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पति से शादी करना पड़ा भारी? कविता कृष्णमूर्ति का कैसे बर्बाद हुआ करियर?

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क्या हो अगर जिस आवाज को सुनकर पूरा हिंदुस्तान झूम उठा उसी आवाज के पीछे छिपी हो एक ऐसी कहानी जिसे जानकर शायद आप भी कुछ पल के लिए खामोश हो जाए। [संगीत] एक लड़की जिसके सामने एक चमकदार फिल्मी दुनिया थी। लेकिन वहां पहुंचने का रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। बड़े-बड़े नामों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए उसे वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। कई बार मौका हाथ आया लेकिन मंजिल फिर भी दूर रही और फिर एक ऐसा गाना आया जिसने सब कुछ बदल दिया। आंखों [संगीत] की गुस्ताखियां। जिस आवाज को कभी सिर्फ किसी और की रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया जाना था, वही आवाज आगे चलकर करोड़ों दिलों की पहचान बन गई। लेकिन इस कामयाबी की कीमत क्या थी? शोहरत मिली, सम्मान मिला, बड़े-बड़े पुरस्कार मिले। मगर निजी जिंदगी ने भी इस गायिका के सामने ऐसे सवाल खड़े किए जिनका जवाब शायद उन्होंने खुद भी कभी नहीं सोचा था। एक तरफ संगीत की दुनिया में लगातार बढ़ती ऊंचाइयां और दूसरी तरफ ऐसा रिश्ता जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर वो कौन सी आवाज थी जिसे पहचान मिलने में लगभग एक दशक लग गया और क्यों एक ऐसी महिला जिसने जिंदगी भर अकेले रहने का फैसला कर लिया था आखिरकार एक ऐसी जिंदगी का हिस्सा बनी जहां पहले से ही एक पूरा परिवार उसका इंतजार कर रहा था| आज की कहानी सिर्फ एक महान गायिका की सफलता की कहानी नहीं है। एक ऐसी गायिका जिसने अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि सुनने वाले झूम उठते थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस महान गायिका को फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा। अपने करियर के शुरुआती दौर में ही लता मंगेशकर, मुकेश और हेमंत कुमार जैसे दिग्गजों के साथ मंच पर प्रस्तुति देने के बावजूद आखिर क्यों प्लेबैक सिंगर बनने में उन्हें एक दशक लंबा समय लगा?

क्या आपको पता है कि ता उम्र शादी ना करने का फैसला लेने वाली इस गायिका को चार-चार बच्चों के पिता से मजबूरन शादी करनी पड़ी। कैसे छोटी-मोटी फिल्मों में गाने रिकॉर्ड करने वाली इस गायिका ने बड़े-बड़े गायक कलाकारों का सिंहासन हिला दिया था। जानेंगे और भी बहुत कुछ। आज की इस वीडियो में हम महान गायिका कविता कृष्णमूर्ति की बात कर रहे हैं। जिनकी अनोखी आवाज कई दशकों से सीधा श्रोताओं के दिल में उतर गई थी। कविता का जन्म 25 जनवरी 1958 को दिल्ली में एक तमिल परिवार में हुआ था। गायिका का असली नाम शारदा कृष्णमूर्ति है जो आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे मशहूर गायिकाओं में से एक बनी और कविता कृष्णमूर्ति के नाम से जानी जाने लगी। कविता के पिता शिक्षा मंत्रालय में नौकरी करते थे। 8 साल की उम्र में उन्होंने एक सिंगिंग कंपटीशन में पहला अवार्ड जीता था। जिसके बाद उन्होंने सिंगर बनने का सपना देखा। मुंबई के स जेवियर कॉलेज में पढ़ाई करते हुए कविता ने कई कंपटीशंस में हिस्सा लिया था। सिंगर की आंटी ने उन्हें संगीत के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने फिर सिंगर बलरामपुरी से शास्त्रीय संगीत की तालीम ली। कविता कृष्णमूर्ति को बचपन से ही संगीत में दिलचस्पी रही। वे महान गायिका लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानती थी। यही वजह रही कि वे लता मंगेशकर और मनन्ना डे के गाने खूब चाव से सुनती थी। संयोग यह रहा कि 9 साल की उम्र में उन्हें लता मंगेशकर के साथ गाने का मौका भी मिल गया और बांग्ला गाना गाया। उन्होंने 1976 में प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। कविता कृष्णमूर्ति ने पहला गाना 1976 की फिल्म कादंबरी के लिए रिकॉर्ड किया था। जिसका संगीत विलायत खान ने तैयार किया था। मूल गाने को लता मंगेशकर ने गाया था। जिसे शबाना आजमी पर फिल्माया गया था। यह गाना 1949 में आई हिट फिल्म महल का रिमिक सॉन्ग था। उसके बाद साल 1980 में कविता कृष्णमूर्ति ने अपना गाना काहे को ब्याही मांग भरो सच ना गाया। 1985 में रिलीज हुई फिल्म प्यार झुकता नहीं से कविता को बतौर सिंगर बॉलीवुड में पहचान मिली। इस फिल्म के निर्देशक के सी बोकाडिया और संगीतकार एसएच बिहारी थे। बिहारी ने कविता से लता जी के सारे गाने डब कराए और फिल्म के आखिरी गाने तुमसे मिलकर ना जाने क्यों मैं कविता को मौका दिया था जो एक बच्चे पर फिल्माया जाना था। संगीतकार एच एस बिहारी ने कविता से कहा था कि तुम यह गाना पूरी शिद्दत से गाओ। अगर यह गाना बच्चे की आवाज में शूट कर गया तो यह हम तुम्हारी ही आवाज में रखेंगे। इस गाने का डएट तो लता ने गाया लेकिन बच्चे वाला पार्ट कविता के हिस्से में आया। फिर फिल्म कर्मा का सॉन्ग है। वतन तेरे लिए को भी कविता ने अपनी आवाज दी। फिर आया वह समय जिसने कविता कृष्णमूर्ति को रातोंरात स्टार बना दिया। कविता कृष्णमूर्ति ने साल 1987 में आई सुपरहिट फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना करते हैं

