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मेट्रो में खड़ा दिखा 90’s का क्रिकेट स्टार! वायरल तस्वीर का सच चौंका देगा!

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सोशल मीडिया पर यह तस्वीर सुपर वायरल है और सबको पता है यह तस्वीर किसकी है। लेकिन इस तस्वीर के पीछे का जो सच बताया जा रहा है ज़रा उसको जान लीजिए। और ऐसी एक और तस्वीर दिखाऊंगा जिसको देखने के बाद आप चौंक जाएंगे और उसके बाद मैं आपको दो ऐसी कहानियां बताऊंगा जो आपके होश उड़ा देगी और आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि ये चल क्या रहा है। आइए शुरुआत करते हैं इस वीडियो की। तो देखिए यह तस्वीर सोशल मीडिया में जबरदस्त वायरल है और जानते हैं ये भारत के एक्स पेस बॉलर जवाकर श्रीनाथ की ये तस्वीर है। 67 टेस्ट खेले हैं। 29 ओडीआई खेले हैं। 300 से ज्यादा विकेट है उनके ओडीआई में। अब इतना खतरनाक गेंदबाज जिसने भारत को दशकों अपनी सेवाएं दी हैं। और मैं आपको बता दूं माइक अथर्टन या फिर या एंड्रू हटसन साउथ अफ्रीकी सलामी बल्लेबाज थे एंड्रू हटसन उनका स्टेटमेंट था कि भाई इतना खतरनाक गेंदबाज मैंने नहीं देखा या माइक अथटन किसी का स्टेटमेंट था। जवाहर श्रीनाथ अपने करियर के पीक पर 150 कि.मी. की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे। आप सर्च कर लीजिएगा नहीं तो जवाहर श्रीनाथ की आप हिस्ट्री पढ़ लीजिएगा विकपीडिएफ प्रोफाइल पर चले जाइएगा 150 रेगुलर नहीं मतलब उनकी टॉप बॉल टॉप स्पीड बॉल 150 kmph थी ये जब आगर श्रीनाथ की तस्वीर सामने आई तो कुछ लोगों ने कहा कि भाई दिल्ली मेट्रो में देखो कितने आराम से नो वीवीआईपी एटीट्यूड के साथ यह सफर कर रहे हैं कि कोई वीवीआईपी जैसा भाव नहीं तो भैया यह बोर मेट्रो की तस्वीर है। दिल्ली मेट्रो की तस्वीर नहीं है। बोर मेट्रो की तस्वीर है। तस्वीर ओरिजिनल है और यह खिलाड़ी भी ओरिजिनल है। इसके अंदर कोई मिलावट नहीं है।

कैसे? आइए मैं आपको बताता हूं जवागल श्रीनाथ के इस सादेपन के बारे में जिसके बारे में आपको भी कुछ बातें नहीं पता होंगी। इसीलिए मैंने यह वीडियो बनाया है। ना स्टारडम का दिखावा ना कोई तामझाम। बेंगलुरु मेट्रो में ऐसे नजर आए जवागल श्रीनाथ। स्टारडम इनमें कभी था भी नहीं भाई। और आगे मैं आपको एक और बताऊं। हमने अक्सर देखा है कि हमारे दक्षिण भारत से आने वाले जो भी स्टार होते हैं क्रिकेट स्टार उनके अंदर वो आडंबर वो फेक एटीट्यूड नहीं होता जो हम कई और लोगों में देखते हैं। सिंपलीसिटी वहां के सोसाइटी में है। सारे ऐसे हो यह मैं नहीं कह रहा। लेकिन वहां के समाज में सादगी है। है इधर के भी समाज में। लेकिन यहां आडंबर की होड़ लगी रहती है। कौन फरारी के साथ फोटो खिं लेगा? कौन पोर्स के साथ फोटो खिं लेगा? कौन कोरियन पट पहन के एक चश्मा लगा के खुद को रैपर साबित कर देगा। इस तरह की होड़ एक लगी रहती है यहां के लोगों के बीच जो मेरा अनुभव है। अब देखिए टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी स्टोरी कवर की है। फॉर्मर इंडियन प्रेसर जवागल श्रीनाथ स्पॉटेड ट्रेवलिंग इन बोर मेट्रो वि ट्रॉली बैक इंटरनेट प्रेजेंस ह सिंपलीसिटी। क्यों तारीफ कर रहे हो भाई? यह ऐसे ही हैं। आप तारीफ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आपने ऐसे लोगों को देखा नहीं है।

