एक वरिष्ठ महिला अफसर जिसकी पहचान उसका रुतबा, कड़क मिजाज और एक शानदार व्यक्तित्व होता है। अचानक सोशल मीडिया पर उसकी कुछ नई तस्वीरें सामने आती हैं। इन तस्वीरों में वह बिल्कुल अलग दिख रही है। उसके सिर पर एक भी बाल नहीं है। उसने अपना सिर मुंडवा लिया है। बिना किसी स्कार्फ के वो ऐसे ही अपने दफ्तर जाने को तैयार है। तस्वीरें देखते ही लोग हैरान रह गए। हर कोई पूछने लगा कि आखिर इस तेजतर्रार [संगीत] महिला अफसर ने ऐसा क्यों किया? क्या कोई मन्नत है या कोई बीमारी है?
लेकिन जब इस बोल्ड लुक के पीछे [संगीत] की असलियत सामने आई तो अच्छे-अच्छों की आंखें भर आई। नमस्कार, मैं हूं सिद्धार्थ प्रकाश। जिन तस्वीरों ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है, वह किसी आम इंसान की नहीं बल्कि मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा यानी एमपीपीसीएस की एक जानीमानी अधिकारी सविता प्रधान की है। सविता वर्तमान में मध्य प्रदेश के सिंगौली [संगीत] नगर निगम में आयुक्त के पद पर तैनात है। अक्सर लोग उन्हें आईएएस समझ लेते हैं। लेकिन उन्होंने खुद [संगीत] साफ किया है कि वह आईएएस नहीं बल्कि राज्य प्रशासनिक सेवा की अफसर हैं। तो फिर एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपनी सुंदरता का मोह त्याग [संगीत] कर अपना सिर क्यों मुंडवा लिया?
इसका जवाब एक मासूम बच्ची की दर्दनाक स्थिति से जुड़ा है। एनडीTV इंडिया से खास बातचीत में सविता प्रधान ने बताया कि इस कदम के पीछे कैंसर के अंतिम [संगीत] स्टेज से जूझ रही एक छोटी सी बच्ची है। इस बच्ची से उनकी पहचान [संगीत] Facebook के जरिए हुई थी। बातचीत के दौरान उस मासूम बच्ची ने एक दिन सविता से कहा मैम मुझे आपके बाल बहुत पसंद है। बस इसी एक लाइन ने सविता को अंदर तक झकझोर दिया। बच्ची की आखिरी इच्छा [संगीत] पूरी करने और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उन्होंने एक विग बनवाने का फैसला किया और इसके लिए अपने ही सिर के सारे बाल दान [संगीत] कर दिए। सविता के लिए फैसला आसान नहीं था। लेकिन यह उनकी अंतरात्मा की आवाज थी।
वो बताती हैं कि उनकी मां ने खुद तीन बार कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को झेला है। इसलिए वह बहुत करीब से जानती हैं कि कीमोथरेपी के दौरान जब बाल झड़ते हैं तो एक महिला या बच्ची को कितना गहरा [संगीत] दर्द होता है। सिर मुंडवाने के बाद उन्होंने Instagram पर चार तस्वीरें शेयर करते हुए समाज को एक बहुत बड़ा और सशक्त संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि आपकी सुंदरता आपके लंबे बालों या महंगे गहनों से नहीं बल्कि आपके आत्मविश्वास से झलकती है। वो इसी बोल्ड लुक में बेझिझक अपना काम संभाल रही हैं। सविता का यह जज्बा अचानक नहीं आया है। मूल रूप से नर्मदापुरम के मड़ई गांव की रहने वाली सविता का जन्म एक बेहद गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था।
पिता बीड़ी के पत्ते तोड़ते [संगीत] थे और मजदूरी करते थे। महज 16 साल की उम्र में उनकी शादी खुद से 11 साल बड़े शख्स से कर दी गई। ससुराल में उन्हें भयानक घरेलू [संगीत] हिंसा और प्रताड़ना झेलनी पड़ी। लेकिन वो टूटी नहीं। घरेलू हिंसा से तंग आकर उन्होंने अपने दो बेटों अथर्व और यजूस के साथ ससुराल छोड़ दिया। रिश्तेदारों के सहारे एक ब्यूटी पार्लर में काम किया। बच्चों का पेट पाला और साथ ही अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की। दिन रात एक करके उन्होंने एमपीपीएससी की तैयारी की। साल 2005 में पहली ही बार में परीक्षा पास कर वो डीएसपी [संगीत] बनी और फिर साल 2006 में 83वीं रैंक हासिल कर वो मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा [संगीत] की अफसर बन गई। उनकी पहली पोस्टिंग नरसिंहपुर के गोटेगांव में हुई थी। सविता प्रधान ने यह साबित कर दिया है कि असली खूबसूरती बाहरी दिखावे में नहीं [संगीत] बल्कि आपके अच्छे कर्मों में बसती है। सविता प्रधान के इस साहसिक और भावुक कदम पर आपकी क्या राय [संगीत] है? कमेंट बॉक्स में हमें अपनी कीमती राय जरूर बताइएगा। फिर मिलेंगे एक और वीडियो में।