मैं दुनिया [गाना गाने की आवाज़] भुला दूंगी तेरी चांद। आज हम बात करेंगे एक ऐसी हीरोइन की जो सिर्फ एक मूवी से नेशनल क्रश बन गई थी। जाने जिगर जानेमन [संगीत] मुझको है तेरी कसम। तू जो मुझे एक ऐसी लड़की जिसे जबरदस्ती डायरेक्टर ने हीरोइन बनाया। उसने बहुत ही कम समय में वो नाम कमाया कि हर बड़ा एक्टर उसका हीरो बना। [संगीत] वाली होली हो लेकिन फिर एक हादसे ने उसकी जिंदगी नर्क बना दी थी तो हम बात कर रहे हैं आशिक की गर्ल अनु अग्रवाल की नजर के सामने जिगर के पार [संगीत] आखिर कैसे जो हीरोइन एक मूवी से स्टार बन गई थी वो रातोंरात बॉलीवुड से गायब हो गई। ऐसा क्या हुआ था कि अनु अग्रवाल ने सब कुछ छोड़कर एक सन्यासी का जीवन अपना लिया था। अनु अग्रवाल की जिंदगी जीते जी नर्क कैसे बन गई थी? क्या सच में उसका दो बार पुनर्जन्म हुआ था? जानेंगे आशिकी गर्ल की अनसुनी और रोचक कहानी। तो चलिए शुरू करते हैं। वेलकम टू फिल्मी विचार। अनु अग्रवाल का जन्म 11 जनवरी 1969 को दिल्ली में हुआ था। हालांकि कुछ जगह पर उनका जन्म 11 जनवरी 1962 भी लिखा मिलता है। अनु अग्रवाल एक अच्छे खासे अमीर परिवार में पैदा हुई थी। उनके पिता का नाम था रमेश प्रकाश जो पहले दिल्ली के हंसराज कॉलेज में टीचर थी और इसके बाद उन्होंने फाइनेंस मिनिस्ट्री में भी काम किया है। उनकी मां का नाम था उर्मिला आर्य। अनु अग्रवाल का असली नाम था अनीता आर्य अग्रवाल जो आगे चलकर अनीता से अनु हो गया। मेरे महबूब से मिलती है अनु अग्रवाल बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में बहुत तेज थी मतलब इतनी तेज थी कि उन्होंने कॉलेज में गोल्ड मेडल जीता था और गोल्ड मेडलिस्ट होकर जो पैसे मिले उन्हें लेकर वह मुंबई की हवा खाने पहुंच गई और बंबई पहुंचते ही उन पर मॉडलिंग का भूत सवार हो गया। इसके बाद पढ़ाई लिखाई छूट गई और वह अपना अंग प्रदर्शन करते हुए रैंप वॉक करने लगी। धीरे-धीरे अनु के सामने ऐड के ऑफर भी आने लगे और वह कई तरह के ऐड में काम करके पैसे छापने लगी। इसके बाद अनु अग्रवाल ने दूरदर्शन के धारावाहिक से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। अनु अग्रवाल पहली बार दूरदर्शन के शो इसी बहाने में दिखाई दी थी और यहीं से उनके एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई थी। कैसे बाप हैं
आप जो उसकी मदद करना तो दूर उसकी खतों का जवाब तक नहीं दिया। दिया था क्या? सिर्फ [संगीत] जवाब यार। अब जो लोग अनु अग्रवाल को महेश भट्ट की खोज कहते हैं तो वह बस इतना जान लें कि महेशवा से मिलने से पहले ही अनु अग्रवाल एक मॉडल बन चुकी थी और एक चर्चित टीवी सीरियल में एक्टिंग भी कर चुकी थी और इंटरव्यूज भी देने लगी थी। ऐसे ही एक इंटरव्यू को देखकर उन पर नजर पड़ी थी महेश भट्ट की। महेश भट्ट ने तुरंत फैसला किया कि इसे तो मैं हीरोइन बनाऊंगा। हालांकि शुरुआत में अनु अग्रवाल ने मना कर दिया था क्योंकि वह मॉडलिंग करके ही खुश थी