राजीव कपूर ने कसम खाई थी कि वह कभी आर.के. बैनर की किसी फिल्म में काम नहीं करेंगे और उन्होंने अपने ही पिता से बात करना बंद कर दिया था। दिलीप कुमार के साथ वह अधूरी फिल्म और लगातार असफलताएँ। अपने पिता के खिलाफ बगावत करते हुए, राजीव कपूर आर.के. स्टूडियो से बाहर निकल आए थे। वह दुनिया को यह साबित करना चाहते थे कि वह राज कपूर के बिना भी एक स्टार बन सकते हैं। उन्होंने एक के बाद एक फिल्में साइन करना शुरू कर दिया—’आसमान’, ‘लवर बॉय’, ‘ज़बरदस्त’, ‘महान साथी’, लेकिन शायद किस्मत उनके खिलाफ हो चुकी थी। एक के बाद एक उनकी सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर (फ्लॉप) साबित हुईं। जब भी दर्शक सिनेमाघरों में जाते…
राजीव कपूर के जीवन का यह दौर हिंदी सिनेमा (बॉलीवुड) के सबसे दुखद और पेचीदा अध्यायों में से एक है। कपूर खानदान जैसे प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद राजीव कपूर (चिम्पू) का करियर वैसी ऊंचाइयों को नहीं छू पाया, जिसकी उनसे उम्मीद थी।इस पूरे घटनाक्रम और उनके संघर्ष के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:1. ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता और गलतफहमीसाल 1985 में राज कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और इस फिल्म से राजीव कपूर रातोंरात स्टार बन गए थे।
हालांकि, इस फिल्म की सफलता के बाद भी राजीव कपूर के मन में एक टीस थी। उनका मानना था कि फिल्म की सफलता का पूरा श्रेय सिर्फ राज कपूर (उनके पिता) और मंदाकिनी को मिला, जबकि एक अभिनेता के रूप में उनकी मेहनत को नजरअंदाज किया गया। उन्हें यह भी लगता था कि आर.के. बैनर (R.K. Films) के भीतर उन्हें एक स्वतंत्र अभिनेता के रूप में वह पहचान नहीं मिल पा रही थी, जिसके वे हकदार थे। इसी खीझ और बगावत के चलते उन्होंने आर.के. स्टूडियो छोड़ने और अपने पिता से दूरी बनाने का बड़ा कदम उठाया।
2. दिलीप कुमार के साथ अधूरी फिल्मराजीव कपूर के करियर का एक बड़ा अधूरा सपना ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार के साथ जुड़ा था। एक समय ऐसा आया था जब राजीव कपूर को लेकर एक बड़ी फिल्म प्लान की जा रही थी, जिसमें दिलीप कुमार भी मुख्य भूमिका में थे। लेकिन आपसी मतभेदों, रचनात्मक असहमतियों या फिर उस दौर के हालातों के चलते वह प्रोजेक्ट बीच में ही अटक गया और कभी पूरा नहीं हो पाया। दिलीप कुमार के साथ स्क्रीन शेयर करने का उनका सपना अधूरा रह गया, जो उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ।3. आर.के. बैनर से बाहर निकलने का गलत दांवपिता राज कपूर के साये से बाहर निकलकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की जिद में राजीव कपूर ने धड़ाधड़ बाहर की फिल्में साइन करना शुरू कर दिया। उन्होंने ‘आसमान’, ‘लवर बॉय’, ‘ज़बरदस्त’, और ‘महान साथी’ जैसी कई फिल्में साइन कीं। उस दौर में उन्हें लगा कि वह अपने दम पर फिल्में चलवा सकते हैं।
4. बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफलताएंकिस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आर.के. बैनर के सुरक्षा चक्र और राज कपूर के निर्देशन के बिना राजीव कपूर की ये बाहरी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप (डिजास्टर) साबित हुईं। दर्शकों ने इन फिल्मों को सिरे से खारिज कर दिया। जिस स्वतंत्र स्टार बनने का सपना उन्होंने देखा था, वह धीरे-धीरे टूटने लगा। बाहर की फिल्में फ्लॉप होने और इंडस्ट्री में नाकामी मिलने के बाद उनकी स्थिति बहुत दयनीय हो गई थी।बाद का जीवनकैरियर की इस नाकामी और पारिवारिक तनाव ने राजीव कपूर को अंदर से तोड़ दिया था। हालांकि, बाद के वर्षों में उनके और उनके परिवार के बीच के रिश्ते सुधर गए थे। उन्होंने अभिनय से दूरी बनाकर फिल्म निर्माण और निर्देशन (जैसे ‘आग’ फिल्म का निर्माण) की ओर रुख किया। साल 2021 में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया, लेकिन उनके शुरुआती दौर की वह बगावत और असफलताओं की दास्तान आज भी बॉलीवुड के सबसे बड़े त्रासद किस्सों में गिनी जाती है।