माने पंचदर्शन, पंचोपदेश, सांख्य योग, न्याय वैशिष्टिक वेदांत, मीमांसा दर्शन और इसके मुंडूक मांडूक आदि उपनिषद और रामायण-महा श्रीमद भगवत गीता और पुराण सब कंठस्थ्य कर रहे हैं। तो यहां नया भारत है जिसमें सभी यज्ञ कर रहे हैं। सभी यजोपवी धारण कर रहे हैं। सब वेद पढ़ रहे हैं और सब एक भाव से आगे बढ़ रहे हैं। देखो देश सड़कों से नहीं चलेगा। देश संसद से ही चलेगा। और शिक्षा मंत्री कौन होगा? कोई नहीं होगा कौन नहीं होगा यह सड़कों पर तय नहीं होगा यह देश का प्रधानमंत्री और देश की संसद तय करेगी अब अब कुछ लोगों ने आजादी के नारे लगाए ब्राह्मणवाद से आजादी भाई आरएसएस से आजादी भाई इस जात उत्सव पंथ से आजादी अब भाई वो ब्राह्मण कुल में पैदा हुआ है और यदि आरएसएस से उसने राष्ट्रवाद सीखा है प्रहलाद जोशी जी ने तो इसके किसी के पेट में दर्द नहीं होना चाहिए यदि आपको जो है जो अधिकार इस देश का संविधान किसी दलित शोषित वंचित को देता है। वही अधिकार इस देश में ब्राह्मण को भी देता है। इसलिए ब्राह्मणवाद को देना मैं कहता हूं कोई भी वाद नहीं होना चाहिए। लेकिन ब्राह्मणों को भी देना वह भी असंवैधानिक है।
अलोकतांत्रिक है। शूद्रों को देना भी अलोकतांत्रिक है। गुरु पूर्णिमा पर यहां हजारों भाई बहनों का जो ब्राह्मण भी हैं, क्षत्रिय भी हैं, वैश्य भी हैं, शूद्र भी हैं। सभी जाति वर्ग समुदाय के भाई बहन हैं। सबको गुरु परंपरा में दीक्षित कर रहे हैं। हमारा एक ही संकल्प है। हम सब ऋषि ऋषिकाओं के वंशधर उनके उत्तराधिकारी प्रतिरूप मूर्त विग्रह वानस स्वरूप हैं। और इस ऋषिकाओं के वंशधर होने के नाते ऋषि संस्कृति का सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतीक यज्ञपोहित सब धारण कर रहे हैं। तो सनातन विरोधियों ने हम पर लांछन लगाया कि एक ब्राह्मण जाति को छोड़कर के किसी को दूसरे को यजोपित करने का अधिकार नहीं।
यह सब जाति वर्ग समुदाय के भाई बहन यजोपवि धारण कर रहे हैं। और स्त्री और शूद्र तो वेद पढ़ ही नहीं सकते। यजप धारण नहीं कर सकते। ऐसी मिथ्या भ्रांति फैलाई थी सनातन विरोधियों ने। आज सब प्रमाण देख लें कि यहां पर पुरुषों के साथ सब बेटियां सब स्त्रियां भी यजप धारण कर रही है और यहां वेद पढ़ती है वेद पढ़ती ही नहीं ऋग यजु साम अथर्व एक दंतु में ऋग्वेद दूसरे में यजुर्वेद तीसरे में सामवेद और ग्रंथि में अथर्ववेद चारों वेदों का प्रतीक उस यजप को धारण कर और चारों चारों वेद और 25-25 शास्त्र माने पंच दर्शन पंचोपदेश सांख्य योग न्याय वैशिष्टिक वेदांत मीमांसा दर्शन और इस केन मुंडुक मांडू आदि उपनिषद और रामायण, महाभारत, श्रीमद् भगवत गीता और पुराण सब कंठस्थ कर रहे हैं। तो यहां नया भारत है जिसमें सभी यज्ञ कर रहे हैं।
सभी यज्ञोपवी धारण कर रहे हैं। सब वेद पढ़ रहे हैं। और सब एक भाव से आगे बढ़ रहे हैं। कोई भेदभाव नहीं। सब एक पूर्वजों की संतान है। आज हमारे मजहब अलग हो सकते हैं। पूर्वज अलग नहीं हो सकते। ये जो मैं बात कह रहा हूं उसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आज हिंदू हो या मुसलमान हो मुसलमान से पूछो तो भाई आप पहले क्या थे? बोलो हम तो कन्वर्टेड मुसलमान है।
तो मैंने कहा मुसलमान से पहले क्या बोले वही थे जो आप हैं। अर्थात हम सबके पूर्वज एक हैं। हम सबका डीएनए एक है। और हम सबका सनातन धर्म भी एक है। हम सबका राष्ट्र धर्म भी मानव धर्म भी एक है। हम सबके पूर्वज एक हैं। पूर्वजों जैसा हमारा चरित्र हो और हम सब मिलजुलकर के राष्ट्र के एकता अखंडता और संप्रदायता के लिए पुरुषार्थ करें। और एक बात और कहना चाहता हूं। पिछले दिनों जंतरमंतर पर कोई जैन जीज ने इकट्ठे होकर के भारत को बदनाम किया। गाली गलौज हमारी संस्कृति और हमारी प्रकृति नहीं है। हमने हमेशा बड़ों को आदर दिया है। माता पिता गुरु और बड़ों के बताए पथ पर हम आगे बढ़े हैं।
महाजनो यत सपथा महाभारत में कहा और श्रीमद् भगवत गीता में कहा यद्य दाच श्रेष्ठ तत देव जना सह प्रमाणम कुरते लोक तधनु वर्तते इसलिए अपने बड़ों को आदर दें गौरव दें और किसी भी प्रकार से कोई असहमतियां हो तो असहमति को भी डेमोक्रेटिक और संवैधानिक लोकतांत्रिक तरीके से हमारा कॉन्स्टिट्यूशन एक डेमोक्रेसी है और हमारे भीतर सबसे बड़ी एक ह्यूमिनिटी है डिविनिटी तो अपने लोकतांत्रिक, संवैधानिक, मानवीय, नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों को मरने ना दें। अपने बच्चों को भी समझाएं। नहीं करें। आपको यदि विरोध भी करना है तो वह भी विवेक पूर्वक करें।