और हीरोइन बनने का उनका कोई इरादा नहीं था। लेकिन महेश भट्ट ठहरा ढीठ आदमी। वो 6 महीने तक अनु अग्रवाल के पीछे पड़ा रहा और उससे कहता रहा कि हीरोइन तो मैं तुम्हें ही बनाऊंगा। अगर तुम सिलेक्ट हो गई तो कहां से कहां पहुंच जाओगी? ओनली स्काई इज द लिमिट। मगर मैं ये सब सोचने का वक्त नहीं। आखिरकार अनु भी मान गई और इसके बाद अनु अग्रवाल ने साइन की अपनी पहली मूवी आस्की। हालांकि इस समय तक अनु का नाम अनु नहीं बल्कि अनीता आर्य अग्रवाल ही था। तो सबसे पहले महेश भट्ट ने उनका नाम बदला और उसे अनीता से अनु कर दिया। तभी तो खोज का क्रेडिट मिलेगा। और इस तरह महेश भट्ट की खोज बनी अनु अग्रवाल। मैं क्या [संगीत] चाहती हूं मैं? 1990 में जब आशिकी आई तो इसने लवर्स के दिलों में तूफान ला दिया। हर कोई इसका दीवाना हो गया था। एक तरफ जहां लड़के लंबे बाल करके राहुल रॉय बनकर घूमने लगे थे। बस एक सनम चाहिए [गाना गाने की आवाज़] आशिकी के [संगीत] लिए। तो वहीं बड़े बाप की परियां भी गरीब और मासूम अनु बनकर घूमने लगी थी। धीरे-धीरे से जिंदगी में आना। धीरे [संगीत] धीरे इस मूवी के गाने ऐसे हिट हुए कि आज भी इन गानों के बिना 90ज के एवर ग्रीन गानों की लिस्ट अधूरी सी लगती है। तू [संगीत] मेरी जिंदगी है तू। मतलब हर गाना यादगार बना और अनु अग्रवाल ऐसी फेमस हुई कि रातोंरात स्टार बन गई। तेरा साथ छूटा वादा जो टूटा मैं खुद को मिटा दूं। इस एक मूवी ने अनु अग्रवाल को जमीन से आसमान पर बिठा दिया और वह बॉलीवुड की टॉप की हीरोइन वाली लिस्ट में शामिल हो गई थी। इस मूवी के बाद अनु अग्रवाल के चाहने वालों का आलम यह था कि उनके किराए के घर की दीवारों पर लोगों ने आई लव यू अनु लिख दिया था और पूरी दीवार भर दी थी। उनके घर के सामने लोगों की भीड़ ऐसे लगती थी मानो वो एक बड़ी सुपरस्टार हीरोइन है और हर कोई उनकी एक झलक को तरसता था [संगीत] और एक मूवी से अनु ने वो स्टारडम देखा जिसके लिए हीरोइन अपनी जिंदगी निकाल देती हैं। अनु की जोड़ी राहुल रॉय के साथ हिट हुई तो अगली मूवी में फिर से दोनों एक साथ दिखाई दिए। चुनरी प्यार की उड़ी आसमान [संगीत] में मूवी का नाम था गजब तमाशा मेकर्स ने आशिकी की स्टार कास्ट को दोबारा लिया तेरे जैसा मेरे जैसा कोई आशिक नहीं [संगीत] इस ज जिसमें हीरो राहुल रॉय थे हीरोइन अनु अग्रवाल थी और साइड एक्टर दीपक तिजोरी ज्यों का त्यों रख दिया था
लेकिन दर्शकों ने इसे बासी चावल बताकर नकार दिया ना तो विदेशी लिबाज में नाचती हुई देसी अनु किसी को पसंद आई और ना ही मूछ पूछों वाला राहुल रॉय किसी को भाया दीवाना दीवाना मैं [संगीत] तेरा दीवाना [गाना गाने की आवाज़] और राहुल के साथ उनकी जोड़ी और मूवी दोनों ऐसे पिटे कि अनु अग्रवाल यह कहने लगी होने दे मुझ पे दया कर दे अनु को लगा कि कहीं वो फ्लॉप हीरोइन वाली लिस्ट में शामिल ना हो जाए और लोग उन्हें देखकर यह ना कहने लगे भाई ये तो शुरू होते ही खत्म हो इसलिए उन्होंने