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गुप चुप शादी और जिन्दगी भर ममता की कुर्बानी? अरुणा ईरानी की कहानी आपको रुला देगी

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25 अगस्त 2026 की यह सुबह बॉलीवुड और 90 के दशक के सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद दुखद खबर लेकर आई। मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से आई एक खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को शोकाकुल कर दिया। फूल और कांटे जैसी ऐतिहासिक फिल्म बनाने वाले और अजय देवगन को रातोंरात सुपरस्टार बनाने वाले दिग्गज निर्देशक कुकू कोहली साहब अब हमारे बीच नहीं रहे। भले ही आज की पीढ़ी के लिए कुकू कोहली का नाम थोड़ा अनजान लगता हो, लेकिन 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस पर राज करने वाले इस इंसान की

अपनी जिंदगी किसी बहुत बड़ी फिल्म स्क्रिप्ट से कम नहीं रही। पर्दे पर एक्शन और रोमांस की नई परिभाषा गढ़ने वाले कुकू जी की अपनी निजी जिंदगी में ढेरों रहस्य, विवाद और एक ऐसी अनकही प्रेम कहानी छिपी है। जिसने उस दौर में कई सवाल खड़े किए। कुकू कोहली, यानी अवतार सिंह कोहली का सफर पाकिस्तान के पेशावर से शुरू हुआ था। विभाजन के बाद भारत आए कुकू जी के दिल में सिनेमा को लेकर गजब का जुनून भरा था। यही जुनून उन्हें मुंबई खींच लाया, और यहां, उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े शो मैन राज कपूर का साथ मिला। पूरे 11 सालों तक कुकू जी ने राज कपूर साहब के चरणों में बैठकर निर्देशन के गुण सीखे। बॉबी, सत्यम, शिवम सुंदरम और प्रेम रोक जैसी महान फिल्मों में बतौर असिस्टेंट काम करते हुए उन्होंने वह बारीकियां सीखी जो आगे चलकर उन्हें बहुत काम आई।

इसके बाद सनी देओल की ब्लॉकबस्टर फिल्म बेताब और अर्जुन में सेकंड यूनिट डायरेक्टर बनकर उन्होंने अपनी धाक जमाई। और फिर वो दिन आया जब उन्होंने बतौर आजाद निर्देशक अपनी पहली फिल्म फूल और कांटे से पूरी इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया। साल 1991 में आई इस एक फिल्म ने हिंदी सिनेमा के सारे समीकरण बदल दिए। बाइक पर दो पैरों पर खड़े होकर एंट्री मारते अजय देवगन और कुकू कोहली के धमाकेदार डायरेक्शन ने इस फिल्म को डायमंड जुबली बना दिया। इसके बाद तो जैसे कुकू कोहली के नाम का सिक्का चलने लगा। सुहाग, हकीकत, अनाड़ी नंबर वन और यह दिल आशिकाना जैसी एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह बॉक्स ऑफिस के असली बाजीगर हैं। अजय देवगन के साथ-साथ उन्होंने यह दिल आशिकाना से करण नाथ को भी बतौर हीरो ल्च किया और संगीतकार नदीम श्रवण की जोड़ी की ऐसी वापसी कराई कि उस फिल्म के गाने आज भी लोगों की जुबान पर गूंजते हैं। लेकिन इस चमक-धमक भरे फिल्मी करियर के पीछे कुकू कोहली की अपनी एक अलग ही दुनिया चल रही थी। बात उस दौर की है जब वह अपनी फिल्म सुहाग की शूटिंग कर रहे थे। इसी फिल्म के सेट पर उनकी मुलाकात उस दौर की मशहूर और बेहद खूबसूरत अदाकारा अरुणा ईरानी से हुई। हैरानी की बात यह है कि

शुरुआत में अरुणा जी और कुकू कोहली के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी। दोनों के बीच 36 का आंकड़ा रहता था। एक दिन सेट पर कोरियोग्राफर सुरेश भट्ट के साथ बैठकर अरुणा जी निर्देशक कुकू कोहली का मजाक उड़ा रही थी। तभी कुकू जी वहां पहुंच गए और पूछ बैठे कि मेरे बारे में क्या बात हो रही है। सुरेश भट्ट ने माहौल को संभालते हुए मजाक में कह दिया कि अरुणा जी कह रही थी कि आप इस सफेद ड्रेस में कितने हैंडसम लग रहे हैं। बस इस एक मासूम सी गलतफहमी ने कुकू कोहली के सख्त रवय को मोम बना दिया। धीरे-धीरे इन दोनों के बीच बातें शुरू हुई और किसी को पता भी नहीं चला कि कब यह 36 का आंकड़ा एक बेहद गहरे प्यार में बदल गया। पर इस प्यार के रास्ते में बहुत बड़ी चट्टान खड़ी थी। कुकू कोहली पहले से ही शादीशुदा थे। उनकी पहली पत्नी रीता कोहली और दो बेटियां पूजा और करिश्मा उनका भरा पूरा परिवार था। अरुणा जी जब कुकू जी के प्यार में पड़ी तो उन्हें शुरुआती दौर में यह बात मालूम ही नहीं थी कि वे शादीशुदा हैं। लेकिन जब सच सामने आया तो अरुणा जी ने इस रिश्ते को समाज की नजरों से छिपा कर रखना ही सही समझा। कुकू जी के लिए भी एक ही समय में दो घरों को संभालना कोई आसान काम नहीं था। लेकिन उन्होंने दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। लिविन में रहने के बाद साल 1990 में दोनों ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली। बरसों तक अरुणा जी

ने अपने इस शादी का जिक्र दुनिया के सामने कभी नहीं किया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कुकू जी की पहली पत्नी और उनकी दोनों बेटियों के जीवन में कोई तूफान आए। शादी के बाद इस रिश्ते का सबसे ज्यादा भावुक और कड़वा सच तब सामने आया जब अरुणा जी ने कभी भी मां ना बनने का बहुत बड़ा फैसला लिया। दरअसल अरुणा जी खुद अपने पिता की दूसरी पत्नी की बेटी थी। बचपन में अपने ही पिता को सरेआम पापा ना कह पाने का दर्द उन्होंने बहुत करीब से झेला था। वह अच्छी तरह जानती थी कि अगर कुकू कोहली से उनकी संतान हुई तो समाज उस बच्चे पर ढेरों सवाल उठाएगा। एक शादीशुदा इंसान के घर से आने वाले बच्चों की मानसिक तकलीफ क्या होती है? वह इस बात को बहुत गहराई से समझती थी। इसलिए उन्होंने अपनी ममता का गला घोट दिया और यह तय किया कि वह कभी बच्चा पैदा नहीं करेंगे। उन्होंने हमेशा माना कि बिना बच्चे के जिंदगी कट सकती है। लेकिन अपने बच्चे को समाज के ताने सुनते देखना उनके बस की बात नहीं थी। कुकू जी की दोनों बेटियां भी आज फिल्म इंडस्ट्री में बतौर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर अपना नाम कमा रही हैं।

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