देखिए राहुल गांधी ने अचानक आंदोलन शुरू किया प्रधानमंत्री आवास के सामने। कांग्रेस पार्टी के सारे सांसद वहां पर जाकर पहुंच गए और वहां पर एक आंदोलन शुरू हुआ। पहली प्रतिक्रिया उस बात को लेकर बीजेपी से भी पहले प्रतिक्रिया आई आम आदमी पार्टी से कि ये आंदोलन में फूट डालने की कोशिश की।
ठीक है? राजनीति वहां से शुरू हो जाती है। सवाल इसीलिए उठता है कि ऐसा लग रहा था कि आम आदमी पार्टी ने पूरा उसका जो आंदोलन का जो जिम्मा है वो उनके पास है और राहुल गांधी उस पे फूट डालने की। ये आरोप उनके तरफ से लगा।
तो देखो ये पॉलिटिकल पार्टीज का अपना पॉलिटिक्स चलता रहेगा। उसमें मैं पढूंगा नहीं। आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस हो, जिसका जो पॉलिटिक्स करना है वो करिए। हमें उससे कोई लेना देना नहीं है।
आंदोलन की जहां तक बात है ये आंदोलन पूरा इंडिपेंडेंट रहा। इट वास टोटली रन बाय द पीपल। वहां पर जो खाना बट रहा था, जो मैनेजमेंट थी उसके लिए भी कई सारे लोगों ने डोनेट किया है। मतलब पहले तो लोग आकर कुछ प्रोफेसर्स आकर कहते थे कि चार दिनों का खाना हम स्पोंसर कर रहे हैं।
कुछ बड़े-बड़े हॉस्पिटल्स के डॉक्टर्स आते थे। मैं नाम नहीं लूंगा वरना उनके यहां पर भी पुलिस पहुंच जाएगी। हम उस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने आकर कहा है कि रोज रात का डिनर हमारी डॉक्टर्स के टीम की तरफ से रहेगा।
सो यह इट वाज़ कंप्लीटली रन बाय द पीपल। हम और मैं आंदोलन के ऊपर एक चीज कहना चाहता हूं सर हमारे देश में जबजब आंदोलन होता है ना हम अन्ना आंदोलन के वक्त मैं स्कूल में था तो आई डोंट नो मच अबाउट इट।
थोड़ा बहुत टीवी पर देखा क्योंकि टीवी पर 247 दिखाया जाता था। हम जबजब इस देश में आंदोलन होता है उसको बदनाम किया जाता है। इट वाज़ नॉट जस्ट अन्ना आंदोलन। हम किसान आंदोलन जब हुआ तब उसे क्या पेंट किया गया? हम यह तो खस्तानी लोग हैं। यह एंटी इंडिया लोग हैं।
हम उसके बाद डॉक्टर्स का एक कुछ हुआ था। डॉक्टर्स को भी पाकिस्तान से जोड़ा गया। सीएनआरसी को भी आप लोगों ने क्या बोल दिया? बांग्लादेशी लोग प्रोटेस्ट कर रहे हैं। हम और बाद में अभी जो रिसेंटली नोएडा का जो हुआ था वर्कर्स का प्रोटेस्ट उसको भी पाकिस्तान से जोड़ दिया।
हम तो इस देश में जबजब आंदोलन होते हैं हम हमेशा किसी ना किसी से जोड़कर उसको बदनाम किया जाता है। हम लोग यह भूल जाते हैं। हमारा जो देश बना है जो देश खड़ा हुआ है वो आंदोलन से ही खड़ा हुआ है।
जब इस देश में इमरजेंसी लगाई थी तब वो डेमोक्रेसी वापस रिस्टोर हुई वो आंदोलन से ही हुई है। तो देश में जब भी आंदोलन होगा ऑब्वियसली बहुत डिफरेंट आईडियोलॉजीस के लोग आपको सपोर्ट करेंगे। तभी तो इट बिकम्स अ पब्लिक मूवमेंट। वह ठीक है, लेकिन आरोप यह भी लगता है कि आपके कंधे पर बंदूक रख कर अब वह सरकार पर निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह नहीं कर पाए विपक्ष के लोग क्योंकि पेपर पेपर लीक तो आज नहीं हो रहा।
पेपर लीक तो सालों से हो रहा है। 20 24 में भी हुआ, 25 में भी हुआ, 26 में भी पेपर लीक हुआ। उसके बाद आप वहां पर आंदोलन के लिए उतर आए। लेकिन, विपक्षी पार्टियां सड़क पर नहीं उतरी। अभिजीत दी और उनके सहयोगी सड़क पर उतरे। उनको जो सपोर्ट मिल रहा है, वह देखते हुए विपक्षी पार्टियों को लगा भीड़ है, हमको जाना चाहिए।
और वो आपके कंधे पर बंदूक रख के अब सरकार सर मुझे लगता है इंडिया को आपका कंधा इस्तेमाल किया जा रहा है विपक्ष में बिल्कुल सर मतलब पॉलिटिक्स के लिए हम बच्चे हैं सर इतने भी बच्चे नहीं कि हमें कोई एक्सप्लइट कर ले मतलब पढ़ लिख कर आया है मैं यूएसए पढ़कर आया हूं आशुतोष लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़कर आया है सौरभ बहुत ही बड़ा लीगल जर्नलिस्ट रह चुका है.
वैष्णवी जो है वो सरकार के साथ काम कर चुकी है मिनिस्टर्स के साथ काम कर चुकी है वो बड़े-बड़े हम तो रत्ना जो है वो भी सुप्रीम कोर्ट में लॉ प्रैक्टिस लॉ प्रैक्टिस करते तो बच्चे नहीं है सर हम हां उम्र में बच्चे हैं बट दुनियादारी आपको समझ में आता है कोई अगर आपका पॉलिटिकल इस्तेमाल कर आपको समझ में आता है सर हमें आपको लगा ऐसा कि पॉलिटिकल इस्तेमाल नहीं नहीं हमने तो मतलब इसलिए हमने पहले से ही बोल दिया था कि अगर कोई भी आना चाहता है.
हमें सपोर्ट करने दे आर फ्री एंड दे विल बी वेलकम हियर बट एक कंडीशन है हमारी आप अपने पार्टी का फ्लैग नहीं लेकर आएंगे आप अपनी पार्टी की बात नहीं करेंगे आपको यहां बात करनी है तो स्टूडेंट्स पर बात मुद्दे पर बात करनी है एंड दे रिस्पेक्टेड इट एंड दैट्स व्हाई वी वर वेलकमिंग देम