Cli

वो एक आदत जिसकी वजह से मौ!त तक पहुंच गए थे जावेद अख्तर, ऐसे मिला नया जीवन, जानकार चौंक जाएंगे।

Uncategorized

जावेद अख्तर की जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था जिसके बारे में वो आज बिना किसी झिझक, बिना किसी संकोच के खुलकर बात करते हैं। वो कहते हैं कि उन्हें शराब पीने की आदत किसी गम को भुलाने के लिए नहीं लगी थी। बल्कि शुरुआत में उन्हें अच्छा लगता था। और यही आदत धीरे-धीरे एक ऐसी आदत बन गई जिससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वह मुंबई आए तब दोस्तों के साथ कभी कभार शुरू किया। उस समय जेब में पैसे कम थे इसलिए यह आदत भी सीमित थी। लेकिन जैसे-जैसे किस्मत बदली फिल्मों में सफलता मिलने लगी और सलीम जावेद की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे ताकतवर लेखक जोड़ी बन गई। वैसे-वैसे पैसे की कमी खत्म होती गई और आसानी से उपलब्ध होने लगी।

जावेद अख्तर ने कई इंटरव्यूज में स्वीकार किया कि एक समय ऐसा भी आ गया था जब वह रोजाना एक पूरी बोतल शराब पी जाते थे और फिर भी उन्हें हैंगओवर तक नहीं होता था। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले विस्की पीते थे। बाद में एलर्जी होने पर लगे और एक समय तो एक बैठक में 18 बोतल तक वह गए थे। बाद में उन्होंने l कर दिया। वह कहते हैं कि उन्हें के लिए किसी साथी की भी जरूरत नहीं होती थी। कोई साथ हो तो ठीक नहीं हो तो वह अकेले भी बैठकर लते थे।

यही वह समय था जब उनके करियर में लगातार जंजीर, डॉन, शोले, त्रिशूल दीवार शक्ति जैसी फिल्मों की सफलता उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा रही थी। बाहर से सब कुछ शानदार दिखाई देता था। लेकिन अंदर ही अंदर शराब उनकी जिंदगी पर कब्जा करती जा रही । बाद में जावेद अख्तर ने स्वीकार किया कि शराब पीने के बाद उनका स्वभाव पूरी तरह बदल जाता था।

सामान्य दिनों में वह शांत और तार्किक रहते थे। लेकिन नशे में अक्सर और अपमानजनक हो जाते थे। उनके अनुसार शायद भीतर दबा हुआ गुस्सा, कड़वाहट और असुरक्षा नशे के बाद बाहर आ जाती थी। उन्होंने माना कि उनकी जिंदगी की कई सबसे बड़ी गलतियां शराब के नशे में ही हुई। यही आदत उनके निजी रिश्तों पर भी भारी पड़ी और उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनकी पहली शादी टूटने के पीछे उनकी गैर जिम्मेदारी और की लत भी एक बड़ा कारण थी। जावेद अख्तर की पहली शादी मशहूर स्क्रिप्ट राइटर एक्ट्रेस हनी ईरानी से हुई थी। फिर उनकी जिंदगी में वह दिन आया जिसने सब कुछ बदल दिया। जावेद अख्तर बताते हैं कि उन्होंने खुद से एक सीधा सवाल पूछा।

क्या मुझे है या छोड़कर जीना है? उन्हें एहसास हो गया कि अगर इसी तरह पीते रहे तो शायद 5253 साल की उम्र से आगे वह नहीं जी पाएंगे। और इसके बाद उन्होंने 31 जुलाई 1991 को आखिरी बार 1 अगस्त 1991 से उन्होंने शराब को हमेशा के लिए छोड़ दिया। वो गर्व से कहते हैं कि उसके बाद उन्होंने जश्न में भी की एक बूंद तक नहीं पी। जब लोग उनकी इच्छाशक्ति की तारीफ करते हैं तो वह मुस्कुरा कर कहते हैं विल पावर कोई चीज नहीं होती। असली चीज होती है जीने की तीव्र इच्छा। और उनके अनुसार उनकी सबसे बड़ी लत नहीं बल्कि जिंदगी है। आज जावेद अख्तर अपने उस दौर का जिक्र किसी सनसनी के लिए नहीं बल्कि एक सीख के रूप में करते हैं। उनका मानना है कि सफलता जितनी बड़ी होती है, उतना ही जरूरी है कि इंसान खुद पर नियंत्रण बनाए रखें। वह अक्सर युवाओं से कहते हैं कि शराब की शुरुआत कई बार शौक से होती है।

लेकिन धीरे-धीरे वही शौक, आदत और फिर लत बन जाता है। उनकी कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसमें सिर्फ एक महान लेखक की कामयाबी नहीं बल्कि अपनी सबसे बड़ी कमजोरी पर जीत हासिल करने वाले इंसान की ईमानदार स्वीकारोक्ति भी शामिल है।

जावेद अख्तर की यह कहानी बताती है कि कितना भी गहरा क्यों ना हो, कितना भी आप पर हावी क्यों ना हो, लेकिन आप अगर उससे पीछा छुड़ाना चाहे तो कुछ भी मुश्किल नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *