सालों बाद शर्मिला टैगोर ने खोला अपने दौर का राजशर्मिला टैगोर ने जब फिल्मों में कदम रखा, तब वह महज 13 साल की थीं। सत्यजीत रे की ‘अपुर संसार’ से शुरुआत करने वाली शर्मिला देखते ही देखते हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।
1960 के दशक में ‘कश्मीर की कली’ और ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ जैसी फिल्मों ने उन्हें ग्लैमरस स्टार बना दिया। लेकिन शर्मिला को डर था कि कहीं उनकी पहचान सिर्फ खूबसूरती और तक सीमित न रह जाए। उन्होंने बाद में बताया कि वह चाहती थीं कि लोग उन्हें एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में याद रखें।यही सोच उनके करियर में बड़ा मोड़ लेकर आई।
उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार चुनने शुरू किए। ‘आराधना’, ‘सफर’, ‘अमर प्रेम’, ‘अविष्कार’ और ‘मौसम’ जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय का दूसरा रूप दर्शकों के सामने रखा। ‘मौसम’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
शर्मिला ने यह भी बताया कि शादी के बाद फिल्में छोड़ने की सलाह उन्हें कई लोगों ने दी थी, लेकिन उन्होंने अपना करियर जारी रखने का फैसला किया। उनके मुताबिक, वह जिंदगी में परिवार और काम-दोनों को साथ लेकर चलना चाहती थीं।