सोशल मीडिया पर यह खबर भ्रामक रूप से प्रसारित की जा रही है कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई भी प्रयास किसी भी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है। [संगीत] उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा बीते दो-ती [संगीत] दिनों से खूब चर्चाओं में है। खबरों के मुताबिक प्रतिमा को हटाने की कोशिश करीब 10 दिनों से जारी थी। बताया गया कि भारी-भरकम मशीनें और क्रीम भी इसे हिला नहीं पाई। यहां तक कि जब मशीनों से बात नहीं बनी तो पुलिस बैंड बाजी के साथ हनुमान जी को मनाने पहुंची। हालांकि तब भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। इस पूरे मामले में अब प्रशासन की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल सिटी एसडीएम से जब इस प्रतिमा को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि अब तक तो प्रतिमा को हटाने की कोशिश ही नहीं की गई।
इस अपडेट के बाद थोड़ा सिर चकराना तो लाजमी है क्योंकि एक तरफ ऐसी खबरें सामने आई कि तमाम कोशिशों के बावजूद प्रतिमा को अपनी जगह से हटाया नहीं जा सका और देखते ही देखते यह पूरा मामला चमत्कार के दावों वाली सुर्खियों में छा गया लेकिन प्रशासन का तो कहना है कि प्रतिमा को हटाने का प्रयास ही नहीं किया गया। आपको बता दें मंगलवार को आईआईटी इंदौर की टीम भी मौके पर पहुंची थी। टीम ने करीब 2 घंटे तक विशेष उपकरणों की मदद से प्रतिमा [संगीत] की गहराई और उसके आसपास की जमीन की जांच की। दावा किया जा रहा है कि प्रतिमा करीब [संगीत] 1000 साल पुरानी हो सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक उम्र और जमीन के नीचे की स्थिति को लेकर फिलहाल आईआईटी इंदौर की रिपोर्ट का इंतजार [संगीत] है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए इसे हटाना संभव है या नहीं। अब जरा पुलिस प्रशासन की ओर से दिए गए बयान पर भी गौर कीजिए।
उज्जैन के एसडीएम एलए गर्ग ने कहा कि सभी लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखा जा रहा है। संबंधित पक्षों की सहमति के बिना प्रतिमा को हटाने की [संगीत] कोई कार्यवाई नहीं की जाएगी। विकास कार्य भी आवश्यक हैं और उज्जैन की धार्मिक आस्था भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेषज्ञों, संत समाज और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ ही समाधान निकाला जाएगा। यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है। साथ ही प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण भी आवश्यक है। खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से जुड़ा विषय उज्जैन वासियों एवं श्रद्धालुओं की आस्था से संबंधित है। प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की भावनाएं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत सर्वोपरि है। खड़े हनुमान जी के संबंध में प्रशासन सभी श्रद्धालुओं, नागरिकों की भावनाओं और एवं आस्था का संपूर्ण सम्मान करता है। सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना प्रशासन कोई भी कदम अथवा निर्णय नहीं लिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर यह खबर भ्रामक रूप से प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन द्वारा श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कई प्रयास किए जा चुके हैं। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अभी तक प्रतिमा को विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई भी प्रयास किसी भी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है। इस संबंध में यह निर्णय लिया गया है कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी राय प्राप्त किए बिना प्रतिमा के विस्थापन हेतु कोई भी आगे कारवाही नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों द्वारा प्रतिमा की संरचना का परीक्षण किया जाएगा। सिंघस्त 2028 के विकास कार्य भी महत्वपूर्ण है। साथ ही उज्जैन की आस्था एवं विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशासन श्रद्धालुओं एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद करके सर्वसमत समाधान निकालने का प्रयास करेगा। एसडीएम ने सोशल मीडिया पर चल रही उन तमाम खबरों को भ्रामक बताया है जिसमें कहा जा रहा है कि प्रशासन प्रतिमा को विस्थापित करने के लिए कई बार प्रयास कर चुका है। एसडीएम के इस बयान के बाद सवाल उठ [संगीत] रहे हैं कि क्या जानबूझकर इसे चमत्कार के तौर पर प्रचारित प्रसारित करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि यह बात तो साफ है कि जहां यह मूर्ति है, यह प्रतिमा है, वहां सड़क बननी है और यह तय है कि सड़क मंदिर को शिफ्ट किए बिना नहीं बन सकती। तभी तो इसे शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। सवाल यह भी है कि क्या सरकार विकास के साथ यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कहीं उसकी नकारात्मक छवि ना बने। जहां एक तरफ सड़क [संगीत] चौड़ीकरण के लिए इस जगह का विकास होना है। वहीं दूसरी तरफ मंदिर और प्रतिमा को हटाने का मामला धार्मिक आस्था [संगीत] से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल सड़क बनाने की नहीं बल्कि प्रतिमा को बिना नुकसान [संगीत] पहुंचाए लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कोई रास्ता निकालने की भी है। शायद यही वजह है कि अब वैज्ञानिक और तकनीकी जांच को अहम माना जा रहा है। सोचिए कि अगर प्रतिमा जमीन के भीतर किसी गहरी संरचना से जुड़ी है और उसे हटाने में क्षति का खतरा है तो सामान्य मशीनों से उसे शिफ्ट करना यकीनन आसान नहीं होगा। आईआईटी इंदौर की जांच से [संगीत] इस स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू भी है। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन के ऐसे बयान को कैसे समझा जाए? अगर वाकई प्रतिमा को हटाने की कोशिश नहीं हुई तो
फिर बीते दिनों सामने आई वो तमाम खबरें और दावे क्या थे जिनमें भारीभरकम मशीनों और कन से प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम होने की बात कही गई थी। खबरों में यह भी सामने आया कि जब शक्ति काम नहीं आई तो पुलिस ने भक्ति का सहारा लिया और बैंड बाजे [संगीत] के साथ प्रतिमा को मनाने की कोशिश की गई ताकि उसे वहां से शिफ्ट [संगीत] किया जा सके। ऐसे दृश्य सामने आने के बाद इस घटना को लेकर लोगों की आस्था [संगीत] और उत्सुकता दोनों इस मामले में बढ़ गई। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है कि [संगीत] प्रशासन फिलहाल इस पूरे मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता क्योंकि प्रतिमा को शिफ्ट करने की सबसे बड़ी शर्त यह है कि उसे किसी भी तरह की क्षति ना पहुंचे। वो खंडित ना हो। ऐसे में प्रशासन आईआईटी इंदौर की तकनीकी जांच को सामने रखकर वक्त ले रहा है ताकि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने का कोई रास्ता निकाला जा सके और शायद इसी वजह से अब आईआईटी [संगीत] की टीम को शामिल किया गया है। लेकिन दूसरी तरफ सवाल यह भी अपनी जगह है कि अगर शुरुआत से ही वैज्ञानिक और तकनीकी राय लेना जरूरी था तो प्रतिमा को हटाने को लेकर इतनी अलग-अलग खबरें और दावे कैसे आए? क्या प्रशासन पहले ही स्थिति को परख रहा था और अब विशेषज्ञों की मदद से कोई सुरक्षित रास्ता तलाश रहा है? सरकार के सामने चुनौती दोहरी है। सड़क का विकास का कार्य भी आगे बढ़ाना है और धार्मिक आस्था से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में कोई ऐसा कदम भी नहीं उठाना जिससे लोगों की भावनाएं आहत हो। ऊपर से यह मामला सियासी हो चुका है।
कांग्रेस विधायक महेश परमार और दिनेश जैन बॉस अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने ढोल नगाड़े और भगवा ध्वज [संगीत] के साथ जय श्री राम के नारे लगाए और मांग की कि जनता नहीं चाहती कि प्रतिमा को हटाया जाए। ऐसे में जनता की भावनाओं का ख्याल रखा जाए। वहीं बुधवार को आह्वान अखाड़े के महामंडलेश्वर अतुलेशानंद महाराज भी समर्थकों और गुरुकुल के छात्रों के साथ मंदिर पहुंचे और हनुमान चालीसा का पाठ किया। उनका कहना था कि पिछले 200 साल से हनुमान जी यहीं हैं और यहीं रहेंगे। तो देखिए कि प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई या नहीं। यह चर्चा का विषय हो सकता है। लेकिन एक बात साफ है। सड़क चौड़ीकरण के काम को सरकार आगे तो बढ़ाना चाहती है, लेकिन इसी के साथ लोगों की नाराजगी और [संगीत] प्रतिमा का खंडित होना। यह दोनों ही चीजें ऐसी है जिसे सरकार नजरअंदाज [संगीत] नहीं कर सकती। क्योंकि मामला धर्म का है, आस्था का है और यही इसे बेहद संवेदनशील बनाता है। अब देखना होगा कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है। सरकार इसका क्या हल निकालती है। इस मामले से जुड़ी हर अपडेट और देश और दुनिया की बाकी अहम खबरों के लिए डाउनलोड [संगीत] करें लाइव हिंदुस्तान ऐप। [संगीत]