एक तरफ सत्ता का शिखर, दूसरी तरफ उजड़ता घर; मुख्यमंत्री बनने के बाद थलापति विजय की जिंदगी का सबसे बड़ा और कड़वा सच!सुपरस्टार से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलापति विजय की राजनीतिक क्रांति तो सबने देखी लेकिन इस महाजीत के पीछे उनके अपने ही घर में एक ऐसी कहानी पक रही है जो किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। पिता की ऐतिहासिक जीत पर पहली बार बेटे जसन संजय ने चुप्पी तोड़ी है। एक तरफ सत्ता का शिखर है तो दूसरी तरफ बिखरते रिश्तों की कड़वाहट। आखिर क्या चल रहा है मुख्यमंत्री विजय के परिवार के अंदर? तमिलनाडु में जमी जमाई पार्टियों की एकाधिकार वाली राजनीति को उखाड़ फेंकने वाले मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के घर से आखिरकार एक बड़ी गूंज सुनाई दी है। अपनी पहली निर्देशित फिल्म सिग्मा की रिलीज से पहले विजय के बेटे जसन संजय ने अपने पिता की चुनावी जीत को एक ऐतिहासिक क्रांति बताया है। बिहाइंड वुड्स टीवी को दिए इंटरव्यू में जसन ने कहा कि अप्पा का मुख्यमंत्री बनना पूरे परिवार के लिए एक अभूतपूर्व गौरव है। लेकिन इसके साथ ही उन पर और उनकी बहन पर इस राजनीतिक और पारिवारिक विरासत को महफूज़ रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी आ गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को बेहद अहम माना जा रहा है। क्योंकि जसन ने साफ किया कि मुख्यमंत्री का परिवार होने के नाते अब उन्हें समाज और राजनीति के मंच पर बेहद सतर्क और सावधान रहना होगा। जसन ने यह भी याद किया कि कैसे विजय ने उन्हें अपनी खुद की पहचान बनाने और स्वतंत्र रूप से करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया था। वो चाहते थे कि मैं अपनी खुद की पहचान और नाम बनाऊं। हम दोनों के लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि हम एक ही तरह से सोचते थे। हमारी सोच एक जैसी थी। एक पिता के रूप में उन्होंने मेरी मदद की। लेकिन जब मेरे करियर की बात आई तो उन्होंने मुझे खुद से चीजें सीखने और जमीनी स्तर पर अनुभव हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कभी भी मुझे सब कुछ तैयार करके नहीं दिया। जसन संजय का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब मुख्यमंत्री विजय का निजी जीवन जबरदस्त सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। महीनों से अफवाहें गर्म थी कि पिता और बेटे के बीच संबंध ठीक नहीं है। यह चर्चा तब और तेज हुई जब सोशल मीडिया पर यह कयास लगाए जाने लगे कि जसन ने अपने नाम से पिता का नाम हटाकर मां का सरनेम अपना लिया और Instagram पर पिता को अनफॉलो कर दिया। इन चर्चाओं के बीच जसन ने पहली बार खुलकर अपने पिता के गुरु मंत्र को साझा किया। जसन ने बताया कि उनके अप्पा ने उन्हें कभी स्पून फीडिंग नहीं की बल्कि हमेशा अपनी खुद की स्वतंत्र पहचान और नाम बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने यह भी संदेश दिया कि परिवार में दूरियां चाहे जो हो पिता का मार्गदर्शन और उनके प्रति सम्मान आज भी अडिग है जिससे विरोधियों के उन आरोपों पर विराम लग गया है जो विजय को पारिवारिक मोर्चे पर असफल दिखा रहे थे। विजय राजनीति में आने के बाद अपनी फिल्म करियर को अलविदा कह चुके हैं। उनके आखिरी फिल्म जननायकन राजनीति के कारण महीनों फंसे रहने के बाद चुनाव बाद रिलीज हो चुकी। विजय एक्टिंग छोड़ चुके हैं। लेकिन बेटे का प्लान कुछ और है। जसन संजय ने इंटरव्यू में एक बेहद दिलचस्प और महत्वाकांक्षी खुलासा करते हुए बताया कि उनका सबसे बड़ा सपना हॉलीवुड के एक्शन स्टार जसन स्टेथन के साथ एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट पर काम करना है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कभी इस हॉलीवुड फिल्म के लिए भारत से किसी बड़े अभिनेता को चुनने का मौका मिला तो उनके दिमाग में सबसे पहला नाम उनके अप्पा यानी थलापति विजय का ही आएगा। जसन के इस बयान ने राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में तहलका मचा दिया है क्योंकि पिता पुत्र के बीच चल रही अनबन की खबरों के बीच जसन ने यह जता दिया कि भले ही उनके बीच पारिवारिक दूरियां हो लेकिन एक अभिनेता और निर्देशक के तौर पर वह आज भी अपने पिता को दुनिया का सबसे बेहतरीन स्टार मानते हैं और उनके साथ मिलकर हॉलीवुड स्क्रीन पर धमाल मचाना चाहते हैं। जसन संजय धीरे-धीरे पिता के बारे में खुल रहे हैं। इससे पहले जसन संजय ने आनंद विकटन को दिए अपने पहले इंटरव्यू में अपने निजी जीवन एक्टिंग ना करने की वजह और सिनेमा में कदम रखने पर पिता विजय और मां