आप जिनको देखते हैं, जिनको फॉलो करते हैं वो वीवीआईपी एटीट्यूड के मारे हुए हैं। आपको आडंबर वाली तस्वीरें दिखाते रहते हैं। तो आप जब वही देखेंगे तो आपको यह तस्वीर सादी सिंपल लगेगी। अब एक और बात बता दूं। जवागल श्रीनाथ किसी की तारीफ पाने के लिए, किसी की मीडिया अटेंशन पाने के लिए, किसी अखबार में मेरी खबर छप जाए इसके लिए ऐसे ट्रेवल नहीं करते। जवागल श्रीनाथ होने का मतलब ही है ट्रू एंड सिंपल। अब देखिए कैसे यह तस्वीर देखिए यह कुछ हफ्ते पहले की तस्वीर है। ये क्रिकेट एक्सपर्ट है और ये बेंगलुरु की सड़कों पर जब मॉर्निंग वॉक कर रहे थे तो उन्हें एक ऐसा शख्स दिखा जिसके हाथ में क्या-क्या है देखिए। घर की चाबी लग रही है। बहुत होगा तो गाड़ी की चाबी होगी। नंदिनी दूध का पैकेट है। जैसे अमूल मदर डेरी यह होता है ना वहां बेंगलुरु में नंदिनी चलता है। ब्रांड एक नंदिनी दूध का पैकेट है। और यहां माला फूल है पॉलिथीन में। जैसे सुबह-सुबह की पूजा पाठ करते होंगे तो ईश्वर को समर्पित करने के लिए पुष्प यहां माला फूल यहां इन्होंने रखे हैं। हाथ में मोबाइल है। जवागल श्रीनाथ कोई सिक्योरिटी नहीं, कोई तामझाम नहीं। बेंगलुरु की सड़कों पर टहलते हैं और जैसे एक सामान्य घर का आदमी मान लीजिए कोई रिटायर्ड आदमी है नौकरी से रिटायर हो गया फिर वो अपने घर में जैसे इन्वॉल्व होता है ना कि भाई चलो दूध नहीं है दूध ला दो माला फूल खत्म माला फूल ला दो वो ड्यूटी जवा अगर श्रीनाथ कर रहे हैं और सिंपलीसिटी इन्होंने कहीं पढ़ा नहीं है इनके ये रूटीन में है सिंपल और सिंपल क्यों ना रहे भाई हम किसको दिखा रहे हैं तड़क भड़क हम किसको दिखा रहे हैं कि हम वीआईपी हैं इसी देश की जनता को जिसने हमें स्टार बनाया।

तो इनके अंदर कम से कम ऐसा भाव नहीं है कि हम जनता को दिखाएं। हम कितने बड़े खिलाड़ी हैं। एक चीज और मैं बेंगलुरु की जनता की भी तारीफ करूंगा। जो जवागल श्रीनाथ को देखकर ये मत समझिएगा किसी ने इनको पहचाना नहीं। जो इनको यहां देखकर भी कोई इनके खिला इनके लिए ऑटोग्राफ लेने नहीं दौड़ा कि अरे सर सेल्फी सेल्फी। यह सिंपलीसिटी भी साउथ की ऑडियंस में एक हद तक होती है। मैं यह नहीं कह रहा हूं भाई वहां भी क्रेज है सुपरस्टार का। रामचरण हो, रजनीकांत हो, कमल हसन हो उनको देखने के लिए जो फैंस हैं, जो भीड़ है उनको घेर लेती है। कभी-कभी हमने देखा भगदड़ की भी सिचुएशन आई है। लेकिन फिर भी वो थोड़े से सहज हैं स्टारडम को लेकर। अब जवागल श्रीनाथ की मैंने आपको यह तस्वीर और दिखाई। यह खुद बताती है कि जवागल श्रीनाथ कितने सिंपल हैं। और आप यह मत सोचिएगा कि भाई रिटायर हो गए हैं। कोई काम नहीं। BCCI वाली पेंशन पे चल रहा है मामला। ICC का रेफरी है यह शख्स। ICC का कई मैचों में रेफरी की भूमिका निभा चुके हैं और जवागल श्रीनाथ इससे भी मत सोचिएगा कमजोर हैं। जमाने से कमाते आ रहे हैं। आज भी कमा रहे हैं। आईसीसी के बहुत ही रेपुटेड ये रेफरी हैं। जवाघड़ श्रीनाथ। अपनी सेवाएं देते रहते हैं आईसीसी के मैचेस में। अब मैं आपको कुछ खबर दिखाता हूं। जरा उनको देखिए और फिर मैच करिए जवाघड़ श्रीनाथ वाली खबर से। यह खबर देखिए। 2 अगस्त 2023 की यानी करीब 3 साल पुरानी। भारतीय दौरे को लेकर विंडीज बोर्ड की बद इंतजामी पर भड़के हार्दिक पांड्या कहा उम्मीद है अगली बार सुविधाओं की कमी नहीं रहेगी। अब हार्दिक पांड्या की कप्तानी में टीम गई थी इंडीज वहां एयरपोर्ट पे कुछ लगे छूट गया किट छूट गई होटल आने में देरी थी। अब वेस्ट इंडीज के साथ एक दिक्कत है। वहां बहुत ज्यादा अच्छी सुविधाएं नहीं मिलती। यह बात सच है। पर हार्दिक पांड्या ने माइक के सामने पोस्ट मैच या प्री प्री मैच प्रेजेंटेशन था। अपनी भड़ास निकाल दी कि यहां की सुविधाएं हमें समझ में नहीं आई। अगली बार उम्मीद है हमें अच्छी सुविधा मिलेगी। मेरे भाई एक तो आप गए हो कमजोर टीम को चबाने कमजोर टीम आप वेस्ट इंडीज बोर्ड को बोल देते।

