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करीना कपूर ने बॉलीवुड की खोली पोल?

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बॉलीवुड में एक फिल्म हिट क्या होती है? उसके बाद उसी फार्मूले पर फिल्म बनने की जैसे लाइन लग जाती है और अब करीना कपूर ने इसी सोच पर सवाल उठा दिया है। करीना ने हाल ही में बॉलीवुड की इस हर्ड मेंटालिटी यानी कि भीड़ की मानसिकता पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा है कि अगर कोई एक फार्मूला चला जाता है

तो इंडस्ट्री बिना सोचे उसी रास्ते पर चलने लगती है। एक इंटरव्यू में करीना ने कहा कि आज की ऑडियंस पहले के मुकाबले काफी ज्यादा समझदार हो गई है। लोग सिर्फ स्टार, जॉनर या किसी ट्रेंड की वजह से फिल्म देखने सिनेमाघर तक नहीं पहुंचते। इसी दौरान करीना ने रणबीर कपूर की फिल्म एनिमल का एग्जांपल देते हुए कहा कि अगर एनिमल में वायलेंस चल गया तो इसका मतलब यह नहीं कि अब हर कोई वायलेंस पर फिल्में बनाने लगे। करीना ने सीधा साधा भेड़ चाल वाली सोच बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऑडियंस ट्रेलर, कहानी और कंटेंट देखकर फैसला लेती है। खासकर यंगस्टर्स अब सवाल पूछते हैं और फिल्म के पीछे की सोच को भी समझना चाहते हैं।

करीना ने यह भी माना कि हर फिल्म 200 या 500 करोड़ का कलेक्शन नहीं कर पाती है। इसलिए सिर्फ बॉक्स ऑफिस नंबर के पीछे भागने के बजाय इंडस्ट्री को अच्छे कंटेंट पर ज्यादा फोकस करना चाहिए। वर्क फ्रंट की बात करें तो करीना कपूर जल्द ही मेघना गुलजार की फिल्म दायरा में नजर आएंगी। इस कोर्ट रूम ड्रामे में उनके साथ पृथ्वीराज सुकुमारन भी लीड रोल में नजर आएंगे। वहीं सच्ची घटनाओं से इंस्पायर्ड यह फिल्म दो पुलिस अधिकारियों की कहानी पर आधारित है और 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। अब करीना का यह दिया गया स्टेटमेंट सोशल मीडिया पर बवाल मचा रहा है।

लोग अपने-अपने रिएक्शन दे रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सच में अगर एनिमल जैसी फिल्म चल जाती है तो उसी जॉर्नर में फिल्म बनाने की कोशिश की जाती है। जिसके चलते कंटेंट कॉपीड लगता है और कहीं ना कहीं कंटेंट जो है रेपिटेट होने की वजह से ऑडियंस निराश होती है और एक मेजर कारण यह भी है फिल्म ना चलने का एस पर द ऑडियंस बट अब देखना होगा कि करीना कपूर की स्टेटमेंट से क्या कुछ होता है। वहीं अब करीना का यह स्टेटमेंट सीधे तौर पर बॉलीवुड के बदलते ट्रेंड पर सवाल उठा रहा है। लेकिन सवाल यही है कि वाकई में इंडस्ट्री में हर्ड मेंटालिटी बढ़ गई है।

सो व्हाट्स योर टेक ऑन दिस? प्लीज डू कमेंट और ऐसे एंटरटेनमेंट से जुड़ी खबरों के लिए देखते रहिए फिल्म रिबीट। ऑलमोस्ट नौ या नौ या 10 साल लग गए थे जस्टिस डिलीवर करने में। और उसमें भी ऐसा देखा है कि जो था उसे छोड़ दिया गया था। ना उसका कोई आइडेंटिटी रिवल किया था। कुछ भी रिवल नहीं किया था। एंड एक्सैक्ट गाय इज़ अमंग अस। सो आप लोग को क्या लगता है कि रिफॉर्म होना चाहिए जुडिशियल सिस्टम में?

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