एक महिला ने 2021 में खुद को मुगलों का वंशज बताते हुए कि मैं मुगल खानदान से हूं उसको अपना वंशज बताते हुए उनका वंशज खुद को बताते हुए लाल किले पर दावा पेश किया था कि लाल किले की मालकिन मैं हूं भारत सरकार ने लाल किले पर गलत तरीके से कब्जा कर रखा है बिल्कुल यही एकदम उसके वर्ड थे कि भारत सरकार ने लाल किले पर कब्जा कर रखा है उसने हमारी जमीन को कब्जा रखा है इसकी असल मालकिन मैं हूं क्योंकि मैं जो मुगल बादशाह थे अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर या बहादुर शाह द्वितीय भी कह सकते हैं उनके पर पोते की बहू हूं इतना लंबा रिश्ता उन्होंने अपना कनेक्शन निकाला कि मैं मुगल खानदान से हूं उनके पर पोते की बहू हूं इस वजह से इसकी असल मालकिन मैं हूं तो ये केस किया गया था 2021 में 2021 2021 में तो 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट में केस हुआ था तो सिंगल जज की बेंच ने यह कह के मना कर दिया था कि 150 साल बाद आप यहां आ रही हो तब से थी 150 साल पहले तो और भी आपके मतलब वंशज रहे होंगे तो वो लोग कहां थे आप कहां थी 2021 में सिंगल जज की बेंच ने उसको ये कह के खारिज कर दिया था तो 2021 से अब तक ढाई तीन साल के बाद फिर से उन्होंने एक अपील की फिर से एक प्ली डाली और फिर से जो डबल जज की बेंच है उन्होंने यह कह के मना कर दिया कि अब अपील करने में आपने देर कर दी ढाई साल लगा दिए और उन्होंने भी कैंसिल कर दी तो इस सब पर हम चर्चा करेंगे न्यूज़ क्या है क्यों चर्चा में है और उसके बाद लाल किले का हम इतिहास इतिहास देखेंगे इतिहास में हमारे लिए कैसे इपोर्ट इंपॉर्टेंस इसकी बनी और आते-आते पहले दिल्ली सल्तनत में फिर मुगल पीरियड में उसके बाद जो ब्रिटिशर्स थे उनके टाइम में और अब भारत सरकार में जब उन भारत हम आजाद हो गए 15 अगस्त 1947 को उसके बाद इसकी हमारे लिए क्या इंपॉर्टेंस है तो ये खबर है लाल किला हमारा है कब्जा या मुआवजा दिलाइट बोल रही है कि कब्जा हमें दीजिए या इसका पैसा या मुआवजा हमें दीजिए दिल्ली हाई कोर्ट में बोली थी अंतिम मुगल बादशाह की बहू सुल्ताना ये इन्होंने कहा था तो हाई कोर्ट ने इसमें क्या कहा है कि अपील ढाई साल की देरी से की जा रही है ढाई साल से भी ज्यादा देरी से आपने अपील की है इस वजह से हम इसको खारिज कर रहे हैं हालांकि सुल्ताना बेगम ने बताया कि वह अपनी खराब सेहत और बेटी के निधन के कारण अपील नहीं कर पाई थी लेकिन कोर्ट ने दलील नहीं मानी है उन्होंने माना बोला था मेरी बेटी का डेथ हो गई थी और टाइम नहीं था इस वजह से उसने तो अभी हम इस सब पर चर्चा करेंगे उससे पहले मैं आपको एक गुड न्यूज़ दे देता हूं अनअकैडमी आपके लिए 50 पर ऑफ लेकर है सभी कोर्सेस पर जैसे