BCCI को बोल देते वो व्यवस्था करा देती। BCCI वो तो उस कई बोर्ड को पाल रही है BCCI द मोस्ट पावरफुल बोर्ड। इन्होंने लाइव कैमरे के सामने इंडीज बोर्ड की धज्जियां उड़ा दी कि यहां सुविधाएं नहीं थी। अब यह वह हार्दिक पांड्या हैं जो ₹200 ₹300 के लिए ट्रक पे सवार होके फ्री की सवारी करके दूर मैच खेलने जाते थे। चौके मार के जीताते थे और ₹200 ₹100 मिल गया तो दिन की पूरी मतलब एक तरह से किस्मत पलट गई। यह वाला अप्रोच था कि भाई 100 200 मिल गए तो भाई बहुत हो गया। मैगी खा के इन्होंने खुद को ढाला है। मतलब संघर्ष बहुत ज्यादा किया है। लेकिन वह संघर्ष जब आपको यह था कि आपको अपनी सिंपलीसिटी दिखानी थी। वहां ये दूसरे बोर्ड को गरिया रहे हैं कि हमें सुविधाएं नहीं मिली। भाई आप अपने खर्चे पे सुविधा करा देते टीम की। अगर आपको इतनी फिक्र थी। हां वो जो लगेज होता है वो आने में देरी हो गई। वो आपका एक जेन्युइन रीज़न था। उस पे नाराजगी बनती है। पर आप सबके सामने आपने एक जो आपका आपकी मेहमान नवाजी कर रहा था जो देश उस पर आप भड़क गए। जबकि हमारे यहां हम किसी के यहां जाएं वो अगर पानी तक भी ना दे तो भी हमें हक नहीं है उस पर भड़कने का। थोड़ा आइडियलिस्टिक बातें कर रहा हूं मैं। लेकिन हार्दिक पांड्या वो मैगी वाले हार्दिक पांड्या वो ₹1 ₹200 कमाने के लिए इधर भागने वाले हार्दिक पांड्या और यह हार्दिक पांड्या इनमें जमीन आसमान का अंतर दिखता है लेकिन जवागल श्रीनाथ में कोई अंतर नहीं दिखता कहने की बात मेरी इतनी है और आगे देखिए BCCI जापान की सुविधाओं से है नाराज एशियन गेम्स में बी टीम को भेजने की तैयारी यह खबर आई थी ऐसी अटकलें लगी थी फिर BCCI ने कहा नहीं हम बी टीम नहीं भेजेंगे हम ए टीम ही भेजेंगे पर BCCI ने माना कि जापान में जो एशियन गेम्स होने वाले हैं 17 सितंबर से लेके 3 अक्टूबर तक। उसमें बहुत खराब व्यवस्था कर रखी है। अब सोचिए जापान जो कि भारत से बड़ी इकॉनमी है। देश इतु सा है। लेकिन भारत से मजबूत अर्थव्यवस्था है जापान की। कहां हम उसको पछाड़ने जा रहे थे। अब खुद पांचवें छठवें पे हम डोल रहे हैं। जापान हमसे बड़ी इकॉनमिक पावर है। हमसे ज्यादा सभ्य देश है जापान। हमसे ज्यादा अनुशासित देश है जापान। इतिहास में जाएंगे तो हमसे ज्यादा गौरवशाली और सभ्य कोई नहीं मिलेगा। पर आज की बात करिए। जापान कमाल का देश है। मतलब आप जापान के नागरिकों से मिलिए। वो आपको एक असुविधा नहीं होने देंगे।