संगीता की प्रतिक्रियाओं को लेकर कई बड़े खुलासे किए थे। जसन ने इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्होंने सिनेमा की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया तो उन्होंने सबसे पहले अपने माता-पिता, अपनी बहन दिव्या साशा और अपने करीबी दोस्तों से इस बारे में बात की थी। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों माता-पिता इस फैसले को लेकर बेहद सकारात्मक थे और उन्होंने जसन का पूरा समर्थन किया। जसन ने कहा उनकी इस सकारात्मकता ने मुझे बहुत ऊर्जा दी और तभी मुझे एहसास हुआ कि मेरे परिवार को मुझ पर कितना भरोसा है। इस बयान से उन अफवाहों को तगड़ा झटका मिला जिनमें कहा जा रहा था कि पारिवारिक कलह के चलते विजय अपने बेटे के करियर सपोर्ट में नहीं है। लेकिन इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू बेहद भावुक और पैचीदा है। विजय की पत्नी संगीता सोनलिंगम द्वारा तलाक की अर्ज़ दाखिल किए जाने के बाद से ही परिवार दो धड़ों में बट चुका है। इसकी सबसे बड़ी और कड़वी गवाही तब देखने को मिली जब मई में चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में विजय का ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह हुआ। इस भव्य समारोह में विजय के माता-पिता तो मौजूद थे लेकिन उनकी पत्नी संगीता, बेटे जसन और बेटी दिव्या नदारत रहे। इसके उलट समारोह में तमिल सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री तशा कृष्णन की मौजूदगी ने आग में घी का काम किया। जिनके साथ विजय के अफेयर की अफवाहों ने राजनीतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी। 27 साल पुराने इस विवाहिक रिश्ते में आई दरार और संगीता द्वारा विजय पर लगाए गंभीर आरोप ने विजय की साफसथरी राजनीतिक छवि के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। पारिवारिक दूरियों का असर अब बच्चों के रहने के तौरतरीकों पर भी साफ दिखने लगा है। जसन संजय ने अपने इंटरव्यू में यह हैरान करने वाला खुलासा भी किया कि अब वो अपनी बहन और मां के साथ एक ही छत के नीचे नहीं रह रहे हैं। जसन ने मजाकिया अंदाज में अपनी मां संगीता को एक जासूस स्पाई बताया जो बच्चों पर कड़ी नजर रखती हैं। वहीं उन्होंने यह भी माना कि अलग रहने के बाद से उनका अपनी बहन दिव्या साशा के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि जसन की
आने वाली फिल्म सिग्मा की रिलीज को इसीलिए भी आगे बढ़ाया गया ताकि वह उनके पिता विजय की आखिरी और सबसे बड़ी फिल्म जननायगन से ना टकराए। पैसे और बिखरते रिश्तों के ताने-बाने पर बनी जसन की इस फिल्म की कहानी कहीं ना कहीं उनके खुद के पारिवारिक जीवन का अक्स भी उसमें दिखता है। तमिलनाडु की सत्ता के शीट पर बैठे मुख्यमंत्री विजय के लिए यह जीत कितनी ऐतिहासिक है। पारिवारिक मोर्चे पर उनकी राह उतनी ही कांटों भरी नजर आ रही है। एक तरफ जहां उनकी पार्टी टीवी ने राज्य में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत की है। वहीं दूसरी तरफ पत्नी से तलाक का मुकदमा और बच्चों का शपथ ग्रहण से दूर रहना उनके विरोधियों को बैठे-बठाए मुद्दा दे देता है। ऐसे में बेटे जसन संजय का पिता की जीत को ऐतिहासिक क्रांति बताना और यह कहना कि वह पिता के साथ मिलकर हॉलीवुड फिल्म बनाना चाहते हैं। विजय के लिए एक बड़ी राजनीतिक राहत लेकर आया है। देखना यह होगा कि द्रविड़ राजनीति के बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटाने वाले थलापति विजय अपने घर के इस बिखरते साम्राज्य को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए कैसे संभाल पाते हैं? शेष भारत के इस एपिसोड पर आपका क्या कुछ कहना है? कमेंट्स में लिखकर अपनी राय जरूर दें। [संगीत]