बच्चन परिवार और गांधी परिवार के बीच के रिश्ते के बारे में सभी जानते हैं। देश की प्रधानमंत्री [संगीत] इंदिरा गांधी और तेजी बच्चन दोनों के बीच खासी दोस्ती थी। वहीं दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी की दोस्ती राजनीतिक और फिल्मी दुनिया में काफी मशहूर थी। इंदिरा गांधी अमिताभ को अपने बेटे की तरह मानती थी और तेजी बच्चन राजीव गांधी को अपने बच्चे जैसा प्यार देती थी। ऐसे में इंदिरा गांधी ने एक बार बॉलीवुड के एक दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर से अमिताभ बच्चन की सिफारिश की थी। इसके चलते उस डायरेक्टर को अपना बंगला तक गिरवी रखना पड़ा था।
आइए जानते हैं कौन है वो डायरेक्टर जिसने फिल्म बनाने के लिए अपना बंगला तक गिरवी रख दिया था। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं। तो दोस्तों हम बात कर रहे हैं साल 1971 में आई उस फिल्म की जिसमें एक दो नहीं बल्कि दिग्गज एक्टर सुनील दत्त के साथ कई सितारे नजर आए थे। इस फिल्म का नाम है रेशमा और सेरा। इस फिल्म को सुनील दत्त ने ही डायरेक्ट किया था। साथ ही इसमें वह बतौर एक्टर भी नजर आए थे। उनके अलावा मूवी में वही रहमान, विनोद [संगीत] खन्ना, राखी, रंजीत, जयंत, अमरीश पुरी और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकार भी थे। रिलीज के बाद रेशमा और सेरा सुपरहिट फिल्म साबित हुई। फिल्म में सभी स्टार कास्ट ने अपनी एक्टिंग से जान डाल दी थी।
मूवी ने सुनील दत्त के करियर को एक खास पहचान भी दिलाई थी। रेशमा और सेरा में अमिताभ बच्चन ने एक गूंगे का किरदार निभाया था। अमिताभ मूवी में सेरा यानी सुनील दत्त [संगीत] के छोटे भाई छोटू बने थे। फिल्म के लिए सुनील दत्त को अमिताभ बच्चन बिल्कुल भी पसंद नहीं थे। सुनील दत्त को अमिताभ की आवाज भी पसंद नहीं थी। पर ना चाहते हुए भी इंदिरा गांधी जी के कहने पर उन्हें फिल्म में ले लिया गया। दरअसल सुनील दत्त की पत्नी यानी नरगिस दत्त और इंदिरा गांधी अच्छी दोस्त थी। इंदिरा ने नरगिस से अमिताभ को रेशमा और सेरा में लेने की सिफारिश की।
ऐसे में सुनील दत्त उनकी बात को काट नहीं पाए। साथ ही इंदिरा गांधी अमिताभ की मां तेजी बच्चन की भी गहरी [संगीत] दोस्त थी और इलाहाबाद के दिनों से उनकी दोस्ती जारी थी। दरअसल सुनील दत्त ने शुरू में प्लान किया था कि वह रेशमा और सेरा की शूटिंग सिर्फ 15 दिनों में पूरी कर लेंगे। बाद में वक्त बढ़ता चला गया क्योंकि इस फिल्म में लगभग 100 लोगों की टीम थी। सुनील दत्त ने जैसलमेर से 80 मील दूर पोचीना नाम के गांव में अपनी यूनिट के टेंट लगाए। 15 दिनों की शूटिंग आखिरकार 2 महीनों से अधिक समय [संगीत] तक चली। जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट काफी बढ़ गया। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहूंगा कि इस फिल्म को पहले सुखदेव डायरेक्ट कर रहे थे। नरगिस ने जब फिल्म के रेसेल्स देखे तो उन्हें कुछ जमी नहीं। इसके बाद सुनील दत्त ने सुखदेव की जगह ली और खुद फिल्म डायरेक्ट की।
वह हर सीन में परफेक्शन चाह रहे थे। सुनील दत्त की बेटी नम्रता दत्त ने अपनी किताब मिस्टर एंड [संगीत] मिसेज दत्त मेमोरीज ऑफ आवर पेरेंट्स में पिता के बंगला गिरवी रखने की बात का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि एक बार सुनील दत्त को एक शॉट के लिए 100 ऊंट चाहिए [संगीत] थे। लेकिन उन्हें सिर्फ 99 ही मिल पाए। उन्होंने शूटिंग करने से मना कर दिया। 100 से ज्यादा लोगों के क्रू का खर्च अचानक बढ़ गया। जिससे फिल्म का बजट नियंत्रण से बाहर हो गया। वहीं प्लानिंग की कमी के कारण खर्च बढ़ गए। जिसकी वजह से सुनील दत्त को बांद्रा स्थित अपना बंगला गिरवी रखना पड़ा। गाड़ियां तक बिक गई। सुनील दत्त अन्य फिल्मों से होने वाली कमाई भी रेशमा और सेरा में लगा रहे थे। इसीलिए उनकी सारी संपत्ति दांव पर लग चुकी थी। जिस रेशमा और सेरा के लिए सुनील दत्त ने अपना बंगला तक गिरवी रख दिया था। उसी फिल्म ने इतिहास रच [संगीत] दिया। यह फिल्म सुपरहिट रही। साथ ही इसने तीन नेशनल अवार्ड [संगीत] जीते थे। पर इसमें उनकी सारी जमा पूंजी लग गई थी। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय बाय टेक केयर।