वर्ष 1992 में रिलीज हुई निर्देशक मुकुल एस. आनंद की फिल्म ‘खुदा गवाह’ और अमिताभ बच्चन से जुड़ा यह किस्सा बॉलीवुड के इतिहास के सबसे रोमांचक और फिल्मी कहानियों में गिना जाता है। इस घटना के कई ऐसे पहलू हैं जो इसे बेहद खास बनाते हैं:1. गृहयुद्ध के दौर में अफगानिस्तान की यात्राजब इस फिल्म की शूटिंग के लिए अफगानिस्तान को चुना गया था, तब वहां सोवियत संघ के जाने के बाद भयंकर गृहयुद्ध (सिविल वॉर) चल रहा था।
देश की सत्ता राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अहमदजई के हाथ में थी, और चारों तरफ मुजाहिदीन गुटों के साथ संघर्ष की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में किसी विदेशी फिल्म की शूटिंग करना बेहद जोखिम भरा और असंभव सा कदम था।2. राष्ट्रपति की बेटी की अपील और ‘जंग रुकने’ का किस्साइस किस्से के अनुसार, भारत में अफगानिस्तान के पूर्व राजदूत शाइदा मोहम्मद अब्दाली ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि तत्कालीन राष्ट्रपति नजीबुल्लाह की बेटी अमिताभ बच्चन की बहुत बड़ी फैन थीं।
जब उन्हें पता चला कि उनके पसंदीदा अभिनेता अफगानिस्तान आए हैं, तो उन्होंने अपने पिता से आग्रह किया कि वे एक दिन के लिए लड़ाई रोक दें ताकि अमिताभ बच्चन सुरक्षित रूप से काबुल घूम सकें।कहा जाता है कि राष्ट्रपति के आग्रह और अमिताभ की लोकप्रियता के चलते वहां के विरोधी गुटों और मुजाहिदीन ने भी इस बात का सम्मान किया। इसके अलावा, विरोधी नेता बुरहानुद्दीन रब्बानी ने भी संदेश भिजवाया था कि वे फिल्म ‘दीवार’ के इस अभिनेता के बड़े प्रशंसक हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर निश्चिंत रहें।
3. वीवीआईपी मेहमाननवाजी और 10 टैंकों का सुरक्षा कवचअमिताभ बच्चन ने खुद अपने एक संस्मरण (मेमॉयर) में इस यात्रा का जिक्र करते हुए बताया था कि उन्हें और फिल्म यूनिट को वीवीआईपी स्टेट गेस्ट का दर्जा मिला था: * सुरक्षा के कड़े इंतजाम: सुरक्षा के मद्देनजर अमिताभ बच्चन के काफिले के आगे और पीछे कुल 10 सैन्य टैंक चलते थे। उन्हें और उनकी टीम को काबुल और मजार-ए-शरीफ ले जाने के लिए सशस्त्र एस्कॉर्ट्स के साथ विशेष विमानों और हेलीकॉप्टर्स का इस्तेमाल किया गया था। * होटल के बजाय स्थानीय घर में निवास: सुरक्षा कारणों से उन्हें होटल में ठहरने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बजाय एक स्थानीय परिवार ने सहर्ष अपना घर फिल्म यूनिट के लिए खाली कर दिया था
और खुद एक छोटे मकान में शिफ्ट हो गया था। * ऐतिहासिक सम्मान: यात्रा के अंत में राष्ट्रपति नजीबुल्लाह ने काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन में अमिताभ बच्चन और उनकी टीम को अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ अफगानिस्तान’ से अलंकृत किया था।4. फिल्म का क्रेजअमिताभ बच्चन और श्रीदेवी स्टारर यह फिल्म अफगानिस्तान में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी। वहां के दर्शकों के बीच इसका ऐसा क्रेज था कि यह अफगानिस्तान के सिनेमाघरों में रिकॉर्ड 10 सप्ताह तक चली थी और आज भी वहां भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की सबसे बड़ी मिसाल मानी जाती है।