हम प्यार मिस्टर इंडिया से और हवाहवाई गाया था। यह उनके करियर का सुपरहिट गाना रहा। सही मायने में कविता कृष्णमूर्ति की किस्मत 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया से चमकी। इस फिल्म में उन्हें संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने मौका दिया और कविता को तीन गाने गाने का मौका मिला। फिल्म में किशोर कुमार के साथ उन्होंने करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया से गाया जो उस वक्त बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ गया। करते हैं हम मिस्टर इंडिया। इसके अलावा कविता की आवाज में इस फिल्म का गाना हवाहवाई सुपर डुपर हिट हुआ। यही वह गाना था जिसके जरिए कविता कृष्णमूर्ति की शोहरत फिल्म जगत में बहुत तेजी से बढ़ी। हवाहवाई गाने को लेकर कविता ने बताया था कि इस गाने को आशा भोसले गाने वाली थी। उनसे सिर्फ शूटिंग के लिए गाना डब कराया गया था। लेकिन कविता ने इसे इतनी खूबसूरती से गाया कि फाइनली उनकी आवाज में ही गाने को फिल्म में शामिल कर लिया गया। मिस्टर इंडिया की कामयाबी के बाद कविता की किस्मत का सितारा बहुत तेजी से चमका। अब उनके पास कई सारी फिल्मों में गाने के ऑफर आने लगे। संगीतकार आर डी बर्मन को कविता से किया अपना वादा याद रहा। उन्होंने अपनी फिल्म 1942 अ लव स्टोरी में कविता को मौका दिया। तो उन्होंने भी अपनी प्रतिभा के मुताबिक पूरी शिद्दत से फिल्म का एक गाना प्यार हुआ चुपके से रिकॉर्ड किया। कविता ने फिल्म 1942 अ लव स्टोरी का गाना प्यार हुआ चुपके से गाया और इसने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया। इसे आरडी बर्मन ने कंपोज किया था। जैसे इन गानों ने उन्हें बॉलीवुड की टॉप गायिकाओं में शामिल कर दिया और उनकी गायकी ने अपना असर छोड़ा और इस गाने के लिए उन्हें 1995 में पहली बार बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इस सम्मान के लिए कविता को

