीका था वो नहीं पसंद था। उनके संगीत की ध्वनि उनको पसंद नहीं थी इसलिए नहीं गाते थे। लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते नयर से भी बहुत अच्छे थे लता जी के। और ये बात उनका परिवार बताता है। तो ये कहना कि ओपी नयर जी ने जानबूझ के लता जी को एकदम गलत है। और शायद कहीं यह भी बात रही होगी कि लता जी को आशा जी से इतना प्यार था। वो चाहती होंगी इस तरह के गाने आशा गाए ताकि उसका भी रुतबा फिल्म इंडस्ट्री में बने। उसको भी खूब काम मिले।

लता और आशा जी को खूब काम भी मिला। उन्होंने तो कोई कहता था कि एक तरह से रिकॉर्ड कायम किया कि एक दिन में सात-सा गाने गाए। 12,000 गाने आशा जी ने गाए। तो ये कहना कि जो है कि लता जी उन्हें रोकती थी और गाने नहीं देती थी। एकदम गलत बात है। दोनों में ऐसा स्नेह था कि कोई सोच नहीं सकता।

तो मुझे लगता है कि इस तरह की अफवाहएं तरह की बातें नहीं फैलाई जानी चाहिए। इसका कोई अर्थ नहीं होता। इसका कोई मतलब नहीं होता। और आशा जी वैसे भी हमेशा से बहुत तेज तर्रार थी। एक बारउस वहां पे कोल्हापुर में किसी ने जो है ये लड़कियां जा रही थी बहने किसी ने कुछ कमेंट पास कर दिया। तो उस लड़के को उन्होंने साइकिल से के गिरा दिया था।

बहुत ही तेज तर्रार थी और मैं तो उनको अहमदाबाद में पिछले साल ही एक मैच में मिला था। तो वो उस समय वो 91 की होंगी। 91 साल की लेकिन इतने ढंग से तैयार होकर सजी सवर ये मेकअप फुल के साथ बैठी थी कि पूछो मत जबरदस्त व्यक्तित्व लग रही थी वो तो बहुत टिप टॉप इस ढंग से रहती थी बहुत अच्छी तरह से रहती थी उनके साथ उनकी ग्रैंड डॉटर भी थी बेटा भी था साथ में वहां पे और वो बहुत अच्छी तरह से बात कर रही थी 91 साल में तेज तर्रार हर तमाम प्रोग्राम्स में जाती थी गातीभी थी सब जगह लगता ही नहीं था कि इतनी जल्दी चली जाएगी और मैं जब गणेश पूजन होता था उनके यहां साल में एक बार जो गणेश जी बिठाएजाते हैं महाराष्ट्र में तो उनके यहां जाता था तो वहां भी बहुत से आरती कराती थी सब करती थी तो मुझे लगता है कि परिवार में बहुत मतलब एकता थी मैंने एक बार लता जी से पूछा मैंने कहा कि बताइए आपको सबसे बुरी बात क्या लगती है जिंदगी में उन्होंने कहा सबसे बुरी बात मुझे ये लगती है जब कोई मेरे मुझे

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