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दिशा सालियान को ऐसा क्या पता था ? वकील ने किया चौंकाने वाला खुलासा

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दिशा सालियान मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए से इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील नीलेश ओझा सर, बॉम्बे हाईकोर्ट का एक बहुत बड़ा फैसला और कई पिताजी की कई वर्षों की लड़ाई पर यह फैसला आया है।

सबसे पहले तो कोर्ट का फैसला क्या है? क्या कुछ आर्डर डायरेक्टिव क्या आए हैं? कोर्ट ने कहा कि दिशा के पिता का स्टेटमेंट रिकॉर्ड करें और उसके बेस पे एफआईआर रजिस्टर करें। और सीनियर पुलिस अधिकारी इन्वेस्टिगेट अपॉइंट करें और इन्वेस्टिगेशन में जो जो आरोपी के खिलाफ में प्रूफ मिलेंगे उनको मतलब उनको सबको आरोपी बनाए जिनके खिलाफ में एविडेंस नहीं मिलेंगे उनको आरोपी नहीं बनाए तो एफआईआर में नामजद एफआईआर होगा या फिर नाम किसी का दर्ज नहीं किया जाएगा.

नहीं नहीं हमारा तो नाम दर्ज होगा मतलब नामजद होगा। हम उसमें नाम के साथ एफआईआर दे रहे हैं। हां लेकिन जो मेरे ख्याल से आगे की जो प्रोसेस होती है तो वह प्रोसेस में थोड़ा सा वो वो जो वर्ड है ना जज साहब ने शायद मेरे ख्याल से कंफ्यूजिंग लिखा है। देखते हैं उसको अगर जरूरत पड़ेगा तो उसको स्पीकिंग टू मिनट्स करके कर लेंगे क्योंकि एफआईआर जब रजिस्टर होता है जब मुझे पता है नाम है आरोपी के तो हम नाम लिखेंगे ना उसमें कौन है आपके नजर में आरोपी किन लोगों ने ये दिशा सालयान की की है आदित्य ठाकरे सूरज पंचोली डीनो मौर्या आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड बाद में सब उसके उनके कोस्पिरेटर जो है ये सचिन वाजे रिया चक्रवर्ती रोहन रॉय उद्धव ठाकरे वो अनिल देशमुख परमवीर सिंह ये सभी लोग हैं आपने ने तो 2020, 2021 के चर्चित चेहरों में किसी को नहीं छोड़ा। सबको आप आरोपी बता रहे हैं।

वाकई में इतने लोगों ने दिशा सालयान की के जिम्मेदार हैं। अरे हमने देखिए कंप्लेंट कोई ऐसी शादी देता है ना हमने कंप्लेंट भी एफिडेविट में दिया है और स्पष्ट लिखा है कंप्लेंट में। आपको मैं कॉपी भेजूंगा। अगर हमारे आरोप गलत निकले तो हमारे खिलाफ कारवाई कीजिए। अच्छा एक बड़ी बड़ी चुनौती यह आ जाती है कि इस मामले को पांच छ साल हो गए हैं।

सबूत इकट्ठा करना क्योंकि की एंट्री बड़े मामलों में हम देखते हैं बहुत बाद में होती है और फिर सबूतों के अभाव देखने को मिल जाते हैं। इस मामले में क्योंकि ये मामले को अब छ साल हो गए हैं। इस मामले में आप कैसे देखते हैं?

कितनी बड़ी चुनौती है सीबीआई के सामने जांच में? ये मामले में सारे जितने सबूत पहले थे उससे ज्यादा अभी आ गए हैं। और में और ज्यादा आएंगे। मैंने पहले दिन कहा था आज तो और ज्यादा हो गया है। लेकिन एक मैं पिछले साल की बात बता रहा हूं। जिस दिन हम कंप्लेंट देने गए थे उस समय हमारे पास वो सबूत थे कि एक आरोपी को की सजा तक पहुंचा सकते हैं। उतने सबूत तब थे। अभी और ज्यादा है और सीबीआई और ज्यादा निकालेंगी क्योंकि हमारे पास में 20 पुलिस ऑफिसर जो है वो आए विटनेस है। तत्कालीन सरकार और तत्कालीन उस समय के पुलिस अधिकारियों पर आपने भरोसा नहीं जताया। क्यों? नहीं हमने नहीं जताया क्योंकि उनका पूरा फ्रॉड दिख रहा था और हमारी बात कोर्ट ने माना कोर्ट ने खुद देखा ना अभी देखिए गिर रही है उसको पूरे जाएगा बोले ये ठीक है ये ठीक है ये ठीक है सब ठीक है होठ ठीक है अंदर का l है तो फिजिक्स है.