करीब एक दशक लंबा इंतजार करना पड़ा। 1980 और 1990 के दशक में उनकी आवाज हर बड़ी फिल्में सुनाई देने लगी। 90 के दशक में वह फिल्म जगत की सबसे कामयाब प्लेबैक सिंगर बनी। उन्हें 1995 से 1997 तक लगातार तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला। कविता ने ना सिर्फ हिट गानों की झड़ी लगा दी बल्कि लगातार तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड अपने नाम कर कई बड़ी सिंगर्स की नींदें भी उड़ा दी। साल 1996 में फिल्म याराना के गाने मेरा पिया घर आया और 1997 फिल्म खामोशी द म्यूजिक के गीत आज मैं ऊपर के लिए कविता को फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया। मनीषा खुराला और सलमान खान की फिल्म खामोशी में कई गाने हैं। उन्हीं में से एक आज मैं ऊपर आसमान नीचे भी है। इस गाने को कविता कृष्णमूर्ति और कुमार शानू ने साथ में गाया है। 2005 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 90 के दशक में कविता कृष्णमूर्ति का करियर बहुत तेजी से चमका। इस दौर में वह अलका और अनुराधा पडवाल को कड़ी टक्कर देने लगी थी। अनुराधा की सीरीज के लिए जब सिर्फ भक्ति गीत गाने लगी, इसका फायदा कविता को भी मिला। 90 और साल 2000 के शुरुआती दौर की ज्यादातर बड़ी फिल्मों में या तो उन्हें मौका मिलता या फिर अलका याग्निक को। इस दौर में वह सबसे कामयाब सिंगर रही। इसके साथ ही वह तमाम बड़े संगीतकारों की पसंद बन गई। अपने करियर में उन्होंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, आनंद मिलिंद, रहमान, राजेश रोशन, नदीम श्रवण, जतिन ललित, अन्नू मलिक और इस्माइल दरबार जैसे संगीतकारों के साथ तमाम हिट गाने रिकॉर्ड किए। उन्होंने एक बेहद मंजे हुए कलाकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई। सूरों के सागर में इस मेलडी क्वीन की आवाज हैरान करने वाले अंदाज में अखेलियां करती है। इन सारे गानों को सुनकर लगता है कि वाकई कविता कृष्णमूर्ति की आवाज का जवाब नहीं। आज भले ही उनकी पहचान दुनिया भर में एक बेहद कामयाब सिंगर की है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक वक्त कविता प्लेबैक सिंगर नहीं बनना चाहती थी। वो अपने पिता और खुद की मर्जी के मुताबिक विदेश सेवा में अफसर बनना चाहती थी। कविता ने किशोर कुमार, बप्पी लहरी, कुमार सानू, उदित नारायण समेत कई दिग्गजों के साथ काम करती नजर आई। इसके अलावा कविता कृष्णमूर्ति ने संगीतकार लक्ष्मीकांत के लिए डबिंग कलाकार के रूप में काम किया था। जहां उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे गायकों के लिए गाने रिकॉर्ड किए और डेमो ट्रैक क्रिएट किए।