और मैं यह दावा भारत के बारे में नहीं कर सकता। नहीं कर सकता। हमारे पास कई ऐसे वीडियो आते हैं कि विदेशी टूरिस्ट घूमने गए। उनके साथ कभी कोई सेल्फी लेने के लिए बदतमीजी कर रहा है। कभी उनके साथ कुछ घटना हो जाती है। मैं मानता हूं ऐसे लोग दशमलव में हैं। लेकिन वो एक गलत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं देश की। जापान में एक तस्वीर दिखा दीजिएगा कि वहां के किसी लोकल ने टूरिस्ट के साथ बदतमीजी की हो। वहां के कल्चर में अनुशासन है और मेहमानों के खातिर सब कुछ न्योछावर कर देने की परंपरा है जो अभी भी चली आ रही है। जापान से कोई तुलना हो नहीं सकती। उस जापान की मेजबानी पर हमने नाराजगी जता दी। क्या छोटे कमरे स्टेडियम 20 कि.मी. दूर है होटल से। जापान में उस तरह के छोटे कमरे बनाना बनाने का ही रिवाज है। अब उसको BCCI बता दे कि हमारे जो खिलाड़ी हैं बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। उनको वो जो हसीना मान जाएगी फिल्म में गोविंदा और संजय दत्त का घर होता था ना कि अगर मोटरसाइकिल स्टार्ट करके सुबह से चले तो दूसरे कमरे में पहुंचने में शाम हो जाती थी। था ना ये हसीना मान जाएगी मूवी में। वो बताते थे ना कि कितने बड़े घर में हम रहते हैं कि एक भाई इतना बड़ा हमारा घर था कि यह बचपन में खो गया था। 20 साल बाद मिला। उसी घर में इतना बड़ा घर था। तो शायद हमारे खिलाड़ियों को वही घर चाहिए। आप एक टूर्नामेंट छोटे से कमरे में रह के नहीं खेल सकते। स्टेडियम 20 कि.मी. दूर है तो कोई पैदल ले जा रहा है आपको। बस आएगी ले जाने। और आपके सामने शिकार कौन है? पाकिस्तान है, बांग्लादेश है, श्रीलंका है और वो फॉर्मेट टी20 है। मतलब बिना ब्रश किए भी आप शिकार कर दोगे।

उन ऐसे देश हैं वह टी20 में भारत की तुलना कोई नहीं है। फुल स्ट्रेंथ वाली टीम है भाई। श्रेयस अयर कप्तान अभिषेक शर्मा है, सूर्यवंशी है, बूम बूम है। बूम बूम का डाउट भी हो सकता है। तो जब इस तरह की खबरें आती हैं कि जब हम पहली बार विश्व विजेता बने थे 1983 में हमारे खिलाड़ी के पास कुछ नहीं था। टिकट के पैसे नहीं होते थे। एक दो खिलाड़ी हम एक्स्ट्रा नहीं लिए जा सकते थे। हम विश्व चैंपियन बन गए। लेकिन आज नखरे देखिए कि हमें जापान की जो मेजबानी उस पे ऐतराज है। जापान के इंतजाम पे ऐतराज है। जापान में बने कमरे पर ऐतराज है। ऐतराज ही करिए या तो खेल लीजिए। देश के लिए खेलते ऐतराज पीछे रहता देश आगे रहता। बस इतनी सी बात है। जवाकर श्रीनाथ की सिंपलीसिटी की तारीफ मत कीजिए। वो वैसे ही हैं। उन पर यह जो हमारे क्रिकेटर हैं डिफेंडर से शुरुआत करते हैं। एक सीरीज खेल ली डिफेंडर आ गई। ऐसे चीजों का जवागल श्रीनाथ पे कोई फर्क नहीं पड़ता और ऐसे सिंपलीसिटी वाले जवागल श्रीनाथ सिर्फ अकेले नहीं है। पुराने कई खिलाड़ी हैं जो सिंपलीसिटी को कोई बहुत आप यह मत सोचिए बहुत रेयर चीज है। सबसे आसान चीज है सिंपल रहना। लेकिन कुछ लोगों के चक्कर में जिनको हम सोशल मीडिया फॉलो करते हैं। हमें लगता है यही दुनिया है। इसीलिए सिंपल रहने को हम विलक्षण मान लेते हैं। रेयर मान लेते हैं। कमी हम में है जवागढ़ श्रीनाथ में नहीं। इसलिए तारीफ नहीं बनती। आप तारीफ मत करिए। आप जवाकर श्रीनाथ की तारीफ मत कीजिए। असल में उन्होंने कुछ तारीफ वाला किया भी नहीं है। सिंपल है। सिंपल हो के ट्रेन में गए। सिंपल होकर ट्रेन से निकल गए। भारत यही है। आडंबर से बाहर आइए। असली भारत को पहचानिए। वीडियो में इतना ही। वीडियो पसंद आया हो शेयर करिए और टॉप सीक्रेट स्पोर्ट्स को अपना प्यार देते रहिए। थैंक यू सो मच।

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