हां, मैं एकमॉडरेट हिंदू थी। क्या जाता है तुम कब से संघी बन गई? मुझे संघी बनना है। तो, यह जो दोगलापन है समाज का, लेफ्टिस्ट वो बन जाते हैं। क्या कंगना ने एक बार फिर से अपनी लाइफ में बड़ा यूटर्न ले लिया है।
एक तरफ लोग उनकी पुरानी पार्टी वीडियोस निकाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ कंगना कह रही हैं कि मुझे बदलने का पूरा अधिकार है और अब मैं संघी बनना चाहती हूं। बस इतना कहना था कि सोशल मीडिया पर कंट्रोवर्सी स्टार्ट हो गई। कई लोगों ने उन्हें सपोर्ट किया तो कई लोगों ने उनके पुराने वीडियोस शेयर कर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
आखिर कंगना ने ऐसा क्या कहा है? दरअसल एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत एक बार फिर से हेडलाइंस पे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है और अपने ऊपर उठ रहे सभी सवालों के जवाब दिए हैं।
उन्होंने कहा कि लोग उनके पुरानी पार्टी के वीडियोस और फिल्म प्रमोशन के क्लिप निकालकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। लेकिन उनका कहना साफ है कि हर इंसान को अपनी सोच बदलने का अधिकार है। कंगना ने कहा अगर आदमी धर्म बदल सकता है। कोई अपनी आईडियोलॉजी बदल सकता है तो उन्हें अपने जीवन का रास्ता चुनने का पूरा अधिकार है। उन्होंने खुलकर कहा कि मैं संघी बनना चाहती हूं। अब यही बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
कंगना ने आगे कहा कि वह अपने अतीत से भाग नहीं रही बल्कि उनका मानना है कि उनकी सोच पहले से बदल चुकी है। लेकिन समय के साथ इंसान बहुत कुछ सीखता है। ऐसा भी उन्होंने कहा है। उन्होंने कहा कि जब बात हिंदू बेटियों की आती है तो लोग उन्हें उनकी पुरानी वीडियो दिखाकर सवाल पूछते हैं। लेकिन अब वह पुराने फैसलों का बचाव नहीं करती। कंगना ने कहा कि उन्होंने करियर में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट किए। आइटम सॉन्ग किए और तो और मेन स्ट्रीम फिल्मों में काम किया। लेकिन बाद में उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अब कंगना बॉलीवुड के खिलाफ बहुत तेजी के साथ बोलती हैं।
इसके साथ ही कई मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं और अपनी सोच के हिसाब से फैसले करती हैं। उनका कहना है कि अगर समाज दूसरे लोगों का बदलाव अपना सकता है तो आखिरकार उनके बदलाव पर सवाल क्यों उठते हैं? अब यही बात इंटरनेट पर एक बड़ी कंट्रोवर्सी बन चुकी है। कुछ लोग कंगना के सपोर्ट में हैं और कह रहे हैं कि इंसान को बदलने की पूरी आजादी है। वहीं कुछ लोग पुराने वीडियो दिखाकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह बदलाव सच में है या सिर्फ इमेज चेंज करने का खेल है। फिलहाल तो कंगना का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है और उनका जो स्टेटमेंट है एक बार फिर से स्पॉटलाइट में आ चुका है। अब सवाल यह सिर्फ कंगना का नहीं बल्कि बदलती हुई सोच का है। क्या यह आजादी सबको है या फिर यह चुनिंदा लोगों को दी जाती है? इसका जवाब आप दीजिए और कंगना ने क्या कुछ कहा है वो आप एक बार जरूर सुनिए। जबकि मैं पार्लियामेंट के लिए लेट हो रही हूं।
लेकिन फिर भी मैंने सोचा मैं आपके साथ अपना एक कुछ विचार नहीं एक फीलिंग जो है वो शेयर करूं। क्योंकि आज मैं सुबह एक पोस्ट कर रही एक हमारी फिल्म इंडस्ट्री की बहन है। बहुत ऐसी हमने फिल्म इंडस्ट्री में हिंदू बेटियां बहनें जिनके संपर्क में हम रहे हैं उनको बहुत क्लोजली देखा भी है, जाना भी है और हम देखते हैं कि कि है वो हिंदू लेकिन चाहे पॉलिटिक्स हो, चाहे रिलीजन हो उसको लेकर उनकी कोई विचारधारा नहीं है। यूथ में यूजली ऐसा होता है।
वो बहुत ही न्यूट्रल है। लेकिन जैसे ही वो चाहे आप संबंध कह लीजिए, शादी कह लीजिए, दोस्ती ले कह लीजिए, इस्लामिस्ट के संपर्क में आते हैं। वैसे ही उनकी सोच इतनी डिफाइंड हो जाती है। इतने कट्टरपंथी लेफ्टिस्ट वो बन जाते हैं। व्हिच आई थिंक देयर इज़ नो हार्म इन दैट क्योंकि आपको संविधान ये आजादी देता है। आप जो चाहे उस तरह का रिलीजन या आईडियोलॉजी अडप्ट कर सकते हैं।
लेकिन जो प्रॉब्लम की बात है लेकिन जब हिंदू बेटियों की बात आती है क्योंकि आज मैं अपने को डिफेंड नहीं करूंगी। मैं नहीं कहूंगी कि जी मैंने आइटम नंबर्स के खिलाफ या पे पैरिटी के खिलाफ या कभी बड़ी-बड़ी फिल्मों में काम नहीं किया। हीरोज़ के खिलाफ मैंने जो है वो बहिष्कार किया। मैंने नेपोटिज्म के खिलाफ लड़ाई ली। आप मुझे ऐसा कैसे कह सकते हैं? हां मैं एक मॉडरेट हिंदू थी। आज अगर मैंने खुद को डिफेंड कर लिया तो इतनी ना जाने कितनी बेटियां जो ये जिसे कहते हैं कि लीप नहीं ले पाएंगी। हां, मैं मॉडरेट हिंदू थी। आज इसी वक्त मुझे जो है जो मुझे तंज किया जाता है तुम कब से संघी बन गई? मुझे संघी बनना है। मुझे जो है बीजेपी आरएसएस की आईडियोलॉजी जिसे एक अवेकंड हिंदू मुझे बनना है। मुझे कन्वर्ट होना है। मैं क्यों नहीं कन्वर्ट हो सकती?
तो ये जो दोगलापन है समाज का जब हिंदू बेटियों की बात आती है तो जो समाज के ठेकेदार है वो एक अग्नि परीक्षा के लिए हमारे 10 साल पुराने तुम तो पार्टी करती थी। तुम तो ये करती थी। ठीक है मैं सब कुछ करती थी। लेकिन आज मुझे भी कन्वर्ट होना है। और मुझे जो है एक डिफाइंड और एक अवेकंड हिंदू बनना है। तो मेरे लिए वो रास्ता क्यों बंद है? तो यह जो है ये एक दोगली सोच और दोगली विचार नहीं चलेंगे और बाकी आप लोग मुझे बताइएगा मेरी और कैसे विचार फाइन हो सकते हैं और आई जस्ट फील दैट हमारी बेटियों को भी वो आजादी होनी चाहिए अगर उनको कन्वर्ट होना है डिफाइंड और डिसिप्लिंड हिंदू में