अगर आप 18 महीने का कोर्स खरीदेंगे तो आपको 9 महीने का एक् 9 महीने का पेमेंट करना पड़ेगा और 9 महीने का उसपे एक्सटेंशन मिल जाएगा फ्री 24 महीने का कोर्स खरीदेंगे तो 12 महीने का पेमेंट करना पड़ेगा और 12 आपको एक्स्ट्रा मिल जाएंगे 36 महीने का खरीदेंगे तो 18 महीने का क पे करना पड़ेगा बाकी इस नंबर पर आप कॉल कर कर सकते हैं डिटेल के लिए खास बात इसकी यह है कि अनलिमिटेड आपको एक्सेस मिल जाएगा क्योंकि अ अनअकैडमी आपको अनलिमिटेड एक्सेस देता है कोई एक बैच नहीं देता है बाकी ये बैच चल रहे हैं 2026 के के लिए आरंभ बैच है 27 के लिए आगाज इंग्लिश में और इंग्लिश में इग्नाइट बैच है अनलिमिटेड एक्सेस मिलेगा आपको सारा कंप्रिहेंसिव जो सिलेबस आपका कवर होगा वन टू वन मेंटरशिप भी मिलेगी अगर आपको ऑप्शनल जॉइन करना है तो 9 दिसंबर 14 दिसंबर 16 20 और 26 दिसंबर से ये बैच स्टार्ट हो रहे हैं हिस्ट्री ज्योग्राफी एंथ्रो पीएसआई और सोशियोलॉजी के ये ऑप्शनल बैच है इनमें भी आपको मेंटरशिप के साथ-साथ बाकी सारा सिलेबस कवर होगा ये लाल किले की पिक्चर सब जानते हैं हमारे लिए प्राइड का यानी कि प्राउड मूवमेंट होता है जब 15 अगस्त को हमारे जो प्रधानमंत्री यहां से झंडा फ फहराते हैं तो ये हमारा सिंबल बन गया है देश की आजादी का भी सिंबल बन गया कैसे बना हम सारी हिस्ट्री पढ़ेंगे पढ़ेंगे इसका बैकग्राउंड देखेंगे ये हमारी आजादी का भी सिंबल बना ये हमारी डिग्निटी हमारी इंटीग्रिटी सबका ये हमारा सिंबल बन गया कैसे बना था वो हम देखेंगे तो ये आप जब देख रहे हैं अगर आप कभी लाल किला जाएंगे तो यहां से एंट्री गेट है और ये एंट्री गेट वाला जो एरिया है यह लाहौरी गेट कहलाता है इसके दो गेट हैं लाल किले के दो गेट हैं एक तो दिल्ली गेट कहलाता है एक लाहौरी गेट कहलाता है तो जो मेन जो एंट्री एरिया है यहां से इसके अगर पीछे से हम देखेंगे तो यहां से एंट्री होती है तो ये लाहौरी गेट है लाहौरी क्यों इसका नाम पड़ा था जो अहमद लाहौरी थे एक जिसने इसका आर्किटेक्ट बनाया था अहमद लाहौरी जिन्होंने इसका आर्किटेक्ट बनाया था तो इसलिए इसका नाम जो है लाहौरी के नाम प दिल्ली गेट है वो पीछे की साइड दूसरी साइड पर मेन जो एंट्री गेट है वो यही है लाहरी गेट तो इस तरह आप इसको देखते रहते होंगे सबको पता ही है प्रधानमंत्री यहां से भाषण देते हैं देश को संबोधित करते हैं तो सबसे पहले इसका बैकग्राउंड क्या है पहले तो न्यूज़ देखेंगे उसके बाद इसका देखेंगे बैकग्राउंड तो जो सुल्ताना बेगम है इन्होंने एक प्ली कह सकते हैं आप अपील दायर की थी
अभी फिलहाल जिसको हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया ये कह के कि आपने अपील ढाई साल लेट की है और इन्होंने दलील भी दी थी लेकिन हाई कोर्ट ने नहीं मानी लेकिन इसको जो एक तो जस्टिस का नाम आप याद रख लेंगे जस्टिस तुषार राव और जस्टिस जस्टिस विभु बाखल तो बाखू इन्होंने दोनों ने इसको मतलब देरी कह के खारिज कर दिया कि आपकी जो प्ली है या अपील है वो देरी से आई थी सबसे पहले जो केस आया था ये 20 दिसंबर 2021 को आया था हाई कोर्ट में इन्होंने एक अर्जी दायर की थी कि इसके मालिक हम हैं जिसको भारत सरकार ने कब्जा कर रखा है मतलब इल्लीगल कब्जा है भारत सरकार का इसके असल मालिक हम है तो कोर्ट ने कह दिया था कि 150 साल से ज्यादा हो गए तब से आप कहां थे इतनी देरी से आप कोर्ट में आ रहे हैं यह कोई वजह नहीं है सुल्ताना बेगम को बहादुर शाह जफर दत्य का बंश बताते