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जिस फिल्म ने रातों-रात बना दिया सुपरस्टार, श्रीदेवी उसे क्यों मानती थीं अपने करियर के लिए ‘कलंक’?

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श्रीदेवी 4 साल की उम्र से फिल्मों में काम करने लगी थी। वह आगे चलकर साउथ सिनेमा की कई बड़ी फिल्मों में नजर आई। उन्होंने रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया। साउथ सिनेमा में नाम कमाने के बाद उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया। मगर उनकी पहली फिल्म 16वां सावन फ्लॉप रही। फिर साल 1983 में श्रीदेवी की जितेंद्र के साथ एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसकी सफलता ने उनकी किस्मत चमका दी। मगर श्रीदेवी इसे अपने करियर के लिए कलंक मानती थी। जिसकी वजह बड़ी ही दिलचस्प है। दोस्तों वीडियो में आगे बढ़ने से पहले प्लीज मेरे [संगीत] चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन को जरूर प्रेस कर दीजिएगा। तो चलिए दोस्तों वीडियो को शुरू करते हैं।

हिंदी सिनेमा की दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी पर्दे पर कभी चुलबुली दिखी, कभी गंभीर और कभी ऐसी भूमिका में नजर आई जिसे देखकर दर्शक है रह गए। उन्होंने साउथ की फिल्मों से शुरुआत की और फिर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाई। लेकिन उनके करियर का एक दिलचस्प सच यह भी था कि जिस फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड में बड़ा स्टार बना दिया, उसी की सफलता को वो अपने लिए पूरी तरह अच्छा नहीं मानती थी। और यह बात श्रीदेवी क्वीन ऑफ हार्ट्स नाम की किताब में दर्ज है। श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में हुआ था। उनका असली नाम श्री अम्मा यंगर अयन था। उन्होंने बहुत छोटी सी उम्र में फिल्मों में काम शुरू कर दिया था।

वह करीब 4 साल की उम्र में बाल कलाकार के रूप में साउथ सिनेमा में नजर आई। तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम करते हुए उन्होंने बचपन में ही अपनी पहचान बना ली थी। उन्हें मलयालम फिल्म पम पट्टा में अभिनय के लिए केरल स्टेट फिल्म पुरस्कार भी मिला। बड़ी होने के बाद भी श्रीदेवी ने साउथ सिनेमा में लगातार काम जारी रखा। 1976 की तमिल फिल्म मुंद्रू मुदीचू में उन्होंने रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया। इसके बाद के फिल्मों ने उन्हें साउथ की बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।

हिंदी फिल्मों में उनकी पहली अहम भूमिका 1979 की 16वां सावन में थी। हालांकि यह फिल्म उन्हें वह पहचान नहीं दिला सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। फिर साल 1983 में श्रीदेवी की फिल्म हिम्मतवाला आई और फिर उनका सब कुछ बदल गया। जितेंद्र के साथ आई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार परफॉर्मेंस दिया। फिल्म के गाने श्रीदेवी के कपड़े और उनका डांस लोगों के बीच बेहद पॉपुलर हुआ। वो अचानक हिंदी फिल्मों की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गई। लेकिन यहीं से उनके मन में एक अजीब सा डर भी पैदा हुआ। श्रीदेवी क्वीन ऑफ हार्ट्स किताब में श्रीदेवी के पुराने इंटरव्यू के हवाले से बताया गया है कि श्रीदेवी हिम्मत वाला की सफलता को अपनी बदकिस्मती मानती थी।

वजह यह थी कि उन्हें डर था कि इस फिल्म की कामयाबी के बाद लोग उन्हें सिर्फ खूबसूरत और ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में देखेंगे और उनके अभिनय को गंभीरता से नहीं लेंगे। उनका यह डर पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं था। हिम्मत बाला के बाद उनकी कई फिल्में कमर्शियल थी। लेकिन श्रीदेवी खुद यह साबित करना चाहती थी कि वह सिर्फ गानों और ग्लैमर के लिए नहीं है। इससे पहले सदमा जैसी फिल्म में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई थी। लेकिन वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही थी। श्रीदेवी को लगता था कि सदमा जैसी भूमिका से वह बताना चाहती थी कि उनके अंदर गंभीर अभिनय की भी पूरी क्षमता है। आगे चलकर उन्होंने इसी बात को अपने काम से साबित किया। 1980 का दशक श्रीदेवी के करियर का सबसे बड़ा दौर बना। तोहफा, नगीना, मिस्टर इंडिया, चांदनी, [संगीत] चालबाज और लम्हे जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई। मिस्टर इंडिया में उनकी कॉमेडी और हवाहवाई वाला अंदाज लोगों को खूब पसंद आया।

चालबाज में उन्होंने दो अलग स्वभाव वाली बहनों का किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता दिखाई। वहीं लम्हे में उन्होंने एक ही फिल्म में अलग उम्र और अलग भावनाओं वाले किरदारों को निभाया। उस दौर में वह ऐसी महिला स्टार बन चुकी थी जिनके नाम पर फिल्में चलने की क्षमता थी। श्रीदेवी ने शादी के बाद धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। 1996 में उन्होंने फिल्म निर्माता बोनी कपूर से शादी की। उनकी दो बेटियां जानवी और खुशी हैं। 1997 की जुदाई के बाद उन्होंने लंबे समय तक फिल्मों से दूरी बनाए रखी। करीब 15 साल बाद साल 2012 में इंग्लिश विंग्लिश से उन्होंने बड़े पर्दे पर वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने एक हाउसवाइफ का किरदार निभाया जो अंग्रेजी सीखकर अपने आत्मविश्वास को वापस लाती है। श्रीदेवी ने मॉम फिल्म में काम किया जो 2017 में रिलीज हुई। यह उनकी आखिरी फिल्म थी। उनके करियर को कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें कई बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। उन्हें भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार के रूप में याद किया जाता है। श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को दुबई में हुआ। वह सिर्फ 54 साल की थी। उनके निधन की खबर ने पूरे देश [संगीत] को झकझोर दिया था। तो दोस्तों, आज का यह वीडियो यहीं समाप्त करते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। तब तक के लिए आप सभी को टाटा बाय-ब टेक केयर।

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