आज कविता कृष्णमूर्ति सिर्फ एक गायिका नहीं बल्कि भारतीय संगीत की एक विरासत बन चुकी हैं। उन्होंने फिल्मी गानों से लेकर गजल, पॉप, क्लासिकल और कई विधा के गाने गाए हैं। अब बात करते हैं इनकी निजी जिंदगी के बारे में। 1987 के फिल्म मिस्टर इंडिया में अपने गानों की कामयाबी के बाद कविता ने तय कर लिया था कि वह शादी नहीं करेंगे। अपनी गायकी और इस पेशे से उन्हें ऐसा प्यार हुआ कि उन्हें जिंदगी में किसी हमसफर की जरूरत नहीं मालूम पड़ती थी। फिर एक दिन ऐसा आया कि कविता को अपना फैसला बदलना पड़ा। दरअसल एक बार उन्हें मशहूर वायलन वादक सुब्रमण्यम का फोन आया और उन्होंने बताया कि वह एक फिल्म कर रहे हैं और उसमें उन्हें हरिहरण के साथ एक गाना गवाना है। तय तारीख पर कविता गाने की रिकॉर्डिंग के लिए बोर पहुंच गई। डॉक्टर सुब्रमण्यम के परिवार से कविता पहले से परिचित थी। पत्नी विजय शंकर की कैंसर के चलते मौत के बाद सुब्रमण्यम अपने तीन बच्चों की परवरिश कर रहे थे। कविता ने उनसे मिलकर सहानुभूति प्रकट की और उनका हालचाल जाना। सुब्रमण्यम ने कहा कि बस किसी तरह जिंदगी कट रही है। इसके बाद रिकॉर्डिंग के सिलसिले में कविता का अक्सर बोर आना जाना होता था। जहां सुब्रमण्यम और उनके बच्चों से भी मुलाकात होती थी। सुब्रमण्यम एक बेहद सुलझे और शरीफ इंसान हैं। यही वजह रही कि कविता उनकी तरफ कुछ आकर्षित भी हुई। एक वक्त आया जब दोनों को लगने लगा कि वह एक दूसरे के लिए बने हैं। जब दोनों ने शादी का फैसला किया तो कविता की मां डर गई। उनको लगा कि कविता का कामयाब प्लेबैक सिंगर का सफर कहीं बीच में ही ना रुक जाए। साथ ही तीन बच्चों के पिता से शादी करने का फैसला उन्हें ज्यादा अटपटा लग रहा था। लेकिन कविता ने किसी की ना सुनी और करीब 40 साल की उम्र में साल 1999 में कर्नाटक संगीतकार डॉक्टर एल सुब्रमण्यम से शादी कर ली। तब सुब्रमण्यम की बड़ी बेटी 13 साल और दो बेटे सात और करीब 5 साल के थे। कविता कहती हैं कि शादी के तुरंत बाद उन्हें मां बुलाने वाले बच्चे मिल गए और एक रेडीमेड फैमिली भी थी। सुब्रमण्यम पहले से शादीशुदा थे। हालांकि उनकी पत्नी का निधन हो गया था। सुब्रमण्यम की पहली शादी से चार बच्चे थे। वहीं कविता के कोई बच्चे नहीं हैं। कविता कृष्णमूर्ति फिलहाल फिल्मों में कम गाने गाती हैं। मगर उनके शो पूरी दुनिया में होते हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु में सुब्रमण्यम एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स नामक म्यूजिक संस्थान की शुरुआत की। साल 2010 में कविता की शादीशुभा जिंदगी में तब एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई जब उनकी नौकरानी ने उनके पति पर छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया। दरअसल हुआ यूं था कि कविता के घर से ₹5,000 और उनकी बेटी की सोने की चैन गायब हो गई थी। नौकरानी पर चोरी का शक जाहिर करते हुए सुब्रमण्यम ने थाने में शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद वह किसी काम से भुवनेश्वर चले गए। दो दिन बाद उन्हें पता चला कि नौकरानी ने उनके खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज करा दिया है। दरअसल 2009 में शाइनी आहूजा केस के बाद घरेलू नौकरानियों द्वारा ब्लैकमेल करने के कई मामले सामने आ रहे थे। सुब्रमण्यम की नौकरानी ने भी ऐसा ही किया। वह मीडिया में जाकर बयान देने लगी। इसके बाद कविता कृष्णमूर्ति को अपने पति के बचाव में उतरना पड़ा और यह मामला बाद में सुलझ गया।

आज कविता कृष्णमूर्ति फिल्मों में गाने से दूरी बना चुकी है। लेकिन आज भी वह स्टेज शो करती हैं। अपने करियर में उन्होंने हिंदी के अलावा कन्नड़ समेत करीब 45 क्षेत्रीय भाषाओं में गाने गाए हैं। वो अब तक करीब 25,000 गाने गा चुकी हैं। कविता आजकल तमाम रियलिटी शो में बतौर गेस्ट जज नजर आती है। कभी-कभी जिंदगी हमें उस रास्ते पर ले जाती है जिसके बारे में हमने सपने में भी नहीं सोचा होता। एक ऐसा सफर जहां शुरुआत में मंजिल दिखाई नहीं देती। लेकिन लगातार चलते रहने वाला इंसान एक दिन खुद मंजिल की पहचान बन जाता है। इस कहानी में भी यही हुआ। एक ऐसी आवाज जिसे पहचान पाने में लंबा इंतजार करना पड़ा। आखिरकार भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाने में कामयाब हुई। लेकिन उनकी जिंदगी हमें सिर्फ सफलता का मतलब नहीं बताती बल्कि यह भी याद दिलाती है कि हर चमक के पीछे कई ऐसी रातें होती हैं जिन्हें दुनिया कभी देख नहीं पाती। करियर हो या रिश्ते हर मोड़ पर लिए गए फैसलों ने उनकी कहानी को अलग रंग दिया। उन्होंने जो चुना उसे पूरी ईमानदारी से निभाया। शायद यही वजह है कि इतने वर्षों बाद भी उनकी आवाज में वही असर महसूस होता है। आज वक्त बदल चुका है। फिल्मों में उनकी मौजूदगी पहले जैसी नहीं रही। लेकिन एक सच्चे कलाकार की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि वह आज कितनी बार पर्दे पर सुनाई दे रहा है। क्योंकि कुछ आवाजें गानों के खत्म होने के बाद भी खत्म नहीं होती। वह यादों में जिंदा रहती हैं। अगर आपको यह कहानी सच में कुछ महसूस करवा पाई हो तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। ऐसी ही अनसुनी और दिलचस्प फिल्मी कहानियों के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए। और जाते-जाते बस इतना याद रखिए। वक्त आवाज को खामोश कर सकता है।

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