उन्होने लाल कीले की असली मालकिन बताया था उन्होंने बोला था कि 18623 थे उनकी डेथ हो गई थी 82 साल की उम्र में और उसके बाद जो है अवैध रूप से कब्जा कर रखा है किसने भारत सरकार ने भारत सरकार ने जब ब्रिटिशर से आजादी मिली तो भारत सरकार ने इस परे अवैध रूप से कब्जा कर रखा है असल मालकिन इसके हमें तो ये था इसका बैकग्राउंड मतलब जो इसकी अपील हुई थी उसकी उसका बैकग्राउंड तो अभी हम देखते हैं लाल किले के बारे में मेन न्यूज क्या है न्यूज़ के अवज में हम पढ़ रहे हैं सिर्फ न्यूज क्या है उस पर थोड़ा सा देखा है बाकी लालकिले के बारे में पढ़ेंगे रेडफोर्ट या लाल किला इसको लाल क्यों कहते हैं पत्थर का यहां जो रंग है वो लाल है बहुत बड़े पैमाने पर लाल पत्थर का इसमें इस्तेमाल किया गया है और इसी वजह से इसको लाल किला कहते हैं इसकी जो योजना है जो किला बनाया गया है उसके आठ कोण हैं ऑक्न इसको टोनल इसको कह सकते हैं अष्टकोण इसको बोल सकते हैं इसमें पूर्व और पश्चिम में दो लंबी-लंबी भुजाएं भी है मतलब मेन क्या है लाल पथर यूज हुआ है इस वजह से इसको ला कहते लाल किला कहते हैं अष्ट कोणय इसका आकार है यह ध्यान रखेंगे और मेन जो आपको याद रखना है क्वेश्चन जहां से बन सकता है यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज इसकी लिस्ट में इसको शामिल किया गया है 2007 में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में इसको शामिल किया गया है 2007 में 2007 में और एक और इंपॉर्टेंट चीज है जब आप नया वाला जो अभी हमारे पास 500 का नोट है हमारी जो करेंसी है उस नोट के पीछे अगर देखेंगे तो इसका चिन्ह बना हुआ है मतलब इसका पिक्चर लगी हुई है लाल किले की तो लाल किले की पिक्चर 0000 के नोट पे ऐसा सवाल बन जाता है दूसरा यूनेस्को में यूनेस्को की विश्व धरोहर में या हेरिटेज साइट में इसको शामिल किया गया 2007 में ये भी आप रखेंगे और एक चीज और ध्यान रखेंगे एएसआई भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण या आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया एएसआई इसकी देखरेख करता है पहले 2003 तक आप कह सकते हैं 2003 तक जब हम 15 अगस्त 1947 को आजाद हुए तो 1947 को ब्रिटिशर्स से जिसने इसको अपने जिम्मे लिया था वो तो भारतीय सेना या आर्मी तो 2003 तक 1947 से 2003 तक इसको देखरेख करती थी इस इस पे कब्जा कह सकते हैं किसका था हमारी सेना का या आर्मी का कब्जा था लेकिन 2003 में इन्होंने जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण है इनको इसका जो जिम्मा है वो सौंप दिया था तो 1947 से या 1947 को जो कब्जा मिला था ब्रिटिशर से वो भारतीय सेना को मिला था तो अब इसको एएसआई देखता है और वही एएसआई यहां पर गैलरी वगैरह का इंतजाम करता है जो वहां पर संग्रहालय वगैरह हैं ऑडियो गाइड है लाइट साउंड शो वगैरह हैं यह सब कौन या म्यूजियम वगैरह ये सब कौन देखता है अब एएसआई देखता है आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया देखता है अब हम इसका पहले देखेंगे ऐतिहासिक महत्व क्या है इसका हिस्टोरिकल इंपॉर्टेंस क्या है लाल किला हमारे लिए इतना खास क्यों है अगर हम शुरू करें 126 से 1506 तक के टाइम पर 1206 जब इल्तुतमिश का टाइम था उसी टाइम से जो अ दिल्ली थी ये काफी इंपोर्टेंट हो गई थी दिल्ली सल्तनत यानी कि तुर्क शासन के लिए तुर्क शासक के लिए भारत के लिए तो दिल्ली उसी टाइम से से इन लोगों ने दिल्ली में रहना स्टार्ट कर दिया वहीं पर सारी चीजें हो गई अगर आप इल्तुतमिश से पहले कुतुबुद्दीन एवक को भी देखेंगे तो वो भी अ यहां दिल्ली में धीरे-धीरे आना स्टार्ट हो गया था हालांकि उसने नहीं बनाई थी पर इल्तुतमिश के टाइम पर इसको बना दिया गया था दिल्ली को खास तौर से फिर उसके बाद जब हम अ मुगलों में आते हैं तो बाबर ने भी दिल्ली को पूरे हिंदुस्तान की राजधानी बताया था तो दिल्ली सल्तनत के पीरियड में इल्तुतमिश से लेके बाद तक के जितने रूलर थे उनके लिए भी इसका काफी इंपॉर्टेंस था फिर उसके बाद बाबर ने खुद कहा है कि दिल्ली जो है है पूरे हिंदुस्तान की राजधानी है उसके बाद जब अकबर का टाइम आया अकबर ने अपनी राजधानी अपनी कैपिटल आगरा ट्रांसफर कर दी आपको पता है आगरा फतेहपुर सीकरी तो वहां पर वो अपनी कैपिटल को ले गया लेकिन फिर भी दिल्ली की इंपॉर्टेंस इतनी थी कि शाहजहां ने 1600 1648 में दिल्ली वापस आया और वहां पर शाहजहानाबाद बसाया शाहजहानाबाद वो एरिया है आज भी जो पुरानी दिल्ली वाला एरिया है तो आगरा अकबर के द्वारा अपनी राजधानी बनाने के टाइम लेकिन फिर भी दिल्ली का महत्व कम नहीं हुआ शाहजहां बाद में फिर वापस दिल्ली आ गया और उसने शाहजहानाबाद बसाया और ये वही शाहजहानाबाद है जो आजकल की पुरानी दिल्ली है
शाहजहां को ही माना जाता है शाहजहां ने ही लाल किले की नीव रखी थी तो ये इंपॉर्टेंट चीजें हैं आपके लिए लाल किले के बारे में आपको पता होनी चाहिए फिर बाद में क्या हुआ जब औरंगजेब के बाद औरंगजेब की मृत्यु हो गई तो औरंगजेब के बाद जो रूलर थे मुगल रूलर वो उतने अच्छे नहीं थे वो उतने ताकतवर नहीं थे वो उतने मतलब कह सकते हैं कि शासन प्रशासन को चलाने में सक्षम नहीं थे वो सब अयाशियां में डूब गए थे तो अयाशियां में डूबने के बाद भी इतने लंबे टाइम से 1206 से दिल्ली का महत्व पूरे देश की जनता में बन गया था तो दिल्ली अपने आप में एक रुतबा रखती थी तो जो लोग थे भारत के वो आज भी दिल्ली को अपनी राजधानी के तौर पर देखते थे अपने प्राइड के तौर पर देखते थे तो अब जो है सिंबॉलिक महत्व हो गया था इसका सिंबॉलिक इंपॉर्टेंस हो गई थी लेकिन बनी हुई अभी भी थी जो दिल्ली के सुल्तान थे मुगल सुल्तान वो खत्म हो गए थे उनके बीच उनके पास कुछ नहीं बचा था तो अब 18 18वीं सदी आते-आते जो मुगल सम्राट थे अधिकांश क्षेत्र और शक्तियां उन्होंने खो दी लेकिन समाज के कु कुछ वर्ग आज भी उनको प्रतीक के रूप में मानते थे और इसका सबसे बड़ा एग्जांपल कौन सा था 1857 की क्रांति या 1857 का विद्रोह 1857 का जब विद्रोह हुआ भारतीय सिपाहियों ने विद्रोह कर दिया उसके बाद जब वो विद्रोह करके जो सैनिक थे मेरठ से दिल्ली की ओर कूज किए वो कहीं और भी जा सकते थे या मेरठ में भी गढ़ बना सकते थे और किसी