मशहूर एक्ट्रेस के साथ हुआ बड़ा । शूटिंग के दौरान झील में गिर गई हसीना। बचाने के लिए कैमरामैन ने भी लगा दी । फिर जो हुआ सभी लोग दंग रह गए। किस्सा जान चिंता में थे चाहने वाले। फिल्मों में जो नजारा हमें बेहद खूबसूरत और आसान लगता है उसे पर्दे पर लाने के पीछे कलाकारों को कई बार अपनी जान तक जोखिम में डालनी पड़ जाती है।
आज शूटिंग के दौरान सुरक्षा के लिए तमाम इंतजाम होते हैं। बॉडी डबल होते हैं और जरूरत पड़ने पर वीएफएक्स का सहारा भी लिया जाता है। लेकिन पुराने जमाने में ऐसा कुछ नहीं हुआ करता था। एक्ट्रेस को कई मुश्किल सीन खुद ही करने पड़ते थे।
हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्ट्रेस वैजंती माला की जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा ही किस्सा है जिसे सुनकर आज भी हैरानी होती है। वैजंती माला ने अपनी ऑटोबायोग्राफी बॉन्डिंग अ मेमोर में फिल्मों की शूटिंग के दौरान हुए कई एक्सपीरियंसेस का जिक्र किया है। इनमें से एक किस्सा कश्मीर की खूबसूरत डल झील का है जो उनकी जान की दुश्मन बन गई थी। एक तमिल फिल्म की शूटिंग के दौरान झील में एक सीन फिल्माया जा रहा था।
सीन करते-करते अचानक वैजंती माला पानी में गिर गई और देखते ही देखते ऐसी स्थिति बन गई कि वह डूबने लगी। सेट पर मौजूद लोगों के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं था। किसी को समझ ही नहीं आया कि तुरंत क्या किया जाए।
तभी कैमरा संभाल रहे कैमरामैन ने बिना एक पल गवाए पानी में लगा दी। उन्होंने वैजंती माला को से बचाया और उन्हें पानी से बाहर निकाला। इतना गंभीर था कि बाद में एक्ट्रेस को भी ले जाना पड़ा। वैजंती माला की मुश्किलें सिर्फ इसी तक असीमित नहीं थी। 1966 में आई एक फिल्म सूरज की शूटिंग के दौरान उनके साथ एक दर्दनाक घटना भी हुई थी।
एक सीन में वह लकड़ी से बने प्लेटफार्म पर डांस कर रही थी। डांस के दौरान लकड़ी से निकली एक कील उनके पैर में घुस गई। जिसके चलते उन्हें दर्दनाक चोट आई। इन के बावजूद वैजंती माला ने कभी डांस और फिल्मों से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा।
13 अगस्त 1933 को मद्रास यानी कि चेन्नई में जन्मी वैजंती माला बचपन से ही भरत नाट्यम सीख रही थी। यही डांस आगे चलकर उनकी पहचान का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। नागिन देवदास नया दौर, मधुमती, साधना, गंगा, जमुना, संगम जैसी फिल्मों ने उन्हें उस दौर की सबसे बड़ी एक्ट्रेसेस में शामिल कर दिया।
उनका डांस और एक्टिंग टैलेंट इतना खास था कि उन्होंने फिल्मों में हीरोइन की स्टीरियोटिपिकल इमेज को भी बदल दिया था। लेकिन वैजंती माला सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने विदेशों में भी भरनाट्यम की परफॉर्मेंससेस दी हुई हैं।
उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 1968 में पद्मश्री और 2024 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। आज वैजयंती माला का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में बेहद सम्मान से लिया जाता है। उनकी कहानी सिर्फ ग्लैमर की ही नहीं बल्कि हिम्मत, मेहनत और उन खतरों की भी है जिन्हें कलाकारों ने कैमरे के पीछे चुपचाप झेला है। डल झील वाला हादसा शायद इसी बात की सबसे बड़ी मिसाल है।