साउथ में कदम रखा और मणि रत्नम की थ्रूदा थ्रू में काम किया। यह मूवी तो हिट रही लेकिन इससे अनु अग्रवाल को कुछ खास फायदा नहीं हुआ और इसके बाद वो वापस से बॉलीवुड में लौट आई। इसके बाद आई किंग अंकल जिसमें अनु अग्रवाल जैकी श्रॉफ की हीरोइन बनी। यह मूवी लोगों को भले ही याद ना हो लेकिन इसके सॉन्ग कोई नहीं भूल सकता। फिर चाहे शाहरुख खान और नगमा का यह गाना हो इस जहां की [गाना गाने की आवाज़] नहीं है तुम्हारी [संगीत] आंखें इस जहां की नहीं जिसे आज भी प्यार में डूबा आशिक सर्च करके सुनता है आसमान से ये किसने [संगीत] उतारी आंखें [गाना गाने की आवाज़] या फिर मूछों पर बना यह वन एंड ओनली पैरोडी सॉन्ग हो काटी नहीं तू [संगीत] क्यों अपनी मूछ लगती है जैसे चूहे की मूछ जिसे हर मूछ लवर को सुनना चाहिए। मैं ना काटूंगा। [संगीत] मैं ना काटूंगा। मुझे [गाना गाने की आवाज़] यह मूवी बच्चों वाली थी। तो मां-बाप ने बच्चों से कहा कि जब टीवी पर आएगी तो देख लेना। इसलिए यह मूवी फ्लॉप हो गई और बच्चों ने इसे मजेदार फिल्म बताया। लेकिन जब यह टीवी पर आई तब। इसके बाद अनु जितेंद्र के साथ कुछ ऐसी हरकतें करते हुए नजर आई। मेरे महबूब से मिली है आपकी। हालांकि इस बार वो हीरोइन नहीं बल्कि खलनायिका बनी थी और इसलिए मूवी का नाम था खलनायिका। इस मूवी में पहली बार अनु खतरनाक विलेन बनी और आशिकी की मासूम सी लड़की इस बार सबको डरावनी सी लगी। स्त्री होकर भी तुम अपने पति को पत्नी का सुख नहीं दे सकती। क्योंकि तुम बीमार हो। तमी की मरीज वो अलग बात है कि डायरेक्टर ने उसे इतनी हल्की खलनाई का बनाया था कि उसे हेट करना है या उस पर दया दिखानी है। लोग इसी में कंफ्यूज हो गए। यह मेरा मुन्ना है। इसे मैंने अपना दूध पिलाया है। खबरदार अगर कोई चालाकी की तो मैं इसकी गर्दन काट दूंगी। अरे कहना क्या चाहते हो? और ऊपर से मूवी का डायरेक्शन भी ऐसा था कि जिसने भी इसे देखा उसका कुछ और देखने का मूड ही नहीं रहा। उन्हीं की याद में मैंने ये ड्रेस पहन ली। अरे नहीं नहीं धीरे रखोगे ना? आपकी सूरत मेरे पति से इतनी मिलती है। और मूवी में काम किया जिसका नाम था कन्यादान। इसमें उनके हीरो थे ऋषि कपूर। इंटरेस्टिंग बात यह थी कि इस मूवी में दो हीरोइन थी। एक तरफ थी अनु अग्रवाल
और दूसरी तरफ थी दिव्या भारती। लेकिन दिव्या भारती की अचानक से मौत हो गई और फिर उनकी जगह मनीषा कोराला को मूवी में ले लिया गया। हालांकि मूवी पूरी होने के बाद भी यह कभी रिलीज नहीं हुई और अगर यह मूवी रिलीज होती तो अनु अग्रवाल की हीरो वाली लिस्ट में ऋषि कपूर भी शामिल हो गए होते। इसके बाद अनु विनोद खन्ना की हीरोइन बनी। दिल तुझ पे फिरा पहली [संगीत] बार हो गया। जिसे नजरें मिली बेकरार। मूवी आई जन्म कुंडली जो एक मल्टीस्टारर मूवी थी। लेकिन अनु ने इसमें बेहतरीन काम किया। मूवी के गाने भी बहुत हिट हुए। फिर चाहे लल्ला होने पर अनोखी बधाई वाला यह गाना हो। लल्ला तेरा घर आ गया। ये झंडा तेरा ऊंचा रहे। जो अगर सच में हमने किसी के बेबी वेलकम पर बजा दिया तो बेबी से पहले हमारा स्वागत होगा और वह भी जूतों से। संग [संगीत] जो लहरा गया वो डंडा तेरा सूचा रहे। मूवी का हर गाना यादगार बना जिसने लोगों को खूब एंटरटेन किया। अनु अग्रवाल ने एक साथ दो-दो हीरो के साथ रोमांस किया। एक तरफ थे जितेंद्र और दूसरी तरफ थे विनोद खन्ना और सच में विनोद खन्ना के साथ वो इतनी रोमांटिक हुई अगर बरसात ना होती तो दिल की [संगीत] बात ना होती कि लोगों को आज फिर तुम पर प्यार आया है वाली माधुरी दीक्षित याद आ गई आज फिर तुम पे प्यार आया है मतलब अनु अग्रवाल ने विनोद खन्ना के साथ भी यादगार मोमेंट बनाए अगर यह रात ना होती तो दिल की बात ना होती। मूवी में रामायण के लक्ष्मण जी यानी कि सुनील लहरी भी थे जो विनोद खन्ना के बेटे का किरदार निभा रहे थे और यह मूवी बड़ी हिट हुई लेकिन बॉक्स ऑफिस पर नहीं बल्कि टीवी पर। इसके बाद जैकी श्रॉफ की रामशस्त्र में अनु अग्रवाल सिर्फ एक गाने में दिखाई दी और कीचड़ में ऐसी सनी कि वह अनिल कपूर की लेडी नायक लगी। [संगीत] अरे मैया देख मी [संगीत] [संगीत] इसके बाद जब देवानंद रिटर्न ऑफ ज्वेल थीफ लेकर आए तो अनु अग्रवाल ने देवानंद के साथ भी रोमांस किया। आंखें चुरा के [संगीत] जो गुजर जाएगा तू सारी उम्र फिर पछताएगा। मतलब सच में वो कितनी लकी रही जिसे एवरग्रीन स्टार के साथ भी रोमांस करने का मौका मिला। हालांकि यही अनु अग्रवाल की आखिरी मूवी बन गई और इसके बाद उनकी जिंदगी कुछ ऐसी बदली जिसके बारे में सोचकर ही लोग परेशान हो जाते हैं। तो अब हम बात करेंगे अनु अग्रवाल की पर्सनल लाइफ की। अनु अग्रवाल की आखिरी मूवी 1996 में आई थी। अनु अग्रवाल ने काम भले ही कम किया लेकिन उनकी पहचान बहुत बड़ी हुई थी जिसका मुख्य कारण उनकी बोल्डनेस भी रही। [संगीत] [संगीत] क्या कर रहा है यार तू? अनु पहली एक दो मूवी के बाद ही शायद यह समझ चुकी थी कि अगर बॉलीवुड में टिके रहना है तो बोल्डनेस का सहारा लेना ही पड़ेगा। और बिना बोल्डनेस दिखाए यहां हीरोइन को कोई भाव नहीं देता। तो फिर अनु अग्रवाल ऐसी बोल्ड हुई कि उन्हें दूसरी जीनत अमान कहा जाने लगा। वह किसी भी तरह का सीन दे देती थी और अपनी बोल्डनेस और हॉटनेस के दम पर उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। उनके बारे में लोग बातें करने लगे थे कि अनु अग्रवाल में से आशिकी गर्ल निकल चुकी है। उन्होंने खुद उस मासूम लड़की को मार दिया है। धीरे-धीरे से दिल [संगीत] को चुराना। और अब जो अनु हमारे सामने हैं, वह एक बोल्ड और बिंदास लड़की है। लोग उन पर बोल्डनेस का ठप्पा लगा ही रहे थे कि तभी अनु ने एक जर्मन मूवी में काम किया। मूवी का नाम था द क्लाउड डोर। इस मूवी में अनु ने सारी हदें पार की और इतने बोल्ड सीन दिए जिन्हें लोग पचा ही नहीं पाए। उन्हें देखकर किसी को भी भरोसा नहीं हो रहा था कि यह वही आसकी गर्ल है जिसकी आवाज नहीं निकलती थी और उसकी मासूमियत पर लोग फिदा हुए थे