और जगह भी जा सकते थे लेकिन वो कहां गए 1857 का विद्रोह करके अगले दिन सुबह-सुबह दिल्ली पहुंच गए और उन्होंने जाकर किसका गेट खटखटाया लाल किले का लाल किले में कौन था बहादुर शाह द्विती यानी के बहादुर शाह जफर और उन्होंने सिंबॉलिक सरदार अपना घोषित कर दिया सम्राट घोषित कर दिया उनको कि आप देश के सम्राट हैं आप शासन चलाएंगे वो अलग बात है 1857 की क्रांति को दबा दिया गया लेकिन उनका जो सिंबॉलिक सरदार या सिंबॉलिक सम्राट था वो कौन बना बहादुर शाह जफर इससे ये आईडिया लगाया जा सकता है कि 1206 से या उसके बाद मुगलों के बाद भी 1857 तक जब हम क्रांति कर रहे हैं जब हम अंग्रेजों को भगा रहे हैं अंग्रेजों से लड़ रहे हैं तो जनता के दिल में आज भी सम्राट की रेस्पेक्ट थी और लोग वहां पर वो गए और उन्होंने उनको बोला कि देश के आप सम्राट बनिए देश का देश का जो कार्यभार है वापस संभालिए वो संभाल नहीं पाए उम्र ज्यादा थी लेकिन वो अलग अ अलग मसला है पर भरोसा जिस परे हमें होगा उसी को तो हम जिम्मेदारी सौंपते हैं तो इसीलिए उन परे 1857 तक भी मुगल बादशाहों पर भरोसा था जो ब्रिटिश शाही आ गई जब 1857 की क्रांति को दबा दिया गया उस विद्रोह को दबा दिया गया तो इन लोगों ने देख लिया कि जो मुगल बादशाह है उसको आप लोगों के दिलों से निकाल नहीं पाए हैं तो इन लोगों ने इस चीज़ को नोटिस कर लिया एक तो मुगल बादशाहों को खत्म करो उसी टाइम 1857 की क्रांति को दबाने के बाद इन्होंने इनको रंगून निर्वासित कर दिया जो बहादुर शाह जफर थे इनकी बाद में डेथ हो गई थी और इनके जो बेटे थे उनके सर काटकाट के इनके सामने पेश कर दिए थे थालियां में सजाकर वह सब कहानी अलग है मेन क्या है इन्होंने सबसे ज्यादा चोट करी मुगल बादशाहों पर और मुगल जो के स्ट्रक्चर बने हुए थे तो इनको पता लग गया कि लाल किला क्योंकि जो सैनिक थे विद्रोह करके लाल किले की साइड गए थे कि लाल किलो को खत्म करना बहुत जरूरी है और मुगल बादशाहों की जो पहचान है उसको मिटाना बहुत जरूरी है तो इन्होंने दोनों को ही खत्म कर दिया जब दिल्ली पर ब्रिटिश कब्जा हो गया 1857 की क्रांति के बाद तो इन्होंने शाहजहानाबाद जो पुरानी दिल्ली थी उसको पूरी तरह से बर्बाद कर दिया और जो आप देखेंगे आज का लाल किला वो असल लाल किला नहीं है मतलब अंदर की बहुत सारी स्ट्रक्चर इन्होंने बर्बाद कर दी तोड़ दी बहुत लगभग 60 पर तक इन्होंने तोड़ दिया और अपनी स्ट्रक्चर वहां प बना दी आप जब ला लाल किले के अंदर जाएंगे तो बहुत सारी चीजें अंग्रेजों की बनाई हु है अपनी अंदर में तो वो सारी चीजें ध्वस्त कर दी और उसको अपने मतलब अपनी छाप छोड़ दी उन्होंने मुगलों की छाप खत्म कर दी लाल किलो को तो इन्होंने छोड़ दिया बाकी जो अंदर की भव्यता थी उसको इन्होंने छीन लिया अपनी कलाकृतियां ला दी सब कुछ लूट के ले गए आंतरिक सन्ना चलाओ को चेंज कर दिया ब्रिटिश इमारतों में उसको बदल दिया जो मुगल इमारतें थी अंदर की वो बदल के इन्होंने चेंज कर दी अपनी ब्रिटिश इमारतों में इस परिवर्तन ने लाल किले पर ब्रिटिश शाही अधिकार की अमिट छाप छोड़ दी क्योंकि इन्होंने ये भांप लिया था ये जान लिया था