इनकी हुआ उधर 25 फुट दूर जाके तो इन्होंने पहले किया उसके बाद में ले जाकर वहां पर ले जाकर रख दी आप आप इतने दावे से आपने कहा कि मैंने एफिडेविट पे ये बात लिखी है तो कौन है कौन है किसने की किसने किया आई विटनेस हमारे पास है मैंने आपको जितने नाम गिनाए हैं के और के आरोपियों में हमने ने पहले दिन से जो मेन नाम रखे हैं। मेन नाम है

आदित्य ठाकरे उसके बॉडीगार्ड सूरज पांचोली रोहन रॉय एंड आदर्श ये आपने मुख्य नाम रखे हैं जिन जिनको आप का जिम्मेदार मानते हैं। मुंबई पुलिस ने का का जिम्मेदार मानते हैं। मुंबई पुलिस ने दो बार जांच की है। मुंबई पुलिस का जो अपने कोर्ट में जो बयान उन्होंने दिया उन दोनों बार में उन्होंने पाया कि यह केस ही है और उन्होंने दर्ज किया।

यहां तक कि जो सुशांत सिंह मामले में दर्ज की गई थी। की भी जांच में ऐसा कुछ निकल कर नहीं आया। पहली चीज इनका रिपोर्ट था। इसीलिए तो हमारी पिटीशन मंजूर हो के का आर्डर हुआ ना। तो यह पुलिस का जो मनोहर कहानियां था ना कोर्ट ने पहले दिन ही क्लियर किया। सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि वाले ऑफिसिसेस जो भी है उसमें एडीआर की इन्वेस्टिगेशन नहीं हो सकती। यह आपकी जो रिपोर्ट है यूज़लेस है। लीगली है। उसको कोई वैल्यू ही नहीं है। एक आदित्य ठाकरे के वकील ने कोर्ट में एफिडेविट दिया कि ने इस मामले में इन्वेस्टिगेशन करके मुझे क्लीन चिट दिया है। कोर्ट ने के ऑफिसर को बोला आप कंफर्म करो। के ऑफिसर ने वहां से कंफर्म किया। कोर्ट में सबमिशन दिया। उसने कहा कि साहब यह झूठा बोल रहा है।

हमने दिशा सालयान का मैटर कभी इन्वेस्टिगेट किया ही नहीं। तो क्लीन चिट देने का सवाल नहीं होता। इन्होंने पैसा देके वो न्यूज़ फैलाए थे। पब्लिश करवा के लाए थे। तो वो किसने न्यूज़ दिया था और क्यों दिया था वो भी लोग अरेस्ट होंगे। अभी यानी आप खुद मानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत का दिशा सैलन का कोई संबंध नहीं है केस का। नहीं बहुत संबंध है। डायरेक्ट संबंध है। हां यह तो कभी आप गलती से भी मत सोचना।

और यह इसी में सुशांत का केस फिर से रीओपन होगा। देखिए आपने अगर हमारा यह पढ़ा नहीं होगा आपने कंप्लेंट एफिडेविट मैं प्रूफ के साथ बता रहा हूं। दिशा ने जो इनका वीडियो रिकॉर्डिंग किया था का वो सब बाकी के कई चीजें वो कॉपी उसने दिया था सुशांत सिंह राजपूत को।

सुशांत सिंह उसमें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाला था। उसने यह बात रिया को बताई। रिया और आदित्य ठाकरे शौिक च ये लोग है। यह पहले इन्होंने दोनों ने स्टेटमेंट दिया कि हम दोनों एक दूसरे को नहीं जानते। जब ने रजिस्टर करके रिया को अरेस्ट किया। उसका फोन लिया। उसके चैट जो डिलीट हो गए थे उसको से रिकवर कराया।

उसमें आदित्य और रिया का सालों से संबंध है वो पार्टनर है। ये अप्रूव हो गया। दोनों के स्टेटमेंट झूठे हो गए। मुझे बताइए तुम्हारा कोई लेनदेन है तो तुम झूठ क्यों बोलोगे? अगर आप सिंपल हो मैं अगर आप पर आरोप लगाऊं कि आपने मेरा चुराया है तो अगर आप ईमानदार हो तो आप बोलोगे साहब मेरे पास बिल है मैं तो मेरा ऑथेंटिक मैं पर्सन हूं आप झूठ बोलोगे क्या तो ये जो पहले दिन से झूठा सबूत दे रहे थे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे जो झूठे सबूत देते हैं वो एडिशनल एविडेंस है और एक मैं उन लोगों का भी धन्यवाद अदा करता हूं जिन्होंने दिशा के पिता को और हमको डिरेज करने के लिए झूठे न्यूज़ चलाए थे .

आदित्य ठाकरे के सपोर्ट कोर्ट में क्योंकि यही ग्राउंड है सुप्रीम कोर्ट का कल्याण सरकार का जजमेंट है कि इसमें अब आदित्य एंड कंपनी आरोपियों को जेल में रखकर केस चलाने का इसमें अभी कोर्ट ऑर्डर कर सकता है। तो उन लोगों का भी धन्यवाद जिन्होंने पैसे खाकर ऐसी गलत न्यूज़ चलाई थी।

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