जो अब इतनी बोल्ड हो चुकी है कि मासूमियत पसंद करने वाले लोग उनसे किनारा करने लगे थे और बोल्डनेस पसंद करने वाले लोग उन पर अपनी आंखें सेकने लगे थे। अनु अग्रवाल ने सिर्फ मूवीज में काम नहीं किया बल्कि वह एमT के प्रोग्राम ओएमटी की वीजे भी रही और उन्होंने पूरे 4 साल तक टीवी पर काम किया और बेहतरीन तरीके से एमT पर अपनी पहचान बनाई। अनु अग्रवाल का करियर बहुत अच्छा चल रहा था। उन्हें काम भी मिल रहा था और वह हर बड़े एक्टर के साथ काम कर रही थी। लेकिन फिर अचानक से एक ऐसी घटना घटी जिसने सब कुछ बदल दिया। [चीखने की आवाज़] अनु अग्रवाल का एक भयंकर कार एक्सीडेंट हुआ। यह एक्सीडेंट इतना खतरनाक था कि अनु अग्रवाल का चेहरा बर्बाद हो गया था। शरीर पूरी तरह से टूट गया था। दिमाग पर ऐसी चोट आई थी कि वह कोमा में चली गई थी। अनु अग्रवाल पूरे 29 दिनों तक कोमा में पड़ी रही और हर किसी ने उनके मरने की खबर फैला दी थी। सबको लगा कि अब अनु अग्रवाल का जिंदा बचना मुश्किल है और शायद वह कभी नहीं उठेंगी। लेकिन अनु अग्रवाल ने मौत को मात दी और 29 दिन बाद वह होश में आ गई। लेकिन अब अनु अग्रवाल अपनी याददाश्त खो चुकी थी। उन्हें कुछ भी याद नहीं था वो कौन हैं और क्या करती हैं और एक झटके में अनु अग्रवाल का दिमाग जीरो हो गया था। बच्चा पेट ही में मर गया। [संगीत] नहीं [चीखने की आवाज़] उनका लुक पूरी तरह से बदल चुका था। कार एक्सीडेंट में कार के शीशे के टुकड़े उनके चेहरे में ऐसे धंसे कि पूरा चेहरा खराब हो चुका था। उनके इतने ऑपरेशन हुए कि पहली वाली अनु अग्रवाल मानो कहीं खो गई थी और यह जो लड़की अब लोगों के सामने थी, वह एक अलग ही लड़की बन चुकी थी। उनका चेहरा इतना बदल चुका था कि अनु अग्रवाल खुद को भी नहीं पहचान पा रही थी। उनका चेहरा बहुत ही अजीब सा दिखने लगा था। हाथ पैर काम करना लगभग बंद कर चुके थे और उन्हें यह भी याद नहीं था कि उन्होंने कभी मूवीज में काम भी किया है। लेकिन बेटी जो कुछ हुआ है उसे भूल जाओ। जीना सीखो। हां सिस्टर जिऊंगी। जब लोगों ने उन्हें कुछ याद दिलाने की कोशिश की तो उन्हें दौरे पड़ने लगे और उनकी तबीयत और भी ज्यादा बिगड़ने लगी। अनु अग्रवाल को सब कुछ भ्रम जैसा लगने लगा। उनका दम घुटने लगा था। इसलिए उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया। उन्होंने योग को अपना जीवन बनाया और वह उत्तराखंड में एक योग आश्रम में रहने लगी। वह दिन रात बस योग साधना में खुद को लीन रखती और दुनियादारी को उन्होंने छोड़ दिया था। इसी योग ने उन्हें एक नई जिंदगी दी और इसी योग के सहारे वह अपनी जिंदगी में वापस लौटी और धीरे-धीरे उन्हें अपनी पुरानी जिंदगी भी याद आ गई। लेकिन अब अनु अग्रवाल उस पुरानी दुनिया में नहीं लौटना चाहती थी। उनका बॉलीवुड में मन भर चुका था। वो उस चकाचौंध में नहीं जाना चाहती थी। इसलिए उन्होंने अपना घर और कार बेच दी