कि लाल किले को खत्म करना मतलब मुगल बादशाहत को खत्म करना है तो मुगल बादशाहत को भी उन्होंने खत्म कर दिया लाल किले को भी खत्म कर दिया उसको खत्म करके झंडा लगा दिया किसका ब्रिटिशर्स का अब इससे इनको डिसाइड हो गया कि अब हम इसके मालिक हैं तो इसी तरह से जब इंडियन गवर्नमेंट थी 1947 की जब हम देख रहे होते हुए जब वहां दिल्ली सल्तनत का शासन था फिर मुगलों का आया फिर ब्रिटिशर्स आए तो उसी लाल किले पर अपना झंडा या या अ अपनी जो है अ मालिका कह सकते हैं मिल्कियत वहां पर जमा रहे हैं तो ये एक प्रतीक बन गया था कि भारत का शासन अगर मुगलों के पास है तो उनके पास वो होना चाहिए लाल किला अगर ब्रिटिशर्स के पास है तो लाल किले पर कब्जा होना चाहिए तो लाल किला एक प्रतीक बन गया एक सिंबल बन गया भारत पर शासन का रूलर रूल का तो इसीलिए जब ब्रिटिशर्स से भारत सरकार को या भारत के हाथ में ये शासन आया तो उनको भी क्या मिला उनको भी करना पड़ा क्या कि वहां पर हमारा सरंगा लहराएगा अब ब्रिटिशर्स का झंडा हटेगा और हमारा लहराएगा तो प्रतीकात्मक अधिकार का उपयोग होने लग गया अंग्रेजों ने दिल्ली की प्रतीकात्मक शक्ति को पहचान लिया इनको पता था दिल्ली की जो जनता है भारत की दिल्ली के लिए बहुत ज्यादा सीरियस है या कह सकते हैं बहुत इमोशनल है तो अब इन्होंने पूरी तरह से सिंबॉलिक रूप से दिल्ली को या लाल किले को अपने कब्जे में लिया और 1911 में एक दरबार लगाया वहां पर इनकी जो राजधानी थी आपको पता है अंग्रेज पहले कहां आए थे पश्चिम बंगाल में तो इन्होंने अपना जो गढ़ बना रखा था त वो कलकाता को बना रखा था तो भारत की राजधानी उन्होंने कलकाता कोलकाता से 1911 में दिल्ली ट्रांसफर कर ली तो लोगों के मन में बैठाने के लिए कि अब हम आप पे कब्जा कर चुके हैं तो ये इन्होंने उसको मजबूत कर लिया कुछ समारोह वगैरह करें और दिल्ली दरबार लगाया अपनी राजधानी इन्होंने भारत की जो अपनी राजधानी थी इन्होंने भारत में वो दिल्ली स्थानांतरित कर दी और नए शहर का इन्होंने अपने हिसाब से निर्माण कराया जो मुगलों के अ मतलब कह सकते हैं कि आर्किटेक्चर था उसको इन्होंने खत्म करना स्टार्ट कर दिया और अपनी तरह के इन्होंने घर बनाए वया अपनी तरह के वहां पर बिल्डिंग्स बनाई अब लाल किला कैसे भारतीय स्वतंत्रता दिवस समारोह का स्थल बन गया इंडिपेंडेंस डे हम सेलिब्रेट करते हैं कैसे बना आपको पता है मुगलों ने वहां प कब्जा किया वो भी कब्जा कर कर रहे थे या ये इन्होंने कब्जा किया तो एक वो सिंबल बन गया था कि अगर भारत में आप शासन कर रहे हैं तो आप कहां पर होंगे लालकिले पर तो इसी वजह से हमारी भी एक सिंबल अगर हम कहीं और ले जाते तो शायद उतना अच्छा ना लगता सपोज करो कोई पहाड़ी है चोटी भारत की है कश्मीर में उस परे पाकिस्तान कब्जा कर ले और बाद में हम उससे छीने तो हम क्या करेंगे उसी चोटी पर अपना झंडा ले आएंगे तभी तो हम कहलाएंगे कि हां हम यहां पहुंच गए हैं तो ये एक सिंबल बन जाता है
