45 करोड़ फ्रॉड केस में विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी की मुश्किलें खत्म होती नजर नहीं आ रही है। विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी जो इस वक्त बेल पर बाहर है उन्हें फिर से जेल जाना पड़ सकता है और इस बार तो सजा 7 साल की हो सकती है। विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी इस केस में ऑलरेडी 2 महीना उदयपुर की जेल में रह चुके हैं
और बेल पर वह बाहर आए हैं। जिस वक्त उन्हें बेल दी गई तब विक्रम भट्ट और उनकी लीगल टीम ने कोर्ट को यह बताने की कोशिश की कि उनके और डॉक्टर अजय मुंडिया के बीच जो मैटर है यह फ्रॉड का मैटर नहीं बल्कि यह तो सिविल मैटर में ट्रीट किया जाना चाहिए क्योंकि यह ब्रीच ऑफ कॉन्ट्रैक्ट है। यह कोई फ्रॉड नहीं और अगर फ्रॉड है तो आप बताइए कि फ्रॉड कैसे हुआ? यह बहस लंबे समय से राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही थी।
अब हाईकोर्ट ने माना है कि यह जो केस है यह सिविल केस नहीं बल्कि फ्रॉड केस ही है और इस केस को फ्रॉड केस की तरह ही लड़ा जाएगा। अजय मूडिया की तरफ से कुछ ऐसे सबूत पेश किए गए। साथ ही कुछ ऐसे गवाह पेश किए गए जो यह बताते हैं कि वाकई में विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी ने डॉ. अजय मूडिया के साथ किया।
वो कोई सिविल केस नहीं बल्कि वो एक फ्रॉड था। एक्चुअली खुद विक्रम भट्ट के वेंडर संदीप त्रिलोभन और को प्रोड्यूसर महबूब अंसारी ने कोर्ट के सामने यह कबूल किया है कि विक्रम भट्ट के कहने पर उन्होंने कुछ पेंटर्स, रिक्शा चालक और ऐसे ही वर्कर्स के नाम पर फर्जी वेंडर खाते खुलवाए। फिर इनके नाम से फर्जी इनवॉइसेस रेज की गई और इन अकाउंट्स में फर्जी बिल्स के जरिए ₹ ₹2 लाख मंगवाए गए। 25 से ज्यादा बार इस तरह के फर्जी बिल्स जनरेट किए गए
और पैसा ऐठा गया। जब खुद विक्रम भट्ट के वेंडर ने सामने आकर यह बात कही तो कोर्ट ने भी मान लिया कि यह जो मामला है यह सिविल का नहीं यह तो फ्रॉड का है। इसके अलावा कुछ ऐसे ट्रांजैक्शंस भी सामने आए जो यह बताते हैं कि डॉ. अजय मुंडिया की तरफ से जबजब विक्रम भट्ट ने पैसा मांगा वह पैसा गया। लेकिन विक्रम भट्ट ने जो काम करने की गारंटी दी थी, वह काम तो किया ही नहीं। और तो और काम करने के लिए जो पैसा भेजा गया उसका भी गलत इस्तेमाल