और दुनिया की सैर पर निकल गई। उनका हमेशा से दुनिया घूमने का मन था। वो वर्ल्ड टूर करना चाहती थी। इसलिए वो वर्ल्ड टूर पर चली गई। लड़की गली की देखो बन गई मैं। भूल गई मैं। अनु अग्रवाल जब वापस लौटी तो उन्होंने हमेशा के लिए एक्टिंग और फिल्मी दुनिया छोड़ दी और अपना जीवन योग को समर्पित कर दिया। वह एक योगा ट्रेनर बन गई और उन्होंने अपने नाम से एक फाउंडेशन शुरू किया जिसमें वह गरीब बच्चों को योगा सिखाने लगी। अनु अग्रवाल ने यह फाउंडेशन इस तरह से चलाया कि वह लगभग 3 लाख से भी ज्यादा लोगों को योग सिखा चुकी हैं। अनु अग्रवाल की अगर लव लाइफ की बात की जाए तो वह रिग नाम के एक लड़के से प्यार करती थी। लेकिन जब वह फिल्मों में बोल्ड सीन देने लगी थी तो उस लड़के ने अनु अग्रवाल से दूरी बना ली थी। अनु अग्रवाल का सपना था कि वह एक दिन यह इंडस्ट्री छोड़कर रिक के साथ पेरिस में अपना घर बसा लेगी। [संगीत] थी। वह फिल्मों में काम जरूर कर रही थी,
लेकिन बॉलीवुड से जुड़ाव महसूस नहीं करती थी। उन्हें हमेशा एक आउटसाइडर जैसा महसूस करवाया जाता था। ना तो उन्हें कभी किसी पार्टी में बुलाया जाता था और ना ही लोग उन्हें उतना भाव देते थे। बॉलीवुड की अंदर की पॉलिटिक्स और दोहरे चेहरे से अनु अग्रवाल हताश हो गई थी। इसलिए उन्होंने फैसला किया था कि थोड़ा पैसा कमाकर वो बॉलीवुड छोड़ देंगी, और अपने बॉयफ्रेंड से शादी कर कर कहीं दूर चली जाएंगी। लेकिन इससे पहले ही उनके बॉयफ्रेंड ने उन्हें छोड़ दिया और अनु अग्रवाल का आखिरी सहारा भी उनसे छूट गया। वह इस दुख से संभलती कि इससे पहले ही उनका एक्सीडेंट हो गया और उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई। हालांकि फिर भी उन्होंने मौत पर जीत हासिल की और दोबारा अपनी जिंदगी जीना शुरू किया। आजा रे आ सजना [संगीत] तू छोड़ मुझे। अनु अग्रवाल ने अपनी जिंदगी पर एक किताब भी लिखी है जिसमें उन्होंने अपनी जिंदगी के हर पहलू पर बात की है। अनु अग्रवाल अब पूरी तरह से एक्टिंग से दूर हैं और योग में ही अपनी दिनचर्या बिता रही हैं। वह अब तक लगभग 3 लाख से भी ज्यादा लोगों को योग सिखा चुकी हैं और योग करती हैं, योग सिखाती हैं और योग ही लिखती हैं। अनु अग्रवाल पूरी तरह से बदल चुकी हैं। कोई भी उन्हें एक नजर में देखकर पहचान नहीं पाता। उनका चेहरा बदल चुका है और अब वह पहले जैसी बिल्कुल नहीं दिखती और कोई भी उन्हें देखकर यह नहीं बता सकता कि यह वही अनु अग्रवाल हैं जिसने आशिकी से लोगों के दिलों में घर कर लिया था। अब वो पहले जैसी बिल्कुल भी नहीं रहीं। ना तो वह जिंदगी रही और ना ही वह लुक रहा। कह सकते हैं कि यह उनका दूसरा जन्म है और वह एक अलग ही लड़की हैं। अनु अग्रवाल अब लगभग 57 साल की हो चुकी हैं। वह मुंबई में ही रहती हैं और एक अलग तरह की जिंदगी जी रही हैं। आपको अनु अग्रवाल याद है तो हमें कमेंट में जरूर बताएं। मैं दुनिया [गाना गाने की आवाज़] भुला दूंगी। तेरी चाहत