किसी जगह पर तो इसी तरह से क्या हो गया था लाल किला भी सिंबल बन गया इस चीज का कि अब हम भारत का रूल हमारे हाथ में है तो भारत की जब आजादी हुई तो पहले प्रधानमंत्री बने जवाहरलाल नेहरू इन्होंने भी अपना निर्णय लिया कि जो हम अपना राष्ट्रीय ध्वस्त रंगा है हम कहां फहराएंगे लाल किले पर फहराएंगे तो इन्होंने इसी वजह से डिसीजन लिया था कि अब अंग्रेजों को हमने निकाल दिया अब सत्ता हमारे हाथ में आ गई है अब तिरंगा हम लाल किले पर अब लाल किले पर तिरंगा हमारा होगा 15 अगस्त 1947 को प्रिंसेस पार्क है वहां पर वहां पर इन्होंने तिरंगा फैलाया फहराया जवाहरलाल नेहरू ने और उसके बाद 16 अगस्त 1947 को अगले दिन इन्होंने लाल किले में ऐतिहासिक भाषण दिया था उसका नाम था ट्रस्ट विद डेस्टिनी तो ये चीजें आप याद कर सकते हैं 15 अगस्त 1947 को तिरंगा फहराया था प्रिंसेस पार्क में जवाहरलाल नेहरू ने 16 अगस्त को अपना भाषण अपना लेक्चर दिया था ट्रस्ट विद डेस्टिनी में ये इंपॉर्टेंट चीजें हैं बहुत कम आपको मिलेंगी तो इसको ध्यान रख लेना अब फिर जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन था उसको हटाकर हमारी सत्ता हमारे पास वापस आई थी इसका ये सिंबल बन गया लाल किला और उस पर जो हमारी संप्रभुता है भारत की पहचान है उस पर जोर देने के लिए प्रतीक बन गया था कि अब हमारे पास लाल किला है उस पर हमारे पास हमारा जो है झंडा होना चाहिए हर साल जो है तब से ही ये एक तरह से प्रथा बन गई हमारी 15 अगस्त 1947 से लेके आज तक यह हमारी प्रथा बन गई है कि लाल किले पर भारत का जो प्रधानमंत्री है वह तिरंगा फहराता है और देश को संबोधित करता है जैसे वहां पर जवाहरलाल नेहरू ने भाषण दिया था
देश को संबोधित किया था उसी तरह से एक वो क्या बन गया चलन बन गया है एक प्रथा बन गई है भारत की कि हम हर साल यहां से हमारा प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं और उसके बाद देश को संबोधित करते हैं और ये भारत का जो स्वतंत्रता दिवस समारोह है उसका एक हिस्सा बन गया और अभिन अंग बन गई पहचान बन गई एक तो बहुत सारी चीजें हमारी पहचान बन जाती है ना तो इस तरह से ये हिस्ट्री थी लाल किले की कैसे लाल किला हमारे लिए इतना इंपोर्टेंट है और इस पर कैसे किसी ने केस किया और वो कैसे कैसे क्या-क्या केस है उतना जरूरी नहीं था केस क्या है मेन था इसका हिस्टोरिकल बैकग्राउंड ये हमारे लिए इंपॉर्टेंट था तो इस पर सवाल भी बन सकता है आप एक बार इसको देख लेंगे कला संस्कृति और वास्तु कला के संदर्भ में भारतीय इतिहास में मुगल साम्राज्य के योगदान का मूल्यांकन कीजिए क्या-क्या योगदान किया है मुगल साम्राज्य ने तो इस तरह से क्वेश्चन पूछ सकता है यूपीएससी इसीलिए मुझे इंपोर्टेंट लगा यूपीएससी के पॉइंट ऑफ व्यू से तो मैं आपके सामने इसको लेके आया हूं तो आपकी इसके इसके बारे में क्या राय है लाल किले के बारे में क्या राय है हमारा जो प्राइड है यह लाल किला इसके बारे में आपकी क्या राय है अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर देना तो आज के लिए इतना रखते हैं उम्मीद है आपको सेशन अच्छा लगा होगा फिर मिलेंगे नए सेशन में तब तक के लिए बाय थैंक्स फॉर वाचिंग